Bihar Famous Lokoktiya and Hindi Meaning (बिहार की प्रचलित लोकोक्तियाँ एवं अर्थ )

लोकोक्तियाँअर्थ
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ताअकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता
अक्किल गईल घास चरेसोच-विचार न कर पाना
अगिला खेती आगे-आगे, पछिला खेती भागे जागेअग्र सोची सदा सुखी
अंडा सिखावे बच्चा के, ए बच्चा तू चेंव-चेंव करअअज्ञानी का ज्ञानी को उपदेश देना व्यर्थ
अंडा सिखावे बच्चा के, बच्चा करु चेंव-चेंवअज्ञानी का ज्ञानी को सिखाना
अंत भला तो सब भलाअगर किसी काम का नतीजा अच्छा होता है, तो सब कुछ ठीक मान लिया जाता है
अधजल गगरी छलकत जाएकम गुणों वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है
अधिका जोगी मठ के उजारजिस कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग अपनी बुद्धि लगाने लगते हैं, उसका खराब हो जाने का खतरा रहता है
अपन हाथ जगन्नाथ।अपने कार्य के लिए खुद जिम्मेदार होना चाहिए।
अपनी गली में त एगो कुत्ता शेर होलाअपने क्षेत्र में सभी बहादुर और प्रभावशाली होते हैं
अपनी दुआरे, कुतवो बरिआरेअपनी गली में एक कुत्ता भी शेर होता है
अपनी-अपनी डफली अपना-अपना रागसबका मत पृथक-पृथक होना
अपने खाईं, बिलरिया लगाईंगलत काम खुद करके दूसरों पर मढ़ना
अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेतअवसर खो देने के बाद पछताने से कोई फायदा नहीं होता
अबरा के मउगी, भर घर के भउजीकमजोर का मजाक बनाना
अबरे के मेहरारू गाँवभरी के भउजाईकमजोर को सभी सताते हैं
अभागा गइने ससुरारी अउरी उहवों माँड़े-भातसमय खराब हो तो चारों तरफ से बुरा होता है
अहिर से इयारी, भादो में उजारीअहिर की दोस्ती भरोसेमंद नहीं
आइल थोर दिन, गइल ढेर दिनसमय जल्दी बीत जाता है
आखिर संख बाजल बाकिर बाबाजी के पदा केकाम होता है लेकिन बहुत मेहनत के बाद
आग लगी तो कुआँ खोदनासंकट के समय बचाव के लिए सोचना
आंगा नाथ ना पाछा पगहाबिना रोक-टोक के
आगे कुआँ पीछे खाईसामने खतरा, पीछे भी खतरा।
आगे नाथ ना पीछे पगहा, खा मोटा के भइने गदहास्वछंद व्यक्ति, मनमौजी
आदमी के काम हअए गलती कइलअनजाने में हुई गलती क्षमा योग्य है
आधा माघे कंबर काँधेमाघ के मध्य में ही ठंड कम होने लगती है
आन की धन पर कनवा राजादूसरे की वस्तु पर अपना अधिकार समझना
आन के दाना हींक लगाके खानासुलभ (या दूसरे की) वस्तु का दुरुपयोग
आन्हर कुकुर बतासे भोंकेथोड़ी-सी भी शंका पर हंगामा करना
आपन अपने हअपना अपना ही होता है
आपन इज्जत अपनी हाथे में हअअपनी इज्जत हम स्वयं बनाकर रख सकते हैं
आपन निकाल मोर नावे देकेवल अपना स्वार्थ देखना
आपन पुतवा पुतवा ह अउरी सवतिया के पुतवा दूतवा हअपने लोगों को अधिक महत्व देना, दूसरों को हीन समझना
आपन पेट त सुअरियो पाली लेलेअपना पेट कोई भी पाल सकता है, असली मूल्य दूसरों के लिए करना
आपन भला त सब चाहेलाव्यक्ति वही जो दूसरों के अच्छे की भी सोचे
आपे-आपे लोग बिआपे, केकर माई केकर बापेसभी अपने लाभ में लगे हुए हैं, किसी की चिंता नहीं
आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपासकिसी खास काम को छोड़कर दूसरा काम करना
आसमाने में थूकबS त मुँहवे पर आईउल्टा-पुलटा काम करके खुद फँसना
इजती इजते पर मरेलाइज्जतदार अपनी इज्जत के लिए सब कुछ न्यौछावर कर देता है
इडिल-मिडिल के छोड़ आस, धर खुरपा गढ़ घासपढ़ाई में मन न लगे तो कोई और काम करना अच्छा है
इश्क अउरी मुस्क छिपवले से नाहीं छीपेलाप्रेम और आकर्षण छिप नहीं सकते
इहे छउड़ी इहे गाँव, पूछे छउड़ी कवन गाँवजानबूझ के अनजान बनना
उँखी बहुत मीठाला त ओमे कीड़ा पड़ी जाने कुलीसंबंध की एक सीमा होनी चाहिए
उत्तम खेती, मध्यम बान, निषिद्ध चाकरी, भीख निदानसमय और परिस्थितियों के अनुसार कर्म का क्रम
उत्तर लउका लउके, दखिन गरजे मेह, ऊँचे दवड़ी नधइह, कही गइने सहदेवप्राकृतिक संकेतों से परिणाम निश्चित होते हैं (जैसे बारिश)
उधिआइल सतुआ, पितर के दानअनुपयोगी (खराब) वस्तु दूसरों को देना
उनचापों बयारि बहलसभी तरह की विपत्तियाँ एक साथ आना।
उल्टा चोर कोतवाल को डाँटेअपराध करने वाला दोषारोपण करता है।
ऊँट के मुंह में जीराअसंभव प्रयास से समस्या हल न होना
ऊपर से तऽ दिल मिला, भीतर फांके तीरधोखेबाज
ए जबाना में पइसवे भगवान बाsआधुनिक युग में पैसा ही सर्वोपरि है
एक और एक ग्यारह होते हैंसहयोग से बड़ी सफलता मिलती है।
एक घंटा माँगे त सवेसेर अउरी दिनभर माँगे त सवे सेरमेहनत के बाद भी उन्नति न होना
एक त करैला अपने तीत, दूजे चढ़ नीम के गाछ।पहले से विसंगति/दुर्गुण होने के साथ ही नए दुर्गुणों का होना।
एक मुट्ठी लाई, बरखा ओनिये बिलाईथोड़ी मात्रा में
एक हाथ के ककरी अउरी नौ हाथ के बिआअफवाह, असत्य बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताना
एगो पूते के पूत अउरी एगो आँखी के आँखि नाहीं कहल जालासंतान एक से अधिक ही अच्छी है
एगो हरे गाँवभरी खोंखीएक अनार सौ बीमार
एतना बड़ाई अउरी फटही रजाईयोग्य न होने पर भी बढ़-चढ़कर दिखाना (ऊँची दुकान, फीका पकवान)
ओखर में हाथ, मुसर के देनी दोषनाच न जाने आँगन टेढ़ा
ओछे की प्रीति बालू की भीतिदुर्गुणी की मित्रता अस्थायी होती है
ओरवानी के पानी बड़ेरी नाहीं चढ़ेलाअसम्भव या विपरीत काम
ओस चटले से पिआस नाहीं बूझीबहुत ही कम प्राप्ति से लाभ नहीं
क, ख, ग, घ के लूर ना, दे माई पोथीऔकात से अधिक माँगना
कंकरी के चोर फाँसी के सजाएछोटे गुनाह की बड़ी सज़ा
ककरो बोरे-बोरे नून, ककरो रोटियो पर आफतहर व्यक्ति का जीवन और समस्याएँ अलग होती हैं
कंगाली में आटा गीलाविपत्ति में चीजें और भी बिगड़ जाती हैं।
कंधे से कंधा मिलानाएक दूसरे का साथ देना या सहयोग करना
कनवा के देखि के अँखियो फूटे अउरी कनवा बिना रहलो न जाएऐसे व्यक्ति से घृणा करना जिसके बिना काम न चले
कफन में जेब ना, दफन में भेवईमानदार
कबो घानी घाना कबो मुठी चना कबो उहो मनाकभी सम्मान, कभी अपमान; सब दिन समान नहीं
कमजोर देही में बहुत रीसि होलाकमजोर व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता है
कर भला तो हो भलाअगर आप दूसरों के लिए अच्छे काम करते हैं, तो आपके साथ भी अच्छी चीजें होंगी
करजा के खाइल अउरी पुअरा के तापल बरोबरे है।कर्ज लेने के बाद लाभ और बोझ बराबर होता है।
करनी ना धरनी,धियवा ओठ बिदोरनीकुछ काम न करना और नखरे दिखाना
करब केतनो लाखी उपाई, बिधी के लिखल बाँव न जाईजो भाग्य में है वह होकर रहेगा
करम फूटे त फटे बेवायअभागा
करिया अक्षर भँइस बराबरअनपढ़, ज्ञानहीन व्यक्ति
करिया अच्छर से भेंट ना, पेंगले पढ़ऽ ताड़ेंअसमर्थ होकर भी बड़ी-बड़ी बातें करना
कहले पर धोबिया गदहवा पर नाहीं चढ़ेलाकुछ लोग निर्देश से काम नहीं करते, अपने मन से करते हैं
का कहीं कुछ कही ना जाता अउरी कहले बिना रही ना जाताअसह्य, बरदाश्त के बाहर
का बरसा जब कृषि सुखानीसमय बीत जाने के बाद मदद करने से कोई फायदा नहीं होता
का राम की घरे रहले आ का राम की बने गइलेअनुपयोगी, अयोग्य व्यक्ति
का हरदी के रंग अउरी का परदेशी के संगक्षणभंगुर वस्तुओं का क्या भरोसा
काछ कसौटी सांवर बानदो दांत और भूरे रंग वाला बैल अच्छा माना जाता है; चयन का सही मानदंड
काठ गढ़ले चीकन होला, बात गढ़ले रुखर होला।लकड़ी गढ़ने से चीकनी होती है, जबकि बात में मिर्च-नमक लगाने से नीरस होती है।
काठे के हाड़ी बार-बार नाहीं चढ़ेलाकिसी समझदार का दुरुपयोग बार-बार नहीं किया जा सकता
कानी बिना रहलो न जाये, कानी के देख के अंखियो पेराएप्यार में तकरार
काने के कच्चासहज विश्वासी, बिना सोच-समझे विश्वास करनेवाला
कापर करें सिंगार पुरुष मोर आंहरजिस उद्देश्य के लिए प्रयासरत रहना, वह उद्देश्य का ही ना होना।
काम न धाम हे दे बानी हे देकाम-धाम न करना लेकिन श्रेय लेना
काली माई करिया, भवानी माई गोरअपनी-अपनी किस्मत
की हंसा मोती चुने,की भूखे मर जायव्यक्ति अपने सम्मान और सिद्धांत से समझौता नहीं करता
कुकुरे की पोंछी केतनो घी लगाव उ टेड़े के टेड़े रहीस्वभाव नहीं बदलता, किसी का स्वभाव अपनी जगह स्थिर रहता है
कुकुरे के पोंछी बारह बरिस गाड़ी के राख, टेड़े के टेड़े रहीस्वभाव बदलना बहुत कठिन है
कुल अउरी कपड़ा रखले सेकुल और कपड़े की देखभाल जरूरी है, नहीं तो नष्ट हो जाएंगे
के पर करीं सिंगार पिया मोरे आनरकाम का लाभ तब नहीं जब कोई उसका महत्व समझे
केरा (केला), केकड़ा, बिछू, बाँस इ चारो की जमले नाश।कुछ वस्तुओं का साथ होने पर नुकसान होता है।
केहू के ऊंच लिलार देखि के, आपन लिलार फोड़ी नाहीं लेहल जालाकिसी की बराबरी करने के लिए उल्टा-पुल्टा काम नहीं करना चाहिए
केहू के भंटा बैर, केहू के भंटा पथ।हर व्यक्ति का दृष्टिकोण और व्यवहार अलग होता है।
केहू खात-खात मुए अउरी केहू खइले बिना मुएकहीं अधिकता और कहीं कमी; दुरुपयोग
केहू हीरा चोर, केहू खीरा चोरचोर-चोर मौसेरे भाई
कोइला से हीरा, कीचड़ से फूलअद्भुत कार्य
खग जाने खग की भाषायोग्य व्यक्ति केवल योग्य के साथ समझ सकता है।
खड़ी खेती, गाभिन गाय, तब जान जब मुँह में जायफसल और गाय का भरोसा तभी, जब परिणाम सामने आए
खाँ भीम अउरी हगें सकुनीएक ही थैली के चट्टे-बट्टे
खा मन भाता अउरी पहिनS जग भाताअपने अनुसार खाओ पर दूसरों को जो पसंद हो पहनो
खाए के ठेकान ना, नहाये के तड़केपरपंच रचना
खाना कुखाना उपासे भला, संगत कुसंगत अकेले भलासमय पर भोजन करें और कुसंगत से बचें
खाली बाती से काम नाहीं चलेलाकेवल बात से काम नहीं चलता; कर्म करना चाहिए
खिंचड़ी के चारी इआर, दही, पापर, घी, अचारकिसी चीज़ का असली मजा उसके पूरक के साथ आता है
खिचड़ी खात के नीक लागे अउरी बटुली माजत के पेट फाटेबिना मेहनत आराम करना ठीक नहीं
खेत खाय गदहा, मारल जाय जो रहाकिसी और की गलती की सजा किसी और को मिलना
खेतिहर गइने घर दाएँ बाएँ हरमालिक के हटते ही काम करनेवाला कामचोरी करता है
खेती, बेटी, गाभिन गाय, जे ना देखे ओकर जायखेती, बेटी और गाभिन गाय की देख-रेख करनी पड़ती है; ध्यान न देने पर नुकसान
खेलबी ना खेले देइबी, खेलिए बिगाड़बीन खुद अच्छा काम करना न दूसरों को करने देना
खोंसू के जान जा अउरी खवइया के सवादे ना मिलेअत्यधिक हुज्जत करने से दूसरों को परेशानी
गइने मरद जिन खइने खटाई अउरी गइली मेहरारू जिन खइली मिठाईमर्द को खट्टी चीजें और औरतों को मीठी चीजें कम खानी चाहिए
गइल जवानी फिर ना लौटी, चाहें घी, मलीदा खाजवानी एक बार चली जाती है, फिर लौटती नहीं
गइल भँइस पानी मेंहानि, घाटा
गइल राज जहवाँ चुगला पइसे, गइल पेड़ जहवाँ बगुला बइसेजहाँ अवसर और साधन होते हैं, वहाँ ही लाभ होता है।
गज भर के गाजी मियाँ नव हाथ के पोंछआडम्बर
गाइ बाँधी के राखल जाले साड़ नाहींमर्द की अपेक्षा औरत पर ज्यादे निगरानी रखना चाहिए
गाई गुन बछरू, पिता गुन घोड़ा, नाहीं ढेर त थोड़ो थोड़ागुण थोड़े-थोड़े अवश्य मिलते हैं
गाछ नै रोपब, त फल कोना भेटत?बिना मेहनत किए फल नहीं मिलता
गाड़ी में दम नाहीं बारी में डेराडींगबाजी करने वाले के लिए; सिर्फ बात करने वाला
गारी में लसालस नाहीं पादे ठसाठसअत्यधिक बहसने वाले के लिए कहा जाता है
गुरु गुड़ रह गइलन, चेला चीनी हो गइलेगुरु से आगे निकल जाना
गेहूँ की साथे घुनवो पिसालाअच्छा होते हुए भी बुरे के साथ रहने पर परेशानी आती है
गोबर, मैला, नीम की खली। या से खेती दूनी फली।इन सभी उर्वरक से खेत की उपज दोगुनी होती है।
घर के जोगी जोगड़ा, आन गाँव के सिद्धअपने घर में व्यक्ति की कद्र नहीं होती, लेकिन बाहर उसकी प्रतिष्ठा होती है
घर के ना घाट के माई के न बाप केआवारा, न तो घर का न घाट का
घर के भेदिया लंका ढाहेचुगली करने वाला
घर फूटे गँवार लूटे, गाँव फूटे जवार लूटेघर या गाँव में फूट होने से अनुचित लाभ उठाने का अवसर मिलना
घर में दिया बारी के मंदिर में दिया बारल जालापहले अपना काम, फिर दूसरों का काम
घर में भूजी भाँग नाहीं बीबी पादे चिउड़ायोग्य न होने पर भी बढ़-चढ़कर बोलना, अत्यधिक बहसना
घाट-घाट का पानी पी के होखल बड़का संतसौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को
घीव के लड्डू, टेढो भलामांगी हुई चीज़ हर हाल में अच्छी
घोड़ा की पिछाड़ी अउरी हाकिम की अगाड़ी कबो नाहीं जाए के चाहींघोड़े के पीछे या अधिकारी के आगे जाने पर जोखिम
चउबे गइलन छब्बे बने दूबे बन के अइलनफायदे के लालच में नुकसान करना
चमड़ी जाय पर दमड़ी न जाएकंजूस
चमरा की मनवले डांगर नाहीं मरेलावही होगा जो भगवान चाहेगा
चलनि दूसलैन सूप के, जिनका सहस्त्र टा छेदकुछ चीजें केवल योग्य व्यक्ति ही सही उपयोग कर पाते हैं।
चलनी में दूध दुहे अउरी करमे के दोस देगलती खुद करना और दोष दूसरों पर लगाना
चाल रहे सादा जे निबहे बाप-दादाचाल-चलन ऐसा रखना चाहिए कि निर्वाह आसान हो
चालीस में चारी कम (३६), हजाम, पंडीजी सलामहजाम बहुत चालाक होते हैं, टक्कर केवल पंडित ही ले सकता है
चिरई के जान जाए, लईका के खेलवनाअपनी क्षणिक खुशी के लिए दूसरों को कष्ट देना
चिरई में कउआ, मनई में नउआपक्षियों में कौवा और आदमियों में हजाम चतुर होते हैं
चिराग तले अंधेरा।निकट की चीज़ अक्सर दिखाई नहीं देती।
चोरवा के मन बसे ककड़ी की खेत मेंआदत नहीं जाती
छप्पर पर फूंस नहीं, ड्योढ़ी पर नाचदिखावटी ठाट-बाट परन्तु वास्तविकता में कुछ भी नहीं
छाती पर मुंग दरऽबिना मतलब का कष्ट देना
छिया-छिया गप-गपकिसी वस्तु की आलोचना करना और उसका उपयोग भी करना
जइसन खाइ अन, वइसन रही मनआहार का प्रभाव मन और आचरण पर पड़ता है
जइसन देखीं गाँव की रीती. ओइसन उठाई आपन भीती।समाज की परंपरा के अनुसार अपने व्यवहार का निर्माण करें।
जइसन बोअबऽ, ओइसने कटबऽजैसी करनी वैसी भरनी
जइसन माई ओइसन धिया, जइसन काकड़ ओइसन बीयापुत्री में माँ का गुण होता है
जनम के संघाती सब केहु ह लेकिन करम के नाहींजन्म के दोस्त सब हैं, कर्म स्वयं करना पड़ता है
जब बरसे तब बाँधो क्यारी, बड़ा किसान जब हाथ कुदारीसही समय पर कार्य करना लाभकारी होता है।
जब भगवान मुँह चिरले बाने त खाएके देबे करीहेंसबके लिए भगवान देने वाला है
जवन रोगिया के भावे उ बैदा फुरमावेकिसी को वही काम करने को कहना जो उसे अच्छा लगे
जवने पतल में खाना ओही में छेद करनाविश्वासघात करना
जहाँ गाछ न वृक्ष, वहाँ रेड़ प्रधान।अभाव में छोटी वस्तु ही महत्वपूर्ण।
जहाँ चाह, वहाँ राहअगर किसी व्यक्ति को कुछ पाना है, तो उसके लिए राह निकल ही आती है; यदि व्यक्ति के पास कुछ करने की दृढ़ इच्छा (चाह) हो, तो कोई भी रास्ता (राह) वह ढूंढ़ ही लेता है
जाके पांव न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराईजिस मनुष्य पर कभी दुःख न पड़ा हो, वह दूसरों का दुःख क्या समझे
जात-जात के भेदिया जात-जात घर जाए बाभन, कुक्कुर, घोड़िया, जात देखि नरियाएब्राह्मण, कुत्ता और घोड़ा अपनी ही जाति के दुश्मन होते हैं
जाति सुभाव ना छुटे, टाँग उठा के मुतेस्वभाव नहीं बदलता
जाहाँ लूटी परे ताहाँ टूटी परे, जाहाँ मारी परे ताहाँ भागी परेखुदगर्ज
जिअते माछी नाहीं घोंटाईसामने ही कोई गलती हो तो उसे नजरअंदाज करना मुश्किल
जितना गहिरा जोतै खेत, बीज पड़े फल उत्तने देतजितनी मेहनत, उतना ही फल प्राप्त होता है।
जिंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए।जीवन की लंबाई से ज्यादा महत्व उसके गुणवत्तापूर्ण और सार्थक होने में है।
जिन ढूंढ़ा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठजो खोजते हैं वे पाते हैं, पर इसके लिए चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है
जिनगी भर गुलामी, बढ़-बढ़ के बातछोटी मुँह बड़ी बात
जिनगी में उतार-चढ़ाव आवत जात रहेलाजीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
जियते पिया बाती न पूछें, मुअते पिपरवा पानीमरने के बाद दिखावा करना, जीवित रहते सच न बताना
जीअत पर छूछ भात, मरले पर दूध भातजीवित रहने पर उपेक्षा एवं अनादर, मरने के बाद सम्मान और गुणगान
जे गुड़ खाई उ कान छेदाईगलत काम का परिणाम भी गलत होता है
जे न देखल कनेया पुतरी उ देखल सालीउन्नति कर जाना
जे ना देखन अठन्नी-चवन्नी उ देखल रूपइयासौभाग्यशाली
जेकर बनरी उहे नचावे, दोसर नचावे त काटे धावेजिसकी चीज़ उसी की अक्ल
जेकर बहिन अंदर ओकर भाई सिकनदरभाई अपने विवाहित बहन के घर में बेखौफ आता-जाता है
जेतना के बबुआ ना ओतना के झुनझुनाअधिक खर्च करना
जेतने मुँह ओतने बातेंहर कोई अपनी राय देता है
जेतने वेकती ओतने कार, नाहीं वेकती नाहीं कारजितने लोग रहते हैं उतना ही काम होता है
जेतने सरी ओतने तरीजितना पुराना उतना ही बढ़िया
जैसी करनी वैसी भरनी।जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही परिणाम मिलेगा।
जो जागत है वो पावत है, जो सोवत है वो खोवत हैजो व्यक्ति सचेत और सक्रिय रहता है, उसे सफलता मिलती है, जबकि जो आलसी या लापरवाह होता है, वह अवसरों को खो देता है
ढुलमुल बेंट कुदारी अउरी हँसी के बोले नारीदोनों से बचिए, खतरा कर सकती हैं
तीन तिरहुतिया तेरह पाक, ककरो चुड़ा दही, ककरो भातहर किसी को उसके भाग्य के अनुसार मिलता है।
तीन में ना तेरह मेंकहीं का नहीं
तू डाढ़े-डाढ़े त हम पाते-पाते।हर किसी को उसके कर्म और प्रयास अनुसार फल मिलता है।
तेते पाँव पसारिए, जैती लाँबी सौरअपनी क्षमता और संसाधनों के अनुसार ही कार्य करना चाहिए
तेली के जरे मसाल, मसालची के फटे कपारइर्ष्या करना
तेली के लइका भूखे मरे अउरी लोग कहे की पी के मातल बाकिसी चीज़ का कारण कुछ और हो और समझा कुछ और जाए
थूके सतुआ नाहीं सनाईअत्यधिक परिश्रम/सामग्री आदि की आवश्यकता
थोथा चना, बाजे घनाअसमर्थ व्यक्ति अधिक बात करता है
दउरा में डेग डाललधीरे-धीरे चलना, काम को बहुत ही धीमी गति से करना
दस के लाठी एक के बोझएकता में शक्ति है
दाँत बा तS चाना नाहीं, चाना बा तS दाँत नाहींसमयानुसार आवश्यक वस्तु की कमी
दादा कहने सरसउवे लदीहSलकीर के फकीर; निर्धारित नियम का पालन करना
दाल में काला होनाकिसी बात में कमी या गड़बड़ी होना।
दाल-भात के कवरबहुत आसान होना
दुधारू गाइ के लतवो सहल जालाजिस व्यक्ति से फायदा हो, उसकी थोड़ी गलती भी सहन की जाती है
दूनू लोक से गइने पाड़े, न हलुआ मिलल न माड़ेधोबी का कुत्ता; न घर का न घाट का
दूर के ढोल सुहावनेदूर से कोई चीज बहुत अच्छी लगती है, लेकिन वास्तव में वह उतनी अच्छी नहीं होती
देखा देखी पाप, देखा देखी धरमलोग अक्सर दूसरों को देखकर अच्छे या बुरे काम करते हैं
देर आए दुरूस्त आए।देर से सही काम करना भी बेहतर है, बजाय पूरी तरह असफल होने के।
देही ना दासा गाड़ी तेलवासाशरीर अच्छा न होने पर भी अत्यधिक श्रृंगार करना
धान गिरे बड़ भाग, गेहूँ गिरे दुरभाग।किस्मत और प्रयास के अनुसार परिणाम मिलता है।
धान गिरे बढ़ भाग, गोहूँ गिरे दुरभागधान गिरने से उपज अच्छी होती है, गेहूँ गिरने से उपज खराब होती है; यानि नतीजे का अनुमान
धोबिया अपनी गदहवो के बाबू कहेमीठी और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें
न ऊधो का लेना, न माधो का देनाकिसी के मामलों में अनावश्यक रूप से न पड़ना, दूसरों के झगड़ों या लेन-देन से दूर रहना
न खेलब, न खेले देबन स्वयं कार्य करना और न दूसरे को करने देना
नउआ के देखि के हजामत बड़ी जालाआवश्यकता न होने पर भी चीज़ पाने की इच्छा करना
नन्ही चुकी गाजी मियाँ, नव हाथ के पोंछसम्भलने से परे
नया लुगा नौ दिन, लुगरी बरीस दिननई चीज जल्दी पुरानी हो जाती है, पुराने चीज़ें लंबे समय तक टिकती हैं।
नया-नया दुलहिन के नया-नया चालनई प्रथा शुरू करना
नर हो न निराश करो मन कोहर किसी के जीवन में परेशानियां आती हैं, लेकिन उन परेशानियों से निराश होकर लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता
नव के लकड़ी, नब्बे खरचबेवकूफी में खर्च करना
नव नगद ना तेरह उधारलेन-देन बराबर रखना
नवकि में नव के पुरनकी में ठाढ़ेनये-नये को इज्जत देना
ना खेलब ना खेले देब, खेलवे बिगाड़बकिसी को आगे न बढ़ने देना
ना नईहरे सुख, ना ससुरे सुखअभागा
ना नीमन गीतिया गाइब, ना मड़वा में जाइबना अच्छा काम करेंगे ना पूछ होगी
ना नौ मन तेल होई ना राधा नचिहेंन साधन उपलब्ध होगा, न कार्य होगा
ना रही बाँस ना बाजी बँसुरीमूल का ही नाश होना
ना सूत ना कपास जुलाहों में लट्ठम लठ।सही साधन या सामग्री के बिना काम सफल नहीं होता।
नाच न जाने आंगन टेढाकिसी काम को करने में असमर्थ होने पर बहाने बनाना
नाचे कूदे बंदर अउरी माल खाए मदारीकिसी दूसरे के मेहनताने पर ऐश करना
नाचे ना जाने आँगन टेढ़ादोष दूसरों पर डालना।
नानी की आगे ननीअउरे के बखानजिसे सबकुछ मालूम हो, उसे बताना बेकार
नानी के धन, बेइमानी के धन अउरी जजमानी के धन नाहीं रसेलाव्यर्थ धन; किसी काम का नहीं होता
नाया लुगा नौ दिन, लुगरी बरीस दिननया भी कुछ दिन में पुराना हो जाता है, पुराना अधिक उपयोगी होता है
नाहीं चिन त नाया कीनपारखी न होने पर नया ही खरीदना चाहिए
निरबंस अच्छा लेकिन बहुबंस नाहीं अच्छासंतान हो तो अच्छे गुण वाली, नहीं तो न हो
नीक रही करम, त का करीहें बरमहमेशा अच्छा कर्म करना चाहिए
नेबुआ तs लेगइल सागे में मती डालेकिसी वस्तु का गलत प्रयोग होने की आशंका
नौ की लकड़ी, नब्बे खरचअसली कीमत कम, खर्च अधिक
नौ के लकड़ी, नब्बे खर्चअसली मूल्य कम, खर्च अधिक
नौ दिन चले, अढ़ाई कोसकाम धीमी गति से करना, लेट करना
पइसा ना कउड़ी बीच बाजार में दौड़ा-दौड़ीबिना साधन के भविष्य की कल्पना
पइसा ना कउड़ी बीच बाजार में दौड़ा-दौड़ीबिना साधन के भविष्य की कल्पना, खाली जेब परन्तु बड़े-बड़े सपने देखना
पड़लें राम कुकुर के पालेकुसंगति में पड़ना
परहित सरिस धरम नहिं भाईदूसरों की भलाई के समान कोई धर्म नहीं है
पहीले दिन पहुना, दूसरे दिन ठेहुना, तीसरे दिन केहुनारिश्तेदारी में लंबे समय तक रहना धीरे-धीरे सम्मान कम कर देता है
पाईं त रस लाई, नाहीं त घर-घर आगी लगाईंमिलने पर खुश, न मिलने पर हंगामा करना
पातर देहरी अन्न के खानिपतला व्यक्ति ज्यादा खाता है
पानी पीअs छानी के अउरी गुरु करs जानी केसोच-समझकर कार्य और निर्णय लेना चाहिए
पानी में रहकर मगर से बैर।प्रभावी क्षेत्र में सामर्थ्यशाली से दुश्मनी।
पाप डुबोवे धर्म तिरावे, धर्मी कधै न मुँह दुख पावपाप आदमी को तबाह करता है, पुण्य बचाता है और दुख नहीं होने देता
पाव भरी के देबी अउरी नौ पाव पूजानौ की लकड़ी, नब्बे खर्च; दिखावटी तैयारी
पीपल काटे, पाल बिनास, भगवा भेस सतावे। काया गढ़ी में दया न व्यापे जरा मूर से जायेगलत कार्य करने से नुकसान होता है; अनुचित आचरण हानि पहुँचाता है।
पुरुवा रोपे पूर किसान, आधा खखड़ी आधा धानमेहनत और परिश्रम से उचित परिणाम मिलता है।
पूत के पांव पालने में दिख जाते हैंकिसी व्यक्ति का भविष्य उसके वर्तमान लक्षणों से जाना जा सकता है
पूरी के पेट सोहारी से नाहीं भरीरुचि अनुसार भोजन होना चाहिए
पेट कबो नाहीं भरेलादुनिया में सबकुछ भर सकता है, केवल पेट को नहीं; भूख अनंत है
पेटवे सब कुछ करावेलापेट के कारण ही जीव बुरे काम भी करता है
पैर पुजाइल बा पीठी नाहींसहन करने की एक सीमा होती है
फटकी के लS अउरी अउरी फटकी के दSहिसाब बराबर रखना, मरौवत न रखना
फुटली आँखों ना सोहालाबिल्कुल नापसंद
बइठले ले बेगारी भलाखाली बैठना ठीक नहीं, हमेशा कुछ करना चाहिए
बईठल बनिया का करे, एह कोठी के धान ओह कोठी धरेबिना मतलब का काम करना
बकरी के माई कबले खर जिउतिया मनाईजो होना है वह होगा ही
बड़ के लइका पादे त बाबू के हवा खुली गइल अउरी छोट के पादे त मार सारे पदले बाबड़े को इज्जत, छोटे को अपमान
बड़ रहें जेठानी त राखें आपन पानीअपनी इज्जत अपने हाथ में है
बड़ संग रहिअ त खइहS बीड़ा पान, छोट संग रहिअ त कटइहS दुनु कानसज्जन का संग लाभदायक, दुष्ट का संग हानिकारक
बड़ संग रहिअ त खइहऽ बीड़ा पान, छोट संग रहिअ त कटइहऽ दुनु कानसज्जन का संग अच्छा है जबकि दुष्टों का संग करने से हानि होता है
बड़-बड़ घोड़ा दहाइल जा अउरी गदहा पूछे केतना पानीछोटे द्वारा दुस्साहस करना; हास्यप्रद स्थिति
बढ़े पूत पिता के धरमा, खेती उपजे अपने करमापिता के अच्छे कर्मों से पुत्र की उन्नति होती है पर अपनी मेहनत से ही खेत की अच्छी पैदावार होती है
बतिया मानबी बाकिर खूँटवा ओहि जागि गारबीदूसरे की सुनो पर करना अपनी जैसी
बनला के सभे इयार, बिगड़ला के केहू नासमय का फेर
बनले के साथी सब केहू ह अउरी बिगड़ले के केहु नाहींसुख में सभी साथी, दुख में कोई नहीं
बभने के बनावल नाहीं त बभने खाई, नाहीं त बैले खाईब्राह्मण का भोजन या बहुत अच्छा या बहुत खराब होता है
बहसू के नव गो हर, खेते में गइल एको नाहींकेवल बहसने से काम नहीं चलता
बाग़ के बाग़ चउरिये बाबेवकूफ जनता
बाढ़े पूत पिता की धरमा, खेती उपजे अपनी करमापिता के अच्छे कर्मों से पुत्र की उन्नति होती है, अपनी मेहनत से खेत में उपज
बाण-बाण गइल त नौ हाथ के पगहा ले गइलखुद तो डूबे दूसरे को भी ले डूबे
बात लाख के करनी खाक केसिर्फ बात बनाना, कर्म नहीं करना।
बानर का जानी आदी के सवादसभी लोग वस्तुओं की महत्ता नहीं जानते
बाप ओझा अउरी माई डाइनविरोधाभास; एक अच्छा तो दूसरा बुरा
बाबा के धियवा लुगरी अउरी भइया के धियवा चुनरीजो रिस्ते में जितना करीब, उतना ही मान
बाभन बुधीचालूपना; ब्राह्मण बुद्धि यहाँ काम नहीं करेगी
बाभन, कुकुर, भाँट, जाति-जाति के काटब्राह्मण, कुत्ता और भाँट अपनी जाति के ही दुश्मन होते हैं
बाभन, कुकुर, हाथी, नाहीं जात के साथीब्राह्मण, कुत्ता, हाथी आपसी सहयोग नहीं करते
बाँसे की कोखी रेड़ जामलकुपुत्र होना
बाहे न बिआ उ बतिए कहाउम्र बढ़ती रहती है, समय का इंतजार न करें
बिन घरनी,घर भूत के डेराऔरत से ही घर घर लगता है
बिन मारे मुदई(शत्रु) मरे, की खड़े ऊँख बिकाए, बिना दहेज के बर मिले तो तीनों काम बन जाएबिना प्रयत्न के परिणाम नहीं, सही समय और साधन जरूरी
बिनु घरनी, घर भूत के डेरानारी बिना घर सूना
बिनु सत्संग विवेक न होईबिना अच्छी संगति के सही-गलत का ज्ञान नहीं होता
बिलइया के नजर मुसवे परलक्ष्य पर ध्यान होना
बुढ़ सुगा पोस ना मानेलापुराने को नई सीख नहीं दी जा सकती
बुढ़वा भतार पर पाँची गो टिकुलीआवश्यकता न होने वाले काम करना
बुन्नी नाचे थुन्नी पर, फुहरी बड़ेरी परडिंग हाँकना, एक से बढ़कर एक करना
बुरा काम के नतीजो बुरे होलाबुरे काम का नतीजा भी बुरा होता है
बेटओ मीठ अउरी भतरो मीठसबसे मिला हुआ; सब कुछ संतुलित और अच्छा
बेटा अउरी लोटा बाहरे चमकेलापुत्र घर के बाहर नाम रोशन करता है
बेटा के भुजा अउरी दमादे के जाउरअपनों का अनादर और दूसरों का सम्मान
बेटी के बेटा कवने काम, खइहें इहँवा चेटइहें गाँवदूर रहनेवाले समय पर मदद नहीं करते
बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होयगलत काम का, गलत नतीजा
भइंस पानी में हगी त उतरइबे करीछिपी हुई बात प्रकट हो जाती है
भगवान की घर में देर बा, अंधेर नाहींभगवान के घर में देर है, न्याय जरूर होगा
भगवान के बाँही बहुत लमहर हभगवान सबकी रक्षा करता है
भगवान के भाई भइल बारअकाम टालने वालों के लिए; कोई भी काम कल पर नहीं टालना चाहिए
भगवान के माया कहीं धूप कहीं छायादुनिया में घटित अच्छा-बुरा भगवान की माया है
भर घरे देवर, भसुरे से मजाकउल्टा काम करना
भर फगुआ बुढ़उ देवर लागेंलेमौसमी अंदाज
भाग वाला के भूत हर जोतेलाभाग्यवान का काम बन जाना
भूख त छूछ का, नींद त खरहर काआवश्यकता प्रधान
भूखे भजन न होई गोपाला, ले लS आपन कंठी मालाभूखे रहकर कोई काम नहीं होता
भूखे भजन ना होइहें गोपाला, लेलीं आपन कंठी-मालाखाली पेट काम नहीं होता
भेड़ियाधसान- घमासान, भेड़-चालझगड़ा, चालाकी
भैंस के आगे बीन बजाए, भैंस खड़ी पगुरायमूर्ख व्यक्ति को शिक्षा देना बेकार है
भोज गड़ी कोहड़ाभोज के समय कोहड़ा रोपना; समय पर तैयारी नहीं करना
भोला गइलें टोला प, खेत भइल बटोहिया, भोला बो के लइका भइल ले गइल सिपहियाना घर का ना घाट का
मँगनी के चनन, घिसें रघुनंननदूसरे की वस्तु का दुरुपयोग
मंगनी के बैल के दांत ना गिनायेमुफ्त में मिली वस्तु की तुलना नहीं की जाती
मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर करनाधर्म कभी भी लोगों को एक-दूसरे से दुश्मनी करने या नफरत फैलाने की शिक्षा नहीं देता
मन के हारे हार है, मन के जीते जीतजिंदगी में जीत या हार सिर्फ मन के भाव हैं; यदि हम अपने मन से हार मान लेते हैं, तो हम सच में हार जाते हैं, और यदि हम मन से जीतने का दृढ़ संकल्प करते हैं, तो हम अवश्य जीत सकते हैं
मन चंगा त कठवती में गंगामन की पवित्रता सर्वोपरि है
मन चंगा तो कठौती में गंगायदि मन साफ और शुद्ध हो, तो कोई भी स्थान या स्थिति पवित्र लगती है
मन में आन, बगल में छुरी, जब चाहे तब काटे मूरीद्वेष और धोखा देने वाला व्यक्ति
मन मोरा चंचल, जिअरा उदास, मन मोरा बसे इयरवा के पासमन की चंचलता, किसी काम में मन न लगना
मरदे के खाइल अउरी मेहरारू के नहाइल, केहू देखेला नाहींमर्द को खाने और औरत को नहाने में ज्यादा समय नहीं लगाना चाहिए
मरले से भूतो भागी जालाकभी-कभी कठोर उपाय करने पड़ते हैं
महँगा रोए एकबार, सस्ता रोए बार-बारमहँगी वस्तुएँ अधिक दिन टिकती हैं, सस्ती बार-बार खराब होती हैं
माई के जिअरा गाई अइसन, बाप के जिअरा कसाई अइसनमाँ स्नेही, बाप कठोर
माई के मनवा गाई जइसन अउरी पूत के मनवा कसाई जइसनपुत्र कुपुत्र पर माता सदा सुमाता
माई चले गली-गली, बेटा बने बजरंगबलीखुद की तारीफ़ करना
माघ के टूटल मरद अउरी भादो के टूटल बरध कबो नाहीं जुटेलेंकमजोर व्यक्ति और कमजोर बैल फिर कभी स्वस्थ/मजबूत नहीं होते
माघे जाड़ ना पूसे जाड़, जब बयारी बहे तबे जाड़हवा बहने पर ही ठंडक बढ़ती है
माड़-भात-चोखा, कबो ना करे धोखासादगी का रहन-सहन
मानS तS देव नाहीं तS पत्थरविश्वास ही सर्वोपरी है
मुअल घोड़ा के घास खाइलमिथ्या आरोप
यहाँ न लागहि राउर मायायह आपकी बात प्रभावी नहीं है।
रसरी जरी गइल पर एंठ नाहीं गइलघमंड नहीं जाना चाहिए
रस्सी जल गई पर बल न गया।साधन समाप्त हो सकता है, लेकिन शक्ति या मूल्य बरकरार रहता है।
रहे के ठेकान ना पंड़ाइन मांगस डेराअसमर्थता
रहे निरोगी जे कम खाया, काम न बिगरे जो गम खायाकम खाना और गम खाना अच्छा होता है
राजा के मोतिये के दुःख बाऽ सक्षम को क्या दुःखसक्षम व्यक्ति को कोई दुःख नहीं होता
राम मिलावे जोड़ी एगो आन्हर एगो कोढ़ीएक जैसा मेल करना
रामजी के चिरईं, रामजी के खेत, खाले चिरईं भर-भर पेटअपने धन पर ऐश
रूप न रंग, मुँह देखाइये मांगताड़ेठगी करना
रो रो खाई, धो धो जाईअप्रसन्न मन से किया भोजन लाभकारी नहीं होता
रोग के जड़ खाँसीखाँसी रोगों की जड़ है
रोजो कुँआ खोदS अउरी रोजो पानी पीअSभविष्य के बारे में न सोचना, अदूरदर्शी व्यक्ति
रोवे के रहनी अंखिये खोदा गइलबहाना मिल जाना
लईकन के संग बाजे मृदंग, बुढ़वन के संग खर्ची के दंगजब जैसा तब तैसा
लउटल भाग भइली लरकोरी, नित उठ दूधा भर-भर खोरी।भाग्य और प्रयास दोनों मिलकर सफलता देते हैं।
लगन चरचराई अपने हो जाईसमय पर काम बन जाना
लाजे भवही बोले ना अउरी सवादे भसुर छोड़े नामजबूरी या चुप्पी का नाजायज फायदा उठाना
लाठी कपारे भेंट नाहीं अउरी बाप-बाप चिल्लानखरेबाजी; जब परिणाम नहीं आता तब अधिक चिल्लाना या शिकायत करना
लाठी के देवता बाती से नाहीं मानेलेंदुष्ट समझाने से नहीं समझता, कभी-कभी कठोरता आवश्यक
लाठी के मारल भुला जाला लेकिन बाती के नाहींशब्द या बात का असर हमेशा रहता है
लात के देवता बात से ना मानेआदत से लाचार
लाद दऽ लदवा दऽ, घरे ले पहुँचवा दऽबढ़ता लालच
लादल बैला लादल जाय, हुंछका बैला कोहरत जायमेहनत का सही उपयोग से लाभ मिलता है।
लामही से पाँव लागी लेहल ठीक हदूर से ही प्रणाम करना अच्छा है, अधिक मेल-जोल जरूरी नहीं
लाल, पीयर जब होखे अकास, तब नइखे बरसा के आसआकाश का लाल और पीला रंग होने पर बारिश की संभावना नहीं
लूर-लुपुत बाई मुअले प जाईआदत से लाचार
लोग न लइका मुँहे लागल करिखाबदनामी, काले धब्बे लगना
लोहा के लोहे काटेलासमान प्रकृति वाला ही भारी पड़ता है
वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरेमनुष्यता का असल मकसद सिर्फ अपना पना सुख नहीं है, बल्कि दूसरों के लिए कुछ करना है
वेश्या में नाव लिखाइल त का मोट अउरी का पातरकाम करना जरूरी, चाहे छोटा या बड़ा
सइंया भये कोतवाल, अब डर काहे काअपने शासन में भय नहीं; “जिसकी लाठी उसकी भैंस”
सईयाँ के मन-मुँह पाईं तS सासु के झोंटा नेवाईंसंगति मिलते ही गलत काम करना
संगत से गुण होत है संगत से गुण जाये।संगत या साथी से व्यक्ति के गुण और आदतें प्रभावित होती हैं।
सब चाही त काम आँटीसभी मिलकर काम करें तो जल्दी समाप्त होगा
सब धन बाईसे पसेरीसब एक समान
सब धान बाइसे पसेरीसब एक जैसे; समान या व्यंग्यात्मक तुलना
सब रामायन बीती गइल, सीता केकर बापअच्छी तरह से समझाने के बाद भी मूर्खतापूर्ण प्रश्न करना
सबकुछ खइनी दुगो भुजा ना चबइनीभरपेट खाने के बाद भी देखने की कोशिश करना कि कुछ और मिल जाए
समय के साथ न्याय की संकल्पना व्यापक हो रही हैसमय के साथ न्याय और समाज की सोच विकसित होती है।
सराहल धिया डोम घरे जालीअत्यधिक बढ़ाई देने से बच्चे बिगड़ जाते हैं
सरी पाकी जइहें, गोतिया ना खइहें, गोतिया के खाइल, अकारथ जइहेंखराब हो जाने देना लेकिन दूसरों को उपयोग न करने देना
ससुर के परान जाए, पतोह करे काजरनिष्ठुर होना
साँच को आँच क्यासच्चाई को किसी साक्ष्य की जरूरत नहीं होती और वह समय के साथ सामने आ जाती है
सादा जीवन, उच्च विचारबिना दिखावे के सरल जीवन जीना और अच्छे विचार रखना
सांवा खेती, अहिर मीत, कबो-कबो होखे हीतसाँवा की खेती और अहिर की दोस्ती कभी-कभी ही लाभदायक
सुखे के साथी सब केहु हsसुख में सभी साथी, दुख में कोई नहीं
सुपवा हंसे चलनिया के कि तोरा में सतहत्तर छेदखुद दोषी होकर किसी को कोसना
सुपवा हंसे चलनिया के कि तोरा में सतहत्तर छेदखुद दोषी होकर किसी को कोसना, अपनी कमियों को देखने की बजाय दूसरों में ऐब निकालना
सेतिहा के साग गलपुरना के भाजीमुफ्त या अतिरिक्त होने पर वस्तु का उपयोग करना
सोना दहाए. कोयला पर छापा।कीमती चीज़ का मूल्य दिखाई देता है, सामान्य चीज़ का नहीं।
सोना लुटाय और कोयले पर छापाअच्छा अवसर होने के बावजूद गलत या अप्रासंगिक कार्य करना
सोने के कुदारी माटी कोड़े के हअसबको अपनी योग्यतानुसार कार्य करना चाहिए
सौ चूहा खा के बिल्ली चली हज को।बहुत मेहनत करने के बाद भी अगर योजना सही न हो तो लाभ नहीं मिलता।
सौ पापे बाघ मरेलाअति सर्वत्र वर्जयेत; पाप का घड़ा भरेगा तो फूटेगा
हड़बड़ी के बिआह, कनपटीये सेनुरहड़बड़ी का काम गड़बड़ी में
हथिया की पेटे जाड़ हहाथी की पेट से ही ठंड शुरू होती है
हथिया-हथिया कइलन गदहो ना ले अइलननाम बड़े दर्शन छोटे
हम चराईं दिल्ली, हमरा के चरावे घर के बिल्लीघर की मुर्गी दाल बराबर
हर द हरवाह द अउरी गाड़ी खोदे के पैना दपूरी तरह दूसरों पर निर्भर होने वाले आलसी
हर बड़े से खर खाए, बकरी अंचार खाएहर किसी को उसके कार्य के अनुसार फल मिलता है।
हरबरी के बियाह में कनपटी पर सिंदूरजल्दबाजी का काम बुरा होता है
हरबरी के बियाह में कनपट्टी परं सिंदूरविशेष अवसरों पर पारंपरिक रीति-रिवाज का पालन करना।
हरिकल मानेला परिकल नाहीं मानेलाखेत अगर हड़क जाए तो धीरे-धीरे सुधारा जा सकता है लेकिन परिकल व्यक्ति कतई नहीं मानता
हरिकल मानेला परिकल नाहीं मानेलाहर व्यक्ति एक जैसा नहीं सोचता।
हरीसचंद पर विपती पड़ी त पकवल मछरी जल में कूदीविपत्ति बहुत बुरी होती है
हवा के आंगा, बेना के बताससूरज को दीपक दिखाना
हंस के मंत्री कौआबेमेल
हंसले घर बसेलाउन्नति करना
हँसुआ की बिआहे में खुरपी के गीतजहाँ जो करना चाहिए वह न करके कुछ और करना
हंसुआ के बिआह, खुरपी के गीतबेमतलब की बात
हाथी आइली हाथी आइली पदलसी भढ़ाक देअफवाह फैलाने पर कहा जाता है; झूठी बात
हाथी के दांत खाने के और दिखाने के औरकरना कुछ, कहना कुछ
हाथी चले बाजार, कुकुर भोंके हजारगंभीरता से काम करना
हाथे में पइसा रहेला तब बुधियो काम करेलेपास में पैसा होने पर दिमाग काम करता है
हुँसीयार लइका हगते चिन्हालाहोनहार व्यक्ति की छोटी-छोटी बातें भी पहचान में आती हैं
हेलल भंईसिया पानी मेंसब खत्म हो जाना
होता घीवढारी आ सराध के मंतरविपरीत काम करना
होनहार बिरवान के होत चिकने पातहोनहार के लक्षण पहले से ही दिखाई पड़ने लगते हैं

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