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पर्यावरण असन्तुलन सृष्टि का विनाशक है / Environmental Imbalance is the Destroyer of Creation

पर्यावरण असन्तुलन सृष्टि का विनाशक है (70th BPSC Essay) एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में प्रकृति […]

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देश का विकास और सूचना प्रौद्योगिकी /Country Development and Information Technology

देश का विकास और सूचना प्रौद्योगिकी (70th BPSC Essay) आज के युग को यदि सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) का युग

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समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की महत्ता / Importance of India in Contemporary Global Perspective

समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की महत्ता (70th BPSC Essay) आज के वैश्विक परिदृश्य में भारत एक उभरती हुई महाशक्ति

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बापक नाम साग-पात आ बेटाक नाम परोर | Bapak Nam Sag-Pat Aa Betak Nam Paror

बापक नाम साग-पात आ बेटाक नाम परोर (70th BPSC Essay) ग्रामीण जीवन में एक प्रसिद्ध कहावत है — “बापक नाम

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जिअते माछी नाहीं घोंटाई | Jiate Machhi Nahin Ghontai

जिअते माछी नाहीं घोंटाई (70th BPSC Essay) “जिअते माछी नाहीं घोंटाई” एक प्रसिद्ध लोकप्रचलित कहावत है, जो हमारे जीवन के

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बनले के साथी सब केहू ह अउरी बिगड़ले के केहु नाहीं | Banle ke Sathi Sab Kehu H Auri Bigdale Ke Kehu Nahin

बनले के साथी सब केहू ह अउरी बिगड़ले के केहु नाहीं (70th BPSC Essay) किसी गांव में एक साधु बाबा

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मूस मोटइहें, लोढ़ा होइहें, ना हाथी, ना घोड़ा होइहें (Moos Motaihen, Lodha Hoihen, Na Hathi, Na Ghora Hoihen)

मूस मोटइहें, लोढ़ा होइहें, ना हाथी, ना घोड़ा होइहें (68th BPSC Essay) भारतीय समाज में लोक कथाएँ और लोकोक्तियाँ केवल

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अगिला खेती आगे-आगे, पछिला खेती भागे-जागे (Agila Khetee Aage-Aage, Pachhila Khetee Bhage Jage)

अगिला खेती आगे-आगे, पछिला खेती भागे-जागे (68th BPSC Essay) समय का महत्व हर क्षेत्र में होता है, चाहे वह खेती

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पानी में मछरिया, नौ-नौ कुटिया बखरा (Paani mein machharia, nau-nau kutia bakharaa)

पानी में मछरिया, नौ-नौ कुटिया बखरा (68th BPSC Essay) गाँव के एक छोटे से कस्बे में मोहन नाम का एक

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धर्म के बिना विज्ञान नाङ्गर (लंगड़ा) छै, विज्ञान के बिना धर्म आन्हर (अँधा) छै (Dharma ke bina vigyan nangar chhai, vigyan ke bina dharma aanhar chhai)

धर्म के बिना विज्ञान नाड्गर (लंगड़ा) छै, विज्ञान के बिना धर्म आन्हर (अँधा) छै। (68th BPSC Essay) अल्बर्ट आइंस्टीन का

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कोविड के बाद बदलाव माँगती शिक्षा। /Education seeking change after Covid. (68th BPSC Essay)

कोविड के बाद बदलाव माँगती शिक्षा। (68th BPSC Essay in Hindi) परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है, और समय के

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इंटरनेट ने हमारे संसार को विश्वगाँव में बदल दिया है। (Internet has turned our world into a global village.)

इंटरनेट ने हमारे संसार को विश्वगाँव में बदल दिया है। (68th BPSC Essay) तकनीकी प्रगति ने मानव सभ्यता को निरंतर

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हम इतिहास-निर्माता नहीं हैं, बल्कि हम इतिहास द्वारा निर्मित हैं। (We are not makers of history, we are made by history.)

हम इतिहास-निर्माता नहीं हैं, बल्कि हम इतिहास द्वारा निर्मित हैं। (68th BPSC Essay) इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संकलन

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उत्कृष्ट कला हमारे अनुभव को प्रकाशित करती है या सत्य को उद्घाटित करती है। (Good art should illuminate our experience or reveal truths.)

उत्कृष्ट कला हमारे अनुभव को प्रकाशित करती है या सत्य को उद्घाटित करती है। (68th BPSC Essay) मानव सभ्यता के

उत्कृष्ट कला हमारे अनुभव को प्रकाशित करती है या सत्य को उद्घाटित करती है। (Good art should illuminate our experience or reveal truths.) Read Post »

अपने अनिवार्य कर्तव्य का पालन करें क्योंकि कर्म निश्चय ही निष्क्रियता से उत्तम है।(Perform your obligatory duty because action is indeed better than inaction.)

अपने अनिवार्य कर्तव्य का पालन करें क्योंकि कर्म निश्चय ही निष्क्रियता से उत्तम है। (68th BPSC Essay) मानव जीवन में

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साहित्य ज्ञान का केवल एक स्रोत ही नहीं है, साथ ही वह नैतिक और सामाजिक क्रिया का भी एक रूप है। (Literature is not only a source of knowledge, but also a form of moral and social activity.)

साहित्य ज्ञान का केवल एक स्रोत ही नहीं है, साथ ही वह नैतिक और सामाजिक क्रिया का भी एक रूप

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जंगल अपने पेड़ स्वयं तैयार करता है। यह लोगों के जंगल में आकार बीज फेंकने का इंतजार नहीं करता है। (Forest creates its own trees. It does not wait for the people to throw seeds.)

जंगल अपने पेड़ स्वयं तैयार करता है। यह लोगों के जंगल में आकार बीज फेंकने का इंतजार नहीं करता है।

जंगल अपने पेड़ स्वयं तैयार करता है। यह लोगों के जंगल में आकार बीज फेंकने का इंतजार नहीं करता है। (Forest creates its own trees. It does not wait for the people to throw seeds.) Read Post »

आगु नाथ ने पाछू पगहा, बिना छान के कूदे गधा (Agu nath nai pachhu pagaha, bina chhan ke kude gadha)

आगु नाथ ने पाछू पगहा, बिना छान के कूदे गधा (69th BPSC Essay) एक गाँव में एक युवक रहता था,

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धोबियक कुकुर ने घर के ने घाट के (Dhobiyak kukur nen ghar ke ne ghat ke)

धोबियक कुकुर ने घर के ने घाट के (69th BPSC Essay) “जिसने समय को समझ लिया, उसने जीवन को समझ

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बिन समाज के बोली हो सकेला का, बिन बोली (भाषा) समाज हो सकेला का (Bin samaj ke boli ho sakela ka, bin boli (Bhasha) samaj ho sakela ka!)

बिन समाज के बोली हो सकेला का, बिन बोली (भाषा) समाज हो सकेला का (69th BPSC Essay) “भाषा किसी समाज

बिन समाज के बोली हो सकेला का, बिन बोली (भाषा) समाज हो सकेला का (Bin samaj ke boli ho sakela ka, bin boli (Bhasha) samaj ho sakela ka!) Read Post »

भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तथा बचाव के उपाय। (Impact of climate change on Indian agriculture and prevention measures)

भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तथा बचाव के उपाय। (69th BPSC Essay) “खुदा का शुक्र है कि इंसान

भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तथा बचाव के उपाय। (Impact of climate change on Indian agriculture and prevention measures) Read Post »

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