Bihar Lokoktiya and Meaning in Hindi: जैसा कि आप जानते हैं कि BPSC Mains परीक्षा के निबंध पत्र में तृतीय खंड के अंतर्गत बिहार की प्रचलित लोकोक्तियों पर आधारित निबंध लिखने का प्रश्न पूछा जाता है। इस खंड का उद्देश्य अभ्यर्थियों की लोकसंस्कृति की समझ, सामाजिक दृष्टि और भाव–अभिव्यक्ति की क्षमता का मूल्यांकन करना होता है।
नीचे प्रस्तुत लगभग 100 से अधिक बिहार की प्रमुख लोकोक्तियों का यह संग्रह आपकी आगामी Mains परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है। यदि आप इन लोकोक्तियों के अर्थ और भाव को ध्यानपूर्वक समझ लेते हैं, तो निबंध लेखन के दौरान आपको विषय-वस्तु गढ़ने में काफी आसानी होगी। किसी भी लोकोक्ति पर निबंध लिखते समय आपको विषय नया या कठिन नहीं लगेगा।
बिहार लोकोक्तियाँ एवं उनके अर्थ List
1. अगिला खेती आगे-आगे, पछिला खेती भागे जागे
Hinglish: Agila Kheti Aage-Aage, Pichla Kheti Bhage Jage
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि जो व्यक्ति समय रहते योजना बनाकर कार्य करता है, वही आगे रहता है। खेती का उदाहरण देकर यह समझाया गया है कि जो किसान समय पर बुवाई करता है, उसकी फसल अच्छी होती है, जबकि देर करने वाला किसान पूरे मौसम भाग-दौड़ करता रह जाता है। जीवन में भी यही सिद्धांत लागू होता है। पढ़ाई, नौकरी, व्यवसाय या पारिवारिक जीवन—हर क्षेत्र में अग्रिम तैयारी सफलता की कुंजी होती है। समय पर निर्णय न लेने वाला व्यक्ति हमेशा दबाव में रहता है और अवसर खो देता है। यह लोकोक्ति हमें समय प्रबंधन, दूरदर्शिता और अनुशासन का महत्व समझाती है।
2. अंडा सिखावे बच्चा के, ए बच्चा तू चेंव-चेंव करअ
Hinglish: Anda Sikhave Bachcha Ke, E Bachcha Tu Chein-Chein Kar
अर्थ: यह लोकोक्ति उस स्थिति को दर्शाती है जब अज्ञानी व्यक्ति ज्ञानी को उपदेश देने का प्रयास करता है। जैसे एक निर्जीव अंडा बच्चे को चलना सिखाने लगे, वैसे ही ज्ञानहीन व्यक्ति की सलाह निरर्थक होती है। समाज में अक्सर देखा जाता है कि बिना अनुभव और समझ वाले लोग विशेषज्ञों को निर्देश देने लगते हैं, जिससे भ्रम और गलत निर्णय होते हैं। यह कहावत अनुभव, योग्यता और विवेक के महत्व को रेखांकित करती है। सही मार्गदर्शन वही दे सकता है जिसके पास व्यवहारिक ज्ञान और जीवन अनुभव हो। यह लोकोक्ति अनावश्यक अहंकार से बचने और सीखने की भावना अपनाने की प्रेरणा देती है।
3. अपनी दुआरे, कुतवो बरिआरे
Hinglish: Apni Duare, Kutvo Bariyare
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति अपने क्षेत्र में स्वयं को बहुत शक्तिशाली समझने लगता है। जैसे अपनी गली में एक साधारण कुत्ता भी शेर जैसा व्यवहार करता है। यह कहावत सीमित अधिकार या प्रभाव मिलने से उत्पन्न अहंकार की ओर संकेत करती है। कई बार लोग छोटे पद या स्थानीय प्रभाव पाकर दूसरों पर रौब जमाने लगते हैं, लेकिन वास्तविकता में उनकी शक्ति सीमित होती है। यह लोकोक्ति आत्ममूल्यांकन और विनम्रता का संदेश देती है। व्यक्ति को अपनी वास्तविक क्षमता पहचाननी चाहिए और यह समझना चाहिए कि सच्ची शक्ति चरित्र और व्यवहार से आती है, न कि केवल स्थान या परिस्थिति से।
4. अपने खाईं, बिलरिया लगाईं
Hinglish: Apne Khain, Billiya Lagain
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति स्वयं गलती करता है लेकिन दोष किसी और पर डाल देता है। जैसे कोई खुद दूध पी जाए और बाद में बिल्ली को दोषी ठहरा दे। यह मानव स्वभाव की एक सामान्य कमजोरी को उजागर करती है। समाज, राजनीति और व्यक्तिगत जीवन में लोग अपनी असफलताओं की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। यह प्रवृत्ति समस्याओं को और जटिल बना देती है। यह लोकोक्ति आत्मस्वीकृति, ईमानदारी और उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर बल देती है। जब तक व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करता, तब तक सुधार और प्रगति संभव नहीं है।
5. अबरे के मेहरारू गाँवभरी के भउजाई
Hinglish: Abre Ke Mehararu Gaonbhari Ke Bhaujai
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि कमजोर व्यक्ति को समाज में हर कोई सताने लगता है। शक्ति और संसाधनों की कमी के कारण कमजोर वर्ग का शोषण आसान हो जाता है। यह कहावत सामाजिक असमानता और अन्याय की वास्तविकता को दर्शाती है। समाज में अक्सर देखा जाता है कि निर्धन, असहाय या कमजोर लोगों की आवाज़ को दबा दिया जाता है। यह लोकोक्ति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि न्यायपूर्ण समाज के लिए कमजोर वर्ग की सुरक्षा और सशक्तिकरण आवश्यक है। साथ ही, यह नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाती है कि ताकतवर वर्ग को कमजोरों का सहारा बनना चाहिए।
6. अहिर से इयारी, भादो में उजारी
Hinglish: Ahir Se Iyari, Bhado Mein Ujari
अर्थ: यह लोकोक्ति अविश्वसनीय मित्रता की ओर संकेत करती है। इसका भाव है कि कुछ संबंध केवल सुविधा या स्वार्थ पर आधारित होते हैं और संकट के समय साथ नहीं देते। जैसे भादो के महीने में खेत उजड़ जाते हैं, वैसे ही भरोसेमंद न होने वाली दोस्ती भी समय आने पर टूट जाती है। यह कहावत हमें सतर्क रहने की सीख देती है कि हर मित्रता सच्ची नहीं होती। जीवन में मित्र चुनते समय उनके चरित्र, निष्ठा और व्यवहार को परखना आवश्यक है। सच्चे संबंध वही होते हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी साथ निभाएँ।
7. आइल थोर दिन, गइल ढेर दिन
Hinglish: Aail Thor Din, Gail Dher Din
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि समय बहुत तेजी से बीत जाता है। जो समय आने वाला होता है, वह कम प्रतीत होता है, जबकि बीता हुआ समय बहुत लंबा लगता है। यह कहावत समय की क्षणभंगुरता को दर्शाती है। जीवन में लोग अक्सर वर्तमान को हल्के में लेते हैं और बाद में पछताते हैं। यह लोकोक्ति समय के सदुपयोग का संदेश देती है। प्रत्येक क्षण मूल्यवान है और उसे सार्थक कार्यों में लगाना चाहिए। बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता, इसलिए वर्तमान का सही उपयोग ही भविष्य को बेहतर बना सकता है।
8. आन्हर कुकुर बतासे भोंके
Hinglish: Anhar Kukur Batase Bhonke
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है बिना ठोस कारण या सही जानकारी के शोर मचाना। जैसे अंधा कुत्ता हवा की आहट पर भौंकने लगता है। यह कहावत उन लोगों पर लागू होती है जो अफवाहों या अधूरी जानकारी पर प्रतिक्रिया देते हैं। आज के समय में यह प्रवृत्ति और भी बढ़ गई है। यह लोकोक्ति विवेक, धैर्य और तथ्य-जाँच के महत्व को रेखांकित करती है। किसी भी विषय पर प्रतिक्रिया देने से पहले सोच-विचार आवश्यक है, अन्यथा समाज में भ्रम और तनाव फैलता है।
9. आपे-आपे लोग बिआपे, केकर माई केकर बापे
Hinglish: Aape-Aape Log Biyape, Kekar Mai Kekar Bape
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि अधिकांश लोग अपने स्वार्थ में ही लगे रहते हैं। हर व्यक्ति अपने लाभ, अपने परिवार और अपने हितों को प्राथमिकता देता है। यह समाज की यथार्थवादी तस्वीर प्रस्तुत करती है। हालांकि यह पूर्ण सत्य नहीं है, फिर भी यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने और अत्यधिक अपेक्षाएँ न रखने की सीख देती है। यह लोकोक्ति यह भी बताती है कि यदि समाज को बेहतर बनाना है तो व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सामूहिक हित के बारे में सोचना आवश्यक है।
10. आसमाने में थूकबS त मुँहवे पर आई
Hinglish: Aasmane Mein Thukab Ta Munhve Par Aai
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति दूसरों को नुकसान पहुँचाने या अपमानित करने का प्रयास करता है, वही कार्य अंततः उसी पर उल्टा पड़ता है। जैसे आकाश की ओर थूकने पर थूक वापस अपने ही चेहरे पर गिरती है। यह कर्मफल के सिद्धांत को स्पष्ट करती है। बुरे कर्मों का परिणाम अंततः स्वयं को ही भुगतना पड़ता है। यह लोकोक्ति नैतिक आचरण, संयम और सद्भाव का संदेश देती है। व्यक्ति को दूसरों के प्रति द्वेष रखने के बजाय सकारात्मक कार्य करने चाहिए, क्योंकि वही अंततः लाभकारी सिद्ध होते हैं।
11. इडिल-मिडिल के छोड़ आस, धर खुरपा गढ़ घास
Hinglish: Idle-Middle Ke Chhod Aas, Dhar Khurpa Garh Ghaas
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि यदि किसी व्यक्ति का मन पढ़ाई या बौद्धिक कार्य में नहीं लगता, तो उसे किसी उपयोगी श्रम या व्यावहारिक काम में लग जाना चाहिए। यहाँ ‘इडिल-मिडिल’ से आशय आलस्य और अनुत्पादक सोच से है, जबकि ‘खुरपा गढ़ घास’ मेहनत और श्रम का प्रतीक है। यह कहावत यह संदेश देती है कि बेकार बैठने से अच्छा है कि व्यक्ति कोई छोटा ही सही, लेकिन सार्थक कार्य करे। जीवन में हर व्यक्ति एक ही प्रकार के काम के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसलिए अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य चुनना ही वास्तविक बुद्धिमानी है।
12. इश्क अउरी मुस्क छिपवले से नाहीं छीपेला
Hinglish: Ishq Auri Musk Chhipavale Se Nahin Chhipela
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि प्रेम और आकर्षण को अधिक समय तक छिपाया नहीं जा सकता। जैसे कस्तूरी की खुशबू अपने आप फैल जाती है, वैसे ही सच्चा प्रेम भी व्यक्ति के व्यवहार, आँखों और शब्दों से प्रकट हो जाता है। यह कहावत मानवीय भावनाओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति को दर्शाती है। प्रेम कोई बनावटी भावना नहीं है, बल्कि वह भीतर से स्वतः उत्पन्न होती है। समाज में चाहे जितनी रोक-टोक हो, सच्ची भावना किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती है। यह लोकोक्ति भावनात्मक सत्य और मानवीय संवेदनाओं की शक्ति को उजागर करती है।
13. उत्तम खेती, मध्यम बान, निषिद्ध चाकरी, भीख निदान
Hinglish: Uttam Kheti, Madhyam Baan, Nishiddh Chakari, Bheekh Nidaan
अर्थ: इस लोकोक्ति में जीवनयापन के साधनों का एक क्रम बताया गया है। इसमें खेती को सर्वोत्तम, व्यापार को मध्यम, नौकरी को सीमित और भीख को सबसे निकृष्ट बताया गया है। इसका आशय यह है कि आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन सबसे श्रेष्ठ हैं। खेती और स्वरोजगार व्यक्ति को स्वतंत्रता और सम्मान देते हैं, जबकि दूसरों पर निर्भर रहना आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाता है। यह लोकोक्ति समय और परिस्थितियों के अनुसार कर्म चुनने की सीख भी देती है। इसका मूल संदेश यह है कि परिश्रम आधारित और स्वाभिमान से जुड़ा कार्य ही जीवन को स्थायित्व और संतोष प्रदान करता है।
14. उधिआइल सतुआ, पितर के दान
Hinglish: Udhiyail Satuwa, Pitar Ke Daan
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो वस्तु स्वयं के लिए अनुपयोगी या खराब हो, उसे दान के नाम पर दूसरों को देना नैतिक नहीं है। यहाँ ‘उधिआइल सतुआ’ खराब या बासी वस्तु का प्रतीक है और ‘पितर के दान’ दिखावटी पुण्य का। यह कहावत दिखावे की धार्मिकता और बनावटी दान पर प्रहार करती है। सच्चा दान वही होता है जो श्रद्धा, शुद्धता और निःस्वार्थ भावना से दिया जाए। अनुपयोगी वस्तुओं को दान बताकर देना वास्तव में छल है। यह लोकोक्ति नैतिक मूल्यों, ईमानदारी और वास्तविक परोपकार की भावना को महत्व देती है।
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15. एक घंटा माँगे त सवेसेर अउरी दिनभर माँगे त सवे सेर
Hinglish: Ek Ghanta Mange Ta Savaser, Auri Dinbhar Mange Ta Save Ser
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि अत्यधिक मेहनत करने के बावजूद यदि परिणाम समान ही रहे, तो वह श्रम निरर्थक प्रतीत होता है। यह उन परिस्थितियों को दर्शाती है जहाँ व्यक्ति लगातार प्रयास करता है, लेकिन उन्नति या लाभ नहीं होता। इसका कारण गलत दिशा, अनुचित व्यवस्था या शोषण हो सकता है। यह कहावत केवल मेहनत नहीं, बल्कि सही रणनीति और अवसर की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। यह व्यक्ति को आत्मविश्लेषण करने की प्रेरणा देती है कि कहीं परिश्रम गलत स्थान या गलत तरीके से तो नहीं किया जा रहा। सही दिशा में किया गया प्रयास ही वास्तविक प्रगति दिलाता है।
16. ओखर में हाथ, मुसर के देनी दोष
Hinglish: Okhar Mein Haath, Musar Ke Deni Dosh
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी ही गलती के लिए दूसरों को दोषी ठहराता है। ‘ओखर’ और ‘मूसर’ का उदाहरण देकर यह बताया गया है कि यदि हाथ स्वयं ओखर में डाला गया है, तो चोट लगने पर मूसर को दोष देना अनुचित है। जीवन में अक्सर लोग असफलता या नुकसान के लिए परिस्थितियों, लोगों या व्यवस्था को दोषी ठहराते हैं, जबकि वास्तविक कारण उनकी अपनी गलतियाँ होती हैं। यह लोकोक्ति आत्म-जिम्मेदारी, आत्मविश्लेषण और ईमानदारी की सीख देती है। अपनी भूल स्वीकार करने से ही सुधार और प्रगति संभव है। दोषारोपण से न तो समस्या हल होती है और न ही अनुभव से सीख मिलती है।
17. ओस चटले से पिआस नाहीं बूझी
Hinglish: Os Chatle Se Piyaas Nahin Bujhi
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि बहुत ही कम प्राप्ति से वास्तविक आवश्यकता पूरी नहीं होती। जैसे ओस की बूंदें चाटने से प्यास नहीं बुझती, वैसे ही नाममात्र की सहायता या लाभ से बड़ी समस्या का समाधान नहीं होता। यह कहावत अधूरे उपायों और प्रतीकात्मक प्रयासों की सीमाओं को दर्शाती है। जीवन में समस्याओं का समाधान करने के लिए पर्याप्त संसाधन, प्रयास और योजना की आवश्यकता होती है। यह लोकोक्ति यह भी सिखाती है कि दिखावटी सहायता से संतुष्ट होने के बजाय स्थायी और प्रभावी समाधान की ओर ध्यान देना चाहिए।
18. क, ख, ग, घ के लूर ना, दे माई पोथी
Hinglish: Ka, Kha, Ga, Gha Ke Loor Na, De Maai Pothi
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी योग्यता और सामर्थ्य से अधिक की माँग करता है। यहाँ ‘क, ख, ग, घ’ तक न जानने वाले द्वारा ‘पोथी’ माँगना असंगति का प्रतीक है। यह कहावत अतार्किक अपेक्षाओं और अव्यावहारिक महत्वाकांक्षाओं पर व्यंग्य करती है। जीवन में यदि व्यक्ति अपनी क्षमता को समझे बिना बड़े साधनों या पद की माँग करता है, तो वह स्वयं को हास्यास्पद स्थिति में डाल देता है। यह लोकोक्ति आत्ममूल्यांकन, धैर्य और क्रमिक विकास की सीख देती है। योग्यता के अनुरूप लक्ष्य ही वास्तविक प्रगति का आधार होते हैं।
19. कबो घानी घाना कबो मुठी चना कबो उहो मना
Hinglish: Kabo Ghani Ghana Kabo Muthi Chana Kabo Uho Mana
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जीवन में हर दिन एक जैसा नहीं होता। कभी व्यक्ति को भरपूर सम्मान, साधन और अवसर मिलते हैं, तो कभी सीमित संसाधनों और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। यह जीवन की अनिश्चितता और परिवर्तनशीलता को दर्शाती है। यह कहावत व्यक्ति को धैर्य और संतुलन बनाए रखने की सीख देती है—सफलता में अहंकार नहीं और असफलता में निराशा नहीं। समय के साथ परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, इसलिए हर स्थिति को समान भाव से स्वीकार करना ही समझदारी है।
20. करजा के खाइल अउरी पुअरा के तापल बरोबरे है
Hinglish: Karja Ke Khail Auri Puara Ke Tapal Barobare Hai
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि कर्ज लेकर किया गया लाभ अंततः बोझ के समान होता है। जैसे उधार का खाना और पराए ईंधन से तापना—दोनों अस्थायी और निर्भरता वाले हैं। यह कहावत बताती है कि कर्ज तात्कालिक सुविधा तो देता है, लेकिन भविष्य में आर्थिक दबाव और चिंता बढ़ाता है। यह आत्मनिर्भरता, सीमित खर्च और विवेकपूर्ण वित्तीय निर्णयों का संदेश देती है। जीवन में स्थायी सुख और स्वतंत्रता के लिए अपनी आय और साधनों के भीतर रहकर योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ना आवश्यक है।
21. करनी ना धरनी, धियवा ओठ बिदोरनी
Hinglish: Karni Na Dharni, Dhiyava Oth Bidorni
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि व्यक्ति कोई ठोस काम नहीं करता, फिर भी नखरे और दिखावा करता रहता है। ‘करनी ना धरनी’ से तात्पर्य है—न कोई परिश्रम, न कोई जिम्मेदारी; जबकि ‘ओठ बिदोरनी’ अनावश्यक सजावट और बनावटी व्यवहार का संकेत है। समाज में ऐसे लोग अक्सर आलोचना या अपेक्षाएँ तो बहुत रखते हैं, पर योगदान शून्य होता है। यह कहावत कर्म और आचरण के बीच संतुलन का संदेश देती है। सम्मान और अधिकार उसी को शोभा देते हैं जो परिश्रम, अनुशासन और जिम्मेदारी निभाता है। बिना काम किए दिखावा करना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि सामाजिक विश्वास को भी कमजोर करता है।
22. काठ गढ़ले चीकन होला, बात गढ़ले रुखर होला
Hinglish: Kaath Gadhle Cheekan Hola, Baat Gadhle Rukhar Hola
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जहाँ कारीगरी से लकड़ी चिकनी हो जाती है, वहीं बातों में अनावश्यक सजावट और बनावट उन्हें रूखा और नीरस बना देती है। यह कहावत संप्रेषण में सादगी और सत्यता के महत्व को रेखांकित करती है। वास्तविक प्रभाव शब्दों की संख्या या अलंकरण से नहीं, बल्कि उनकी सच्चाई और स्पष्टता से आता है। अतिशयोक्ति, मिर्च-मसाले और बनावटी भाषा कई बार संदेश को कमजोर कर देती है। जीवन में और खासकर सार्वजनिक संवाद में सीधी, सरल और ईमानदार बात अधिक विश्वसनीय और प्रभावी होती है।
23. कानी बिना रहलो न जाये, कानी के देख के अंखियो पेराए
Hinglish: Kaani Bina Rahlo Na Jaaye, Kaani Ke Dekh Ke Ankhiyo Peraaye
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ प्रेम-संबंधों में होने वाली तकरार और आकर्षण—दोनों को एक साथ दर्शाना है। ‘कानी’ प्रतीक है उस प्रिय व्यक्ति का, जिसके बिना रहना कठिन होता है, लेकिन जिसकी हर हरकत पर मन खिन्न भी हो जाता है। प्रेम में नोक-झोंक, असहमति और शिकायतें स्वाभाविक हैं, फिर भी भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है। यह कहावत मानवीय संबंधों की जटिलता को उजागर करती है—जहाँ प्रेम केवल सुख नहीं, बल्कि सहनशीलता और समझदारी की भी माँग करता है। परस्पर सम्मान और संवाद से ही ऐसे संबंध संतुलित रह पाते हैं।
24. कुकुरे के पोंछी बारह बरिस गाड़ी के राख, टेड़े के टेड़े रही
Hinglish: Kukure Ke Ponchhi Barah Baris Gaadi Ke Raakh, Tede Ke Tede Rahi
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि स्वभाव बदलना अत्यंत कठिन होता है। चाहे कितनी भी कोशिश की जाए, मूल प्रवृत्ति अक्सर वैसी ही बनी रहती है। जैसे कुत्ते की पूँछ को वर्षों दबाकर रखने पर भी वह सीधी नहीं होती, वैसे ही व्यक्ति की आदतें और स्वभाव आसानी से नहीं बदलते। यह कहावत हमें यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने की सीख देती है—न तो अति अपेक्षाएँ रखें और न ही बार-बार निराश हों। सुधार संभव है, पर उसके लिए दीर्घकालिक प्रयास, आत्मइच्छा और सतत अनुशासन आवश्यक होता है।
25. खड़ी खेती, गाभिन गाय, तब जान जब मुँह में जाय
Hinglish: Khadi Kheti, Gabhin Gaay, Tab Jaan Jab Munh Mein Jaay
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि किसी कार्य या संपत्ति पर तब तक भरोसा नहीं करना चाहिए, जब तक उसका परिणाम प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त न हो जाए। खड़ी फसल और गर्भवती गाय—दोनों में संभावनाएँ तो होती हैं, पर निश्चितता नहीं। प्राकृतिक आपदाएँ, रोग या अन्य अनिश्चितताएँ परिणाम बदल सकती हैं। यह कहावत धैर्य, सावधानी और यथार्थवाद का संदेश देती है। योजनाओं और अपेक्षाओं में संतुलन आवश्यक है—अतिआत्मविश्वास नुकसान पहुँचा सकता है। वास्तविक लाभ तभी माना जाना चाहिए जब वह हाथ में आ जाए।
26. खा मन भाता अउरी पहिनS जग भाता
Hinglish: Kha Man Bhaata Auri Pahin Jag Bhaata
अर्थ: इस लोकोक्ति का गहरा आशय यह है कि व्यक्ति के जीवन में निजी स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा—दोनों का संतुलन आवश्यक है। भोजन व्यक्ति की व्यक्तिगत रुचि और सुविधा से जुड़ा विषय है, जिसमें उसे अपनी पसंद का अधिकार होता है। लेकिन पहनावा और बाहरी आचरण समाज के सामने व्यक्ति की छवि प्रस्तुत करता है। यदि व्यक्ति केवल अपनी इच्छा को प्राथमिकता दे और सामाजिक संदर्भों की अनदेखी करे, तो वह आलोचना और अस्वीकार का पात्र बन सकता है। यह लोकोक्ति सिखाती है कि समाज में रहते हुए दूसरों की भावनाओं, परंपराओं और अपेक्षाओं का सम्मान करना आवश्यक है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ सामाजिक असंवेदनशीलता नहीं होना चाहिए। समझदारी इसी में है कि निजी जीवन में स्वतंत्र रहें, लेकिन सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और सामंजस्य बनाए रखें।
27. खेतिहर गइने घर दाएँ बाएँ हर
Hinglish: Khetihar Gaine Ghar Daaye Baaye Har
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जो व्यक्ति केवल निगरानी या डर के कारण काम करता है, वह नियंत्रण हटते ही लापरवाह हो जाता है। खेतिहर के चले जाने पर घर का इधर-उधर हो जाना इस बात का प्रतीक है कि काम करने वाले में आत्मअनुशासन का अभाव है। यह कहावत कार्य-संस्कृति में जिम्मेदारी और ईमानदारी के महत्व को रेखांकित करती है। सच्चा कर्मठ व्यक्ति वही होता है जो बिना किसी दबाव या निगरानी के भी अपने कर्तव्य का पालन करे। समाज और संस्थाएँ तभी मजबूत बनती हैं जब लोग आंतरिक नैतिकता से प्रेरित होकर काम करें। यह लोकोक्ति बताती है कि केवल बाहरी नियंत्रण से नहीं, बल्कि आत्म-जिम्मेदारी से ही स्थायी व्यवस्था और विश्वास कायम होता है।
28. खेलबी ना खेले देइबी, खेलिए बिगाड़बी
Hinglish: Khelbi Na Khele Deibi, Kheliye Bigadbi
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो स्वयं तो कोई अच्छा कार्य नहीं करते, लेकिन दूसरों को भी आगे बढ़ने नहीं देते। यह मानसिकता ईर्ष्या, असुरक्षा और नकारात्मक सोच से उत्पन्न होती है। ऐसे लोग समाज, परिवार या कार्यस्थल की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन जाते हैं। यह कहावत बताती है कि केवल निष्क्रिय रहना ही समस्या नहीं है, बल्कि सक्रिय रूप से दूसरों का रास्ता रोकना और भी अधिक हानिकारक है। यह लोकोक्ति सहयोग, सकारात्मक दृष्टिकोण और उदारता का संदेश देती है। यदि व्यक्ति स्वयं सक्षम नहीं है, तो उसे दूसरों की सफलता से सीख लेनी चाहिए, न कि उसे नष्ट करने का प्रयास करना चाहिए। सामूहिक उन्नति तभी संभव है जब लोग एक-दूसरे का साथ दें।
29. गज भर के गाजी मियाँ नव हाथ के पोंछ
Hinglish: Gaj Bhar Ke Gaji Miyan Nau Haath Ke Ponch
अर्थ: यह लोकोक्ति आडंबर और दिखावे की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य करती है। इसका अर्थ है कि जब वस्तु या व्यक्ति छोटा हो, लेकिन उसे बड़े तामझाम और दिखावे से ढक दिया जाए। समाज में कई लोग अपनी वास्तविक क्षमता, ज्ञान या संसाधनों से अधिक दिखाने का प्रयास करते हैं। यह कहावत स्पष्ट करती है कि बाहरी सजावट और बनावट से वास्तविक मूल्य नहीं बढ़ता। सच्ची प्रतिष्ठा और सम्मान व्यक्ति के कर्म, चरित्र और योग्यता से प्राप्त होते हैं। दिखावा कुछ समय के लिए लोगों को भ्रमित कर सकता है, लेकिन अंततः सच्चाई सामने आ ही जाती है। यह लोकोक्ति सादगी, आत्मविश्वास और वास्तविकता को अपनाने की प्रेरणा देती है।
30. घर के ना घाट के माई के न बाप के
Hinglish: Ghar Ke Na Ghaat Ke, Maai Ke Na Baap Ke
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो न तो परिवार से जुड़ा है और न ही समाज में उसकी कोई स्पष्ट पहचान या जिम्मेदारी है। यह आवारापन, दिशाहीनता और अस्थिर जीवन का प्रतीक है। ऐसा व्यक्ति न किसी का होता है और न कोई उसका भरोसा करता है। यह कहावत सामाजिक संबंधों, पारिवारिक जुड़ाव और उत्तरदायित्व के महत्व को उजागर करती है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसका जीवन तभी सार्थक बनता है जब वह किसी समुदाय, परिवार या उद्देश्य से जुड़ा हो। संबंध और कर्तव्यबोध व्यक्ति को पहचान, स्थिरता और जीवन का अर्थ प्रदान करते हैं। बिना इन मूल आधारों के जीवन खोखला और असुरक्षित हो जाता है।
31. घोड़ा की पिछाड़ी अउरी हाकिम की अगाड़ी कबो नाहीं जाए के चाहीं
Hinglish: Ghoda Ke Pichhaadi Auri Haakim Ke Agaadi Kabo Nahin Jaaye Ke Chahi
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि कुछ स्थान और परिस्थितियाँ स्वभावतः जोखिमपूर्ण होती हैं, इसलिए वहाँ अनावश्यक साहस या लापरवाही नहीं दिखानी चाहिए। घोड़े के पीछे जाना खतरनाक है क्योंकि वह लात मार सकता है, और अधिकारी के आगे जाना जोखिमपूर्ण इसलिए है क्योंकि अधिकार के दुरुपयोग या दंड का सामना करना पड़ सकता है। यह कहावत व्यवहारिक बुद्धि, सतर्कता और परिस्थिति की समझ पर बल देती है। जीवन में हर जगह समान साहस या सीधेपन का प्रयोग उचित नहीं होता। शक्ति, अधिकार और स्वभाव को पहचानकर ही व्यवहार करना चाहिए। यह लोकोक्ति विवेकपूर्ण आचरण, आत्म-सुरक्षा और सामाजिक यथार्थ को समझने की सीख देती है।
32. चलनि दूसलैन सूप के, जिनका सहस्त्र टा छेद
Hinglish: Chalani Duslain Soop Ke, Jinka Sahastra Ta Chhed
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जिनमें स्वयं अनेक दोष होते हैं, वे दूसरों की कमियाँ निकालने में आगे रहते हैं। ‘सूप’ में हजारों छेद होते हैं, फिर भी वह चलनी को दोष देता है—यह पाखंड और दोगलेपन का प्रतीक है। समाज में अक्सर लोग अपने दोषों को छिपाकर दूसरों की आलोचना करते हैं। यह कहावत आत्ममंथन, विनम्रता और ईमानदारी का संदेश देती है। किसी पर उँगली उठाने से पहले स्वयं के आचरण की जाँच आवश्यक है। आलोचना तभी सार्थक होती है जब वह सुधार के उद्देश्य से हो, न कि स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने के लिए।
33. चिरई के जान जाए, लईका के खेलवना
Hinglish: Chirai Ke Jaan Jaaye, Laika Ke Khelavna
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि किसी की क्षणिक खुशी किसी और के लिए गंभीर कष्ट या हानि का कारण बन सकती है। बच्चे के लिए पक्षी केवल खेलने की वस्तु हो सकता है, लेकिन पक्षी के लिए वही खेल जीवन-मरण का प्रश्न बन जाता है। यह कहावत संवेदनशीलता, करुणा और जिम्मेदारी का संदेश देती है। जीवन में हमें यह समझना चाहिए कि हमारी मनोरंजन या सुविधा किसी और को पीड़ा न दे। समाज में शक्ति असमानता के कारण अक्सर कमजोर वर्ग को नुकसान उठाना पड़ता है। यह लोकोक्ति मानवीय मूल्यों और सहानुभूति को केंद्र में रखकर आचरण करने की प्रेरणा देती है।
34. चिरई में कउआ, मनई में नउआ
Hinglish: Chirai Mein Kauaa, Manai Mein Nauaa
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जैसे पक्षियों में कौवा चतुर और अवसरवादी माना जाता है, वैसे ही मनुष्यों में नाई (नउआ) को व्यवहारकुशल और समझदार समझा जाता है। यह कहावत लोकानुभव पर आधारित सामाजिक अवलोकन को दर्शाती है। यहाँ चतुराई का अर्थ केवल चालाकी नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता भी है। यह लोकोक्ति यह बताती है कि हर समाज में कुछ वर्ग या व्यक्ति अपनी व्यावहारिक बुद्धि और सामाजिक समझ के कारण विशिष्ट भूमिका निभाते हैं। साथ ही, यह संकेत भी देती है कि बुद्धिमत्ता कई रूपों में प्रकट होती है—केवल औपचारिक शिक्षा में नहीं।
35. जइसन देखीं गाँव की रीती, ओइसन उठाई आपन भीती
Hinglish: Jaisan Dekhin Gaon Ke Reeti, Oisan Uthaai Aapan Bhiti
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति को जिस समाज या परिवेश में वह रहता है, उसकी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अपने व्यवहार का निर्माण करना चाहिए। हर समाज की अपनी संस्कृति, मान्यताएँ और सामाजिक सीमाएँ होती हैं। यदि व्यक्ति उन्हें न समझे और उनका सम्मान न करे, तो वह अलग-थलग पड़ सकता है। यह कहावत सामाजिक समायोजन, सहिष्णुता और व्यवहारिक बुद्धि का संदेश देती है। इसका यह अर्थ नहीं कि व्यक्ति अपनी पहचान खो दे, बल्कि यह कि वह स्थानीय परंपराओं के साथ सामंजस्य बनाकर चले। यही संतुलन सामाजिक स्वीकृति और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का आधार है।
36. जवन रोगिया के भावे उ बैदा फुरमावे
Hinglish: Jawan Rogiya Ke Bhaave U Baida Phurmaave
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि व्यक्ति अक्सर वही सलाह या कार्य चाहता है जो उसे सुनने या करने में अच्छा लगे, भले ही वह उसके लिए वास्तविक रूप से लाभकारी न हो। जैसे रोगी वैद्य से वही दवा लिखवाना चाहता है जो उसे पसंद हो, न कि जो वास्तव में बीमारी ठीक करे। यह कहावत मानव स्वभाव की उस कमजोरी को दर्शाती है जिसमें हम कठिन लेकिन सही मार्ग के बजाय आसान और मनपसंद विकल्प चुनते हैं। जीवन में यह प्रवृत्ति शिक्षा, राजनीति, प्रशासन और व्यक्तिगत निर्णयों में भी दिखाई देती है। यह लोकोक्ति हमें यह सिखाती है कि सही निर्णय वही होता है जो दीर्घकालिक हित में हो, न कि केवल तत्काल सुख देने वाला। विवेक और अनुशासन के बिना सही उपचार या समाधान संभव नहीं है।
37. जहाँ गाछ न वृक्ष, वहाँ रेड़ प्रधान
Hinglish: Jahan Gaach Na Vriksh, Wahan Red Pradhan
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जहाँ संसाधनों या योग्य विकल्पों का अभाव होता है, वहाँ छोटी या साधारण वस्तु भी महत्वपूर्ण बन जाती है। जब बड़े पेड़ उपलब्ध नहीं होते, तब झाड़ी (रेड़) ही प्रधान मानी जाती है। यह कहावत अभाव की स्थिति में प्राथमिकताओं के बदलने को दर्शाती है। जीवन में कई बार परिस्थितियाँ हमें आदर्श विकल्पों से समझौता करने को मजबूर करती हैं। यह लोकोक्ति यथार्थवाद, व्यावहारिक सोच और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की सीख देती है। साथ ही यह भी बताती है कि किसी व्यक्ति या वस्तु का महत्व संदर्भ और स्थिति के अनुसार बदलता रहता है।
38. जाके पांव न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई
Hinglish: Jaake Paanv Na Fati Bivai, Wo Kya Jaane Peer Paraai
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जिसने स्वयं कभी कष्ट या पीड़ा का अनुभव नहीं किया, वह दूसरों के दुःख को गहराई से नहीं समझ सकता। पैरों की बिवाई का दर्द केवल वही जान सकता है जिसने उसे झेला हो। यह कहावत सहानुभूति और अनुभव के महत्व को रेखांकित करती है। समाज में कई बार संपन्न या सुविधाभोगी लोग गरीब और पीड़ित वर्ग की समस्याओं को हल्के में लेते हैं। यह लोकोक्ति हमें संवेदनशील बनने, दूसरों के अनुभवों का सम्मान करने और उनके दृष्टिकोण को समझने की प्रेरणा देती है। वास्तविक करुणा अनुभव और समझ से ही जन्म लेती है, केवल शब्दों से नहीं।
39. जिअते माछी नाहीं घोंटाई
Hinglish: Jiyate Maachhi Nahin Ghontai
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जब कोई गलती या गलत काम हमारी आँखों के सामने हो रहा हो, तो उसे अनदेखा करना कठिन हो जाता है। जैसे जीवित मक्खी को निगल पाना असंभव है, वैसे ही प्रत्यक्ष गलतियों को सहन करना मुश्किल होता है। यह कहावत नैतिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाती है। जब अन्याय या त्रुटि स्पष्ट रूप से दिखाई दे, तो चुप रहना भी एक प्रकार की सहमति बन जाता है। यह लोकोक्ति व्यक्ति को साहस, सत्यनिष्ठा और हस्तक्षेप की प्रेरणा देती है। समाज में सुधार तभी संभव है जब लोग गलत को देखकर आँखें न मूँदें।
40. जितना गहिरा जोतै खेत, बीज पड़े फल उत्तने देत
Hinglish: Jitna Gahira Jotai Khet, Beej Pade Phal Utne Det
अर्थ: इस लोकोक्ति का सीधा और गहन अर्थ है कि जितनी गहरी मेहनत और तैयारी होती है, परिणाम भी उतना ही अच्छा मिलता है। खेत जितना गहराई से जोता जाएगा, बीज उतना ही अच्छा फल देगा। यह कहावत परिश्रम, लगन और निरंतर प्रयास के महत्व को दर्शाती है। जीवन के हर क्षेत्र—पढ़ाई, नौकरी, व्यवसाय या कला—में सफलता का यही सिद्धांत लागू होता है। सतही प्रयास से सीमित परिणाम मिलते हैं, जबकि गहन मेहनत स्थायी सफलता दिलाती है। यह लोकोक्ति कर्म और फल के सीधे संबंध को स्पष्ट करते हुए व्यक्ति को निरंतर और ईमानदार प्रयास के लिए प्रेरित करती है।
41. जियते पिया बाती न पूछें, मुअते पिपरवा पानी
Hinglish: Jiyate Piya Baati Na Poochhen, Muate Piparwa Paani
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति जीवित रहते किसी की सुध नहीं लेता, लेकिन मृत्यु के बाद दिखावे और औपचारिकता में लग जाता है। जब सहायता, स्नेह या संवाद की वास्तविक आवश्यकता होती है, तब लोग उदासीन रहते हैं, और जब अवसर समाप्त हो जाता है, तब पछतावा या दिखावटी सम्मान प्रकट करते हैं। यह कहावत मानवीय संबंधों में ईमानदारी और समय पर संवेदनशीलता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सच्चा स्नेह वही है जो कठिन समय में साथ दे। मृत्यु के बाद की औपचारिकताएँ जीवित व्यक्ति के दुःख को दूर नहीं कर सकतीं। यह लोकोक्ति हमें वर्तमान में रिश्तों को निभाने और भावनाओं को समय रहते व्यक्त करने की प्रेरणा देती है।
42. जेकर बहिन अंदर ओकर भाई सिकनदर
Hinglish: Jekar Bahin Andar, Okar Bhai Sikandar
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि बहन के ससुराल में भाई को विशेष सम्मान और निर्भयता प्राप्त होती है। विवाहित बहन के घर भाई बिना संकोच आ-जा सकता है और उसे आदर मिलता है। यह कहावत पारिवारिक संबंधों की उस विशेषता को दर्शाती है जिसमें भाई–बहन का रिश्ता विवाह के बाद भी मजबूत बना रहता है। समाज में यह संबंध विश्वास और अपनत्व का प्रतीक माना जाता है। यह लोकोक्ति यह भी बताती है कि कुछ रिश्ते सामाजिक औपचारिकताओं से ऊपर होते हैं। भाई का बहन के घर निर्भय आना-जाना पारिवारिक सुरक्षा, स्नेह और आपसी सम्मान का संकेत है।
43. जेतना के बबुआ ना ओतना के झुनझुना
Hinglish: Jetna Ke Babua Na, Otna Ke Jhunjhuna
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि व्यक्ति अपनी क्षमता या आवश्यकता से अधिक खर्च कर देता है। जैसे बच्चे के लिए जितना खिलौना जरूरी नहीं, उससे अधिक झुनझुना ले लिया जाए। यह कहावत फिजूलखर्ची और दिखावे पर व्यंग्य करती है। समाज में कई लोग प्रतिष्ठा या शौक के नाम पर अनावश्यक खर्च करते हैं, जिससे बाद में आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं। यह लोकोक्ति संतुलन, विवेक और संसाधनों के सही उपयोग का संदेश देती है। खर्च वही उचित है जो आवश्यकता और सामर्थ्य के भीतर हो। अनियंत्रित खर्च न केवल आर्थिक अस्थिरता लाता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ाता है।
44. जेतने वेकती ओतने कार, नाहीं वेकती नाहीं कार
Hinglish: Jetne Wekti Otne Kaar, Nahin Wekti Nahin Kaar
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जितने लोग होते हैं, उतना ही काम निकल आता है। जब लोग होते हैं, तो जिम्मेदारियाँ और कार्य भी उत्पन्न होते हैं, और जब कोई नहीं होता, तो काम भी नहीं रहता। यह कहावत श्रम-विभाजन और मानवीय संसाधन के महत्व को दर्शाती है। कार्य की मात्रा अक्सर उपलब्ध लोगों पर निर्भर करती है। यह लोकोक्ति यह भी सिखाती है कि काम का बोझ अकेले नहीं उठाया जाना चाहिए, बल्कि उसे साझा करना चाहिए। सामूहिक प्रयास से काम आसान होता है और दक्षता बढ़ती है।
45. दूनू लोक से गइने पाड़े, न हलुआ मिलल न माड़े
Hinglish: Doonu Lok Se Gaine Paade, Na Halua Milal Na Maade
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति दो पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में किसी एक का भी नहीं बन पाता, वह अंततः दोनों ओर से नुकसान उठाता है। इसे ‘धोबी का कुत्ता’ की स्थिति भी कहा जाता है—न घर का, न घाट का। यह कहावत निर्णयहीनता और अवसरवाद की आलोचना करती है। जीवन में स्पष्ट पक्ष और उद्देश्य होना आवश्यक है। जो व्यक्ति हर जगह फिट होने की कोशिश करता है, वह कहीं का नहीं रहता। यह लोकोक्ति साहसपूर्वक निर्णय लेने और अपने सिद्धांतों पर टिके रहने की सीख देती है।
46. धान गिरे बड़ भाग, गेहूँ गिरे दुरभाग
Hinglish: Dhaan Gire Bad Bhaag, Gehun Gire Durbhaag
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि परिणाम केवल प्रयास पर नहीं, बल्कि समय, परिस्थितियों और किस्मत पर भी निर्भर करता है। धान और गेहूँ दोनों मेहनत से उगाई जाने वाली फसलें हैं, लेकिन धान का गिरना कभी लाभदायक माना जाता है, जबकि गेहूँ का गिरना नुकसानदायक होता है। इससे यह संकेत मिलता है कि एक ही घटना अलग-अलग परिस्थितियों में अलग परिणाम दे सकती है। जीवन में भी कई बार समान प्रयास के बावजूद किसी को सफलता मिलती है और किसी को असफलता। यह लोकोक्ति व्यक्ति को अहंकार और निराशा—दोनों से बचने की सीख देती है। सफलता मिलने पर केवल स्वयं को श्रेय देना उचित नहीं और असफलता में केवल स्वयं को दोषी ठहराना भी सही नहीं। संतुलित दृष्टि आवश्यक है।
47. धोबिया अपनी गदहवो के बाबू कहे
Hinglish: Dhobiya Apni Gadahvo Ke Babu Kahe
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी बात मनवाने या संबंध बनाए रखने के लिए मीठी और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करता है, चाहे सामने वाला कितना ही साधारण क्यों न हो। धोबी का अपने गधे को ‘बाबू’ कहना भाषा की ताकत को दर्शाता है। यह कहावत बताती है कि कठोर शब्दों की तुलना में मधुर वाणी अधिक प्रभावी होती है। सम्मानजनक भाषा से कठिन कार्य भी आसान हो जाते हैं और संबंधों में कटुता नहीं आती। यह लोकोक्ति व्यवहारकुशलता, विनम्रता और संवाद की कला का महत्व बताती है। जीवन में सफलता केवल योग्यता से नहीं, बल्कि भाषा और व्यवहार से भी प्राप्त होती है।
48. न ऊधो का लेना, न माधो का देना
Hinglish: Na Udho Ka Lena, Na Madho Ka Dena
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति को दूसरों के मामलों, झगड़ों या लेन-देन में अनावश्यक रूप से नहीं पड़ना चाहिए। जब किसी विषय से हमारा प्रत्यक्ष संबंध न हो, तो उसमें हस्तक्षेप करना अक्सर परेशानी का कारण बनता है। यह कहावत व्यावहारिक बुद्धि और आत्म-सुरक्षा का संदेश देती है। समाज में कई विवाद ऐसे होते हैं जिनमें बीच में पड़ने वाला व्यक्ति स्वयं ही फँस जाता है। यह लोकोक्ति सिखाती है कि हर समस्या का समाधानकर्ता बनना आवश्यक नहीं। विवेक यही है कि जहाँ जिम्मेदारी हो वहीं हस्तक्षेप किया जाए, अन्यथा दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।
49. नउआ के देखि के हजामत बड़ी जाला
Hinglish: Nauaa Ke Dekhi Ke Hajaamat Badi Jaala
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि बिना वास्तविक आवश्यकता के भी किसी चीज़ को पाने की इच्छा जागृत हो जाती है। जैसे नाई को देखकर बाल कटवाने की इच्छा हो जाना, चाहे बाल ठीक ही क्यों न हों। यह कहावत मानव मन की उस प्रवृत्ति को दर्शाती है जिसमें दूसरों को देखकर अनावश्यक चाहतें उत्पन्न होती हैं। यह उपभोक्तावाद और दिखावे की मानसिकता पर भी संकेत करती है। व्यक्ति यदि हर आकर्षण के पीछे भागेगा, तो असंतोष बढ़ेगा। यह लोकोक्ति आत्मसंयम, विवेक और आवश्यकता-आधारित निर्णय लेने की सीख देती है। संतोष ही मानसिक शांति का आधार है।
50. नन्ही चुकी गाजी मियाँ, नव हाथ के पोंछ
Hinglish: Nanhi Chuki Gaji Miyan, Nau Haath Ke Ponch
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग ऐसी स्थिति के लिए किया जाता है जहाँ वस्तु या व्यक्ति छोटा हो, लेकिन उसके चारों ओर अत्यधिक तामझाम और दिखावा हो। यह आडंबर की चरम अवस्था को दर्शाती है, जहाँ वास्तविकता और प्रस्तुति में भारी अंतर होता है। यह कहावत बताती है कि जब दिखावा वास्तविकता से बहुत आगे निकल जाए, तो स्थिति संभालना कठिन हो जाता है। समाज में कई बार छोटी बातों को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे भ्रम और अव्यवस्था पैदा होती है। यह लोकोक्ति सादगी, संतुलन और यथार्थ को अपनाने की सीख देती है। वास्तविक मूल्य प्रदर्शन से नहीं, बल्कि सार और गुणवत्ता से तय होता है।
51. ना नीमन गीतिया गाइब, ना मड़वा में जाइब
Hinglish: Na Neeman Geetiya Gaib, Na Madwa Mein Jaib
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय ऐसे व्यक्ति से है जो न तो कोई अच्छा, उपयोगी या रचनात्मक कार्य करता है और न ही समाज के सामूहिक जीवन में भागीदारी निभाता है। ‘अच्छा गीत न गाना’ योग्यता, परिश्रम और प्रतिभा के अभाव का प्रतीक है, जबकि ‘मड़वा में न जाना’ सामाजिक संबंधों, मेल-जोल और जिम्मेदारियों से दूरी को दर्शाता है। ऐसे लोग न समाज में योगदान देते हैं और न ही दूसरों के सुख-दुःख में शामिल होते हैं। परिणामस्वरूप उनकी कोई पहचान, प्रतिष्ठा या पूछ-परख नहीं बनती। यह लोकोक्ति स्पष्ट संदेश देती है कि समाज में सम्मान केवल जन्म या दिखावे से नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी, सकारात्मक कर्म और सामाजिक जुड़ाव से मिलता है। निष्क्रिय जीवन व्यक्ति को धीरे-धीरे अप्रासंगिक बना देता है।
52. नाहीं चिन त नाया कीन
Hinglish: Nahin Chin Ta Naya Keen
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि यदि किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति की सही पहचान और परख न हो, तो नया विकल्प चुनना अधिक सुरक्षित और समझदारी भरा होता है। बिना ज्ञान या अनुभव के पुरानी, संदिग्ध या अपरिचित चीज़ अपनाने से नुकसान होने की संभावना रहती है। यह कहावत केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के निर्णयों, रिश्तों और अवसरों पर भी लागू होती है। जब व्यक्ति किसी विषय में पारखी नहीं होता, तब अनुमान और जोखिम के बजाय सुरक्षित मार्ग अपनाना बुद्धिमानी होती है। यह लोकोक्ति व्यावहारिक सोच, सावधानी और विवेक का संदेश देती है। हर बार सस्ता या पुराना विकल्प लाभकारी नहीं होता; कई बार स्पष्ट, भरोसेमंद और नया विकल्प ही दीर्घकालिक सुरक्षा और संतोष देता है।
53. निरबंस अच्छा लेकिन बहुबंस नाहीं अच्छा
Hinglish: Nirbans Achha Lekin Bahubans Nahin Achha
अर्थ: इस लोकोक्ति का गूढ़ अर्थ यह है कि संतान की संख्या से अधिक उसके गुण, संस्कार और आचरण महत्वपूर्ण होते हैं। यदि संतान सुशील, जिम्मेदार और नैतिक मूल्यों से युक्त हो, तो कम संख्या भी परिवार और समाज के लिए वरदान होती है। इसके विपरीत, यदि संतान अवगुणों, अनुशासनहीनता और अनैतिक प्रवृत्तियों से भरी हो, तो अधिक संख्या अभिशाप बन जाती है। यह लोकोक्ति गुणवत्ता बनाम मात्रा के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से सामने रखती है। समाज की अनेक समस्याएँ अशिक्षा, गलत पालन-पोषण और मूल्यहीन संस्कारों से जन्म लेती हैं। यह कहावत माता-पिता को यह संदेश देती है कि संतान का निर्माण केवल जन्म देने से नहीं, बल्कि सही संस्कार और जिम्मेदारी से होता है।
54. नीक रही करम, त का करीहें बरम
Hinglish: Neek Rahi Karam, Ta Ka Karihen Baram
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि यदि व्यक्ति के कर्म अच्छे, ईमानदार और नैतिक हों, तो किसी प्रकार के भ्रम, डर या अंधविश्वास का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अच्छे कर्म स्वयं व्यक्ति का सबसे बड़ा कवच होते हैं। जब इंसान अपने आचरण को लेकर संतुष्ट होता है, तब उसे भविष्य, भाग्य या किसी अनिष्ट की चिंता नहीं सताती। यह कहावत कर्मफल के सिद्धांत को गहराई से दर्शाती है। अंधविश्वास और डर प्रायः वहीं जन्म लेते हैं, जहाँ आत्मग्लानि या अनैतिकता होती है। यह लोकोक्ति व्यक्ति को सत्य, सदाचार और नैतिकता को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा देती है। अच्छे कर्म न केवल आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में विश्वास और सम्मान भी स्थापित करते हैं।
55. पड़लें राम कुकुर के पाले
Hinglish: Padlen Ram Kukur Ke Paale
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई भला, सीधा या प्रतिष्ठित व्यक्ति बुरी संगति में फँस जाता है। अच्छे स्वभाव वाला व्यक्ति भी यदि गलत लोगों के संपर्क में आ जाए, तो उसका चरित्र, व्यवहार और छवि प्रभावित हो जाती है। संगति का प्रभाव मनुष्य पर अत्यंत गहरा पड़ता है—विचार, भाषा और आचरण तक बदल जाते हैं। यह कहावत कुसंगति के खतरों के प्रति चेतावनी देती है। कई बार व्यक्ति स्वयं गलत नहीं होता, लेकिन गलत साथ उसे पतन की ओर ले जाता है। यह लोकोक्ति स्पष्ट संदेश देती है कि उन्नति और चरित्र की रक्षा के लिए सही संगति का चुनाव अत्यंत आवश्यक है। अच्छी संगति व्यक्ति को ऊँचा उठाती है, जबकि बुरी संगति उसका सर्वनाश कर सकती है।
56. परहित सरिस धरम नहिं भाई
Hinglish: Parhit Saris Dharam Nahin Bhai
अर्थ: इस लोकोक्ति का मूल भाव यह है कि दूसरों की भलाई से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। मनुष्य का जीवन केवल अपने स्वार्थ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें परोपकार, करुणा और सेवा की भावना होनी चाहिए। धार्मिक कर्मकांड, पूजा-पाठ या दान तभी सार्थक होते हैं जब उनका उद्देश्य समाज और मानवता का कल्याण हो। यह लोकोक्ति भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती है, जहाँ सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। दूसरों की सहायता करने से न केवल समाज मजबूत होता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर भी संतोष और आत्मिक शांति उत्पन्न होती है। यह कहावत व्यक्ति को स्वार्थ से ऊपर उठकर सोचने और मानवता के हित में कार्य करने की प्रेरणा देती है।
57. पहिले दिन पहुना, दूसरे दिन ठेहुना, तीसरे दिन केहुना
Hinglish: Pahile Din Pahuna, Doosre Din Thehuna, Teesre Din Kehuna
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि अतिथि या रिश्तेदार का सम्मान समय के साथ घटने लगता है यदि वह लंबे समय तक बिना आवश्यकता के ठहरा रहे। पहले दिन मेहमान का स्वागत पूरे आदर और प्रेम से होता है, दूसरे दिन औपचारिकता रह जाती है और तीसरे दिन वह बोझ लगने लगता है। यह कहावत सामाजिक व्यवहार और व्यावहारिक यथार्थ को दर्शाती है। इससे यह सीख मिलती है कि रिश्तों में संतुलन और मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। अतिथि को भी समझदारी दिखानी चाहिए और मेजबान की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। संबंधों की मधुरता तभी बनी रहती है जब दोनों पक्ष विवेकपूर्ण आचरण करें।
58. बैठल बनिया का करे, एह कोठी के धान ओह कोठी धरे
Hinglish: Baithal Baniya Ka Kare, Eh Kothi Ke Dhaan Oh Kothi Dhare
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि बिना उद्देश्य या आवश्यकता के किया गया कार्य निरर्थक होता है। जैसे बैठा हुआ बनिया एक कोठी का धान दूसरी कोठी में रखता रहता है, लेकिन उससे कोई वास्तविक लाभ नहीं होता। यह कहावत ऐसे कामों पर व्यंग्य करती है जो केवल समय और ऊर्जा की बर्बादी होते हैं। जीवन में कई लोग व्यस्त तो रहते हैं, पर उनका कार्य न तो उत्पादक होता है और न ही सार्थक। यह लोकोक्ति सिखाती है कि कार्य केवल करने के लिए नहीं, बल्कि परिणाम और उद्देश्य के साथ किया जाना चाहिए। सोच-समझकर किया गया कार्य ही प्रगति और संतोष देता है।
59. बड़-बड़ घोड़ा दहाइल जा अउरी गदहा पूछे केतना पानी
Hinglish: Bad-Bad Ghoda Dahail Ja Auri Gadaha Poochhe Ketna Paani
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जब बड़े, सक्षम और अनुभवी लोग किसी कठिन काम में लगे हों, तब छोटे या अयोग्य व्यक्ति का अनावश्यक हस्तक्षेप हास्यास्पद बन जाता है। यहाँ गधे द्वारा पानी पूछना उसके दुस्साहस और नासमझी को दर्शाता है। यह कहावत आत्ममूल्यांकन और मर्यादा की सीख देती है। हर व्यक्ति को अपनी योग्यता, सीमा और परिस्थिति को समझकर ही बोलना या आगे बढ़ना चाहिए। बिना समझे हस्तक्षेप करने से न केवल स्वयं की प्रतिष्ठा घटती है, बल्कि स्थिति और भी बिगड़ सकती है। यह लोकोक्ति विवेक, संयम और समयानुकूल आचरण का संदेश देती है।
60. बढ़े पूत पिता के धरमा, खेती उपजे अपने करमा
Hinglish: Badhe Poot Pita Ke Dharama, Kheti Upje Apne Karama
अर्थ: इस लोकोक्ति का गहरा अर्थ यह है कि पिता के अच्छे कर्म और प्रतिष्ठा से पुत्र को सामाजिक सम्मान और अवसर अवश्य मिल सकते हैं, लेकिन वास्तविक सफलता और फल केवल स्वयं के परिश्रम से ही प्राप्त होते हैं। खेत की उपज किसी के नाम या विरासत से नहीं, बल्कि मेहनत और देखभाल से होती है। यह कहावत कर्म की प्रधानता को स्पष्ट करती है। विरासत सहारा दे सकती है, पर स्थायी उन्नति आत्म-परिश्रम से ही संभव है। यह लोकोक्ति युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, मेहनत करने और अपने कर्मों पर विश्वास रखने की प्रेरणा देती है। समाज में वही व्यक्ति टिकाऊ सफलता प्राप्त करता है जो अपने प्रयासों से आगे बढ़ता है।
61. बिन मारे मुदई मरे, की खड़े ऊँख बिकाए, बिना दहेज के बर मिले तो तीनों काम बन जाए
Hinglish: Bin Maare Mudai Mare, Ki Khade Oonkh Bikaaye, Bina Dahej Ke Bar Mile To Teeno Kaam Ban Jaaye
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि जीवन में बिना प्रयास, बिना सही समय और बिना उचित साधनों के परिणाम प्राप्त नहीं होते। यहाँ तीन उदाहरण देकर यह समझाया गया है कि शत्रु का बिना संघर्ष के हार जाना, खड़ी फसल का अपने आप बिक जाना और बिना दहेज के अच्छा वर मिल जाना—ये सब केवल कल्पनाएँ हैं। वास्तविक जीवन में सफलता सहज नहीं मिलती। हर उपलब्धि के पीछे योजना, परिश्रम और अवसर की सही पहचान होती है। यह लोकोक्ति उन लोगों की मानसिकता पर व्यंग्य करती है जो बिना मेहनत के बड़े परिणाम की आशा रखते हैं। यह कहावत व्यक्ति को यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने, प्रयास करने और परिस्थितियों के अनुकूल साधन जुटाने की प्रेरणा देती है।
62. बुढ़ सुगा पोस ना मानेला
Hinglish: Budh Suga Posh Na Maanela
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति उम्र, आदत या अनुभव के कारण जड़ हो चुका हो, उसे नई सीख या अनुशासन स्वीकार कराना अत्यंत कठिन होता है। जैसे बूढ़ा तोता नई बोली नहीं सीख पाता, वैसे ही कुछ लोग समय के साथ अपने विचारों और व्यवहार में परिवर्तन नहीं करना चाहते। यह कहावत मानव स्वभाव की जड़ता और हठधर्मिता को दर्शाती है। जीवन में सीखने की प्रवृत्ति यदि समाप्त हो जाए, तो विकास रुक जाता है। यह लोकोक्ति यह भी सिखाती है कि सीखने की इच्छा उम्र से नहीं, मानसिकता से जुड़ी होती है। जो व्यक्ति खुले मन से सीखता है, वही समय के साथ प्रासंगिक और उपयोगी बना रहता है।
63. भर घरे देवर, भसुरे से मजाक
Hinglish: Bhar Ghare Devar, Bhasure Se Majaak
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति अपनी वास्तविक जिम्मेदारी या उचित स्थान को छोड़कर उल्टा और अनुचित व्यवहार करता है। जब घर में देवर मौजूद हो, तब भसुर से मजाक करना सामाजिक मर्यादा के विरुद्ध माना जाता है। यह कहावत संदर्भ, मर्यादा और प्राथमिकता के महत्व को दर्शाती है। जीवन में हर संबंध और परिस्थिति की अपनी सीमा और मर्यादा होती है। यदि व्यक्ति इन सीमाओं को न समझे, तो उसका व्यवहार अनुचित और हास्यास्पद बन जाता है। यह लोकोक्ति सामाजिक समझ, विवेक और सही प्राथमिकता तय करने की सीख देती है। उचित समय और उचित व्यक्ति के साथ व्यवहार करना ही समझदारी है।
64. भाग वाला के भूत हर जोतेला
Hinglish: Bhaag Wala Ke Bhoot Har Jotela
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि भाग्यवान व्यक्ति के लिए परिस्थितियाँ अपने आप अनुकूल हो जाती हैं। यहाँ तक कि जो कार्य सामान्यतः कठिन या असंभव प्रतीत होता है, वह भी सहज रूप से संपन्न हो जाता है। यह कहावत लोकमान्यता को दर्शाती है कि सौभाग्य व्यक्ति के मार्ग की बाधाओं को भी अवसर में बदल देता है। हालांकि यह भाग्य की भूमिका को स्वीकार करती है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संकेत देती है कि भाग्य उन्हीं का साथ देता है जो अवसर को पहचानते हैं। यह लोकोक्ति व्यक्ति को यह समझाती है कि सफलता में भाग्य और प्रयास—दोनों का योगदान होता है, और दोनों में संतुलन आवश्यक है।
65. भूखे भजन ना होइहें गोपाला, लेलीं आपन कंठी-माला
Hinglish: Bhookhe Bhajan Na Hoihen Gopala, Lelin Aapan Kanthi-Maala
अर्थ: इस लोकोक्ति का गहरा अर्थ यह है कि जब मनुष्य की मूल आवश्यकताएँ पूरी नहीं होतीं, तब उससे उच्च आदर्शों, धर्म या त्याग की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। भूखा व्यक्ति पहले भोजन चाहता है, भजन नहीं। यह कहावत जीवन की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है। आध्यात्मिकता, नैतिकता और साधना तभी संभव है जब शारीरिक आवश्यकताएँ पूरी हों। समाज में गरीबी और अभाव के बीच उपदेश देना निष्प्रभावी होता है। यह लोकोक्ति नीति-निर्माण और सामाजिक सोच के लिए भी महत्वपूर्ण है—पहले जीवन की बुनियादी जरूरतें, फिर आदर्श। मानव व्यवहार को समझने में यह कहावत अत्यंत यथार्थवादी दृष्टि प्रदान करती है।
66. भैंस के आगे बीन बजाए, भैंस खड़ी पगुराय
Hinglish: Bhains Ke Aage Been Bajaaye, Bhains Khadi Paguraay
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि जो व्यक्ति समझने या सीखने की क्षमता ही नहीं रखता, उसे उपदेश देना या शिक्षा देना व्यर्थ होता है। जैसे भैंस के सामने बीन बजाने से उसे संगीत का कोई आनंद नहीं मिलता और वह अपने ही काम में लगी रहती है, वैसे ही मूर्ख या अज्ञान व्यक्ति ज्ञान की बातों को ग्रहण नहीं करता। यह कहावत शिक्षा, सलाह और संवाद की प्रभावशीलता पर प्रकाश डालती है। हर व्यक्ति के लिए एक ही प्रकार का उपदेश उपयोगी नहीं होता। यह लोकोक्ति यह सिखाती है कि समय, व्यक्ति और परिस्थिति को समझकर ही ज्ञान देना चाहिए। अन्यथा ज्ञान देने वाला अपनी ऊर्जा व्यर्थ करता है और अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।
67. भोज गड़ी कोहड़ा
Hinglish: Bhoj Gadi Kohda
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जिस कार्य की तैयारी समय रहते नहीं की जाती, वह अंतिम समय पर अव्यवस्थित और निरर्थक हो जाता है। भोज के समय कोहड़ा बोने का कोई अर्थ नहीं, क्योंकि तब उसका कोई उपयोग नहीं होगा। यह कहावत समय प्रबंधन और पूर्व-योजना के महत्व को दर्शाती है। जीवन में हर कार्य के लिए एक उपयुक्त समय होता है। यदि सही समय निकल जाए, तो प्रयास भी निष्फल हो सकता है। यह लोकोक्ति बताती है कि आलस्य, टालमटोल और असावधानी व्यक्ति को असफलता की ओर ले जाती है। सफलता के लिए आवश्यक है कि काम समय पर और सोच-समझकर किया जाए।
68. भोला गइलें टोला प, खेत भइल बटोहिया, भोला बो के लइका भइल ले गइल सिपहिया
Hinglish: Bhola Gaila Tola Pa, Khet Bhail Batohiya, Bhola Bo Ke Laika Bhail Le Gaila Sipahiya
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो न तो अपने घर का रहा और न ही बाहर कहीं स्थिर हो पाया। भोला के गाँव छोड़ने से उसका खेत पराया हो गया और उसका बेटा भी सैनिक बनकर चला गया। यह कहावत जीवन में अस्थिरता, भटकाव और पहचान खो देने की स्थिति को दर्शाती है। जब व्यक्ति अपनी जड़ों से कट जाता है और कहीं ठहराव नहीं बना पाता, तो उसका जीवन दिशाहीन हो जाता है। यह लोकोक्ति स्थायित्व, जिम्मेदारी और सही निर्णय के महत्व को रेखांकित करती है। जीवन में संतुलन और स्पष्ट उद्देश्य न हो, तो व्यक्ति ‘ना घर का, ना घाट का’ बन जाता है।
69. मँगनी के चनन, घिसें रघुनंनन
Hinglish: Mangani Ke Chanan, Ghisen Raghunandan
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि जो वस्तु मुफ्त या उधार में मिलती है, उसका लोग अक्सर दुरुपयोग करते हैं। जब वस्तु अपनी न हो, तो उसके मूल्य और सीमाओं का ध्यान नहीं रखा जाता। यह कहावत मानव स्वभाव की उस कमजोरी को दर्शाती है जिसमें व्यक्ति दूसरों की चीज़ों का उतना सम्मान नहीं करता जितना अपनी वस्तुओं का। समाज में सार्वजनिक संपत्ति या उधार की वस्तुओं के साथ लापरवाही इसी मानसिकता का परिणाम है। यह लोकोक्ति जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और नैतिकता की सीख देती है। किसी भी वस्तु का उपयोग करते समय यह समझना चाहिए कि उसका स्वामी कोई और है और उसका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी भी है।
70. मंगनी के बैल के दांत ना गिनाये
Hinglish: Mangani Ke Bail Ke Daant Na Ginaaye
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो वस्तु बिना मूल्य या उपहार में मिली हो, उसकी अधिक आलोचना या तुलना नहीं करनी चाहिए। बैल के दांत गिनना उसकी उम्र और कीमत जाँचने का तरीका है, लेकिन जब बैल मुफ्त मिला हो, तो यह व्यवहार अनुचित माना जाता है। यह कहावत संतोष और कृतज्ञता का संदेश देती है। जीवन में जो सहायता, अवसर या वस्तु निःस्वार्थ रूप से मिले, उसके प्रति आभार प्रकट करना चाहिए, न कि दोष ढूँढना। यह लोकोक्ति व्यक्ति को लालच, अतिसमीक्षा और असंतोष से बचने की सीख देती है। कृतज्ञता संबंधों को मजबूत बनाती है और जीवन में संतुलन बनाए रखती है।
71. मन चंगा तो कठौती में गंगा
Hinglish: Man Changa To Kathauti Mein Ganga
अर्थ: इस लोकोक्ति का गहरा भाव यह है कि पवित्रता किसी बाहरी स्थान, वस्तु या धार्मिक कर्मकांड पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मन की शुद्धता पर निर्भर करती है। यदि मन साफ, ईमानदार और सद्भाव से भरा हुआ हो, तो साधारण-से-साधारण स्थान भी पवित्र अनुभव होता है। गंगा जैसे पवित्र तीर्थ का महत्व तब ही है, जब श्रद्धा और शुद्ध भावना हो। यह लोकोक्ति आडंबरपूर्ण धार्मिकता पर प्रश्न उठाती है और आंतरिक नैतिकता को सर्वोपरि मानती है। जीवन में यदि व्यक्ति का मन छल, द्वेष और अहंकार से मुक्त है, तो उसका हर कर्म धर्म के समान हो जाता है। यह कहावत आत्मशुद्धि, नैतिक आचरण और सच्ची भक्ति का संदेश देती है, जहाँ मन ही सबसे बड़ा तीर्थ माना गया है।
72. मन मोरा चंचल, जिअरा उदास, मन मोरा बसे इयरवा के पास
Hinglish: Man Mora Chanchal, Jiyara Udaas, Man Mora Base Iyarwa Ke Paas
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव मन की अस्थिरता और भावनात्मक विचलन को दर्शाता है। व्यक्ति का मन बार-बार भटकता है, किसी एक कार्य में स्थिर नहीं हो पाता और भीतर उदासी बनी रहती है। मन किसी प्रिय व्यक्ति, स्मृति या कल्पना में उलझा रहता है, जिससे वर्तमान कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता। यह कहावत मानवीय मन की जटिलता को उजागर करती है, जहाँ भावनाएँ तर्क पर हावी हो जाती हैं। पढ़ाई, काम या जिम्मेदारी के समय यदि मन किसी और जगह अटका रहे, तो कार्य निष्प्रभावी हो जाता है। यह लोकोक्ति आत्मनियंत्रण, एकाग्रता और मानसिक संतुलन के महत्व को समझाती है। मन को साधे बिना स्थायी सफलता और संतोष संभव नहीं है।
73. मानS तS देव नाहीं तS पत्थर
Hinglish: Maan Ta Dev, Nahin Ta Patthar
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि विश्वास ही किसी वस्तु, व्यक्ति या प्रतीक को महत्व देता है। यदि आस्था हो, तो साधारण मूर्ति भी देवता बन जाती है और यदि विश्वास न हो, तो वही देवता केवल पत्थर प्रतीत होता है। यह कहावत आस्था की शक्ति को दर्शाती है। जीवन में भी किसी लक्ष्य, व्यक्ति या विचार पर विश्वास हो, तभी वह प्रेरणा और दिशा देता है। बिना विश्वास के प्रयास निष्क्रिय हो जाते हैं। यह लोकोक्ति यह भी सिखाती है कि अंधविश्वास और विश्वास में अंतर समझना आवश्यक है—सच्चा विश्वास विवेक और श्रद्धा से जुड़ा होता है। जीवन में सफलता, भक्ति और संबंध—सब विश्वास के आधार पर ही टिके रहते हैं।
74. रहे के ठेकान ना पंड़ाइन मांगस डेरा
Hinglish: Rahe Ke Thekan Na, Pandain Maangas Dera
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव असमर्थता और निर्भरता को दर्शाता है। जिसका स्वयं का ठिकाना नहीं है, वह दूसरों से आश्रय माँगता फिरता है। यह कहावत उस स्थिति को दिखाती है जहाँ व्यक्ति आत्मनिर्भर न होकर हमेशा दूसरों पर निर्भर रहता है। जीवन में स्थायित्व और सम्मान तभी मिलता है जब व्यक्ति अपने साधनों, क्षमताओं और निर्णयों के बल पर खड़ा हो। जो व्यक्ति स्वयं कोई व्यवस्था नहीं बना पाता, वह बार-बार दूसरों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर होता है। यह लोकोक्ति आत्मनिर्भरता, परिश्रम और दीर्घकालिक योजना के महत्व को समझाती है। बिना आत्मसहायता के न तो स्थिरता मिलती है और न ही सामाजिक सम्मान।
75. रामजी के चिरईं, रामजी के खेत, खाले चिरईं भर-भर पेट
Hinglish: Ramji Ke Chirai, Ramji Ke Khet, Khaale Chirai Bhar-Bhar Pet
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति अपना धन या संसाधन स्वयं अर्जित करता है, उसे उसका उपभोग करने का पूरा अधिकार होता है। जैसे रामजी की चिड़िया रामजी के खेत से भरपेट खाती है, वैसे ही अपने परिश्रम से कमाए गए धन पर ऐश करना अनुचित नहीं है। यह कहावत स्वामित्व और अधिकार के सिद्धांत को दर्शाती है। समाज में कई बार लोग दूसरों के वैध सुख पर भी आपत्ति जताते हैं, जबकि यह व्यक्ति का निजी विषय होता है। यह लोकोक्ति यह भी सिखाती है कि मेहनत से अर्जित संसाधनों का विवेकपूर्ण उपभोग गलत नहीं, बल्कि स्वाभाविक है। अपने कर्मफल का आनंद लेना आत्मसम्मान का हिस्सा है।
76. लईकन के संग बाजे मृदंग, बुढ़वन के संग खर्ची के दंग
Hinglish: Laikan Ke Sang Baaje Mridang, Budhwan Ke Sang Kharchi Ke Dang
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि व्यक्ति को समय, अवस्था और परिस्थिति के अनुसार अपना व्यवहार बदलना चाहिए। बच्चों के साथ खेलकूद, संगीत और आनंद का वातावरण उपयुक्त होता है, जबकि बुज़ुर्गों के साथ व्यवहार में संयम, जिम्मेदारी और खर्च का ध्यान आवश्यक होता है। यह कहावत “जब जैसा तब तैसा” के सिद्धांत को स्पष्ट करती है। जीवन में हर व्यक्ति और हर परिस्थिति एक जैसी नहीं होती। यदि व्यक्ति हर जगह एक ही प्रकार का व्यवहार करे, तो वह असंगत और अव्यवहारिक माना जाता है। यह लोकोक्ति सामाजिक समझ, संवेदनशीलता और व्यवहारिक बुद्धि का संदेश देती है। सही समय पर सही आचरण ही व्यक्ति को सम्मान और स्वीकार्यता दिलाता है। परिस्थितियों के अनुरूप ढलना ही सामाजिक जीवन की कुंजी है।
77. लादल बैला लादल जाय, हुंछका बैला कोहरत जाय
Hinglish: Laadal Baila Laadal Jaay, Hunchka Baila Koharat Jaay
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि मेहनत का सही उपयोग होने पर ही उसका फल मिलता है। जिस बैल पर सही ढंग से बोझ लादा जाता है, वह आराम से काम करता है, जबकि जिस पर बोझ असंतुलित या गलत ढंग से डाला जाए, वह परेशान होता है। यह कहावत बताती है कि केवल मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मेहनत की दिशा और पद्धति भी सही होनी चाहिए। जीवन में कई लोग बहुत परिश्रम करते हैं, लेकिन गलत योजना या अव्यवस्थित प्रयास के कारण उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। यह लोकोक्ति बुद्धिमत्ता, योजना और संतुलन के महत्व को रेखांकित करती है। सही ढंग से किया गया श्रम ही स्थायी लाभ और संतोष देता है।
78. सबकुछ खइनी दुगो भुजा ना चबइनी
Hinglish: Sabkuch Khaini Dugo Bhuja Na Chabaini
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि आवश्यकता पूरी हो जाने के बाद भी व्यक्ति की लालसा समाप्त नहीं होती। सब कुछ खाने के बाद भी मन करता है कि शायद कुछ और मिल जाए। यह मानव स्वभाव की असंतोषी प्रवृत्ति को दर्शाती है। कई बार व्यक्ति पर्याप्त साधन, भोजन या सुख होने के बावजूद संतुष्ट नहीं रहता और और अधिक पाने की कोशिश करता है। यह कहावत लोभ और अतृप्ति की ओर संकेत करती है। यह सिखाती है कि असंतोष व्यक्ति को कभी सुखी नहीं होने देता। संतोष और संयम ही मानसिक शांति का आधार हैं। यदि व्यक्ति अपनी सीमाओं को समझे और उपलब्ध संसाधनों में संतुष्ट रहना सीखे, तो उसका जीवन अधिक संतुलित और शांत बन सकता है।
79. ससुर के परान जाए, पतोह करे काजर
Hinglish: Sasur Ke Paran Jaaye, Patoh Kare Kaajar
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग निष्ठुरता और संवेदनहीनता को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसका अर्थ है कि किसी के जीवन या गंभीर संकट की परवाह किए बिना दूसरा व्यक्ति अपने सौंदर्य या स्वार्थ में लगा रहता है। जब ससुर की जान जा रही हो और बहू काजल लगाने में व्यस्त हो, तो यह अत्यंत कठोर और अमानवीय व्यवहार माना जाता है। यह कहावत मानवीय संवेदनाओं के अभाव पर तीखा व्यंग्य करती है। समाज में कई बार लोग दूसरों के दुःख, पीड़ा या संकट को नजरअंदाज कर देते हैं और केवल अपने हित को प्राथमिकता देते हैं। यह लोकोक्ति करुणा, सहानुभूति और नैतिक जिम्मेदारी का महत्व समझाती है।
80. हड़बड़ी के बिआह, कनपटीये सेनुर
Hinglish: Hadbadi Ke Biaah, Kanpatiye Senur
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जल्दबाजी में किया गया कार्य अक्सर बिगड़ जाता है। विवाह जैसे गंभीर कार्य को यदि बिना सोच-विचार और तैयारी के किया जाए, तो परिणाम अव्यवस्थित और त्रुटिपूर्ण हो सकता है। ‘कनपटी पर सिन्दूर’ अव्यवस्था और अनुचित प्रक्रिया का प्रतीक है। यह कहावत जीवन के हर क्षेत्र पर लागू होती है—पढ़ाई, नौकरी, व्यवसाय या संबंध। जल्दबाजी में लिए गए निर्णय बाद में पछतावे का कारण बनते हैं। यह लोकोक्ति धैर्य, योजना और सोच-समझकर निर्णय लेने की सीख देती है। सही समय लेकर, सभी पहलुओं पर विचार करके किया गया कार्य ही सफल और स्थायी होता है।
81. हथिया-हथिया कइलन गदहो ना ले अइलन
Hinglish: Hathiya-Hathiya Kailan, Gadaho Na Le Ailan
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि नाम, प्रचार या दिखावा बहुत बड़ा हो, लेकिन वास्तविक परिणाम अत्यंत छोटा या नगण्य हो। ‘हथिया-हथिया’ कहकर बड़ा काम करने का शोर मचाया गया, लेकिन अंत में गधा तक नहीं लाया जा सका। यह कहावत उन व्यक्तियों, योजनाओं या कार्यों पर व्यंग्य करती है जिनका प्रचार तो बहुत होता है, पर धरातल पर कोई ठोस उपलब्धि नहीं दिखती। समाज, राजनीति और प्रशासन में ऐसी स्थितियाँ अक्सर देखने को मिलती हैं, जहाँ बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन परिणाम निराशाजनक होते हैं। यह लोकोक्ति यह सिखाती है कि किसी भी कार्य का मूल्यांकन उसके नाम या प्रचार से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणाम से किया जाना चाहिए। दिखावे से नहीं, कर्म से पहचान बनती है।
82. हरिकल मानेला परिकल नाहीं मानेला
Hinglish: Harikal Maanela, Parikal Nahin Maanela
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति या वस्तु स्वभाव से सरल और लचीली होती है, उसे समझाया और सुधारा जा सकता है, लेकिन जो व्यक्ति हठी, अहंकारी या जिद्दी होता है, वह किसी भी तर्क या समझाइश को स्वीकार नहीं करता। खेत यदि खरपतवार से भर जाए, तो मेहनत और धैर्य से उसे सुधारा जा सकता है, लेकिन ‘परिकल’ यानी जिद्दी व्यक्ति अपनी गलती मानने को तैयार नहीं होता। यह कहावत मानव स्वभाव की कठोरता पर प्रकाश डालती है। जीवन में समस्या व्यक्ति नहीं, बल्कि उसकी जिद बन जाती है। यह लोकोक्ति हमें विनम्र, लचीला और सीखने के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देती है, क्योंकि सुधार वही कर सकता है जो मानने को तैयार हो।
83. हंसुआ के बिआह, खुरपी के गीत
Hinglish: Hansua Ke Biaah, Khurpi Ke Geet
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग ऐसी बातों या गतिविधियों के लिए किया जाता है जिनका कोई अर्थ, उद्देश्य या आपसी संबंध नहीं होता। हँसुए का विवाह और खुरपी का गीत—दोनों ही असंगत और बेमेल कल्पनाएँ हैं। यह कहावत निरर्थक बातचीत, अनावश्यक योजनाओं या असंबंधित चर्चाओं पर व्यंग्य करती है। समाज में कई बार लोग ऐसी बातों में समय नष्ट करते हैं जिनका न तो कोई परिणाम होता है और न ही कोई उपयोगिता। यह लोकोक्ति व्यक्ति को यह सीख देती है कि समय और ऊर्जा को सार्थक, उद्देश्यपूर्ण और व्यवहारिक कार्यों में लगाना चाहिए। बेमतलब की बातों से न तो समस्या हल होती है और न ही प्रगति होती है।
84. हाथे में पइसा रहेला तब बुधियो काम करेले
Hinglish: Haathe Mein Paisa Rahela Tab Budhiyo Kaam Karele
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जब व्यक्ति के पास धन या साधन होते हैं, तब उसकी बुद्धि अधिक सक्रिय और प्रभावी हो जाती है। आर्थिक संसाधन होने से विकल्प बढ़ जाते हैं और निर्णय लेना आसान हो जाता है। यह कहावत यह भी दर्शाती है कि कई बार बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन केवल अवसर और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। गरीबी और अभाव में व्यक्ति की सोच सीमित हो जाती है, जबकि साधन मिलने पर वही व्यक्ति समाधान खोजने लगता है। यह लोकोक्ति सामाजिक और आर्थिक यथार्थ को उजागर करती है कि धन केवल सुविधा नहीं, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ाता है। हालांकि यह भी संकेत मिलता है कि बुद्धि का सही उपयोग तभी सार्थक है जब वह नैतिकता के साथ जुड़ी हो।
85. होता घीवढारी आ सराध के मंतर
Hinglish: Hota Ghee-Dhari Aur Shradh Ke Mantar
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग ऐसे कार्यों के लिए किया जाता है जो परिस्थिति के बिल्कुल विपरीत हों या जिनका कोई तार्किक मेल न बैठता हो। घी खाना आनंद और सुख का प्रतीक है, जबकि श्राद्ध के मंत्र शोक और संयम से जुड़े होते हैं। दोनों का एक साथ होना असंगत और अनुचित माना जाता है। यह कहावत उन लोगों पर लागू होती है जो समय, स्थान और परिस्थिति की समझ के बिना उल्टा आचरण करते हैं। यह लोकोक्ति व्यवहारिक बुद्धि और सामाजिक मर्यादा का महत्व बताती है। हर कार्य का एक उचित संदर्भ होता है, और यदि उस संदर्भ की अनदेखी की जाए, तो व्यक्ति हास्यास्पद या असंवेदनशील बन जाता है।
86. जुड़ै मियाँ के माँड नैय, माँगय मियाँ ताड़ी
Hinglish: Jurai Miyan Ke Maand Naiy, Maangay Miyan Taadi
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति की हैसियत और सामर्थ्य कुछ और हो, लेकिन उसकी माँगें उससे कहीं अधिक बड़ी हों। यहाँ ‘माँड’ साधारण भोजन का प्रतीक है और ‘ताड़ी’ विलास या ऊँचे शौक का। यह कहावत उन लोगों पर व्यंग्य करती है जो बिना योग्यता, साधन या परिश्रम के बड़े सुख-सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। समाज में ऐसे लोग अक्सर दूसरों से अनुचित अपेक्षाएँ करते हैं और अपनी सीमाओं को समझना नहीं चाहते। यह लोकोक्ति आत्ममूल्यांकन, यथार्थबोध और संतुलित अपेक्षाओं का संदेश देती है। व्यक्ति को अपनी स्थिति के अनुरूप आकांक्षाएँ रखनी चाहिए और उन्नति के लिए पहले क्षमता विकसित करनी चाहिए। बिना आधार के बड़ी माँगें अंततः निराशा और असंतोष ही देती हैं।
87. खस्सी के जान जाय, खवैया के स्वादे नैय
Hinglish: Khassi Ke Jaan Jaay, Khavaiya Ke Swaade Naiy
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि किसी का बड़ा त्याग या बलिदान व्यर्थ चला जाना, जब उससे किसी को वास्तविक लाभ या संतोष न मिले। यहाँ बकरी की जान जाना एक बड़े नुकसान का प्रतीक है, जबकि खाने वाले को स्वाद न मिलना उस बलिदान की निष्फलता को दर्शाता है। यह कहावत जीवन की उन स्थितियों पर लागू होती है जहाँ कोई व्यक्ति अत्यधिक परिश्रम, त्याग या कष्ट सहता है, लेकिन परिणाम न तो सार्थक होता है और न ही अपेक्षित। यह लोकोक्ति विवेकपूर्ण निर्णय और सही उद्देश्य के महत्व को रेखांकित करती है। बलिदान तभी सार्थक है जब उसका परिणाम सकारात्मक और उपयोगी हो। बिना उद्देश्य या समझ के किया गया त्याग केवल पीड़ा बढ़ाता है, सम्मान या लाभ नहीं।
88. कानय के मोन छल त आईंख में गरल खुट्टी
Hinglish: Kaanay Ke Mon Chhal Ta Aankh Mein Garal Khutti
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग उस स्थिति के लिए किया जाता है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर बहाना बनाकर रोता या दुखी होने का नाटक करता है। जैसे रोने का मन हो तो आँख में कुछ डालकर आँसू निकाल लिए जाएँ। यह कहावत बनावटी दुःख, दिखावटी पीड़ा और छलपूर्ण भावनाओं पर व्यंग्य करती है। समाज में कई लोग सहानुभूति, ध्यान या लाभ पाने के लिए अपनी तकलीफ को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। यह लोकोक्ति सच्चे और नकली भावों के अंतर को समझने की सीख देती है। वास्तविक दुःख को नाटक की आवश्यकता नहीं होती, वह स्वयं प्रकट हो जाता है। यह कहावत ईमानदारी, भावनात्मक सच्चाई और आत्मसम्मान का महत्व समझाती है।
89. अनकर धान पाबि त अस्सी मन तौलाबी
Hinglish: Ankar Dhaan Paabi Ta Assi Man Taulabi
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि दूसरों की वस्तु या संपत्ति को लोग अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। जब चीज़ अपनी न हो, तो उसका मूल्य, मात्रा या महत्व अतिरंजित कर दिया जाता है। यह कहावत मानव स्वभाव की उस प्रवृत्ति को उजागर करती है जिसमें व्यक्ति दूसरों की चीज़ को लेकर लालच या ईर्ष्या से ग्रस्त हो जाता है। समाज में यह व्यवहार अफवाहों, झूठी प्रशंसा या गलत तुलना का कारण बनता है। यह लोकोक्ति संतुलित दृष्टिकोण और सत्यनिष्ठा का संदेश देती है। किसी भी वस्तु या उपलब्धि का मूल्यांकन तथ्य और वास्तविकता के आधार पर होना चाहिए, न कि स्वार्थ या कल्पना के आधार पर। अतिशयोक्ति से भ्रम पैदा होता है और संबंधों में कटुता आती है।
90. माय बाप बिसैर गेलौं त बहू भेल फैमिली
Hinglish: Maai Baap Bisair Gailon Ta Bahu Bhel Family
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि स्वार्थ के कारण व्यक्ति अपने पुराने, सच्चे और मूल संबंधों को भुलाकर नए रिश्तों को प्राथमिकता देने लगता है। माता-पिता जैसे आधारभूत संबंधों को भूल जाना और सुविधा के अनुसार नए रिश्तों को ‘परिवार’ मान लेना स्वार्थी मानसिकता को दर्शाता है। यह कहावत बदलते सामाजिक मूल्यों और अवसरवादी रिश्तों पर तीखा व्यंग्य करती है। जीवन में रिश्तों की वास्तविक परीक्षा कठिन समय में होती है, न कि सुविधा में। यह लोकोक्ति कृतज्ञता, पारिवारिक मूल्यों और नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाती है। जो व्यक्ति अपने मूल संबंधों को भूल जाता है, वह अंततः भावनात्मक रूप से खाली हो जाता है। सच्चे रिश्ते स्वार्थ से नहीं, कर्तव्य और सम्मान से निभाए जाते हैं।
91. माय बाप करे कुटान पिसान, बेटा के नाम दुर्गा दत्त
Hinglish: Maai Baap Kare Kutan Pisan, Beta Ke Naam Durga Datt
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि वास्तविक स्थिति कुछ और हो, लेकिन बाहरी दिखावा बहुत बड़ा हो। माता-पिता गरीबी, मेहनत और संघर्ष में जीवन गुजार रहे हैं, लेकिन बेटे का नाम ‘दुर्गा दत्त’ जैसे भव्य और प्रतिष्ठित नाम पर रखा गया है। यह कहावत समाज में दिखावटी मानसिकता पर तीखा व्यंग्य करती है, जहाँ लोग अपनी आर्थिक या सामाजिक स्थिति से अधिक ऊँचा दिखने का प्रयास करते हैं। नाम, उपाधि या बाहरी पहचान से वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। यह लोकोक्ति सिखाती है कि सम्मान और प्रतिष्ठा नाम से नहीं, बल्कि कर्म, व्यवहार और परिश्रम से प्राप्त होती है। दिखावे पर आधारित पहचान लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती और अंततः वास्तविकता सामने आ ही जाती है।
92. करनी ने धरनी आ सुवर्णी नाम
Hinglish: Karni Na Dharni Aa Suvarni Naam
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति के पास न तो कोई ठोस कार्य होता है और न ही कोई जिम्मेदारी निभाने का भाव, लेकिन उसका नाम या प्रचार बहुत बड़ा होता है। यह कहावत ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ जैसी स्थिति को दर्शाती है। समाज में ऐसे लोग अक्सर केवल बातों, पदों या उपाधियों के सहारे अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, जबकि उनके कर्म शून्य होते हैं। यह लोकोक्ति कर्म की प्रधानता को रेखांकित करती है। बिना कर्म के नाम का कोई मूल्य नहीं होता। वास्तविक सम्मान और विश्वास केवल कार्य, निष्ठा और योगदान से मिलता है। यह कहावत व्यक्ति को आत्ममूल्यांकन करने और दिखावे के बजाय वास्तविक कर्म पर ध्यान देने की सीख देती है।
93. काइंख तरि अँचार आ देखाबय पोथी के बिचार
Hinglish: Kaainkh Tari Aachar Aa Dekhaabay Pothi Ke Bichaar
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव कथनी और करनी के बीच के अंतर को उजागर करता है। व्यक्ति स्वयं तो साधारण या निम्न स्तर का आचरण करता है, लेकिन दूसरों को बड़े-बड़े सिद्धांत, ग्रंथों और आदर्शों की बातें सुनाता है। ‘आँख के नीचे अचार’ से तात्पर्य वास्तविक जीवन की गंदगी या अव्यवस्था से है, जबकि ‘पोथी के विचार’ ऊँचे आदर्शों का प्रतीक हैं। यह कहावत पाखंड और दोहरे आचरण पर तीखा व्यंग्य करती है। समाज में ऐसे लोग अक्सर नैतिकता का उपदेश देते हैं, लेकिन स्वयं उसका पालन नहीं करते। यह लोकोक्ति सिखाती है कि उपदेश तभी प्रभावी होता है जब वह आचरण में भी दिखाई दे।
94. जेकर माय मरल तेक्कर पत्ता पर भाते नै
Hinglish: Jekar Maai Maral Tekk ar Patta Par Bhaate Nai
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह बेसहारा हो गया हो। माँ के न रहने पर व्यक्ति की देखभाल, सुरक्षा और भावनात्मक सहारा समाप्त हो जाता है। यह कहावत माँ के महत्व और उसकी अनुपस्थिति में उत्पन्न असहायता को गहराई से दर्शाती है। समाज में माँ केवल संबंध नहीं, बल्कि संरक्षण और करुणा की प्रतीक होती है। जब यह आधार टूट जाता है, तो व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों में अकेला पड़ जाता है। यह लोकोक्ति मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है और पारिवारिक सहारे के महत्व को रेखांकित करती है। यह हमें याद दिलाती है कि कमजोर और बेसहारा लोगों के प्रति समाज की जिम्मेदारी अधिक होती है।
95. करनी देखियौन मरनी बेर
Hinglish: Karni Dekhiyoun Marni Ber
अर्थ: इस लोकोक्ति का गहरा अर्थ यह है कि जीवन के अंत में व्यक्ति के साथ केवल उसके कर्म ही जाते हैं। धन, पद, रिश्ते और दिखावा—सब यहीं रह जाते हैं। मृत्यु के समय व्यक्ति का मूल्यांकन उसके कर्मों के आधार पर होता है, न कि उसकी संपत्ति या प्रसिद्धि के आधार पर। यह कहावत कर्मफल के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से सामने रखती है। जीवन भर किए गए अच्छे या बुरे कार्य ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान बनते हैं। यह लोकोक्ति व्यक्ति को यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि जीवन का प्रत्येक कार्य महत्व रखता है। इसलिए सदाचार, ईमानदारी और मानवता के साथ किया गया कर्म ही अंततः सार्थक होता है।
96. जेत्ते के बहु नै ओत्ते के लहठी
Hinglish: Jette Ke Bahu Nai, Otte Ke Laathi
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यवस्था, साधन और संसाधन उतने ही होने चाहिए जितनी वास्तविक आवश्यकता हो। यदि जरूरत सीमित है, तो उसके लिए अत्यधिक तैयारी या साधन जुटाना न तो व्यावहारिक है और न ही बुद्धिमानी। यह कहावत संतुलन और मितव्ययिता का संदेश देती है। जीवन में कई बार लोग आवश्यकता से अधिक व्यवस्था कर लेते हैं, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है और बाद में समस्याएँ भी खड़ी हो जाती हैं। यह लोकोक्ति बताती है कि योजनाएँ वास्तविक जरूरतों के आधार पर बननी चाहिए, न कि दिखावे या अनावश्यक डर के कारण। संतुलित सोच व्यक्ति को न केवल आर्थिक रूप से सुरक्षित रखती है, बल्कि निर्णयों में भी स्पष्टता लाती है। आवश्यकता और व्यवस्था के बीच सामंजस्य ही विवेकपूर्ण जीवन का आधार है।
97. सरलो भुन्ना रोहू के दुन्ना
Hinglish: Saralo Bhunna Rohu Ke Dunna
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि कुछ लोग सरल और सीधी बातों को भी अनावश्यक रूप से जटिल बना देते हैं। साधारण रोहू मछली को भी भूनकर दुगना कठिन बना देना इस प्रवृत्ति का प्रतीक है। जीवन में कई समस्याएँ वास्तव में सीधी होती हैं, लेकिन व्यक्ति अपनी उलझी सोच, अहंकार या अनावश्यक चालाकी के कारण उन्हें कठिन बना लेता है। यह कहावत बताती है कि सरलता में ही समाधान छिपा होता है। अनावश्यक पेचीदगी न केवल समय और ऊर्जा नष्ट करती है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ाती है। यह लोकोक्ति व्यक्ति को सरल सोच अपनाने, समस्याओं को मूल रूप में समझने और व्यावहारिक समाधान खोजने की प्रेरणा देती है। जटिलता नहीं, स्पष्टता ही प्रगति का मार्ग खोलती है।
98. जे सब सौं छोट से उनचास हाथ
Hinglish: Je Sab Saun Chhot Se Unchaas Haath
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी वास्तविक स्थिति से थोड़ा-सा ऊपर दिखने या बनने की कोशिश करता है। यहाँ ‘उनचास हाथ’ का प्रयोग यह दर्शाने के लिए किया गया है कि छोटा होते हुए भी बड़ा दिखने की आकांक्षा बनी रहती है। यह कहावत मानवीय महत्वाकांक्षा और आत्म-प्रदर्शन की प्रवृत्ति को उजागर करती है। समाज में कई लोग अपनी सीमाओं को स्वीकार करने के बजाय स्वयं को बड़ा दिखाने का प्रयास करते हैं, जिससे वे अक्सर असहज और हास्यास्पद स्थिति में पड़ जाते हैं। यह लोकोक्ति आत्ममूल्यांकन और यथार्थबोध का संदेश देती है। वास्तविक उन्नति दिखावे से नहीं, बल्कि क्रमिक परिश्रम और क्षमता विकास से होती है।
99. देह पर नै लत्ता, आ चलय कलकत्ता
Hinglish: Deh Par Nai Latta, Aa Chalay Calcutta
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति के पास मूलभूत साधन तक नहीं हैं, लेकिन उसके सपने और योजनाएँ अत्यंत बड़े हैं। शरीर पर कपड़ा नहीं और कलकत्ता जैसे बड़े शहर जाने की तैयारी—यह स्थिति अव्यावहारिक महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। यह कहावत उन लोगों पर व्यंग्य करती है जो संसाधनों, तैयारी और क्षमता के बिना बड़े लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं। सपने देखना गलत नहीं है, लेकिन उन्हें साकार करने के लिए आवश्यक साधनों और परिश्रम की भी आवश्यकता होती है। यह लोकोक्ति यथार्थवाद, योजना और क्रमिक प्रगति का संदेश देती है। मजबूत आधार के बिना ऊँचे लक्ष्य केवल कल्पना बनकर रह जाते हैं।
100. अलखोसरी के दू टा फोसरी भेल, एक गो फुटि गेल, एक गो टहकै ये
Hinglish: Alkhosari Ke Du Ta Phosari Bhel, Ek Go Phuti Gel, Ek Go Tahkai Ye
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जो वस्तु या संरचना कमजोर होती है, वह जल्दी नष्ट हो जाती है या टूट-फूट का शिकार हो जाती है। कमजोर सामग्री से बनी चीज़ें अधिक समय तक टिक नहीं पातीं। यह कहावत केवल भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति, व्यवस्था और विचारों पर भी लागू होती है। यदि किसी कार्य या संबंध की नींव कमजोर हो, तो वह थोड़े से दबाव में ही टूट जाता है। यह लोकोक्ति मजबूती, गुणवत्ता और ठोस आधार के महत्व को रेखांकित करती है। स्थायित्व के लिए आवश्यक है कि नींव मजबूत हो—चाहे वह शिक्षा हो, चरित्र हो या व्यवस्था। कमजोर आधार पर खड़ी चीज़ें लंबे समय तक नहीं टिकतीं।
101. अधिका जोगी मठ के उजार
Hinglish: Adhika Jogi Math Ke Ujaar
अर्थ: इस लोकोक्ति का तात्पर्य है कि जब किसी कार्य में बहुत अधिक लोग बिना स्पष्ट जिम्मेदारी और समन्वय के जुड़ जाते हैं, तो वह कार्य सुधरने के बजाय बिगड़ जाता है। ‘जोगी’ यहाँ उन लोगों का प्रतीक है जो स्वयं को विशेषज्ञ मानते हैं और हर कोई अपने तरीके से काम करना चाहता है। मठ का उजड़ जाना यह दर्शाता है कि अनुशासन और नेतृत्व के अभाव में संसाधनों का दुरुपयोग होता है। प्रशासन, राजनीति, शिक्षा संस्थानों या किसी भी संगठन में यदि कार्य-विभाजन स्पष्ट न हो और हर व्यक्ति हस्तक्षेप करने लगे, तो व्यवस्था अव्यवस्थित हो जाती है। यह लोकोक्ति हमें सिखाती है कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए सीमित लेकिन योग्य लोगों का चयन, स्पष्ट नेतृत्व और उत्तरदायित्व आवश्यक है। भीड़ से नहीं, बल्कि सही दिशा और समन्वय से कार्य सफल होता है।
102. अभागा गइने ससुरारी अउरी उहवों माँड़े–भात
Hinglish: Abhaga Gaine Sasurari Auri Uhvon Maande-Bhaat
अर्थ: इस लोकोक्ति के माध्यम से अत्यधिक दुर्भाग्य की स्थिति को व्यक्त किया गया है। भारतीय समाज में ससुराल जाना सामान्यतः सम्मान, आतिथ्य और सुख-सुविधा से जोड़ा जाता है। लेकिन यदि वहाँ भी साधारण या निराशाजनक स्थिति मिले, तो व्यक्ति स्वयं को अत्यंत अभागा मानता है। ‘माँड़े-भात’ साधारण भोजन का प्रतीक है, जो अपेक्षाओं के विपरीत परिणाम को दर्शाता है। जीवन में कई बार व्यक्ति बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ किसी नए स्थान या संबंध में प्रवेश करता है, परंतु वास्तविकता अपेक्षा के अनुरूप नहीं होती। यह लोकोक्ति हमें यह सिखाती है कि केवल स्थान या संबंध बदलने से जीवन की समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं। वास्तविक परिवर्तन कर्म, परिश्रम और परिस्थितियों की समझ से ही संभव है।
103. आगे नाथ ना पीछे पगहा, खा मोटा के भइने गदहा
Hinglish: Aage Naath Na Peechhe Pagha, Kha Mota Ke Bhai Gadhha
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि जब किसी व्यक्ति के जीवन में न अनुशासन होता है और न ही मार्गदर्शन, तो वह गलत दिशा में चला जाता है। ‘नाथ’ और ‘पगहा’ पशु को नियंत्रित करने के साधन हैं। इनके अभाव में पशु मनमानी करता है और अंततः नुकसान उठाता है। इसी प्रकार, यदि मनुष्य के जीवन में नियम, नैतिकता और आत्मसंयम न हो, तो वह भोग-विलास, आलस्य और अविवेक में फँस जाता है। ‘खा मोटा के भइने गदहा’ यह दर्शाता है कि सुख-सुविधा में डूबकर व्यक्ति अपनी विवेकशीलता खो देता है। यह लोकोक्ति हमें अनुशासन, आत्मनियंत्रण और सही मार्गदर्शन के महत्व को समझाती है, जो जीवन को सही दिशा देने के लिए अनिवार्य हैं।
104. आपन पुतवा पुतवा ह अउरी सवतिया के पुतवा दूतवा ह
Hinglish: Aapan Putwa Putwa Ha Auri Savatiya Ke Putwa Dootwa Ha
अर्थ: यह लोकोक्ति मानवीय स्वार्थ और पक्षपात की प्रवृत्ति को उजागर करती है। व्यक्ति को अपना बच्चा अत्यंत प्रिय लगता है, जबकि वही गुण दूसरे के बच्चे में दिखाई दें तो वह उसे तुच्छ समझता है। यह प्रवृत्ति केवल पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज, राजनीति और प्रशासन में भी देखने को मिलती है। अपने हितों को प्राथमिकता देना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह न्याय और समानता को प्रभावित करने लगे, तो सामाजिक असंतुलन उत्पन्न होता है। यह लोकोक्ति हमें यह चेतावनी देती है कि यदि निर्णय केवल निजी स्वार्थ के आधार पर लिए जाएँगे, तो समाज में असमानता और असंतोष बढ़ेगा। इसलिए निष्पक्ष दृष्टि, समान व्यवहार और नैतिक मूल्यों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
105. इहे छउड़ी इहे गाँव, पूछे छउड़ी कवन गाँव
Hinglish: Ihe Chhaudi Ihe Gaon, Poochhe Chhaudi Kavan Gaon
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष और स्पष्ट सत्य को भी स्वीकार नहीं करता और अनावश्यक प्रश्न खड़े करता है। यहाँ ‘छउड़ी’ और ‘गाँव’ प्रत्यक्ष प्रमाण के प्रतीक हैं, फिर भी प्रश्न पूछना दिखावटी अज्ञान या टालमटोल को दर्शाता है। समाज और प्रशासन में कई बार लोग जानबूझकर सच्चाई से आँखें मूँद लेते हैं और भ्रम की स्थिति बनाए रखते हैं। यह व्यवहार समस्या के समाधान में बाधक बनता है। यह लोकोक्ति ऐसे लोगों पर व्यंग्य करती है और हमें स्पष्टता, ईमानदारी और साहस के साथ सत्य को स्वीकार करने की सीख देती है। समस्याओं से बचने के बजाय उनका सामना करना ही समाज और व्यक्ति दोनों के लिए हितकारी होता है।
106. एक मुट्ठी लाई, बरखा ओनिये बिलाई
Hinglish: Ek Mutthi Laai, Barkha Oniye Bilai
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि छोटी-सी लापरवाही या तुच्छ कारण भी बड़े कार्य को बिगाड़ सकता है। ‘एक मुट्ठी लाई’ परिश्रम और उम्मीद का प्रतीक है, जबकि ‘बरखा ओनिये बिलाई’ अचानक आई विपत्ति को दर्शाती है, जो पूरे प्रयास को व्यर्थ कर देती है। जीवन में कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति लंबे समय तक मेहनत करता है, लेकिन अंत में एक छोटी-सी चूक या अनपेक्षित घटना से सब कुछ बिगड़ जाता है। यह लोकोक्ति हमें सावधानी, सतर्कता और जोखिम प्रबंधन का महत्व समझाती है। पढ़ाई, नौकरी, खेती या व्यवसाय—हर क्षेत्र में अंत तक सावधान रहना आवश्यक है। केवल परिश्रम ही नहीं, बल्कि समय पर सही निर्णय और सुरक्षा उपाय भी जरूरी होते हैं। यह लोकोक्ति हमें यह भी सिखाती है कि सफलता नाजुक होती है, इसलिए उसे बनाए रखने के लिए निरंतर सजग रहना चाहिए।
107. एक हाथ के ककरी अउरी नौ हाथ के बिआ
Hinglish: Ek Haath Ke Kakri Auri Nau Haath Ke Biya
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि छोटे-से कारण को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करना या किसी बात को आवश्यकता से अधिक फैलाना। ‘एक हाथ की ककड़ी’ छोटी बात का प्रतीक है, जबकि ‘नौ हाथ की बीया’ अतिशयोक्ति को दर्शाती है। समाज में अक्सर देखा जाता है कि मामूली घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है, जिससे भ्रम, डर या विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। यह प्रवृत्ति अफवाहों, गपशप और गलत सूचनाओं को जन्म देती है। यह लोकोक्ति हमें संयमित भाषा और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सीख देती है। किसी भी घटना या समस्या का मूल्यांकन उसके वास्तविक स्वरूप में करना चाहिए, न कि उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना चाहिए। यह सामाजिक सद्भाव, समझदारी और विवेक को बढ़ावा देने वाली लोकोक्ति है।
108. ककरो बोरे–बोरे नून, ककरो रोटियो पर आफत
Hinglish: Kakro Bore-Bore Noon, Kakro Rotiyo Par Aafat
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि एक ही वस्तु या परिस्थिति किसी के लिए सुविधा हो सकती है, तो किसी और के लिए वही संकट बन जाती है। ‘नून’ यानी नमक किसी के लिए बोरे-बोरे उपलब्ध है, जबकि किसी और के लिए रोटी पर भी आफत है। यह सामाजिक-आर्थिक असमानता को उजागर करती है। समाज में संसाधनों का वितरण समान नहीं होता, जिसके कारण कुछ लोग अत्यधिक संपन्न होते हैं और कुछ बुनियादी आवश्यकताओं से भी वंचित रहते हैं। यह लोकोक्ति हमें संवेदनशीलता, सहानुभूति और सामाजिक न्याय की आवश्यकता का बोध कराती है। साथ ही यह चेतावनी भी देती है कि संपन्नता पर घमंड नहीं करना चाहिए और जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए।
109. काली माई करिया, भवानी माई गोर
Hinglish: Kaali Maai Kariya, Bhawani Maai Gor
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि रूप-रंग या बाहरी भिन्नता के बावजूद मूल तत्व एक ही होता है। काली और भवानी दोनों देवी हैं, केवल उनका स्वरूप अलग-अलग है। समाज में भी लोग अक्सर रंग, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव करते हैं, जबकि मूल रूप से सभी मनुष्य समान हैं। यह लोकोक्ति विविधता में एकता के सिद्धांत को दर्शाती है। यह हमें यह सिखाती है कि बाहरी अंतर के आधार पर किसी का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए। सच्चा सम्मान आंतरिक गुणों, आचरण और मानवीय मूल्यों से होता है। यह लोकोक्ति सामाजिक समरसता, सहिष्णुता और समानता का संदेश देती है।
110. केरा (केला), केकड़ा, बिछू, बाँस—इ चारो की जमले नाश
Hinglish: Kera (Kela), Kekda, Bichhu, Baans—Ee Chaaro Ki Jamle Naash
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि कुछ तत्व या परिस्थितियाँ जब एक साथ मिल जाती हैं, तो विनाशकारी परिणाम उत्पन्न होते हैं। केला, केकड़ा, बिच्छू और बाँस—ये चारों अलग-अलग ही परेशानी पैदा करते हैं, और यदि एक साथ हों तो स्थिति और बिगड़ जाती है। यह लोकोक्ति संगति के महत्व को दर्शाती है। गलत लोगों, बुरी आदतों या नकारात्मक परिस्थितियों का मेल व्यक्ति के जीवन को नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिए जीवन में सही संगति, सही वातावरण और सही चुनाव बहुत आवश्यक है। यह लोकोक्ति हमें सतर्क रहने और यह समझने की सीख देती है कि हर मेल लाभकारी नहीं होता; कुछ मेल विनाश का कारण भी बन सकते हैं।
111. घर के जोगी जोगड़ा, आन गाँव के सिद्ध
Hinglish: Ghar Ke Jogi Jogda, Aan Gaon Ke Siddh
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि अपने आसपास या अपने समाज में रहने वाले व्यक्ति की प्रतिभा और योग्यता को लोग अक्सर कम आँकते हैं, जबकि बाहर से आए व्यक्ति को अधिक सम्मान दिया जाता है। ‘घर के जोगी’ को साधारण समझना और ‘दूसरे गाँव के जोगी’ को सिद्ध मान लेना मानवीय मानसिकता को दर्शाता है। यह प्रवृत्ति समाज, कार्यालय, शिक्षा संस्थानों और प्रशासन में आमतौर पर देखने को मिलती है, जहाँ स्थानीय लोगों की क्षमता को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को महत्व दिया जाता है। यह लोकोक्ति हमें आत्ममूल्यांकन और निष्पक्ष दृष्टि अपनाने की सीख देती है। साथ ही यह चेतावनी भी देती है कि यदि हम अपने समाज के लोगों की योग्यता को पहचानने में असफल रहेंगे, तो प्रतिभा का सही उपयोग नहीं हो पाएगा।
112. जइसन माई ओइसन धिया, जइसन काकड़ ओइसन बीया
Hinglish: Jaisan Maai Oisan Dhiya, Jaisan Kakad Oisan Biya
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि संतान पर माता-पिता और परिवेश का गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसे ककड़ी का बीज वैसा ही फल देता है, वैसे ही माता का स्वभाव और संस्कार बेटी में दिखाई देते हैं। यह लोकोक्ति पारिवारिक संस्कारों के महत्व को रेखांकित करती है। बच्चों का व्यवहार, सोच और मूल्य अचानक नहीं बनते, बल्कि वे घर के वातावरण से विकसित होते हैं। यदि परिवार में नैतिकता, अनुशासन और सकारात्मकता होगी, तो उसका प्रभाव अगली पीढ़ी पर भी पड़ेगा। यह लोकोक्ति अभिभावकों को यह संदेश देती है कि बच्चों को उपदेश देने से अधिक आवश्यक है स्वयं आदर्श आचरण प्रस्तुत करना। समाज निर्माण में परिवार की भूमिका को समझने के लिए यह लोकोक्ति अत्यंत सार्थक है।
113. जीअत पर छूछ भात, मरले पर दूध भात
Hinglish: Jiat Par Chhoochh Bhaat, Marle Par Doodh Bhaat
अर्थ: इस लोकोक्ति के माध्यम से समाज की उस प्रवृत्ति पर कटाक्ष किया गया है, जिसमें व्यक्ति के जीवित रहते उसकी उपेक्षा की जाती है, लेकिन मृत्यु के बाद दिखावटी सम्मान दिया जाता है। ‘छूछ भात’ उपेक्षा का प्रतीक है, जबकि ‘दूध भात’ मृत्यु के बाद किया गया आडंबरपूर्ण सम्मान दर्शाता है। समाज में कई लोग अपने माता-पिता, बुज़ुर्गों या प्रतिभाशाली व्यक्तियों का जीवनकाल में सम्मान नहीं करते, लेकिन उनके जाने के बाद प्रशंसा करते हैं। यह लोकोक्ति हमें समय रहते सम्मान, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का पालन करने की सीख देती है। वास्तविक सम्मान वही है जो व्यक्ति के जीवित रहते उसके काम आए, न कि मृत्यु के बाद किया गया औपचारिक प्रदर्शन।
114. जे गुड़ खाई उ कान छेदाई
Hinglish: Je Gud Khaai U Kaan Chhedaai
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय है कि हर सुख या लाभ के साथ कोई न कोई कीमत चुकानी पड़ती है। ‘गुड़ खाना’ सुख या लाभ का प्रतीक है, जबकि ‘कान छेदना’ उस सुख की कीमत या त्याग को दर्शाता है। जीवन में कोई भी उपलब्धि बिना परिश्रम, त्याग या जोखिम के नहीं मिलती। शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय या सामाजिक प्रतिष्ठा—हर सफलता के पीछे संघर्ष छिपा होता है। यह लोकोक्ति हमें यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने की सीख देती है और बताती है कि केवल लाभ देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि उसके परिणामों और दायित्वों को भी समझना चाहिए। यह लोकोक्ति जिम्मेदारी, धैर्य और संतुलित सोच को प्रोत्साहित करती है।
115. ढुलमुल बेंट कुदारी अउरी हँसी के बोले नारी
Hinglish: Dhulmul Bent Kudaari Auri Hansi Ke Bole Naari
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि जिस वस्तु या व्यक्ति में मजबूती और गंभीरता नहीं होती, उस पर भरोसा करना कठिन होता है। ढीले बेंट वाली कुदारी ठीक से काम नहीं करती, ठीक उसी तरह हँसी-मजाक में बात करने वाला व्यक्ति भी गंभीर परिस्थितियों में भरोसेमंद नहीं माना जाता। यह लोकोक्ति प्रतीकात्मक रूप से यह सिखाती है कि किसी भी कार्य के लिए दृढ़ता, स्पष्टता और गंभीरता आवश्यक है। जीवन में यदि व्यक्ति निर्णयों में अस्थिर हो या जिम्मेदारी से बात न करे, तो उसकी विश्वसनीयता कम हो जाती है। यह लोकोक्ति आत्मअनुशासन, गंभीर आचरण और कर्म में मजबूती का महत्व बताती है।
116. नया लुगा नौ दिन, लुगरी बरीस दिन
Hinglish: Naya Luga Nau Din, Lugri Baris Din
अर्थ: इस लोकोक्ति का आशय यह है कि नई चीज़ों के प्रति आकर्षण सामान्यतः अल्पकालिक होता है, जबकि पुरानी और उपयोग में आई वस्तुएँ लंबे समय तक साथ निभाती हैं। नया कपड़ा कुछ दिनों तक सबका ध्यान आकर्षित करता है, लेकिन वही पुराना कपड़ा पूरे वर्ष काम आता है। यह केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधों, अनुभवों और मूल्यों पर भी लागू होता है। आधुनिक समाज में लोग अक्सर नवीनता के मोह में पुराने, भरोसेमंद साधनों और रिश्तों को नजरअंदाज कर देते हैं। नई नौकरी, नया संबंध या नई तकनीक शुरुआत में आकर्षक लगती है, लेकिन समय के साथ वही पुराने अनुभव और मूल्य जीवन को स्थिरता देते हैं। यह लोकोक्ति हमें दिखावे से ऊपर उठकर उपयोगिता, स्थायित्व और अनुभव को महत्व देने की सीख देती है। वास्तविक जीवन में वही चीज़ें और लोग मूल्यवान होते हैं, जो कठिन समय में भी साथ निभाएँ।
117. बनले के साथी सब केहू ह अउरी बिगड़ले के केहु नाहीं
Hinglish: Banle Ke Saathi Sab Kehu Ha, Bigadle Ke Kehu Naahin
अर्थ: यह लोकोक्ति समाज की स्वार्थपूर्ण मानसिकता को गहराई से उजागर करती है। जब व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है, तब उसके चारों ओर मित्रों, समर्थकों और प्रशंसकों की भीड़ लग जाती है। हर कोई उससे जुड़ना चाहता है और उसकी उपलब्धियों में भागीदार बनना चाहता है। लेकिन जैसे ही वही व्यक्ति असफलता, संकट या पतन की स्थिति में आता है, वही लोग उससे दूरी बना लेते हैं। इस लोकोक्ति के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि सफलता में साथ देने वाले बहुत मिल जाते हैं, पर कठिन समय में साथ निभाने वाले बहुत कम होते हैं। यह हमें संबंधों की वास्तविकता को समझने की दृष्टि देती है। सच्चे मित्र और संबंध वही होते हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी साथ खड़े रहें। यह लोकोक्ति हमें यह भी सिखाती है कि हमें केवल सफलता के समय नहीं, बल्कि असफलता में भी दूसरों का साथ देना चाहिए।
118. बिलइया के नजर मुसवे पर
Hinglish: Biliya Ke Nazar Muswe Par
अर्थ: इस लोकोक्ति का प्रयोग उस स्थिति में किया जाता है जब किसी व्यक्ति की दृष्टि हर समय अपने स्वार्थ या लाभ पर टिकी रहती है। जैसे बिल्ली की नज़र लगातार चूहे पर होती है, वैसे ही कुछ लोग हर परिस्थिति में केवल अपना फायदा तलाशते रहते हैं। उन्हें न रिश्तों की परवाह होती है, न नैतिकता की और न ही सामाजिक मूल्यों की। समाज, राजनीति और व्यवसाय में ऐसे लोग अक्सर अवसरवादी के रूप में देखे जाते हैं, जो हर स्थिति से लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। यह लोकोक्ति हमें ऐसे व्यक्तियों से सतर्क रहने की चेतावनी देती है। साथ ही यह आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करती है कि कहीं हम स्वयं भी तो स्वार्थ की इसी दृष्टि से काम नहीं कर रहे। सामाजिक सौहार्द और विश्वास तभी संभव है, जब व्यक्ति अपनी दृष्टि केवल लाभ तक सीमित न रखे।
119. मन में आन, बगल में छुरी, जब चाहे तब काटे मूरी
Hinglish: Man Mein Aan, Bagal Mein Chhuri, Jab Chaahe Tab Kaate Moori
अर्थ: यह लोकोक्ति दिखावे और वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर करती है। ऐसे व्यक्ति बाहर से मधुर, विनम्र और मित्रवत दिखाई देते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर वे नुकसान पहुँचाने की योजना बनाए रहते हैं। ‘बगल में छुरी’ छिपे हुए षड्यंत्र और विश्वासघात का प्रतीक है। समाज में इस प्रकार के लोग सबसे अधिक खतरनाक होते हैं, क्योंकि वे सीधे विरोध नहीं करते, बल्कि अवसर मिलने पर वार करते हैं। राजनीति, कार्यालय और सामाजिक जीवन में ऐसे लोगों की कमी नहीं है। यह लोकोक्ति हमें सतर्क, विवेकशील और व्यवहार में सावधान रहने की सीख देती है। केवल मीठे शब्दों या बाहरी व्यवहार पर भरोसा करना उचित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के कर्म और आचरण को समझना आवश्यक है।
120. माई के जिअरा गाई अइसन, बाप के जिअरा कसाई अइसन
Hinglish: Maai Ke Jiyara Gaai Aisan, Baap Ke Jiyara Kasaai Aisan
अर्थ: इस लोकोक्ति में माता और पिता की भावनात्मक भूमिकाओं का यथार्थ चित्रण किया गया है। माँ का हृदय गाय के समान कोमल, करुणामय और क्षमाशील होता है, जबकि पिता का हृदय कसाई जैसा कठोर प्रतीत होता है। इसका आशय यह नहीं है कि पिता निर्दयी होता है, बल्कि यह दर्शाता है कि पिता अनुशासन, नियम और कठोर निर्णयों के माध्यम से संतान को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। माँ स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा देती है, जबकि पिता जिम्मेदारी और अनुशासन सिखाता है। संतान के संतुलित विकास के लिए दोनों की भूमिका समान रूप से आवश्यक है। यह लोकोक्ति पारिवारिक जीवन में संतुलन, संस्कार और उत्तरदायित्व के महत्व को स्पष्ट करती है।
121. लाल, पीयर जब होखे अकास, तब नइखे बरसा के आस
Hinglish: Laal, Peeyar Jab Hokhe Aakaas, Tab Naikhe Barsa Ke Aas
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ प्रकृति के संकेतों के माध्यम से अनुभवजन्य ज्ञान को व्यक्त करता है। जब आकाश लाल या पीला दिखाई देता है, तो यह संकेत माना जाता है कि वर्षा की संभावना नहीं है। ग्रामीण समाज में मौसम की जानकारी आधुनिक उपकरणों के बिना प्राकृतिक संकेतों से प्राप्त की जाती थी। यह लोकोक्ति उसी पारंपरिक ज्ञान को दर्शाती है। व्यापक अर्थ में यह कहावत जीवन पर भी लागू होती है। जब परिस्थितियों के संकेत प्रतिकूल हों, तो निरर्थक आशा पालना व्यर्थ होता है। यदि हालात साफ़ तौर पर किसी परिणाम की ओर इशारा कर रहे हों, तो व्यक्ति को यथार्थ स्वीकार कर उसी के अनुसार योजना बनानी चाहिए। यह लोकोक्ति यथार्थवाद, अनुभव और विवेक पर आधारित निर्णय लेने की सीख देती है। जीवन में केवल आशा नहीं, बल्कि परिस्थिति की सही पहचान भी उतनी ही आवश्यक है।
122. सुपवा हंसे चलनिया के कि तोरा में सतहत्तर छेद
Hinglish: Supwa Hanse Chalniya Ke Ki Tora Mein Satahattar Chhed
अर्थ: यह लोकोक्ति आत्मालोचना की कमी और दोहरे मापदंड पर तीखा व्यंग्य करती है। ‘सुपवा’ स्वयं छिद्रों से भरा होता है, फिर भी वह ‘चलनी’ का मज़ाक उड़ाता है कि उसमें बहुत छेद हैं। इसका आशय यह है कि जिन लोगों में स्वयं अनेक दोष होते हैं, वही दूसरों की आलोचना करने में सबसे आगे रहते हैं। समाज में यह प्रवृत्ति बहुत सामान्य है—व्यक्ति अपने दोषों को अनदेखा कर दूसरों की छोटी-छोटी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है। यह लोकोक्ति हमें आत्मनिरीक्षण की सीख देती है और बताती है कि दूसरों पर उँगली उठाने से पहले अपने भीतर झाँकना आवश्यक है। स्वस्थ समाज वही होता है जहाँ आलोचना आत्मसुधार के उद्देश्य से हो, न कि अहंकार या दिखावे के लिए।
123. सोना लुटाय और कोयले पर छापा
Hinglish: Sona Lutaay Aur Koyle Par Chhaapa
अर्थ: इस लोकोक्ति का भाव यह है कि जब व्यक्ति को बड़ा नुकसान हो जाता है, तो उसके बाद छोटी-सी बात पर भी कठोर कार्रवाई की जाती है या व्यर्थ का दोषारोपण किया जाता है। ‘सोना लुटना’ बड़े नुकसान का प्रतीक है, जबकि ‘कोयले पर छापा’ निरर्थक या देर से की गई कार्रवाई को दर्शाता है। यह स्थिति प्रशासन, समाज और व्यक्तिगत जीवन—तीनों में देखी जा सकती है। जब समय रहते सही कदम नहीं उठाए जाते और वास्तविक समस्या को अनदेखा कर दिया जाता है, तब नुकसान हो जाने के बाद दिखावटी सख्ती की जाती है। यह लोकोक्ति हमें समय पर निर्णय लेने, प्राथमिकताओं को समझने और वास्तविक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की सीख देती है। देर से किया गया कठोर कदम अक्सर समस्या का समाधान नहीं कर पाता।
124. बाप के नाम लत्ती फत्ती, बेटा के नाम कदीमा
Hinglish: Baap Ke Naam Latti Fatti, Beta Ke Naam Kadima
अर्थ: यह लोकोक्ति दिखावे और झूठी प्रतिष्ठा पर कटाक्ष करती है। पिता के पास कोई ठोस पहचान या उपलब्धि नहीं है, फिर भी बेटे का नाम बड़े ठाठ-बाट और भारी-भरकम शब्दों से रखा गया है। इसका आशय यह है कि वास्तविक योग्यता और आचरण के बिना केवल नाम, पद या दिखावे से सम्मान नहीं मिलता। समाज में कई बार लोग अपनी वास्तविक स्थिति से अधिक ऊँचा दिखने का प्रयास करते हैं, जिससे खोखलापन उजागर हो जाता है। यह लोकोक्ति हमें सिखाती है कि सम्मान नाम या बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि कर्म, चरित्र और उपलब्धियों से प्राप्त होता है। वास्तविक प्रतिष्ठा अंदरूनी गुणों से बनती है, न कि केवल शब्दों और दिखावे से।
125. हरबरी के बियाह में कनपट्टी पर सिन्दूर
Hinglish: Harbari Ke Biyaah Mein Kanpatti Par Sindoor
अर्थ: इस लोकोक्ति का अर्थ है—बिना समझ और विवेक के किया गया कार्य, जो परंपरा या नियमों के विरुद्ध हो। विवाह में सिंदूर माँग में लगाया जाता है, लेकिन यहाँ उसे कनपट्टी पर लगाया जा रहा है, जो जल्दबाजी और अव्यवस्था का प्रतीक है। यह लोकोक्ति उन कार्यों पर व्यंग्य करती है जो जल्दबाजी, दिखावे या अधूरी समझ के कारण गलत ढंग से किए जाते हैं। जीवन में कई बार लोग सामाजिक दबाव या जल्द परिणाम पाने की चाह में बिना सोच-विचार निर्णय ले लेते हैं, जिसका परिणाम गलत निकलता है। यह लोकोक्ति हमें धैर्य, समझ और सही प्रक्रिया का पालन करने की सीख देती है। कोई भी कार्य तभी सार्थक होता है जब वह सही समय, सही विधि और सही समझ के साथ किया जाए।
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