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Bihar SI Mains 27 May 2026 Question and Answer in Hindi
1. गलत जोड़ी पहचानें :
Answer: D
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर भारतीय संविधान निर्माण की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक थे। उन्हें 29 अगस्त 1947 को गठित संविधान सभा की प्रारूप समिति (Drafting Committee) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। भारतीय संविधान के निर्माण में उनके असाधारण योगदान के कारण उन्हें “भारतीय संविधान के शिल्पकार” के रूप में जाना जाता है।
मौलाना अबुल कलाम आजाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे। उन्होंने भारत में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के विकास, वैज्ञानिक सोच और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जैसी संस्थाओं की नींव रखी गई। भारत में प्रत्येक वर्ष 11 नवंबर को उनकी जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है।
राजकुमारी अमृत कौर स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं। उन्होंने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, महिला स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रयासों से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली की स्थापना संभव हुई।
आचार्य नरेंद्र देव भारत के प्रमुख समाजवादी चिंतक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उनका संबंध भारतीय समाजवादी आंदोलन से था, न कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना से। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1925 में हुई थी और उसके संस्थापक नेतृत्व में एम.एन. रॉय, एस.ए. डांगे, मुजफ्फर अहमद आदि प्रमुख थे। इसी कारण विकल्प D गलत जोड़ी है।
2. धन विधेयक से संबंधित प्रावधानों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
a. इसे केवल एक मंत्री द्वारा, लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।
b. इसे केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर पेश किया जा सकता है और राज्यसभा में भेजे जाने पर स्पीकर के प्रमाणन की आवश्यकता होती है।
c. इसे राज्यसभा द्वारा अधिकतम 14 दिनों के लिए रोका जा सकता है।
d. संयुक्त बैठक का प्रावधान है।
e. लोकसभा में इसकी हार से सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
Answer: A
भारतीय संविधान में धन विधेयक (Money Bill) से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 110 में दिए गए हैं। धन विधेयक वह विधेयक होता है जो कराधान, सरकारी व्यय, भारत की संचित निधि, ऋण लेने या वित्तीय मामलों से संबंधित हो। भारतीय संसदीय शासन प्रणाली में धन विधेयक का विशेष महत्व है क्योंकि यह सरकार की वित्तीय नीतियों और संसदीय उत्तरदायित्व से जुड़ा होता है।
कथन (a) गलत है क्योंकि धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसे राज्यसभा में प्रस्तुत करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अतिरिक्त इसे केवल मंत्री ही प्रस्तुत करे, यह आवश्यक नहीं है; हालांकि व्यवहार में प्रायः वित्त मंत्री ही इसे प्रस्तुत करते हैं।
कथन (b) सही है। संविधान के अनुसार धन विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक होती है। साथ ही जब इसे राज्यसभा भेजा जाता है, तब लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि संबंधित विधेयक धन विधेयक है। स्पीकर का यह निर्णय अंतिम माना जाता है।
कथन (c) भी सही है। राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है। वह केवल सुझाव दे सकती है, जिन्हें स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार लोकसभा के पास होता है। यदि 14 दिनों के भीतर राज्यसभा विधेयक वापस नहीं करती, तो विधेयक स्वतः पारित माना जाता है।
कथन (d) गलत है क्योंकि धन विधेयक के मामले में संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान नहीं है। संयुक्त बैठक का प्रावधान सामान्य विधेयकों के लिए अनुच्छेद 108 में दिया गया है।
कथन (e) सही है। संसदीय शासन प्रणाली में धन विधेयक सरकार के विश्वास से जुड़ा होता है। यदि लोकसभा धन विधेयक को अस्वीकार कर दे, तो यह सरकार के विरुद्ध अविश्वास के समान माना जाता है और सरकार को इस्तीफा देना पड़ सकता है।
3. निम्नलिखित में से कौन-सी भारतीय संविधान की संघीय विशेषताएँ हैं?
a. दोहरी सरकार
b. एकल संविधान
c. संविधान की सर्वोच्चता
d. शक्तियों का विभाजन
e. एकीकृत न्यायपालिका
f. द्विसदनीय विधायिका
Answer: B
भारतीय संविधान को सामान्यतः “संघात्मक व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव” वाला संविधान कहा जाता है। संविधान निर्माताओं ने भारत की भौगोलिक विशालता, सांस्कृतिक विविधता तथा राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संघीय तथा एकात्मक दोनों प्रकार की विशेषताओं को सम्मिलित किया।
भारतीय संविधान की प्रमुख संघीय विशेषताओं में दोहरी सरकार, संविधान की सर्वोच्चता, शक्तियों का विभाजन तथा द्विसदनीय विधायिका शामिल हैं।
दोहरी सरकार (Dual Government) का अर्थ है कि शासन दो स्तरों पर संचालित होता है—एक केंद्र सरकार और दूसरी राज्य सरकारें। दोनों के अधिकार संविधान द्वारा निर्धारित किए गए हैं।
संविधान की सर्वोच्चता संघीय शासन की मूल विशेषता है। भारत में संविधान सर्वोच्च विधि है और केंद्र तथा राज्य दोनों संविधान के अधीन कार्य करते हैं। यदि कोई कानून संविधान के विपरीत हो, तो न्यायपालिका उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है।
शक्तियों का विभाजन भारतीय संघवाद की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत शक्तियों को संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में विभाजित किया गया है। यह व्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों के संतुलन को बनाए रखती है।
द्विसदनीय विधायिका (Bicameral Legislature) भी संघीय विशेषता है। केंद्र में संसद के दो सदन—लोकसभा और राज्यसभा—हैं। राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और संघीय ढाँचे को मजबूत बनाती है।
इसके विपरीत एकल संविधान तथा एकीकृत न्यायपालिका भारत की एकात्मक विशेषताएँ मानी जाती हैं। अमेरिका जैसे देशों में राज्यों के अलग-अलग संविधान होते हैं, जबकि भारत में अधिकांश राज्यों के लिए एक ही संविधान लागू है। इसी प्रकार भारत में सर्वोच्च न्यायालय के नेतृत्व में एकीकृत न्यायपालिका की व्यवस्था है।
4. राज्यपाल के पास इनमें से कौन-सी विवेकाधीन शक्ति है?
a. राष्ट्रपति की सहमति के लिए बिल को सुरक्षित रखना।
b. केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासक के तौर पर कार्य करना।
c. अनुसूची IV के तहत शक्ति।
d. मुख्यमंत्री की नियुक्ति और सरकार को बर्खास्त करना।
e. राज्य में संवैधानिक मशीनरी विफल होने पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट करना।
Answer: A
भारतीय संविधान में राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। राज्यपाल की शक्तियाँ सामान्यतः मंत्रिपरिषद् की सलाह पर आधारित होती हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में उसे विवेकाधीन शक्तियाँ (Discretionary Powers) भी प्राप्त होती हैं। इन शक्तियों का उल्लेख मुख्य रूप से अनुच्छेद 163 में किया गया है।
राष्ट्रपति की सहमति के लिए विधेयक सुरक्षित रखना राज्यपाल की महत्वपूर्ण विवेकाधीन शक्ति है। यदि कोई विधेयक संविधान के विरुद्ध प्रतीत हो, उच्च न्यायालय की शक्तियों को प्रभावित करता हो या राष्ट्रीय महत्व का हो, तो राज्यपाल उसे राष्ट्रपति के विचार हेतु सुरक्षित रख सकता है।
कुछ राज्यों के राज्यपालों को अतिरिक्त रूप से केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासक का दायित्व भी दिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, पंजाब के राज्यपाल को कई बार चंडीगढ़ का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस स्थिति में वह विवेकाधीन भूमिका निभाता है।
मुख्यमंत्री की नियुक्ति भी कई परिस्थितियों में विवेकाधीन शक्ति बन जाती है, विशेषकर जब विधानसभा में किसी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो। ऐसी स्थिति में राज्यपाल अपने विवेक से उस नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है जो सदन का विश्वास प्राप्त करने में सक्षम हो। यदि सरकार बहुमत खो दे, तो राज्यपाल मुख्यमंत्री को पद छोड़ने के लिए कह सकता है।
राज्य में संवैधानिक मशीनरी विफल होने की स्थिति में राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकता है। यह प्रावधान अनुच्छेद 356 से संबंधित है, जिसके आधार पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। यह भी राज्यपाल की महत्वपूर्ण विवेकाधीन शक्ति मानी जाती है।
कथन (c) गलत है क्योंकि संविधान की चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) राज्यसभा में राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व से संबंधित है। यह राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों से संबंधित नहीं है।
5. संविधान का कौन-सा अनुच्छेद यह उपबंधित करता है कि प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद् के सभी निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को देगा?
Answer: C
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री के कर्तव्यों से संबंधित है। इस अनुच्छेद के अनुसार प्रधानमंत्री का दायित्व है कि वह राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद् के सभी निर्णयों, प्रशासनिक मामलों तथा विधायी प्रस्तावों की जानकारी दे।
भारत में संसदीय शासन प्रणाली लागू है, जिसमें राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है जबकि वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद् के पास होती है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद् का प्रमुख होने के कारण राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद् के बीच मुख्य कड़ी के रूप में कार्य करता है।
अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री के प्रमुख दायित्व निम्न हैं—
मंत्रिपरिषद् के निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को देना।
राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराना।
ऐसे विषयों को मंत्रिपरिषद् के समक्ष प्रस्तुत करना जिन पर किसी मंत्री ने निर्णय लिया हो लेकिन मंत्रिपरिषद् ने विचार न किया हो।
अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद् की सलाह से संबंधित है।
अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति, कार्यकाल और सामूहिक उत्तरदायित्व से संबंधित है।
अनुच्छेद 81 लोकसभा की संरचना और प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रावधान देता है।
6. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए : लोह अयस्क क्षेत्र एवं राज्य
सूची-I (लौह अयस्क क्षेत्र) सूची-II (राज्य)
1. गुआ एवं नोआमुण्डी i. छत्तीसगढ़
2. बैलाडिला ii. झारखण्ड
3. बेल्लारी-चित्रदुर्ग iii. महाराष्ट्र
4. रत्नागिरी iv. कर्नाटक
Answer: A
भारत प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध देश है और यहाँ लौह अयस्क के विशाल भंडार पाए जाते हैं। लौह अयस्क आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता है क्योंकि इससे इस्पात (Steel) का निर्माण होता है। इस्पात उद्योग को किसी भी देश की औद्योगिक प्रगति का सूचक माना जाता है। भारत में लौह अयस्क मुख्यतः हेमेटाइट तथा मैग्नेटाइट प्रकार का पाया जाता है, जिनमें हेमेटाइट सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत के प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र मुख्य रूप से झारखण्ड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा में स्थित हैं। इन क्षेत्रों का विकास औद्योगिक केंद्रों, रेलवे नेटवर्क तथा इस्पात संयंत्रों के विकास से जुड़ा हुआ है।
लौह अयस्क क्षेत्र संबंधित राज्य प्रमुख विशेषता
गुआ एवं नोआमुण्डी झारखण्ड उच्च गुणवत्ता वाला हेमेटाइट अयस्क
बैलाडिला छत्तीसगढ़ भारत का प्रमुख निर्यातक लौह अयस्क क्षेत्र
बेल्लारी-चित्रदुर्ग कर्नाटक दक्षिण भारत का प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र
रत्नागिरी महाराष्ट्र कोंकण क्षेत्र का खनिज क्षेत्र
गुआ एवं नोआमुण्डी झारखण्ड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित प्रसिद्ध लौह अयस्क क्षेत्र हैं। यह क्षेत्र छोटानागपुर पठार का भाग है, जो भारत का प्रमुख खनिज क्षेत्र माना जाता है। यहाँ उच्च गुणवत्ता वाला हेमेटाइट लौह अयस्क पाया जाता है। इन खानों से प्राप्त अयस्क का उपयोग मुख्यतः जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील संयंत्र में किया जाता है।
बैलाडिला लौह अयस्क क्षेत्र छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित है। यह क्षेत्र अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले लौह अयस्क के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बैलाडिला की खदानों का विकास मुख्य रूप से राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) द्वारा किया गया है। यहाँ से प्राप्त अयस्क का निर्यात जापान, दक्षिण कोरिया तथा अन्य देशों को किया जाता है। बैलाडिला क्षेत्र बस्तर क्षेत्र में स्थित है और यह भारत की महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं में शामिल है।
बेल्लारी-चित्रदुर्ग क्षेत्र कर्नाटक में स्थित है और दक्षिण भारत का प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। कर्नाटक भारत के प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक राज्यों में शामिल है। बेल्लारी क्षेत्र लौह अयस्क खनन तथा इस्पात उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के लौह अयस्क का उपयोग भद्रावती इस्पात संयंत्र सहित कई औद्योगिक इकाइयों में किया जाता है।
रत्नागिरी महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र खनिज संसाधनों के साथ-साथ अपने बंदरगाहों और समुद्री व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र में रत्नागिरी क्षेत्र लौह अयस्क उत्पादन के लिए जाना जाता है।
भारत के प्रमुख लौह-इस्पात संयंत्रों जैसे भिलाई, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर तथा जमशेदपुर का विकास लौह अयस्क क्षेत्रों के निकट किया गया ताकि परिवहन लागत कम हो और उद्योगों को निरंतर कच्चा माल प्राप्त हो सके।
लौह अयस्क उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात व्यापार, रोजगार सृजन तथा आधारभूत संरचना विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
7. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन भारत में गेहूं की फसल के संदर्भ में सही है/हैं?
I. यह देश के पूर्वी भाग की मुख्य खाद्य फसल है।
II. इसको शुरुआत में उगते समय तेज धूप एवं पकते समय ठंडा मौसम आवश्यक है।
III. इसे इसके विकास के मौसम में समान रूप से वितरित 50-75 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक है।
Answer: C
गेहूं भारत की प्रमुख रबी फसल है तथा चावल के बाद देश की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल मानी जाती है। भारत विश्व के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है। भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में गेहूं का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह करोड़ों लोगों का मुख्य भोजन है और खाद्य सुरक्षा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।
भारत में गेहूं की खेती मुख्यतः उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में की जाती है। पंजाब और हरियाणा को भारत का “गेहूं भंडार” भी कहा जाता है। हरित क्रांति के बाद गेहूं उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई, जिसके कारण भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सका।
कथन स्थिति विवरण
I गलत पूर्वी भारत की मुख्य खाद्य फसल धान है, गेहूं नहीं।
II गलत गेहूं को प्रारंभिक अवस्था में ठंडा मौसम तथा पकते समय शुष्क एवं धूपयुक्त मौसम चाहिए।
III सही 50-75 सेमी वार्षिक वर्षा गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
पहला कथन गलत है क्योंकि भारत के पूर्वी भाग—जैसे पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और बिहार के आर्द्र क्षेत्रों—में अधिक वर्षा होती है, जिससे वहाँ धान (Rice) की खेती अधिक उपयुक्त होती है। धान पूर्वी भारत की मुख्य खाद्य फसल है। गेहूं मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी तथा शुष्क से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की फसल है।
दूसरा कथन भी गलत है। गेहूं की फसल को बुवाई के समय शीतल एवं आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। इसके अंकुरण और प्रारंभिक वृद्धि के लिए लगभग 10°C से 15°C तापमान उपयुक्त माना जाता है। जबकि फसल पकते समय उज्ज्वल धूप और शुष्क मौसम आवश्यक होता है। यदि पकने के समय वर्षा या आर्द्रता अधिक हो जाए, तो फसल में रोग लग सकते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
तीसरा कथन सही है। गेहूं की अच्छी खेती के लिए लगभग 50 से 75 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा उपयुक्त मानी जाती है। जिन क्षेत्रों में वर्षा कम होती है, वहाँ सिंचाई की सहायता ली जाती है। भारत में नहर सिंचाई, ट्यूबवेल सिंचाई तथा भूजल संसाधनों के विकास ने गेहूं उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत में हरित क्रांति (Green Revolution) की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी। इसके अंतर्गत उच्च उपज वाली किस्मों (HYV Seeds), रासायनिक उर्वरकों, सिंचाई सुविधाओं तथा कृषि मशीनरी के प्रयोग से गेहूं उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है।
आज भारत विश्व के प्रमुख गेहूं निर्यातक देशों में भी शामिल हो रहा है और गेहूं उत्पादन भारतीय खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
8. ब्रह्मपुत्र नदी के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है ?
Answer: A
ब्रह्मपुत्र नदी भारत की प्रमुख हिमालयी नदियों में से एक है। यह नदी जल की मात्रा तथा अपवाह क्षेत्र की दृष्टि से भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गिनी जाती है। ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम भारत में नहीं बल्कि तिब्बत में अंगसी हिमनद (Angsi Glacier) के निकट माना जाता है। तिब्बत में इसे यारलुंग त्सांगपो (Yarlung Tsangpo) के नाम से जाना जाता है। इसलिए यह कथन कि “यह अरुणाचल प्रदेश में उद्गमित होती है” गलत है।
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में पूर्व दिशा में बहती हुई हिमालय के पूर्वी छोर पर स्थित नामचा बारवा पर्वत शिखर के निकट पहुँचकर अचानक दक्षिण दिशा की ओर मुड़ती है। इस मोड़ को नदी का प्रसिद्ध ‘यू’ आकार (U-turn or Hairpin Bend) कहा जाता है। यह विश्व के सबसे गहरे नदी गॉर्जों में से एक का निर्माण करती है।
भारत में प्रवेश करने के बाद यह नदी अरुणाचल प्रदेश में सियांग अथवा दिहांग नाम से जानी जाती है। आगे चलकर इसमें दिबांग और लोहित नदियाँ मिलती हैं, जिसके बाद इसे ब्रह्मपुत्र कहा जाता है।
ब्रह्मपुत्र नदी की कुल लंबाई लगभग 2900 किमी मानी जाती है, जबकि सिंधु नदी की लंबाई लगभग 2880 किमी है। इस प्रकार ब्रह्मपुत्र नदी सिंधु नदी से थोड़ी अधिक लंबी है।
असम घाटी में यह नदी विस्तृत जलोढ़ मैदानों का निर्माण करती है और अनेक नदी द्वीप बनाती है। विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली द्वीप ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित है। यह नदी बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद जमुना नाम से बहती है तथा अंततः गंगा (पद्मा) और मेघना नदी के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
ब्रह्मपुत्र नदी जल परिवहन, कृषि, सिंचाई, जलविद्युत तथा पारिस्थितिकी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन असम में आने वाली विनाशकारी बाढ़ों के लिए भी यह नदी जानी जाती है।
9. कॉलम-I (सूखा गंभीरता) को कॉलम-II (भारतीय क्षेत्र) से मिलाइए।
कॉलम-I (सूखा गंभीरता) कॉलम-II (भारतीय क्षेत्र)
1. अत्यधिक सूखा प्रभावित a. पश्चिमी तटीय क्षेत्र
2. गंभीर सूखाग्रस्त b. कोयम्बटूर पठार
3. मंद सूखा प्रभावित c. अरावली पहाड़ियों का पश्चिमी क्षेत्र
4. सूखा मुक्त d. महाराष्ट्र का पूर्वी भाग
Answer: D
भारत की जलवायु मुख्यतः मानसूनी जलवायु है, जिसके कारण वर्षा का वितरण अत्यंत असमान पाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी के कारण बार-बार सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है। सूखा कृषि, जल संसाधन, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
सूखा श्रेणी संबंधित क्षेत्र विशेषता
अत्यधिक सूखा प्रभावित अरावली पहाड़ियों का पश्चिमी क्षेत्र कम वर्षा एवं मरुस्थलीय जलवायु
गंभीर सूखाग्रस्त महाराष्ट्र का पूर्वी भाग अनियमित मानसून एवं वर्षा की कमी
मंद सूखा प्रभावित कोयम्बटूर पठार वर्षा छाया क्षेत्र
सूखा मुक्त पश्चिमी तटीय क्षेत्र अत्यधिक मानसूनी वर्षा
अरावली पहाड़ियों का पश्चिमी क्षेत्र, विशेषकर राजस्थान का थार मरुस्थल क्षेत्र, भारत का सबसे अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। यहाँ औसत वर्षा अत्यंत कम होती है तथा वर्षा की अनिश्चितता अधिक रहती है। गर्म और शुष्क जलवायु के कारण यहाँ बार-बार सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
महाराष्ट्र का पूर्वी भाग, विशेषकर विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र, गंभीर सूखा प्रभावित क्षेत्रों में आते हैं। मानसून की अनियमितता, भूजल का अत्यधिक दोहन तथा सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण यह क्षेत्र बार-बार कृषि संकट का सामना करता है।
कोयम्बटूर पठार तमिलनाडु में स्थित है और यह क्षेत्र वर्षा छाया प्रदेश (Rain Shadow Region) में आता है। यहाँ वर्षा अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन स्थिति अत्यधिक गंभीर नहीं होती, इसलिए इसे मंद सूखा प्रभावित क्षेत्र माना जाता है।
पश्चिमी तटीय क्षेत्र जैसे केरल, कर्नाटक एवं पश्चिमी घाट से लगे क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम मानसून से अत्यधिक वर्षा प्राप्त करते हैं। इसलिए ये क्षेत्र सामान्यतः सूखा मुक्त माने जाते हैं।
भारत में सूखा प्रबंधन हेतु सूखा प्रबंधन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जल शक्ति अभियान, वाटरशेड विकास कार्यक्रम तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
10. छात्रों का एक समूह दिल्ली में जल प्रदूषण के स्तर पर शोध कर रहा था। जल गुणवत्ता के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए छात्रों को किस संस्था का दौरा करना होगा ?
Answer: A
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (Delhi Pollution Control Committee – DPCC) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पर्यावरण प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण के लिए कार्य करने वाली एक स्वायत्त संस्था है। यह संस्था विशेष रूप से दिल्ली में जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण तथा अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कार्य करती है।
यदि छात्रों को दिल्ली में जल गुणवत्ता (Water Quality) तथा जल प्रदूषण के स्तर के बारे में जानकारी प्राप्त करनी है, तो उन्हें DPCC का दौरा करना चाहिए क्योंकि यही संस्था दिल्ली में जल प्रदूषण की निगरानी, विश्लेषण और नियंत्रण का कार्य करती है।
DPCC के प्रमुख कार्य—
• दिल्ली में जल एवं वायु गुणवत्ता की निगरानी करना।
• प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना।
• उद्योगों एवं संस्थानों के लिए पर्यावरण मानकों को लागू करना।
• सीवेज तथा औद्योगिक अपशिष्टों के उपचार संबंधी मानक निर्धारित करना।
• पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) करना।
• प्रदूषण नियंत्रण संबंधी जन-जागरूकता फैलाना।
• पर्यावरण संरक्षण हेतु अनुसंधान एवं विकास कार्य करना।
अन्य विकल्पों के बारे में—
• ICER (Indian Council for Environmental Research) कोई प्रमुख वैधानिक प्रदूषण नियंत्रण संस्था नहीं है।
• NWDA (National Water Development Agency) की स्थापना वर्ष 1982 में की गई थी। यह संस्था जल संसाधन विकास, नदी जोड़ो परियोजनाओं तथा जल प्रबंधन से संबंधित सर्वेक्षण एवं DPR तैयार करने का कार्य करती है। इसका मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का विकास है, न कि प्रदूषण नियंत्रण।
• CPCB (Central Pollution Control Board) एक केंद्रीय संस्था है जिसकी स्थापना जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत की गई थी। यह पूरे भारत में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नीतियाँ एवं मानक निर्धारित करती है, जबकि दिल्ली स्तर पर कार्यान्वयन का प्रमुख दायित्व DPCC का होता है।
DPCC दिल्ली सरकार के अधीन कार्य करती है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरणीय गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
11. निम्नलिखित में से कौन भारत में न्यायिक सक्रियता की स्थापना के लिए जिम्मेदार हैं?
I. न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती
II. न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर
III. न्यायमूर्ति हिदायतुल्लाह
Answer: D
भारत में न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) की अवधारणा का विकास विशेष रूप से 1970 और 1980 के दशक में हुआ। न्यायिक सक्रियता का अर्थ है कि न्यायपालिका केवल कानून की संकीर्ण व्याख्या तक सीमित न रहकर संविधान की मूल भावना, नागरिक अधिकारों तथा सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाए।
भारतीय न्यायपालिका में इस विचारधारा को स्थापित करने और आगे बढ़ाने का श्रेय मुख्यतः न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर तथा न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती को दिया जाता है। इन दोनों न्यायाधीशों ने भारतीय न्यायपालिका को गरीबों, मजदूरों, बंदियों, महिलाओं तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया।
न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर ने न्याय को तकनीकी प्रक्रियाओं से मुक्त कर सामाजिक न्याय के साधन के रूप में विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने मानवाधिकारों, बंदी अधिकारों तथा श्रमिक अधिकारों से जुड़े मामलों में ऐतिहासिक निर्णय दिए।
न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती ने विशेष रूप से जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से यह व्यवस्था विकसित हुई कि कोई भी व्यक्ति या संस्था समाज के कमजोर वर्गों के हित में न्यायालय में याचिका दायर कर सकती है। इससे न्यायपालिका आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनी।
भारत में न्यायिक सक्रियता से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में मेनका गांधी मामला (1978), हुसैनारा खातून मामला, विशाखा मामला (1997) तथा केशवानंद भारती मामला (1973) शामिल हैं। इन मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 की व्यापक व्याख्या करते हुए नागरिक स्वतंत्रताओं को मजबूत किया।
न्यायमूर्ति हिदायतुल्लाह भारत के प्रतिष्ठित मुख्य न्यायाधीश रहे, लेकिन उन्हें न्यायिक सक्रियता के प्रमुख प्रवर्तकों में शामिल नहीं किया जाता।
12. भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए कौन-सा अधिनियम ढाँचा प्रदान करता है?
Answer: B
भारत जैव विविधता की दृष्टि से विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। यहाँ हिमालयी क्षेत्र, पश्चिमी घाट, मरुस्थल, मैंग्रोव वन, उष्णकटिबंधीय वर्षावन तथा समुद्री पारितंत्र जैसी विविध पारिस्थितिक व्यवस्थाएँ पाई जाती हैं। जैव विविधता में वनस्पति, जीव-जंतु, सूक्ष्मजीव तथा उनके आनुवंशिक संसाधन शामिल होते हैं।
भारत में जैव विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग तथा जैव संसाधनों से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत वितरण के लिए जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002) लागू किया गया। यह अधिनियम संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (Convention on Biological Diversity – CBD), 1992 के उद्देश्यों को लागू करने के लिए बनाया गया था।
इस अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority – NBA) की स्थापना की गई, जिसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड तथा स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ गठित की गईं।
इस कानून का उद्देश्य केवल जैव संसाधनों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों और आदिवासी समूहों के पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा करना भी है। यह अधिनियम विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय जैव संसाधनों के अनियंत्रित उपयोग को नियंत्रित करता है।
वन संरक्षण अधिनियम, 1980 मुख्यतः वनों के संरक्षण से संबंधित है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 व्यापक पर्यावरण संरक्षण हेतु बनाया गया था।
वन्य पक्षी और पशु संरक्षण अधिनियम, 1912 ब्रिटिश काल का पुराना कानून था, जिसे बाद में आधुनिक कानूनों ने प्रतिस्थापित कर दिया।
भारत में जैव विविधता संरक्षण हेतु राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व, प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट तथा रामसर आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम जैसी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं।
13. निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रेजेंटेशन प्रोग्राम नहीं है?
Answer: D
प्रेजेंटेशन प्रोग्राम ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जिनका उपयोग स्लाइड आधारित प्रस्तुति तैयार करने के लिए किया जाता है। इनका प्रयोग शिक्षा, व्यापार, प्रशिक्षण, सरकारी प्रस्तुतियों तथा ऑनलाइन मीटिंग्स में व्यापक रूप से किया जाता है।
Microsoft PowerPoint विश्व का सबसे लोकप्रिय प्रेजेंटेशन सॉफ्टवेयर है। यह Microsoft Office Suite का हिस्सा है और इसमें टेक्स्ट, चित्र, ऑडियो, वीडियो, ग्राफ तथा एनीमेशन का उपयोग करके आकर्षक प्रस्तुतियाँ बनाई जाती हैं।
Impress एक ओपन-सोर्स प्रेजेंटेशन सॉफ्टवेयर है जो LibreOffice का हिस्सा है। यह PowerPoint की तरह स्लाइड निर्माण, एनीमेशन तथा मल्टीमीडिया प्रस्तुति की सुविधा प्रदान करता है।
Keynote Apple कंपनी द्वारा विकसित प्रेजेंटेशन सॉफ्टवेयर है। यह मुख्यतः macOS और iOS उपकरणों में उपयोग किया जाता है तथा अपने आकर्षक डिज़ाइन और ग्राफिकल प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध है।
इसके विपरीत KSpread प्रेजेंटेशन सॉफ्टवेयर नहीं है। यह एक स्प्रेडशीट प्रोग्राम था जो KOffice Suite का हिस्सा था। इसका उपयोग डेटा विश्लेषण, तालिका निर्माण, गणना तथा सांख्यिकीय कार्यों के लिए किया जाता था। बाद में इसे Calligra Sheets के रूप में विकसित किया गया।
कंप्यूटर अनुप्रयोगों में सामान्यतः सॉफ्टवेयर को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाता है—
Word Processing Software – MS Word
Spreadsheet Software – MS Excel, KSpread
Presentation Software – PowerPoint, Impress, Keynote
Database Software – MS Access
14. भारत में किस दिन को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाता है?
Answer: A
भारत में प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day)’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस भारत के अंतरिक्ष इतिहास की एक ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में मनाया जाता है।
23 अगस्त 2023 को भारत का चंद्रयान-3 मिशन सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरा था। इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला विश्व का पहला देश बन गया। इस उपलब्धि ने भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश भी बना दिया।
चंद्रयान-3 मिशन का संचालन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा किया गया था। इस मिशन में मुख्य रूप से तीन घटक शामिल थे—
प्रोपल्शन मॉड्यूल
विक्रम लैंडर
प्रज्ञान रोवर
विक्रम लैंडर का नाम भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया था, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। वहीं प्रज्ञान रोवर ने चंद्र सतह पर रासायनिक और खनिज संबंधी अध्ययन किए।
भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया ताकि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति युवाओं में रुचि बढ़ाई जा सके।
भारत के प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों में—
आर्यभट्ट (1975) – भारत का पहला उपग्रह
चंद्रयान-1 (2008) – चंद्रमा पर जल अणुओं की खोज
मंगलयान (2013) – प्रथम प्रयास में मंगल पहुँचने वाला पहला देश
चंद्रयान-3 (2023) – चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, रक्षा, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
15. भारतीय वैज्ञानिक जिसने स्वास्थ्य और कृषि प्रौद्योगिकियों पर अपने शोध के लिए 2024 टाटा ट्रांसफॉर्मेशन फेलोशिप जीती, वह हैं—
Answer: C
प्रो. सी. आनन्धरनक्रिष्ना को वर्ष 2024 में टाटा ट्रांसफॉर्मेशन प्राइज/फेलोशिप से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान स्वास्थ्य, पोषण, सतत ऊर्जा तथा कम लागत वाली RSV Vaccine (Respiratory Syncytial Virus Vaccine) से संबंधित नवाचारों और शोध कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
यह पुरस्कार वैज्ञानिक अनुसंधान और सामाजिक प्रभाव वाले नवाचारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिया जाता है। प्रो. आनन्धरनक्रिष्ना का कार्य विशेष रूप से उन तकनीकों पर केंद्रित रहा है जो कम लागत में अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में सहायक हों।
RSV (Respiratory Syncytial Virus) एक ऐसा वायरस है जो मुख्यतः बच्चों और वृद्ध लोगों में श्वसन संबंधी संक्रमण उत्पन्न करता है। विकासशील देशों में कम लागत वाली वैक्सीन का विकास सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत हाल के वर्षों में जैव प्रौद्योगिकी, वैक्सीन अनुसंधान तथा स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन उत्पादन और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को बढ़ावा देने में विभिन्न संस्थाओं जैसे—
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST)
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT)
CSIR
ICMR
का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाते हैं, जिनका उद्देश्य नवाचार आधारित विकास और सतत प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना है।
16. बिहार के किस प्रसिद्ध लेखक ने उपन्यास “मैला आंचल” लिखा था?
Answer: B
प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास “मैला आंचल” के लेखक फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ हैं। यह उपन्यास हिंदी साहित्य की आंचलिक धारा का अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतिनिधि उपन्यास माना जाता है। इसका प्रकाशन वर्ष 1954 में हुआ था।
फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले (वर्तमान अररिया) के औराही हिंगना गाँव में हुआ था। उन्होंने अपने साहित्य में ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति, सामाजिक विषमता, राजनीतिक परिवर्तन और आम जनता के संघर्षों को अत्यंत जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
“मैला आंचल” को हिंदी का पहला प्रमुख आंचलिक उपन्यास माना जाता है। इस उपन्यास में बिहार के ग्रामीण समाज, स्वतंत्रता के बाद की सामाजिक परिस्थितियों, गरीबी, अशिक्षा, जातिगत समस्याओं तथा ग्रामीण राजनीति का यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास का मुख्य परिवेश बिहार के मिथिला एवं पूर्णिया क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
फणीश्वर नाथ रेणु स्वतंत्रता आंदोलन तथा नेपाल के लोकतांत्रिक आंदोलन से भी जुड़े रहे। उनकी भाषा शैली में स्थानीय बोलियों, लोकगीतों और ग्रामीण संस्कृति का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
रेणु की अन्य प्रमुख कृतियाँ हैं—
परती परिकथा
दीर्घतपा
जुलूस
ठुमरी
विकल्पों में दिए गए अन्य साहित्यकार भी हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण नाम हैं—
रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रकवि के रूप में प्रसिद्ध थे और उनकी प्रमुख कृतियाँ रश्मिरथी तथा उर्वशी हैं।
शिवपूजन सहाय हिंदी गद्य साहित्य के प्रसिद्ध लेखक थे।
देवकी नंदन खत्री तिलिस्मी उपन्यास चंद्रकांता के लिए प्रसिद्ध हैं।
17. वक्तव्य : एक फायरवॉल (Firewall) एक नेटवर्क फिल्टर के रूप में कार्य करता है।
निष्कर्ष :
I. फायरवॉल को एक कंप्यूटर पर रखा जाता है।
II. फायरवॉल एक दीवार के रूप में काम करता है जो worms के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
Answer: B
Firewall कंप्यूटर नेटवर्क सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर आधारित सुरक्षा प्रणाली होती है जो आने-जाने वाले नेटवर्क ट्रैफिक की निगरानी और नियंत्रण करती है। इसका मुख्य कार्य अनधिकृत पहुँच (Unauthorized Access) को रोकना तथा सुरक्षित नेटवर्क और असुरक्षित नेटवर्क के बीच सुरक्षा कवच प्रदान करना होता है।
दिए गए वक्तव्य में कहा गया है कि फायरवॉल एक नेटवर्क फिल्टर के रूप में कार्य करता है। इसका अर्थ है कि यह डेटा पैकेट्स की जाँच कर यह तय करता है कि कौन-सा ट्रैफिक अनुमति प्राप्त करेगा और कौन-सा रोका जाएगा।
निष्कर्ष I सही नहीं है क्योंकि फायरवॉल केवल एक कंप्यूटर पर ही नहीं लगाया जाता। यह व्यक्तिगत कंप्यूटर, सर्वर, नेटवर्क डिवाइस अथवा पूरे संगठन के नेटवर्क स्तर पर भी स्थापित किया जा सकता है। इसलिए यह कहना कि फायरवॉल “एक कंप्यूटर पर रखा जाता है” वक्तव्य से निश्चित रूप से सिद्ध नहीं होता।
निष्कर्ष II सही है। फायरवॉल हानिकारक प्रोग्रामों, वायरस, मालवेयर और विशेष रूप से नेटवर्क के माध्यम से फैलने वाले worms से सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संदिग्ध ट्रैफिक को रोककर नेटवर्क को सुरक्षित बनाता है।
कंप्यूटर सुरक्षा में फायरवॉल के अतिरिक्त अन्य सुरक्षा उपाय भी महत्वपूर्ण हैं, जैसे—
Antivirus Software
Encryption
Authentication System
Intrusion Detection System (IDS)
वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में फायरवॉल का उपयोग बैंकिंग, ई-गवर्नेंस, ई-कॉमर्स, रक्षा तथा क्लाउड कंप्यूटिंग में व्यापक रूप से किया जाता है।
18. उदवा झील, जिसे हाल ही में ‘रामसर साइट’ का दर्जा मिला है, किस राज्य में स्थित है?
Answer: D
उधवा झील पक्षी विहार (Udhwa Lake Bird Sanctuary) भारत के झारखंड राज्य में स्थित है। यह राज्य का एकमात्र पक्षी अभयारण्य है और हाल ही में इसे रामसर साइट (Ramsar Site) का दर्जा प्रदान किया गया।
उधवा झील साहिबगंज जिले में स्थित है और इसमें मुख्य रूप से दो झीलें शामिल हैं—
पटौरा झील
ब्रह्म जमालपुर झील
यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास है। सर्दियों के मौसम में साइबेरिया, मध्य एशिया तथा अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं।
रामसर साइट उन आर्द्रभूमियों (Wetlands) को कहा जाता है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता दी जाती है। यह मान्यता रामसर सम्मेलन, 1971 के अंतर्गत दी जाती है, जिसका आयोजन ईरान के रामसर नगर में हुआ था। भारत इस सम्मेलन का सदस्य देश है।
भारत में आर्द्रभूमियाँ जैव विविधता संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण तथा पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
झारखंड की अन्य महत्वपूर्ण भौगोलिक एवं पर्यावरणीय विशेषताएँ—
बेतला राष्ट्रीय उद्यान
पालामू टाइगर रिजर्व
छोटानागपुर पठार
प्रमुख खनिज संसाधन — कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक
भारत में हाल के वर्षों में अनेक नई रामसर साइटों को मान्यता दी गई है, जिससे आर्द्रभूमि संरक्षण को बढ़ावा मिला है।
19. युवा पर्वतारोही नीतीश सिंह ने किस देश की सबसे ऊँची पर्वत चोटी ‘माउंट किनाबालू’ पर तिरंगा फहराया?
Answer: D
माउंट किनाबालू (Mount Kinabalu) दक्षिण-पूर्व एशिया की प्रसिद्ध पर्वत चोटियों में से एक है और यह मलेशिया की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है। इसकी ऊँचाई लगभग 4095 मीटर है। यह पर्वत बोर्नियो द्वीप के सबा (Sabah) राज्य में स्थित है।
युवा भारतीय पर्वतारोही नीतीश सिंह द्वारा इस पर्वत शिखर पर तिरंगा फहराना भारत के लिए गौरव का विषय माना गया। इस प्रकार की उपलब्धियाँ युवाओं में साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के प्रति रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
माउंट किनाबालू किनाबालू राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत स्थित है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा प्राप्त है। यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है जिसकी राजधानी कुआलालंपुर है। इसकी प्रशासनिक राजधानी पुत्रजया है। मलेशिया दो मुख्य भागों में विभाजित है—
प्रायद्वीपीय मलेशिया
पूर्वी मलेशिया (बोर्नियो क्षेत्र)
विश्व की कुछ प्रमुख पर्वत चोटियाँ—
माउंट एवरेस्ट — नेपाल
K2 (गॉडविन ऑस्टिन) — पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर क्षेत्र
कंचनजंघा — भारत-नेपाल सीमा
माउंट किनाबालू — मलेशिया
भारत में पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (दार्जिलिंग) तथा नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (उत्तरकाशी) जैसी संस्थाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
20. 2024 में किस महान गायक के सम्मान में उनकी 100वीं जन्म जयंती पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया ?
Answer: B
वर्ष 2024 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और भारतीय डाक विभाग (India Post) द्वारा महान पार्श्व गायक मुकेश चंद माथुर (Mukesh Chand Mathur) की 100वीं जन्म जयंती के अवसर पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamp) और Miniature Sheet जारी की गई।
यह कार्यक्रम 24 जुलाई 2024 को नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी के रंग भवन में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुकेश जी के सुपुत्र और प्रसिद्ध गायक नितिन मुकेश ने अपने पिता की संगीत यात्रा को याद करते हुए संगीतमय श्रद्धांजलि भी प्रस्तुत की।
मुकेश हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायकों में से एक थे। उन्हें विशेष रूप से अभिनेता राज कपूर की आवाज़ के रूप में पहचान मिली। उनकी गायकी में दर्द, भावनात्मक गहराई और मधुरता का अनूठा संगम था। उन्होंने अपने संगीत करियर में लगभग 1300 से अधिक गीत गाए।
उनके प्रसिद्ध गीतों में—
• “कहीं दूर जब दिन ढल जाए”
• “दोस्त दोस्त ना रहा”
• “जीना यहाँ मरना यहाँ”
• “सावन का महीना”
आदि शामिल हैं।
अन्य विकल्पों के बारे में—
• मुहम्मद रफी की 100वीं जयंती के अवसर पर वर्ष 2024 में स्मारक सिक्का जारी करने की घोषणा की गई थी।
• किशोर कुमार का जन्म वर्ष 1929 में हुआ था, इसलिए वर्ष 2024 में उनकी 95वीं जयंती थी।
• महेन्द्र कपूर हिंदी फिल्म संगीत के प्रसिद्ध गायक थे, लेकिन वर्ष 2024 में उनके नाम पर ऐसा डाक टिकट जारी नहीं किया गया।
21. क्लीनिकल सेटिंग्स में सक्रिय चारकोल (Activated Charcoal) का सबसे आम दवा देने का तरीका क्या है?
Answer: B
Activated Charcoal (सक्रिय चारकोल) एक विशेष प्रकार का कार्बन पदार्थ है जिसका उपयोग मुख्यतः विषाक्त पदार्थों (Poisons) और दवा की अधिक मात्रा (Drug Overdose) के उपचार में किया जाता है। इसकी सतह अत्यधिक छिद्रयुक्त (Porous) होती है, जिसके कारण यह विषैले पदार्थों को अवशोषित (Adsorb) कर लेता है और उन्हें शरीर में फैलने से रोकता है।
क्लीनिकल सेटिंग्स में सक्रिय चारकोल का सबसे सामान्य उपयोग मौखिक सस्पेंशन (Oral Suspension) के रूप में किया जाता है। इसे पानी या तरल पदार्थ के साथ मिलाकर रोगी को पिलाया जाता है। यह पेट और आँतों में उपस्थित विषैले पदार्थों को बाँध लेता है, जिससे उनका अवशोषण कम हो जाता है।
Activated Charcoal विशेष रूप से निम्न स्थितियों में उपयोगी होता है—
दवा की अधिक मात्रा (Overdose)
विषाक्त रसायनों का सेवन
खाद्य विषाक्तता के कुछ मामले
आपातकालीन विष उपचार
यह उपचार सबसे प्रभावी तब माना जाता है जब विषाक्त पदार्थ के सेवन के एक घंटे के भीतर इसे दिया जाए।
इंट्रावेनस (IV) या सबक्यूटेनियस इंजेक्शन के रूप में Activated Charcoal नहीं दिया जाता, क्योंकि इसका कार्य पाचन तंत्र के भीतर विषैले पदार्थों को अवशोषित करना होता है। इसी प्रकार इसका उपयोग सामान्यतः टॉपिकल एप्लिकेशन के रूप में भी नहीं किया जाता।
चिकित्सा विज्ञान में विष नियंत्रण के लिए अन्य महत्वपूर्ण उपचार पद्धतियाँ भी हैं—
Gastric Lavage
Antidote Therapy
Hemodialysis
Supportive Care
Activated Charcoal का उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह और नियंत्रित परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ रसायनों और अम्लीय पदार्थों के मामलों में यह प्रभावी नहीं होता।
22. कॉलम-I का कॉलम-II के साथ मिलान कीजिए :
कॉलम-I कॉलम-II
P. अधिकतम विद्युत ऋणी तत्व I. नाइट्रोजन
Q. वर्ग-14 का तत्व जिसकी परमाणु त्रिज्या न्यूनतम हो II. बोरॉन
R. वर्ग-13 का तत्व जो अर्द्ध चालक हो III. कार्बन
S. वर्ग-15 का तत्व जो त्रिबंध बनाता है IV. फ्लुओरीन
Answer: C
यह प्रश्न आवर्त सारणी (Periodic Table) के तत्वों के गुणों पर आधारित है। इसमें विद्युत ऋणात्मकता, परमाणु त्रिज्या, अर्द्धचालक गुण तथा रासायनिक बंधन से संबंधित अवधारणाओं का उपयोग किया गया है।
P. अधिकतम विद्युत ऋणी तत्व — फ्लुओरीन (IV)
आवर्त सारणी में फ्लुओरीन (Fluorine) सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है। विद्युत ऋणात्मकता का अर्थ है किसी परमाणु की रासायनिक बंध में इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता। फ्लुओरीन की विद्युत ऋणात्मकता लगभग 4.0 (Pauling Scale) होती है, जो सभी तत्वों में सर्वाधिक है। यही कारण है कि फ्लुओरीन अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातु माना जाता है।
Q. वर्ग-14 का तत्व जिसकी परमाणु त्रिज्या न्यूनतम हो — कार्बन (III)
वर्ग-14 में प्रमुख तत्व हैं—
कार्बन (C)
सिलिकॉन (Si)
जर्मेनियम (Ge)
टिन (Sn)
लेड (Pb)
किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक परतों की संख्या बढ़ती जाती है। चूँकि कार्बन इस समूह का सबसे ऊपरी तत्व है, इसलिए इसकी परमाणु त्रिज्या सबसे कम होती है।
R. वर्ग-13 का तत्व जो अर्द्ध चालक हो — बोरॉन (II)
वर्ग-13 के तत्वों में बोरॉन, एल्युमिनियम, गैलियम आदि शामिल हैं। इनमें बोरॉन (Boron) एक उपधातु (Metalloid) है और यह अर्द्धचालक (Semiconductor) गुण प्रदर्शित करता है। अर्द्धचालकों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ट्रांजिस्टर, डायोड तथा कंप्यूटर चिप्स में किया जाता है।
S. वर्ग-15 का तत्व जो त्रिबंध बनाता है — नाइट्रोजन (I)
नाइट्रोजन (N₂) के दो परमाणुओं के बीच मजबूत त्रि-आबंध (Triple Bond) पाया जाता है। इस बंध को N≡N द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। यह बंध अत्यधिक मजबूत होता है, जिसके कारण वायुमंडलीय नाइट्रोजन सामान्य परिस्थितियों में कम अभिक्रियाशील होती है।
इस प्रकार सही मिलान है—
P → IV (फ्लुओरीन)
Q → III (कार्बन)
R → II (बोरॉन)
S → I (नाइट्रोजन)
23. निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों का रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकारों के साथ मिलान कीजिए :
रासायनिक समीकरण रासायनिक अभिक्रिया का प्रकार
a. C(s) + O₂(g) → CO₂(g) 1. विस्थापन अभिक्रिया
b. CaCO₃(s) ⟶ CaO(s) + CO₂(g) 2. द्वि-विस्थापन अभिक्रिया
c. Pb(s) + CuCl₂(aq) → PbCl₂(aq) + Cu(s) 3. अपघटन अभिक्रिया
d. Na₂SO₄(aq) + BaCl₂(aq) → BaSO₄(s) + 2NaCl(aq) 4. संयोजन अभिक्रिया
Answer: A
रासायनिक अभिक्रियाएँ (Chemical Reactions) वे प्रक्रियाएँ हैं जिनमें अभिकारकों (Reactants) के रासायनिक गुण बदलकर नए पदार्थों का निर्माण होता है। अभिक्रियाओं को उनके स्वरूप और उत्पादों के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
a. C(s) + O₂(g) → CO₂(g)
इस अभिक्रिया में कार्बन और ऑक्सीजन मिलकर एक ही उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं। जब दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं, तो उसे संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) कहते हैं।
यहाँ—
a → 4 (संयोजन अभिक्रिया)
b. CaCO₃(s) ⟶(heat) CaO(s) + CO₂(g)
इस अभिक्रिया में कैल्शियम कार्बोनेट ऊष्मा देने पर टूटकर कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। किसी एक यौगिक का टूटकर दो या अधिक सरल पदार्थों में बदलना अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) कहलाता है।
यह एक उष्मीय अपघटन (Thermal Decomposition) का उदाहरण है क्योंकि इसमें ऊष्मा का उपयोग किया गया है।
यहाँ—
b → 3 (अपघटन अभिक्रिया)
c. Pb(s) + CuCl₂(aq) → PbCl₂(aq) + Cu(s)
इस अभिक्रिया में अधिक अभिक्रियाशील धातु लेड (Pb), कम अभिक्रियाशील धातु कॉपर (Cu) को उसके यौगिक से विस्थापित कर देती है। ऐसी अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) कहते हैं।
धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) के आधार पर अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को विस्थापित कर सकती है।
यहाँ—
c → 1 (विस्थापन अभिक्रिया)
d. Na₂SO₄(aq) + BaCl₂(aq) → BaSO₄(s) + 2NaCl(aq)
इस अभिक्रिया में दो यौगिकों के आयनों का परस्पर आदान-प्रदान होता है और बेरियम सल्फेट (BaSO₄) का सफेद अवक्षेप बनता है। ऐसी अभिक्रिया को द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) कहते हैं।
यह एक अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) भी है क्योंकि इसमें अघुलनशील ठोस पदार्थ बनता है।
यहाँ—
d → 2 (द्वि-विस्थापन अभिक्रिया)
24. कॉपर के विद्युत अपघटनी परिष्करण के समय उपयोग किए जाने वाले ऐनोड, कैथोड और विद्युत अपघट्य क्रमशः होते हैं—
Answer: A
विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) धातुओं को शुद्ध करने की एक महत्वपूर्ण विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया है। इस विधि का उपयोग मुख्यतः कॉपर, सिल्वर, गोल्ड, जिंक आदि धातुओं के शोधन में किया जाता है।
कॉपर के विद्युत अपघटनी परिष्करण में—
अशुद्ध कॉपर (Impure Copper) को ऐनोड (Anode) बनाया जाता है।
शुद्ध कॉपर (Pure Copper) की पतली पट्टी को कैथोड (Cathode) बनाया जाता है।
अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन (Acidified Copper Sulphate Solution) को विद्युत अपघट्य (Electrolyte) के रूप में प्रयोग किया जाता है।
जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तब ऐनोड पर उपस्थित अशुद्ध कॉपर ऑक्सीकरण होकर विलयन में Cu²⁺ आयन के रूप में घुल जाता है—
Cu→Cu^(2+)+2^(e-)
इसके बाद ये आयन कैथोड पर जाकर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं और शुद्ध कॉपर के रूप में जमा हो जाते हैं—
Cu^(2+)+2^(e-) → Cu
इस प्रक्रिया में अशुद्धियाँ दो प्रकार से अलग होती हैं—
अघुलनशील अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं जिन्हें ऐनोड मड (Anode Mud) कहते हैं।
घुलनशील अशुद्धियाँ विलयन में बनी रहती हैं।
ऐनोड मड से कई बहुमूल्य धातुएँ जैसे—
सोना (Gold)
चाँदी (Silver)
प्लैटिनम
प्राप्त की जाती हैं।
कॉपर विद्युत का उत्कृष्ट चालक होता है, इसलिए इसका उपयोग—
विद्युत तारों
मोटरों
जनरेटरों
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों
में व्यापक रूप से किया जाता है। शुद्ध कॉपर की आवश्यकता विद्युत उद्योग में अत्यधिक होती है, इसलिए विद्युत अपघटनी परिष्करण का औद्योगिक महत्व बहुत अधिक है।
25. कॉलम-I में दिए गए तत्वों को कॉलम-II में दिए गए उसके इलेक्ट्रॉनों के वितरण के साथ मिलाइए :
कॉलम-I कॉलम-II
1. ऑक्सीजन a. 2,8,5
2. नियॉन b. 2,6
3. ऐलुमिनियम c. 2,8
4. फॉस्फोरस d. 2,8,3
Answer: C
किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) उसके परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के विभिन्न ऊर्जा स्तरों या कोशों में वितरण को दर्शाता है। इलेक्ट्रॉनों का वितरण मुख्यतः बोर के परमाणु मॉडल के आधार पर किया जाता है।
ऑक्सीजन (Oxygen) का परमाणु क्रमांक 8 होता है। इसलिए इसके 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। प्रथम कोश (K-shell) में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन और द्वितीय कोश (L-shell) में शेष 6 इलेक्ट्रॉन व्यवस्थित होते हैं।
इसका विन्यास — 2,6
अर्थात —
1 → b
नियॉन (Neon) का परमाणु क्रमांक 10 है। यह एक अक्रिय गैस (Noble Gas) है और इसका बाह्य कोश पूर्ण भरा होता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास — 2,8
अर्थात —
2 → c
ऐलुमिनियम (Aluminium) का परमाणु क्रमांक 13 है। इसके इलेक्ट्रॉनों का वितरण — 2,8,3 होता है। ऐलुमिनियम एक हल्की धातु है और इसका उपयोग विमान निर्माण, विद्युत तारों तथा घरेलू उपकरणों में किया जाता है।
अर्थात —
3 → d
फॉस्फोरस (Phosphorus) का परमाणु क्रमांक 15 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास — 2,8,5 होता है। फॉस्फोरस जीवित कोशिकाओं, DNA तथा उर्वरकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अर्थात —
4 → a
इस प्रकार सही मिलान है—
1 → b
2 → c
3 → d
4 → a
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर ही किसी तत्व के—
रासायनिक गुण
संयोजकता
अभिक्रियाशीलता
आवर्त सारणी में स्थान
का निर्धारण किया जाता है।
26. कॉलम-I की भौतिक राशियों का कॉलम-II की उपयुक्त राशियों के साथ मिलान कीजिए :
कॉलम-I कॉलम-II
i. कार्य (Work) a. W/t
ii. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) b. 1/2 mv²
iii. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) c. F × s
iv. शक्ति (Power) d. mgh
Answer: A
भौतिकी में कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति यांत्रिकी (Mechanics) के महत्वपूर्ण विषय हैं। इनका उपयोग वस्तुओं की गति, बल तथा ऊर्जा परिवर्तन को समझने में किया जाता है।
कार्य (Work) तब किया जाता है जब किसी वस्तु पर बल लगाने से उसमें विस्थापन उत्पन्न हो। कार्य का सूत्र होता है—
Work = Force × Displacement
अर्थात
W = F × s
इसलिए कार्य का सही मिलान c से होगा।
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) किसी वस्तु में उसकी स्थिति या ऊँचाई के कारण संचित ऊर्जा होती है। इसका सूत्र—
Potential Energy = mgh
जहाँ
m = द्रव्यमान
g = गुरुत्वीय त्वरण
h = ऊँचाई
अतः स्थितिज ऊर्जा का सही मिलान d से होगा।
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) किसी वस्तु की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा होती है। इसका सूत्र—
Kinetic Energy = 1/2 mv²
यहाँ
m = द्रव्यमान
v = वेग
अतः गतिज ऊर्जा का सही मिलान b से होगा।
शक्ति (Power) कार्य करने की दर को कहते हैं। अर्थात एकांक समय में किया गया कार्य शक्ति कहलाता है। इसका सूत्र—
Power = Work / Time
अर्थात
P = W/t
इसलिए शक्ति का सही मिलान a से होगा।
इस प्रकार सही मिलान है—
i → c
ii → d
iii → b
iv → a
ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, बल्कि इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
27. एक कुली 15 किग्रा के सामान को जमीन से उठाकर अपने सिर पर 2 मी ऊँचाई तक 5 सेकण्ड में रखता है। दूसरा कुली उसी डिब्बे/सामान को समान ऊँचाई तक 10 सेकण्ड में उठाकर रखता है। उपरोक्त स्थिति के लिये सही विकल्प चुनिए :
Answer: C
भौतिक विज्ञान में कार्य (Work) का मान निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है—
कार्य = बल × विस्थापन
अर्थात,
W = mgh
जहाँ—
• m = वस्तु का द्रव्यमान
• g = गुरुत्वीय त्वरण
• h = ऊँचाई
प्रश्न में दोनों कुलियों ने—
• समान द्रव्यमान (15 kg) का सामान उठाया है।
• समान ऊँचाई (2 m) तक उठाया है।
इसलिए दोनों द्वारा किया गया कार्य समान होगा।
पहले कुली द्वारा किया गया कार्य—
W = 15 × 9.8 × 2
दूसरे कुली द्वारा किया गया कार्य भी—
W = 15 × 9.8 × 2
अर्थात दोनों कुलियों का कार्य बराबर है।
हालाँकि दोनों ने यह कार्य अलग-अलग समय में किया है। पहला कुली 5 सेकंड में तथा दूसरा कुली 10 सेकंड में कार्य पूरा करता है। यहाँ समय का अंतर शक्ति (Power) को प्रभावित करता है।
शक्ति का सूत्र—
Power = Work / Time
चूँकि पहले कुली ने समान कार्य कम समय में किया है, इसलिए उसकी शक्ति अधिक होगी। दूसरा कुली अधिक समय लेता है, इसलिए उसकी शक्ति कम होगी।
इस प्रकार—
• कार्य (Work) — दोनों का समान है।
• शक्ति (Power) — पहले कुली की अधिक है।
28. निम्नलिखित परिपथ में 10 Ω प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा है :
Answer: B
यह प्रश्न कक्षा 10 विज्ञान के “विद्युत” (Electricity) अध्याय के एक प्रसिद्ध परिपथ (Circuit) पर आधारित है
दिए गए परिपथ में 20 Ω, 10 Ω तथा 5 Ω के तीनों प्रतिरोधक समानांतर क्रम (Parallel Combination) में जुड़े हुए हैं। समानांतर संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर (Voltage) समान होता है।
परिपथ में बैटरी का विभवांतर 6 V दिया गया है। इसलिए 10 Ω प्रतिरोधक के सिरों पर भी 6 V विभवांतर होगा।
ओम के नियम (Ohm’s Law) के अनुसार—
V = IR
अतः,
I = V / R
यहाँ,
V = 6 V
R = 10 Ω
इसलिए,
I = 6 / 10 = 0.6 A
अतः 10 Ω प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा 0.6 A होगी।
समानांतर संयोजन की मुख्य विशेषताएँ—
प्रत्येक शाखा में विभवांतर समान होता है।
कुल धारा विभिन्न शाखाओं में विभाजित हो जाती है।
तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance) सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
विद्युत परिपथों में समानांतर संयोजन का उपयोग घरों की वायरिंग में किया जाता है ताकि सभी उपकरण स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
29. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही विकल्प चुनें।
कथन (A): 7a/(2 + b)≠7a/2 + 7a/b
कारण (R): वितरण नियम (Distributive Law) गुणन का योग पर लागू होता है, न कि भाग का योग पर।
Answer: A
बीजगणित (Algebra) में वितरण नियम (Distributive Law) एक महत्वपूर्ण गणितीय नियम है। यह नियम बताता है कि गुणा को जोड़ या घटाव पर वितरित किया जा सकता है।
उदाहरण—
a × (b + c) = ab + ac
लेकिन यह नियम भाग (Division) के लिए लागू नहीं होता। इसलिए—
a / (b + c) ≠ a/b + a/c
इसी आधार पर दिया गया कथन—
7a / (2 + b) ≠ 7a/2 + 7a/b
सही है।
इसे संख्यात्मक उदाहरण से समझ सकते हैं। यदि a = 2 तथा b = 2 रखें, तब—
LHS = 7×2 / (2 + 2)
= 14/4
= 3.5
जबकि,
RHS = 14/2 + 14/2
= 7 + 7
= 14
दोनों मान समान नहीं हैं। इसलिए कथन (A) सत्य है।
कारण (R) भी सत्य है क्योंकि वितरण नियम केवल गुणा का जोड़ या घटाव पर लागू होता है। भाग के लिए यह नियम मान्य नहीं होता। यही कारण कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
30. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं सही विकल्प चुनिए :
कथन (S₁): यदि tanθ + cotθ = 2, तो tan²θ + cot²θ = 4
कथन (S₂): यदि cosec A = √2, तो
(2sin^2 A + 3cot^2 A)/(4tan^2 A – 2cos^2 A)=4/3
Answer: C
पहले कथन S₁ का सत्यापन करते हैं।
दिया गया है—
tanθ + cotθ = 2
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर—
(tanθ + cotθ)² = 2²
tan²θ + cot²θ + 2tanθ•cotθ = 4
हम जानते हैं कि—
tanθ × cotθ = 1
अतः,
tan²θ + cot²θ + 2 = 4
tan²θ + cot²θ = 2
लेकिन कथन में दिया गया है कि—
tan²θ + cot²θ = 4
जो कि गलत है। इसलिए कथन S₁ असत्य है।
अब कथन S₂ पर विचार करते हैं।
दिया है—
cosec A = √2
हम जानते हैं कि—
cosec 45° = √2
अर्थात A = 45°
अब,
sin 45° = 1/√2
⇒ sin²45° = 1/2
cos 45° = 1/√2
⇒ cos²45° = 1/2
tan 45° = 1
⇒ tan²45° = 1
cot 45° = 1
⇒ cot²45° = 1
अब इन मानों को दिए गए व्यंजक में रखने पर—
(2sin²A + 3cot²A) / (4tan²A − 2cos²A)
= [2(1/2) + 3(1)] / [4(1) − 2(1/2)]
= (1 + 3) / (4 − 1)
= 4/3
यह कथन में दिए गए मान के बराबर है। इसलिए कथन S₂ सत्य है।
इस प्रकार—
कथन S₁ असत्य है।
कथन S₂ सत्य है।
इसलिए सही विकल्प C है।
31. एक कलश में 13, 14, 15, …, 40 तक की संख्याओं वाले टिकट हैं। इसमें से यादृच्छिक रूप से एक टिकट निकाला जाता है। तो निकाले गये टिकट की संख्या का 18 से बड़ा और 6 का गुणज होने की प्रायिकता है :
Answer: B
कुल टिकटों की संख्या = 40 − 13 + 1
= 28
18 से बड़ी तथा 6 के गुणज संख्याएँ हैं—
24, 30, 36
अनुकूल परिणामों की संख्या = 3
प्रायिकता = अनुकूल परिणाम / कुल परिणाम
= 3/28
∴ सही उत्तर 3/28 है।
32. यदि x = (√2+ 1)/(√2- 1) तथा y=(√2- 1)/(√2+ 1) , तो x²+y²+xy का मान है :
Answer: D
दिया है—
x = (√2+ 1)/(√2- 1) , y=(√2- 1)/(√2+ 1), xy = 1
और,
x + y=[(√2+ 1)^2+ (√2- 1)^2 ]/[(√2+ 1)(√2- 1) ]
=[(2 + 1 + 2√2)+ (2 + 1 – 2√2) ]/[2 – 1]
=(3 + 2√2+ 3 – 2√2)/1
= 6
अब,
x² + y² + xy
= (x + y)² − 2xy + xy
= 6² − 2(1) + 1
= 36 − 2 + 1
= 35
∴ सही उत्तर D (35) है।
33. समांतर श्रेणी 213, 205, 197, ………….., 37 में पदों की कुल संख्या है :
Answer: C
दिया गया है—
प्रथम पद, a = 213
सार्व अंतर, d = 205 − 213
= −8
अंतिम पद, an = 37
समांतर श्रेणी के nवें पद का सूत्र—
an = a + (n − 1)d
मान रखने पर—
37 = 213 + (n − 1)(−8)
37 − 213 = −8(n − 1)
−176 = −8(n − 1)
n − 1 = 22
n = 23
∴ पदों की कुल संख्या = 23
34. संविधान के अनुच्छेदों से सम्बन्धित सूची I का मिलान प्रावधानों से संबंधित सूची II से करके कूट का उपयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिये :-
सूची I (संविधान के अनुच्छेद) सूची II (प्रावधान)
a. अनुच्छेद 14 I. राज्य, धर्म, वंश, जाति, लिंग, स्थान, जन्म या इनमें से कोई भी आधार पर किसी भी नागरिक से विभेद नहीं करेगा।
b. अनुच्छेद 15 II. भारत के किसी भी नागरिक को भारत राज्य की सीमा में विधि के समक्ष समानता के संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।
c. अनुच्छेद 16 III. अस्पृश्यता का अंत किया जाता है तथा इसके कारण उत्पन्न किसी भी अवांछित स्थिति को रोकना।
d. अनुच्छेद 17 IV. राज्य के नागरिकों हेतु किसी भी कार्यालय में नियुक्ति तथा रोजगार लेने की अवसर की समता।
Answer: B
भारतीय संविधान के भाग-III में वर्णित मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला माने जाते हैं। इन अधिकारों का उद्देश्य नागरिकों को सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी समानता प्रदान करना है। अनुच्छेद 14 से 18 तक “समानता के अधिकार” (Right to Equality) का वर्णन किया गया है। यह अधिकार भारत को एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष तथा समतामूलक राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अनुच्छेद 14 “विधि के समक्ष समानता” तथा “विधियों के समान संरक्षण” की गारंटी देता है। इसका अर्थ है कि राज्य किसी भी व्यक्ति के साथ मनमाना व्यवहार नहीं कर सकता। यह सिद्धांत ब्रिटिश संविधान के “Equality before Law” तथा अमेरिकी संविधान के “Equal Protection of Laws” से प्रेरित है। इसलिए अनुच्छेद 14 का सही मिलान सूची-II के कथन II से होगा।
अनुच्छेद 15 राज्य को यह निर्देश देता है कि वह किसी भी नागरिक के साथ केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान आदि के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा। इसी अनुच्छेद के अंतर्गत महिलाओं, बच्चों तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति भी दी गई है। यह सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करता है। अतः अनुच्छेद 15 का सही संबंध कथन I से है।
अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार और सरकारी नियुक्तियों में अवसर की समानता प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में समान अवसर सुनिश्चित करना है। साथ ही राज्य को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण प्रदान करने का अधिकार भी देता है। यह प्रशासनिक समानता और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को सुनिश्चित करता है। इसलिए अनुच्छेद 16 का सही मिलान कथन IV से होगा।
अनुच्छेद 17 भारतीय समाज में प्रचलित अस्पृश्यता को समाप्त करता है। संविधान ने अस्पृश्यता को अपराध घोषित किया और इसके किसी भी रूप को दंडनीय बनाया। इस अनुच्छेद को प्रभावी बनाने के लिए संसद ने अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 पारित किया, जिसे बाद में सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1976 नाम दिया गया। यह अनुच्छेद सामाजिक समानता और मानव गरिमा की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इसका सही संबंध कथन III से है।
इस प्रकार सही मिलान है—
a → II
b → I
c → IV
d → III
भारतीय संविधान में समानता का अधिकार केवल कानूनी समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण बनाना भी है।
35. निम्नलिखित में से किसने लोकतंत्र को ‘बहुमत का अत्याचार’ बताया ?
Answer: C
फ्रांसीसी विचारक एलेक्सिस डी टोकेविले (Alexis de Tocqueville) ने लोकतंत्र के संदर्भ में “Tyranny of the Majority” अर्थात “बहुमत का अत्याचार” की अवधारणा प्रस्तुत की थी। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “Democracy in America” (1835-1840) में इस विचार का विस्तृत वर्णन किया।
डी टोकेविले का मानना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुमत के पास अत्यधिक शक्ति केंद्रित हो सकती है, जिसके कारण अल्पसंख्यकों के अधिकारों और विचारों की उपेक्षा होने लगती है। यदि बहुमत अपनी शक्ति का दुरुपयोग करे, तो वह समाज में वैचारिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों को दबा सकता है। इसी स्थिति को उन्होंने “बहुमत का अत्याचार” कहा।
लोकतंत्र का मूल सिद्धांत जनसत्ता और प्रतिनिधित्व पर आधारित है, लेकिन आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में केवल बहुमत का शासन पर्याप्त नहीं माना जाता। इसलिए संविधान, मौलिक अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका, संघवाद तथा विधि का शासन जैसी व्यवस्थाएँ स्थापित की गईं ताकि अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
रूसो ने “सामान्य इच्छा” (General Will) का सिद्धांत दिया था।
मार्क ट्वेन अमेरिकी लेखक और व्यंग्यकार थे।
जॉन डनिंग ब्रिटिश राजनीतिक व्यक्तित्व थे, लेकिन “बहुमत का अत्याचार” की अवधारणा उनसे संबंधित नहीं है।
भारतीय संविधान में भी बहुमत की शक्ति को सीमित करने हेतु—
मौलिक अधिकार
न्यायिक समीक्षा
संघीय व्यवस्था
स्वतंत्र चुनाव आयोग
जैसी संवैधानिक व्यवस्थाएँ की गई हैं।
36. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और नीचे दिये विकल्पों में से सही विकल्प चुनिएः
I. फ्रांस्वा बर्नियर का राजकुमार दारा शिकोह से घनिष्ठ संबंध था।
II. बर्नियर ने देश के कई भागों की यात्रा की और वृत्तांत लिखे।
III. उन्होंने अपना प्रमुख लेखन फ्रांस के राजा और औरंगजेब को समर्पित किया।
Answer: D
फ्रांस्वा बर्नियर (François Bernier) एक फ्रांसीसी चिकित्सक, राजनीतिक दार्शनिक तथा इतिहासकार थे। वे 1656 से 1668 के बीच भारत में रहे और मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल के अंतिम चरण तथा उत्तराधिकार युद्ध के समय भारत आए थे।
• बर्नियर का मुगल राजकुमार दारा शिकोह से घनिष्ठ संबंध था। वे दारा शिकोह के निजी चिकित्सक के रूप में भी कार्य करते थे। इसलिए कथन I सत्य है।
• भारत में अपने लगभग 12 वर्षों के प्रवास के दौरान उन्होंने दिल्ली, आगरा, कश्मीर, बंगाल तथा अहमदाबाद सहित कई क्षेत्रों की यात्रा की। उन्होंने अपने अनुभवों, मुगल प्रशासन, सामाजिक व्यवस्था तथा आर्थिक दशा का विस्तृत वर्णन अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “Travels in the Mughal Empire” में किया। इसलिए कथन II भी सत्य है।
• बर्नियर ने अपने प्रमुख वृत्तांत को मुख्य रूप से फ्रांस के राजा लुई XIV को समर्पित किया था। दारा शिकोह की मृत्यु के बाद वे औरंगजेब के शासनकाल में भी दरबार से जुड़े रहे तथा उनके लेखों में औरंगजेब की नीतियों और मुगल प्रशासन का उल्लेख मिलता है। इसलिए कथन III भी सत्य है।
NCERT कक्षा 12 इतिहास के अध्याय “यात्रियों के नजरिए” (Themes in Indian History – Part II) में फ्रांस्वा बर्नियर के विवरण को मुगलकालीन भारत के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में बताया गया है। उनके लेखों से उस समय की—
• भूमि व्यवस्था
• शाही दरबार
• सामाजिक संरचना
• व्यापार एवं अर्थव्यवस्था
• मुगल उत्तराधिकार युद्ध
के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
37. नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए और सही उत्तर चुनिए।
कथन I: 1870 के दशक तक, भारतीय पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए व्यंग्यचित्र और कार्टून प्रकाशित होने लगे थे।
कथन II: कुछ व्यंग्यचित्रों में शिक्षित भारतीयों के पश्चिमी रुचि और परिधानों के प्रति आकर्षण की प्रशंसा की गई, जबकि अन्य सामाजिक परिवर्तन की आशा कर रहे थे।
Answer: D
19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में आधुनिक प्रेस और समाचार पत्रों का तेजी से विकास हुआ। इसी दौर में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित व्यंग्यचित्र (Caricatures) और कार्टून भारतीय पत्रिकाओं तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित होने लगे। विशेष रूप से 1870 के दशक तक यह प्रवृत्ति काफी लोकप्रिय हो चुकी थी। इसलिए पहला कथन सही है।
व्यंग्यचित्र उस समय समाज और राजनीति पर टिप्पणी करने का प्रभावी माध्यम थे। इन चित्रों के माध्यम से अंग्रेजी शासन, सामाजिक कुरीतियों, आधुनिक शिक्षा, पाश्चात्य संस्कृति तथा भारतीय समाज में हो रहे परिवर्तनों को दर्शाया जाता था।
कुछ कार्टूनों में शिक्षित भारतीयों द्वारा पश्चिमी पहनावे, भाषा और जीवन शैली अपनाने को आधुनिकता का प्रतीक बताकर प्रस्तुत किया गया। वहीं कई व्यंग्यचित्र ऐसे भी थे जो सामाजिक सुधारों, महिला शिक्षा, जातिगत भेदभाव के विरोध तथा समाज में परिवर्तन की आवश्यकता को उजागर करते थे। इसलिए दूसरा कथन भी सही है।
इस काल में भारतीय समाज में अनेक सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन चल रहे थे, जैसे—
ब्राह्मो समाज
आर्य समाज
प्रार्थना समाज
अलीगढ़ आंदोलन
समाचार पत्र और पत्रिकाएँ इन आंदोलनों के विचारों को जनता तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण माध्यम बने।
औपनिवेशिक भारत में प्रेस ने राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और राजनीतिक जागरूकता के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
38. फैजल सूफीवाद का अनुयायी बनना चाहता था। दिए गए गुणों में से उस गुण को पहचानिए जो सूफीवाद के सिद्धांतों के अनुरूप हैं और जिसे फैजल से अपनाने की अपेक्षा की जाती है।
साथियों के प्रति करुणा
अधिक शक्ति की इच्छा
विलासितापूर्ण जीवन जीने की इच्छा
सांसारिक मामलों से अनासक्ति
Answer: D
सूफीवाद (Sufism) इस्लाम की रहस्यवादी धारा मानी जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईश्वर के प्रति प्रेम, मानवता की सेवा, आत्मिक शुद्धि तथा सांसारिक मोह-माया से दूर रहना था। सूफी संत बाहरी आडंबरों की अपेक्षा आंतरिक पवित्रता और आध्यात्मिक अनुभव को अधिक महत्व देते थे।
सूफी संतों की शिक्षाओं में—
प्रेम
करुणा
सहिष्णुता
मानव सेवा
भाईचारा
त्याग
जैसे गुणों पर विशेष बल दिया गया। इसलिए “साथियों के प्रति करुणा” सूफीवाद का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
सूफी संत सामान्यतः सांसारिक वैभव, सत्ता और विलासिता से दूर रहते थे। वे सरल जीवन, ध्यान, ईश्वर भक्ति तथा आत्मसंयम को महत्व देते थे। इसलिए “सांसारिक मामलों से अनासक्ति” भी सूफीवाद की प्रमुख विशेषता है।
इसके विपरीत “अधिक शक्ति की इच्छा” तथा “विलासितापूर्ण जीवन” सूफी सिद्धांतों के विपरीत माने जाते हैं। सूफी संत भौतिक सुखों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से दूर रहने का संदेश देते थे।
भारत में सूफी आंदोलन विशेष रूप से दिल्ली सल्तनत काल में लोकप्रिय हुआ। प्रमुख सूफी सिलसिले थे—
चिश्ती सिलसिला
सुहरावर्दी सिलसिला
कादिरी सिलसिला
नक्शबंदी सिलसिला
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, निजामुद्दीन औलिया, बाबा फरीद तथा शेख सलीम चिश्ती भारत के प्रसिद्ध सूफी संतों में शामिल थे।
सूफी आंदोलन ने भारतीय समाज में धार्मिक सहिष्णुता, सांस्कृतिक समन्वय और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
39. चालुक्यों के स्थान पर ______ और ______ वंश का उदय हुआ।
Answer: C
दक्षिण भारत के मध्यकालीन इतिहास में चालुक्य वंश का महत्वपूर्ण स्थान था। चालुक्यों ने दक्कन क्षेत्र में लंबे समय तक शासन किया। विशेष रूप से पश्चिमी चालुक्य वंश के पतन के बाद दक्षिण भारत में कई क्षेत्रीय शक्तियों का उदय हुआ।
चालुक्यों के पतन के पश्चात मुख्य रूप से यादव वंश तथा काकतीय वंश शक्तिशाली रूप में उभरे। इसलिए सही विकल्प “यादव और काकतीय” है।
यादव वंश को सेउना वंश भी कहा जाता है। इनकी राजधानी देवगिरि (वर्तमान दौलताबाद, महाराष्ट्र) थी। यादव शासकों ने दक्कन क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित किया। इस वंश का प्रमुख शासक रामचंद्र था। बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि पर आक्रमण किया।
काकतीय वंश का उदय वर्तमान तेलंगाना क्षेत्र में हुआ। इनकी राजधानी वारंगल थी। काकतीय शासकों ने दक्षिण भारत में प्रशासन, सिंचाई और व्यापार को बढ़ावा दिया। इस वंश की प्रसिद्ध शासिका रुद्रमादेवी थीं, जो मध्यकालीन भारत की प्रमुख महिला शासकों में गिनी जाती हैं।
दक्षिण भारत में इसी काल में अन्य महत्वपूर्ण राजवंश भी सक्रिय थे—
चोल वंश — तमिल क्षेत्र
पांड्य वंश — मदुरै क्षेत्र
होयसला वंश — कर्नाटक क्षेत्र
चालुक्य, चोल, पल्लव, पांड्य, यादव तथा काकतीय वंशों ने दक्षिण भारत की कला, स्थापत्य, मंदिर निर्माण तथा क्षेत्रीय संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
40. निम्न में से कौन सा स्थान मुगल काल में एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र नहीं था ?
Answer: D
मुगल काल में भारत का व्यापार और वाणिज्य अत्यंत विकसित था। इस समय देश के अनेक नगर आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख केन्द्र बन चुके थे। मुगल शासकों द्वारा सड़कों, सरायों, मंडियों तथा प्रशासनिक व्यवस्था के विकास से व्यापार को काफी प्रोत्साहन मिला।
आगरा, मुगल साम्राज्य की प्रमुख राजधानी होने के कारण एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक एवं औद्योगिक केन्द्र था। यहाँ वस्त्र, कीमती पत्थर, धातु उद्योग तथा हस्तशिल्प का बड़ा व्यापार होता था। यूरोपीय यात्री टैवर्नियर और बर्नियर ने भी आगरा की समृद्धि का वर्णन किया है।
बुरहानपुर दक्कन और उत्तर भारत के बीच व्यापारिक संपर्क का प्रमुख केन्द्र था। यह विशेष रूप से सूती वस्त्र उद्योग और कपड़ा व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। यह नगर उत्तर-दक्षिण व्यापार मार्ग पर स्थित होने के कारण आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था।
लाहौर मुगल काल का एक प्रमुख व्यापारिक नगर था। यह मध्य एशिया और भारत के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था। यहाँ से रेशम, घोड़े, मसाले तथा विलासिता की वस्तुओं का व्यापार होता था। मुगल काल में लाहौर सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।
इसके विपरीत गोलकुंडा मुगल साम्राज्य का प्रमुख व्यापारिक केंद्र नहीं था। यह दक्षिण भारत के कुतुबशाही वंश के अधीन था और हीरे की खानों के लिए प्रसिद्ध था। विशेष रूप से कोहिनूर हीरा गोलकुंडा क्षेत्र से संबंधित माना जाता है। यद्यपि गोलकुंडा व्यापारिक दृष्टि से समृद्ध था, लेकिन यह मुगल साम्राज्य के प्रमुख व्यापारिक नगरों में शामिल नहीं था।
मुगल काल में प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ थीं—
सूती एवं रेशमी वस्त्र
मसाले
नील
चीनी
अफीम
कीमती पत्थर
यूरोपीय कंपनियों जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी, डच ईस्ट इंडिया कंपनी तथा फ्रांसीसी कंपनियों ने भी इसी काल में भारतीय व्यापार में सक्रिय भाग लेना प्रारंभ किया।
41. निम्नलिखित में से किसमें जल सिंचाई प्रणाली का उल्लेख है?
Answer: A
अर्थशास्त्र में जल सिंचाई प्रणाली का विस्तृत उल्लेख मिलता है। यह ग्रंथ कौटिल्य (चाणक्य/विष्णुगुप्त) द्वारा रचित माना जाता है, जो मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री और राजनीतिक सलाहकार थे।
अर्थशास्त्र प्राचीन भारत का महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक ग्रंथ है। इसमें राज्य प्रशासन, कर व्यवस्था, कृषि, सिंचाई, व्यापार, न्याय, जासूसी व्यवस्था तथा सैन्य संगठन जैसे विषयों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
कौटिल्य ने कृषि को राज्य की आर्थिक समृद्धि का आधार माना। उन्होंने सिंचाई व्यवस्था, नहर निर्माण, जलाशयों तथा बाँधों के निर्माण पर विशेष बल दिया। अर्थशास्त्र में उल्लेख है कि राज्य का दायित्व है कि वह किसानों के लिए जल की पर्याप्त व्यवस्था करे।
मौर्य काल में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कृत्रिम सिंचाई प्रणाली विकसित की गई थी। सुदर्शन झील इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसका निर्माण मूलतः चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में कराया गया था। बाद में इसका पुनर्निर्माण शक शासक रुद्रदामन ने कराया।
नीतिसार कामंदक द्वारा रचित राजनीतिक ग्रंथ है।
अष्टाध्यायी पाणिनि द्वारा रचित संस्कृत व्याकरण का प्रसिद्ध ग्रंथ है।
षड्दर्शन भारतीय दर्शन की छह प्रमुख दार्शनिक परंपराओं को संदर्भित करता है।
अर्थशास्त्र केवल राजनीतिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि प्राचीन भारत की आर्थिक और प्रशासनिक संरचना को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत भी माना जाता है।
42. यहाँ दो कथन दिये गये हैं, जिन्हें क्रमशः अभिकथन (A) और कारण (R) के रूप में चिह्नित किया गया है। नीचे दिये गये कोड के अनुसार अपना उत्तर चुनें।
कथन (A): विश्व के अधिकतर मरुस्थल उपोष्ण भागों में स्थित महाद्वीपों के पश्चिमी किनारे पर स्थित होते हैं।
कारण (R): महासागरीय धारायें (व्यापारिक पवनें) समुद्र से नमी लेकर पूर्वी तट को नमी प्रदान करती हैं और पश्चिमी तट तक पहुँचते-पहुँचते नमी घटती जाती है।
Answer: B
विश्व के अधिकांश प्रमुख मरुस्थल उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों (Subtropical Regions) में महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं। यह भौगोलिक तथ्य जलवायु विज्ञान का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत माना जाता है। उदाहरण के रूप में—
सहारा मरुस्थल — अफ्रीका का पश्चिमी भाग
अटाकामा मरुस्थल — दक्षिण अमेरिका का पश्चिमी तट
कालाहारी मरुस्थल — दक्षिणी अफ्रीका
ऑस्ट्रेलियाई मरुस्थल — पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया
इन मरुस्थलों के निर्माण में मुख्य रूप से उपोष्ण उच्च दाब पेटी, शुष्क व्यापारिक पवनें, तथा ठंडी महासागरीय धाराएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए कथन (A) सही है।
कारण (R) भी सही है। व्यापारिक पवनें सामान्यतः महासागरों से नमी लेकर महाद्वीपों के पूर्वी तटों पर वर्षा कराती हैं। जब ये पवनें महाद्वीपों के आंतरिक भागों से गुजरती हैं, तो उनकी नमी कम होती जाती है। पश्चिमी तट तक पहुँचते-पहुँचते ये अपेक्षाकृत शुष्क हो जाती हैं।
इसके अतिरिक्त पश्चिमी तटों के निकट बहने वाली ठंडी महासागरीय धाराएँ वायुमंडल को स्थिर और शुष्क बनाती हैं, जिससे वर्षा की संभावना कम हो जाती है। उदाहरण—
पेरू धारा — अटाकामा मरुस्थल
बेंगुएला धारा — नामीब मरुस्थल
कैनरी धारा — सहारा क्षेत्र
इस प्रकार कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
मरुस्थलों की जलवायु की प्रमुख विशेषताएँ—
अत्यल्प वर्षा
दिन और रात के तापमान में अत्यधिक अंतर
विरल वनस्पति
शुष्क हवाएँ
भारत में थार मरुस्थल राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित है। यहाँ शुष्क जलवायु, कम वर्षा तथा अरावली पर्वतमाला की स्थिति मरुस्थलीकरण में योगदान देती है।
43. कॉलम I को कॉलम II से मिलाएँ :
कॉलम I (जिन नामों से जाना जाता है) कॉलम II (विशेषताएँ)
a. पुरा I. यह उस जगह को बताता है जहाँ पहले कोई आवास था और मुख्य आवास चारों ओर/आस-पास पाया जा सकता है
b. कलाँ II. बड़ी बस्ती का वर्णन करने के लिए और गाँव के नाम के अंत में जोड़ा जाता है
c. खुर्द III. छोटी बस्ती को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है
d. खेड़ा IV. छोटी कॉलोनियों के साथ-साथ गाँव की ऊँची जमीन को बताता है
Answer: D
नोट : सही मिलान a-I, b-II, c-III, d-IV बनता है, लेकिन यह संयोजन मूल प्रश्न के किसी भी विकल्प में उपलब्ध नहीं था। यह विकल्प Examdhara द्वारा त्रुटि सुधार के रूप में जोड़ा गया है।
भारतीय ग्रामीण अधिवासों (Rural Settlements) के नामकरण में स्थानीय भौगोलिक, ऐतिहासिक तथा सामाजिक विशेषताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गाँवों और बस्तियों के नामों में प्रयुक्त शब्द किसी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, आकार, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अथवा सामाजिक संरचना का संकेत देते हैं।
‘कलाँ’ शब्द का उपयोग किसी बड़े गाँव या बड़ी बस्ती के लिए किया जाता है। यह शब्द सामान्यतः गाँव के नाम के अंत में जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए यदि दो गाँव समान नाम वाले हों, तो बड़े गाँव के साथ “कलाँ” और छोटे गाँव के साथ “खुर्द” लगाया जाता है। इसलिए “कलाँ” का सही मिलान कथन II से होगा।
‘खुर्द’ शब्द फ़ारसी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ “छोटा” होता है। इसका उपयोग छोटी बस्ती या छोटे गाँव को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसलिए “खुर्द” का सही संबंध कथन III से है।
‘पुरा’ शब्द सामान्यतः उस स्थान को इंगित करता है जहाँ पहले कोई पुरानी बस्ती या आवास रहा हो। यह ऐतिहासिक बसावट की ओर संकेत करता है। इसलिए “पुरा” का सही मिलान कथन I से होगा।
‘खेड़ा’ शब्द का उपयोग छोटी बस्तियों, उपनिवेशों अथवा गाँव की ऊँची भूमि के लिए किया जाता है। भारत के कई राज्यों विशेषकर राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह शब्द ग्रामीण अधिवासों के नामों में व्यापक रूप से मिलता है। इसलिए “खेड़ा” का सही मिलान कथन IV से होगा।
इस प्रकार सही मिलान है—
a → I
b → II
c → III
d → IV
ग्रामीण अधिवासों का अध्ययन मानव भूगोल का महत्वपूर्ण भाग है। इससे किसी क्षेत्र की—
बसावट का स्वरूप
सामाजिक संरचना
ऐतिहासिक विकास
कृषि एवं संसाधन उपयोग
के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
44. ‘पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया’ पुस्तक किसने लिखी?
Answer: C
‘Poverty and Un-British Rule in India’ पुस्तक के लेखक दादाभाई नौरोजी थे। यह पुस्तक भारतीय आर्थिक राष्ट्रवाद के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पुस्तक में दादाभाई नौरोजी ने ब्रिटिश शासन द्वारा भारत के आर्थिक शोषण का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।
दादाभाई नौरोजी को “ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया” कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक नेताओं में से एक थे तथा कांग्रेस के तीन बार अध्यक्ष बने। वे पहले भारतीय थे जो ब्रिटिश संसद के सदस्य चुने गए।
इस पुस्तक में उन्होंने प्रसिद्ध “Drain Theory” (धन निष्कासन सिद्धांत) प्रस्तुत किया। इसके अनुसार भारत की संपत्ति और संसाधन लगातार ब्रिटेन भेजे जा रहे थे, जिसके कारण भारत में गरीबी बढ़ रही थी। उन्होंने बताया कि—
उच्च प्रशासनिक पदों पर अंग्रेजों की नियुक्ति
भारत से करों की निकासी
सेना एवं प्रशासन पर अत्यधिक व्यय
ब्रिटेन को होने वाला व्यापारिक लाभ
भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर बना रहे थे।
दादाभाई नौरोजी की इस पुस्तक ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक आधार प्रदान किया और ब्रिटिश आर्थिक नीतियों की आलोचना को मजबूत किया।
आर. सी. दत्त ने भारत के आर्थिक इतिहास पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं।
गोपाल कृष्ण गोखले उदारवादी नेता एवं समाज सुधारक थे।
चित्तरंजन दास प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और स्वराज पार्टी के संस्थापक थे।
45. सियाचिन ग्लेशियर, जो दुनिया का सबसे ऊँचा युद्धक्षेत्र है, किस पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है?
Answer: A
सियाचिन ग्लेशियर विश्व का सबसे ऊँचा युद्धक्षेत्र माना जाता है। यह काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यह ग्लेशियर भारत के केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के उत्तरी भाग में स्थित है।
सियाचिन ग्लेशियर लगभग 76 किलोमीटर लंबा है और यह विश्व के सबसे लंबे गैर-ध्रुवीय ग्लेशियरों में शामिल है। इसका सामरिक महत्व अत्यंत अधिक है क्योंकि यह भारत, पाकिस्तान और चीन के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों के निकट स्थित है।
भारत ने वर्ष 1984 में ऑपरेशन मेघदूत चलाकर सियाचिन क्षेत्र पर सामरिक नियंत्रण स्थापित किया। तब से भारतीय सेना अत्यंत कठिन जलवायु परिस्थितियों में यहाँ तैनात है।
काराकोरम पर्वत श्रृंखला की प्रमुख विशेषताएँ—
विश्व की कुछ सबसे ऊँची चोटियाँ यहाँ स्थित हैं।
K2 (गॉडविन ऑस्टिन) इसी श्रृंखला में स्थित विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है।
यह क्षेत्र हिमनदों (Glaciers) की अधिकता के लिए प्रसिद्ध है।
पीर पंजाल और जांस्कर हिमालय की अन्य पर्वत श्रेणियाँ हैं, जबकि धौलाधार हिमाचल प्रदेश क्षेत्र में स्थित है।
सियाचिन क्षेत्र अत्यधिक ऊँचाई, बर्फीले तूफानों और शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान के लिए जाना जाता है। यहाँ सैनिकों को प्राकृतिक परिस्थितियों से भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
46. भारतीय नौसेना में कौन सा पद भारतीय सेना में मेजर जनरल के समकक्ष है?
Answer: A
भारतीय सशस्त्र सेनाओं में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के पद अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं, लेकिन उनके समकक्ष रैंक निर्धारित किए गए हैं। भारतीय सेना में मेजर जनरल (Major General) के समकक्ष भारतीय नौसेना का पद रियर एडमिरल (Rear Admiral) होता है।
रियर एडमिरल एक दो-स्टार रैंक है। यह नौसेना में वरिष्ठ अधिकारियों की श्रेणी में आता है।
तीनों सेनाओं में समकक्ष रैंक इस प्रकार हैं—
थलसेना नौसेना वायुसेना
मेजर जनरल रियर एडमिरल एयर वाइस मार्शल
भारतीय सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर भारत के राष्ट्रपति होते हैं।
भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसका नेतृत्व Chief of Naval Staff (CNS) करता है। भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य है—
“शं नो वरुणः”
भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की रक्षा तथा सामरिक हितों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
47. ‘लोटा विद्रोह’ मुजफ्फरपुर जिले में किस वर्ष में शुरू हुआ था?
Answer: A
लोटा विद्रोह (Lota Rebellion) बिहार के मुजफ्फरपुर जेल में कैदियों द्वारा किया गया एक महत्वपूर्ण विरोध आंदोलन था। यह विद्रोह औपनिवेशिक शासन के दमनकारी नियमों के खिलाफ कैदियों के असंतोष का प्रतीक माना जाता है।
इस विद्रोह का मुख्य कारण जेल प्रशासन द्वारा कैदियों के उपयोग में आने वाले पीतल के लोटों को हटाकर उनकी जगह मिट्टी के बर्तन देना था। कैदियों ने इसे अपने धार्मिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत अधिकारों में हस्तक्षेप माना।
पीतल के लोटे उस समय केवल उपयोग की वस्तु नहीं थे, बल्कि कैदियों की दैनिक जीवन शैली और सामाजिक मान्यताओं से भी जुड़े हुए थे। मिट्टी के बर्तन देने के निर्णय से कैदियों में भारी असंतोष फैल गया, जिसके परिणामस्वरूप जेल के अंदर विरोध और विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हुई।
कुछ ऐतिहासिक स्रोतों में इस विद्रोह की प्रारम्भिक गतिविधियाँ 1855 के अंत से मानी जाती हैं, लेकिन बिहार से संबंधित अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं तथा प्रामाणिक अध्ययन सामग्री में इसका प्रमुख वर्ष 1856 माना गया है।
यह विद्रोह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से ठीक पहले बिहार में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बढ़ते असंतोष का महत्वपूर्ण उदाहरण था। उस समय बिहार तथा उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश नीतियों के प्रति जन-विरोध तेजी से बढ़ रहा था।
1857 की क्रांति के प्रमुख कारणों में—
• अंग्रेजों की दमनकारी नीतियाँ
• सैनिक असंतोष
• धार्मिक हस्तक्षेप का भय
• आर्थिक शोषण
• सामाजिक असंतोष
शामिल थे।
नोट : डॉ. श्याम मूर्ति भारती इतिहास विभाग, राम नारायण महाविद्यालय, पंडौल, मधुबनी (बिहार) द्वारा लिखित शोध-पत्र “आधुनिक बिहार : एक ऐतिहासिक अध्ययन” (International Journal of History, 2022) में भी मुजफ्फरपुर के लोटा विद्रोह का वर्ष 1856 उल्लेखित है। इसलिए बिहार से संबंधित अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं तथा प्रामाणिक संदर्भ सामग्री में 1856 को ही सही उत्तर माना जाता है। कुछ स्रोतों में इसकी प्रारम्भिक पृष्ठभूमि 1855 से जुड़ी मिलती है, किन्तु विद्रोह का प्रमुख वर्ष 1856 स्वीकार किया जाता है।
संदर्भ : https://www.historyjournal.net/article/198/5-1-33-905.pdf
48. निम्नलिखित में से कौन Airbnb का संस्थापक नहीं है?
Answer: B
Airbnb एक वैश्विक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से लोग अपने घर, कमरे या अन्य आवास यात्रियों को किराये पर उपलब्ध कराते हैं। इसकी स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी।
Airbnb के संस्थापक हैं—
ब्रायन चेस्की (Brian Chesky)
जो गेबिया (Joe Gebbia)
नाथन ब्लेचार्जिक (Nathan Blecharczyk)
इसलिए अमनप्रीत सिंह बजाज Airbnb के संस्थापक नहीं हैं। वे भारत में Airbnb से जुड़े कॉर्पोरेट पदों पर कार्य कर चुके हैं, लेकिन कंपनी के सह-संस्थापक नहीं थे।
Airbnb की शुरुआत अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर से हुई। प्रारंभ में संस्थापकों ने अपने अपार्टमेंट में एयर मैट्रेस लगाकर यात्रियों को ठहराने की सुविधा दी थी, जिससे “Air Bed and Breakfast” नाम बना, जो बाद में “Airbnb” कहलाया।
आज Airbnb विश्व के अनेक देशों में कार्यरत है और पर्यटन तथा आतिथ्य उद्योग में महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बन चुका है। यह शेयरिंग इकोनॉमी (Sharing Economy) का प्रमुख उदाहरण माना जाता है, जहाँ व्यक्ति अपनी निजी संपत्ति या सेवाओं को डिजिटल माध्यम से साझा करते हैं।
49. निम्नलिखित में से किस राज्य की राजधानी ‘ईटानगर’ है?
Answer: B
ईटानगर (Itanagar) भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश की राजधानी है। यह राज्य भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है और क्षेत्रफल की दृष्टि से पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा राज्य है।
अरुणाचल प्रदेश की सीमाएँ—
उत्तर में चीन (तिब्बत)
पूर्व में म्यांमार
पश्चिम में भूटान
दक्षिण में असम और नागालैंड
से मिलती हैं।
ईटानगर का नाम ऐतिहासिक ईटा किला (Ita Fort) के नाम पर पड़ा है। “ईटा” का अर्थ ईंट होता है। यह किला मध्यकालीन काल का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल माना जाता है।
अरुणाचल प्रदेश अपनी जनजातीय संस्कृति, जैव विविधता, पर्वतीय भू-आकृति तथा बौद्ध मठों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की प्रमुख जनजातियाँ—
न्यीशी
आदि
अपातानी
मिश्मी
मोनपा
आदि हैं।
राज्य की प्रमुख नदियाँ—
सियांग
सुबनसिरी
लोहित
दिबांग
हैं, जो आगे चलकर ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का भाग बनती हैं।
अन्य विकल्पों की राजधानियाँ—
मेघालय — शिलांग
मणिपुर — इंफाल
मिजोरम — आइजोल
हैं।
50. 2011 से 24 के बीच परिवहन और संचार क्षेत्र में तीसरी सबसे उच्च वृद्धि दर्ज करने वाला राज्य कौन सा है?
Answer: A
वर्ष 2011 से 2024 के बीच परिवहन और संचार क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने वाले राज्यों मंठ बिहार ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह वृद्धि राज्य में सड़क, रेल, दूरसंचार, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण संभव हुई।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में—
राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार
ग्रामीण सड़क निर्माण
पुल एवं फ्लाईओवर परियोजनाएँ
मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाओं का प्रसार
डिजिटल प्रशासन
तेजी से विकसित हुए हैं।
परिवहन और संचार क्षेत्र किसी भी राज्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इससे—
व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलता है
रोजगार के अवसर बढ़ते हैं
ग्रामीण क्षेत्रों की पहुँच बेहतर होती है
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार संभव होता है।
बिहार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम तथा रेलवे और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं ने इस क्षेत्र की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राज्य की अर्थव्यवस्था में परिवहन और संचार क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है, विशेषकर ई-कॉमर्स, मोबाइल बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के कारण।
51. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सामान्यतः उपयोग किया जाने वाला DBMS नहीं है?
Answer: C
DBMS (Database Management System) ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जिसका उपयोग डेटा को संग्रहीत (Store), व्यवस्थित (Organize), प्रबंधित (Manage) तथा पुनर्प्राप्त (Retrieve) करने के लिए किया जाता है।
Oracle, MySQL तथा PostgreSQL सभी लोकप्रिय DBMS सॉफ्टवेयर हैं। इनका उपयोग बड़े स्तर पर वेबसाइट, बैंकिंग प्रणाली, सरकारी संस्थानों तथा व्यावसायिक संगठनों में किया जाता है।
इसके विपरीत Microsoft Excel एक स्प्रेडशीट प्रोग्राम है, न कि DBMS। इसका उपयोग मुख्यतः—
डेटा तालिका बनाने
गणना करने
चार्ट तैयार करने
सांख्यिकीय विश्लेषण
के लिए किया जाता है।
हालाँकि Excel में डेटा संग्रहित किया जा सकता है, लेकिन इसमें DBMS की उन्नत विशेषताएँ नहीं होतीं, जैसे—
रिलेशनल डेटाबेस प्रबंधन
SQL समर्थन
बहु-उपयोगकर्ता नियंत्रण
ट्रांजैक्शन प्रबंधन
डेटा सुरक्षा एवं normalization
Oracle DBMS बड़े उद्यमों में उपयोग किया जाता है।
MySQL वेब अनुप्रयोगों और वेबसाइटों में अत्यंत लोकप्रिय है।
PostgreSQL एक ओपन-सोर्स रिलेशनल DBMS है, जो उन्नत SQL सुविधाओं के लिए जाना जाता है।
52. विश्व स्वास्थ्य दिवस किस दिन को मनाया जाता है?
Answer: B
विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health Day) प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, रोगों की रोकथाम, स्वच्छता तथा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करना है।
इस दिन को मनाने की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO – World Health Organization) की स्थापना के उपलक्ष्य में की गई थी। WHO की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी। यह संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है, जिसका मुख्यालय जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में स्थित है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कार्य—
वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों का निर्माण
महामारी नियंत्रण
टीकाकरण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार
पोषण और स्वच्छता संबंधी जागरूकता फैलाना
आदि है।
हर वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस के लिए एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है। ये थीम वर्तमान वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों पर आधारित होती हैं, जैसे—
मानसिक स्वास्थ्य
सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाएँ
जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य
संक्रामक रोग नियंत्रण
स्वास्थ्य समानता
भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जैसे—
आयुष्मान भारत योजना
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
प्रधानमंत्री जन औषधि योजना
मिशन इंद्रधनुष
कोविड-19 महामारी के दौरान WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य समन्वय और वैक्सीनेशन जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
53. “अछूत (Untouchable)” पुस्तक के लिए कौन जाना जाता है?
Answer: A
“Untouchable” (अछूत) उपन्यास के लेखक मुल्क राज आनंद हैं। यह उपन्यास वर्ष 1935 में प्रकाशित हुआ था और भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य की प्रारंभिक एवं महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है।
इस उपन्यास में भारतीय समाज में व्याप्त अस्पृश्यता, जातिगत भेदभाव तथा सामाजिक असमानता का यथार्थ चित्रण किया गया है। कहानी का मुख्य पात्र बाखा है, जो सफाई कर्मचारी समुदाय से संबंधित है। लेखक ने उसके दैनिक जीवन, सामाजिक अपमान और भेदभाव के अनुभवों को अत्यंत संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है।
मुल्क राज आनंद भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकारों में थे। उनकी रचनाओं में समाज के गरीब, श्रमिक और वंचित वर्गों की समस्याएँ प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं। उनकी अन्य प्रसिद्ध कृतियाँ हैं—
Coolie
Two Leaves and a Bud
The Big Heart
उनकी साहित्यिक शैली पर महात्मा गांधी और सामाजिक सुधार आंदोलनों का प्रभाव देखा जाता है।
इस्मत चुगताई उर्दू साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका थीं, जो “लिहाफ” कहानी के लिए जानी जाती हैं।
आर.के. नारायण “मालगुडी डेज़” और “द गाइड” के लिए प्रसिद्ध हैं।
कमला दास अंग्रेज़ी और मलयालम साहित्य की चर्चित लेखिका एवं कवयित्री थीं।
54. M, P से 2 साल बड़ा है। L, O से 2 साल बड़ा है। O की आयु L और N की आयु का औसत है, और P की आयु L और M की आयु का औसत है और L की आयु P और O की आयु का औसत है। सबसे छोटा कौन है?
Answer: C
दिया गया है—
M = P + 2
L = O + 2
O = (L + N)/2
P = (L + M)/2
L = (P + O)/2
अब,
L = O + 2
मान लें O = x
तब,
L = x + 2
अब,
L = (P + O)/2
x + 2 = (P + x)/2
2x + 4 = P + x
P = x + 4
अब,
M = P + 2
= x + 6
अब O से संबंधित समीकरण देखें—
O = (L + N)/2
x = (x + 2 + N)/2
2x = x + 2 + N
N = x − 2
अब सभी की आयु—
N = x − 2
O = x
L = x + 2
P = x + 4
M = x + 6
स्पष्ट है कि सबसे कम आयु N की है।
आयु का क्रम—
N < O < L < P < M
55. यदि किसी कूट भाषा में ‘3a, 2b, 7c’ का अर्थ ‘good and tasty’, ‘7c, 9a, 8b’ का अर्थ ‘see good pictures’ और ‘9a, 4d, 2b’ का अर्थ ‘pictures and faint’ हो, तो निम्नलिखित में से ‘see’ शब्द का अर्थ कौन-सा होगा ?
Answer: C
दिया गया है—
3a, 2b, 7c = good and tasty
7c, 9a, 8b = see good pictures
9a, 4d, 2b = pictures and faint
दूसरे और तीसरे कथन में समान शब्द “pictures” है तथा समान कोड “9a” है।
⇒ pictures = 9a
पहले और तीसरे कथन में समान शब्द “and” है तथा समान कोड “2b” है।
⇒ and = 2b
अब पहले कथन में बचा—
3a, 7c = good, tasty
दूसरे कथन में बचा—
7c, 8b = see, good
दोनों में समान कोड “7c” है, इसलिए—
⇒ good = 7c
अब दूसरे कथन में शेष कोड “8b” होगा, जिसका अर्थ “see” है।
⇒ see = 8b
56. यदि M का अर्थ ‘भाग’ है, N का अर्थ ‘जोड़’ है, P का अर्थ ‘घटाव’ है और B का अर्थ ‘गुणा’ है, तब व्यंजक 13P13B36M9N17 का मान क्या होगा ?
Answer: C
दिया गया है—
M = भाग (÷)
N = जोड़ (+)
P = घटाव (−)
B = गुणा (×)
अब व्यंजक—
13P13B36M9N17
को वास्तविक चिन्हों में लिखें—
= 13 − 13 × 36 ÷ 9 + 17
= 13 − 13 × 4 + 17
= 13 − 52 + 17
= − 22
57. एक ही पासे की चार स्थितियों को दर्शाया गया है। इस पासे में पीले रंग के विपरीत कौन-सा रंग होगा ?
Answer: D
दिए गए पासे की चार विभिन्न स्थितियों में पीले रंग (Yellow) के साथ दिखाई देने वाले रंगों का विश्लेषण करते हैं।
पासा 1 में पीले रंग के साथ नारंगी और नीला रंग दिखाई दे रहे हैं।
पासा 3 में पीले रंग के साथ नीला और लाल रंग दिखाई दे रहे हैं।
पासा 4 में पीले रंग के साथ लाल और गुलाबी रंग दिखाई दे रहे हैं।
इस प्रकार पीले रंग के आस-पास स्थित रंग हैं—
नारंगी
नीला
लाल
गुलाबी
हम जानते हैं कि किसी भी घन (Dice) के एक फलक के कुल चार आसन्न (Adjacent) फलक होते हैं तथा केवल एक फलक उसके विपरीत (Opposite) होता है।
चूँकि पीले रंग के साथ चारों रंग पहले ही दिखाई दे चुके हैं, इसलिए शेष बचा हुआ रंग बैंगनी (Violet) ही पीले रंग के विपरीत होगा।
इसलिए पीले रंग के विपरीत सतह पर बैंगनी रंग होगा।
58. एक ही पासे की दो भिन्न स्थितियों को दर्शाया गया है। यदि संख्या 5 पासे के निचले फलक पर है, तो ऊपरी फलक पर कौन-सी संख्या दिखाई देगी ?
Answer: B
4 1 3
4 2 6
पहली स्थिति में 4 के आस-पास 3 और 1 हैं।
दूसरी स्थिति में 4 के आस-पास 2 और 6 हैं।
अर्थात 4 के चारों ओर 1, 2, 3 और 6 स्थित हैं। इसलिए शेष बची संख्या 5, संख्या 4 के विपरीत होगी।
यदि 5 नीचे के फलक पर है, तो उसके विपरीत अर्थात ऊपरी फलक पर 4 होगा।
59. दर्पण में देखने पर घड़ी 9:30 समय दिखाती है। सही समय क्या है ?
Answer: A
दर्पण प्रतिबिंब (Mirror Image) वाले घड़ी प्रश्नों में वास्तविक समय ज्ञात करने के लिए सामान्य नियम प्रयोग किया जाता है—
वास्तविक समय = 11:60 − दर्पण में दिखाई देने वाला समय
दिया गया समय = 9:30
अब,
11:60
− 9:30
= 2:30
अतः घड़ी में वास्तविक समय 2:30 होगा।
घड़ी और दर्पण से संबंधित प्रश्नों में यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दर्पण में समय उल्टा दिखाई देता है। इसलिए वास्तविक समय ज्ञात करने के लिए 12 घंटे की घड़ी के आधार पर घटाव किया जाता है।
60. दिये गये विकल्पों में से सम्बन्धित पद चुनिये।
AG : ? :: EK : MS
Answer: C
दिए गए संबंध में अक्षरों की स्थिति (Alphabetical Position) को देखते हैं—
E → M
K → S
दोनों अक्षरों में 8 स्थान आगे बढ़े हैं—
E + 8 = M
K + 8 = S
इसी प्रकार—
A + 8 = I
G + 8 = O
अतः सही संबंध होगा—
AG : IO :: EK : MS
इसलिए सही उत्तर IO है।
61. निर्देश:
(i) P + Q का अर्थ है P, Q का पिता है।
(ii) P − Q का अर्थ है P, Q की माता है।
(iii) P × Q का अर्थ है P, Q का भाई है।
(iv) P ÷ Q का अर्थ है P, Q की बहन है।
(v) P * Q का अर्थ है P, Q का पुत्र है।
(vi) P # Q का अर्थ है P, Q की पुत्री है।
दिए गए व्यंजक में A का F से संबंध बताओ।
A + B × C ÷ D * E # F
Answer: B
संबंधों का flow इस प्रकार बनता है—
E # F ⇒ E, F की पुत्री है।
D * E ⇒ D, E का पुत्र है।
C ÷ D ⇒ C, D की बहन है।
B × C ⇒ B, C का भाई है।
A + B ⇒ A, B का पिता है।
इसलिए A, F का दामाद (Son-in-law) होगा।
62. निर्देश:
(i) P + Q का अर्थ है P, Q का पिता है।
(ii) P − Q का अर्थ है P, Q की माता है।
(iii) P × Q का अर्थ है P, Q का भाई है।
(iv) P ÷ Q का अर्थ है P, Q की बहन है।
(v) P * Q का अर्थ है P, Q का पुत्र है।
(vi) P # Q का अर्थ है P, Q की पुत्री है।
दिए गए व्यंजक में F का A से संबंध बताओ।
A # B – C * D + E ÷ F
Answer: C
दिए गए संकेतों के अनुसार—
A # B ⇒ A, B की पुत्री है।
B − C ⇒ B, C की माता है।
C * D ⇒ C, D का पुत्र है।
D + E ⇒ D, E का पिता है।
E ÷ F ⇒ E, F की बहन है।
E, F की बहन है। इसका अर्थ है कि F, E का भाई या बहन हो सकता है।
यहाँ F का लिंग स्पष्ट नहीं है, क्योंकि केवल E का स्त्रीलिंग निश्चित है। इसलिए F, A के संबंध में भाई भी हो सकता है और बहन भी।
63. अनुज ने ₹ 8,000 2 वर्ष के लिए 10% प्रति वर्ष की दर से उधार लिए तो मिश्रधन होगा –
ⅰ. यदि चक्रवृद्धि ब्याज की गणना वार्षिक हो।
ⅱ. यदि चक्रवृद्धि ब्याज की गणना अर्द्धवार्षिक हो।
Answer: B
दिया गया है—
मूलधन (P) = ₹8000
दर (R) = 10% प्रति वर्ष
समय (T) = 2 वर्ष
ⅰ. वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज
सूत्र—
A = P(1 + R/100)^T
= 8000(1 + 10/100)^2
= 8000(1.1)^2
= 8000 × 1.21
= ₹9680
ⅱ. अर्द्धवार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज
अर्द्धवार्षिक होने पर—
दर = 10/2 = 5%
समय = 2 × 2 = 4 अर्द्धवर्ष
अब,
A = 8000(1 + 5/100)^4
= 8000(1.05)^4
= 8000 × 1.2155
≈ ₹9724.05
इस प्रकार—
i. ₹9680
ii. ₹9724.05
64. सर्कस का एक मोटर साइकिल सवार जिस खोखले गोले के अंदर अपने करतब दिखाता है, उसका बाहरी व्यास 15m है। मोटर साइकिल सवार के पास अपना करतब दिखाने के लिए उपलब्ध क्षेत्रफल m² होगा, यदि गोले की मोटाई 0.5 m हो।
Answer: C
बाहरी व्यास = 15 m
⇒ बाहरी त्रिज्या = 15/2 = 7.5 m
गोले की मोटाई = 0.5 m
⇒ आंतरिक त्रिज्या = 7.5 − 0.5
= 7 m
मोटर साइकिल सवार के लिए उपलब्ध क्षेत्रफल = खोखले गोले का आंतरिक पृष्ठीय क्षेत्रफल
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × (22/7) × (7)^2
= 4 × (22/7) × 49
= 616 m²
65. यादृच्छिक रूप से दो पासों को एक साथ फेंके जाने पर, दोनों पासों की संख्याओं का योग 9 आने की प्रायिकता क्या है ?
Answer: C
दो पासों को एक साथ फेंकने पर कुल संभावित परिणाम = 6 × 6 = 36
योग 9 आने वाले अनुकूल परिणाम—
(3, 6)
(4, 5)
(5, 4)
(6, 3)
अनुकूल परिणामों की संख्या = 4
प्रायिकता = अनुकूल परिणाम / कुल परिणाम
= 4/36
= 1/9
∴ योग 9 आने की प्रायिकता = 1/9
66. 4x² + 9y² + 16z² − 12xy + 16xz − 24yz का गुणनखंड है :
Answer: A
हम जानते हैं कि—
(a + b + c)² = a² + b² + c² + 2ab + 2bc + 2ca
दिया गया व्यंजक है—
4x² + 9y² + 16z² − 12xy + 16xz − 24yz
अब वर्ग वाले पदों को देखें—
4x² = (−2x)²
9y² = (3y)²
16z² = (−4z)²
अब मिश्रित पदों की जाँच करें—
2(−2x)(3y) = −12xy
2(3y)(−4z) = −24yz
2(−2x)(−4z) = +16xz
सभी पद दिए गए व्यंजक के समान प्राप्त हो रहे हैं।
अतः,
4x² + 9y² + 16z² − 12xy + 16xz − 24yz
= (−2x + 3y − 4z)²
इसलिए सही विकल्प A है।
67. निम्नलिखित प्रश्न में अभिकथन (A) के बाद तर्क (R) कथन दिया गया है। सही विकल्प चुनें :
अभिकथन (A): एक बेलन और लम्बवृत्तीय शंकु का आधार समान है और ऊँचाई भी समान है। बेलन का आयतन शंकु के आयतन का तीन गुना है।
तर्क (R): यदि बेलन की त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए और ऊँचाई आधी कर दी जाए तो उसका आयतन दोगुना हो जाएगा।
Answer: B
बेलन का आयतन = πr²h
शंकु का आयतन = (1/3)πr²h
यदि बेलन और शंकु की त्रिज्या तथा ऊँचाई समान हो, तो—
बेलन का आयतन : शंकु का आयतन
= πr²h : (1/3)πr²h
= 3 : 1
अर्थात बेलन का आयतन, शंकु के आयतन का तीन गुना होता है। इसलिए अभिकथन (A) सत्य है।
अब तर्क (R) की जाँच करें—
बेलन का आयतन = πr²h
यदि त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए, तो नई त्रिज्या = 2r
और ऊँचाई आधी कर दी जाए, तो नई ऊँचाई = h/2
नया आयतन—
= π(2r)²(h/2)
= π × 4r² × h/2
= 2πr²h
यह मूल आयतन का दोगुना है। इसलिए तर्क (R) भी सत्य है।
लेकिन तर्क (R), अभिकथन (A) की व्याख्या नहीं करता, क्योंकि अभिकथन शंकु और बेलन के आयतन के संबंध पर आधारित है, जबकि तर्क बेलन की त्रिज्या और ऊँचाई में परिवर्तन से संबंधित है।
इसलिए सही विकल्प B है।
68. लास्की के अनुसार समानता है –
I. विशेष अधिकारों का अभाव।
II. कि सभी के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों।
III. सभी की सामाजिक लाभों तक पहुँच होनी चाहिए और किसी को भी किसी भी आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए।
IV. आर्थिक और सामाजिक शोषण का अभाव।
Answer: D
प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक हेरॉल्ड जे. लास्की (Harold J. Laski) ने समानता को लोकतंत्र का मूल आधार माना। लास्की के अनुसार समानता का अर्थ केवल कानूनी समानता नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में सभी व्यक्तियों के लिए समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करना है।
लास्की ने समानता के कई महत्वपूर्ण तत्व बताए—
विशेषाधिकारों का अभाव : समाज में किसी वर्ग को जन्म, जाति, धर्म, धन या पद के आधार पर विशेष अधिकार प्राप्त नहीं होने चाहिए।
समान अवसर : प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के विकास के लिए पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
सामाजिक लाभों तक पहुँच : शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा अन्य सामाजिक सुविधाएँ सभी नागरिकों को समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
शोषण का अभाव : आर्थिक और सामाजिक शोषण समाप्त होना चाहिए, तभी वास्तविक समानता स्थापित हो सकती है।
लास्की की समानता की अवधारणा सकारात्मक समानता (Positive Equality) पर आधारित थी। वे केवल कानूनी समानता को पर्याप्त नहीं मानते थे, बल्कि सामाजिक न्याय और आर्थिक अवसरों की समानता पर भी बल देते थे।
भारतीय संविधान में समानता का अधिकार अनुच्छेद 14 से 18 तक वर्णित है। इसमें—
विधि के समक्ष समानता
भेदभाव का निषेध
सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर
अस्पृश्यता का अंत
उपाधियों का उन्मूलन
जैसे प्रावधान शामिल हैं।
69. सही विकल्प का चयन करते हुए किसान विद्रोह की निम्नलिखित घटनाओं को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित करें।
बरासत का किसान विद्रोह
संन्यासी विद्रोह
रंगपुर का किसान विद्रोह
पागलपंथी विद्रोह
Answer: C
ब्रिटिश शासन के प्रारंभिक काल में किसानों, संन्यासियों तथा जनजातीय समुदायों ने अंग्रेजों की दमनकारी भूमि-राजस्व नीतियों, आर्थिक शोषण और अत्याचारों के विरुद्ध अनेक विद्रोह किए। इन विद्रोहों का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।
इन आंदोलनों का कालक्रम इस प्रकार है—
संन्यासी विद्रोह — लगभग 1763 ई. से प्रारंभ
रंगपुर किसान विद्रोह — 1783 ई.
पागलपंथी विद्रोह — उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में, विशेषकर 1825 ई. के आसपास
बरासत किसान विद्रोह — 1831 ई.
इस प्रकार सही क्रम होगा—
2 → 3 → 4 → 1
संन्यासी विद्रोह
यह विद्रोह बंगाल में हुआ था। बंगाल के अकाल (1770) तथा अंग्रेजों की कठोर कर नीति के कारण संन्यासियों और किसानों में असंतोष फैल गया। इस आंदोलन में संन्यासियों और फकीरों ने अंग्रेजी सत्ता का विरोध किया।
रंगपुर किसान विद्रोह
यह विद्रोह वर्तमान बांग्लादेश के रंगपुर क्षेत्र में हुआ। किसानों ने अंग्रेज अधिकारियों और जमींदारों द्वारा किए जा रहे अत्यधिक कर वसूली का विरोध किया।
पागलपंथी विद्रोह
यह आंदोलन करम शाह और बाद में टीपू शाह के नेतृत्व में चला। यह मुख्यतः बंगाल क्षेत्र के गरीब किसानों और जनजातीय समुदायों का आंदोलन था।
बरासत किसान विद्रोह
यह विद्रोह बंगाल के बरासत क्षेत्र में हुआ। इसका नेतृत्व तितुमीर (Syed Mir Nisar Ali) ने किया। उन्होंने किसानों को जमींदारों और अंग्रेजों के शोषण के विरुद्ध संगठित किया। तितुमीर ने प्रसिद्ध बाँस का किला (Bamboo Fort) भी बनवाया था।
70. बौद्ध धर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही विकल्प चुनिए।
I. बोधिसत्व की अवधारणा बौद्ध धर्म के हीनयान संप्रदाय का केंद्रबिंदु है।
II. बोधिसत्व ज्ञान प्राप्ति के मार्ग पर एक अनुकम्पाशील व्यक्ति है।
III. बोधिसत्व व्यक्तिगत मोक्ष के लिए निर्वाण प्राप्त करते हैं।
Answer: B
बोधिसत्व (Bodhisattva) की अवधारणा मुख्य रूप से महायान बौद्ध धर्म से संबंधित है, न कि हीनयान संप्रदाय से। इसलिए कथन I गलत है।
महायान बौद्ध धर्म में बोधिसत्व वह व्यक्ति होता है जिसने ज्ञान प्राप्ति (Enlightenment) का मार्ग अपना लिया है, लेकिन वह केवल अपने मोक्ष के लिए निर्वाण प्राप्त नहीं करता। वह सभी प्राणियों के कल्याण और मुक्ति के लिए कार्य करता है। इसलिए बोधिसत्व को करुणा और दया का प्रतीक माना जाता है। अतः कथन II सही है।
कथन III गलत है क्योंकि बोधिसत्व व्यक्तिगत मोक्ष के लिए निर्वाण प्राप्त करने की बजाय दूसरों के उद्धार के लिए अपने अंतिम निर्वाण को स्थगित कर देता है। व्यक्तिगत मोक्ष की अवधारणा अधिकतर हीनयान (थेरवाद) परंपरा से जुड़ी मानी जाती है, जहाँ “अर्हत” आदर्श को महत्व दिया गया।
बौद्ध धर्म का उदय 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ। इसके संस्थापक गौतम बुद्ध थे, जिनका जन्म लुम्बिनी में हुआ था। बुद्ध ने—
चार आर्य सत्य
अष्टांगिक मार्ग
मध्यम मार्ग
का उपदेश दिया।
बौद्ध धर्म के प्रमुख संप्रदाय—
हीनयान (थेरवाद)
महायान
वज्रयान
माने जाते हैं।
महायान बौद्ध धर्म में बुद्ध को ईश्वरतुल्य माना गया तथा मूर्ति पूजा और बोधिसत्व की अवधारणा का विकास हुआ।
71. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में कृषि संबंधित विकास की घटनाओं का सही कालानुक्रमिक क्रम दर्शाता है?
I. बंगाल में स्थायी बंदोबस्त
II. दक्कन दंगा आयोग
III. संथाल विद्रोह
IV. प्रवर समिति की पाँचवीं रिपोर्ट
Answer: D
भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान कृषि व्यवस्था, भूमि-राजस्व नीतियों और किसानों की स्थिति से संबंधित कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं। इन घटनाओं का सही कालक्रम समझना आधुनिक भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण भाग है।
बंगाल में स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) — 1793
यह व्यवस्था लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा लागू की गई थी। इसके अंतर्गत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मानकर निश्चित राजस्व तय कर दिया गया। इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार की आय सुनिश्चित करना था।
प्रवर समिति की पाँचवीं रिपोर्ट (Fifth Report) — 1813
यह रिपोर्ट ब्रिटिश संसद की एक चयन समिति द्वारा तैयार की गई थी। इसमें ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन तथा बंगाल की कृषि और राजस्व व्यवस्था की स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया था।
संथाल विद्रोह — 1855-56
यह विद्रोह वर्तमान झारखंड और बिहार क्षेत्र में हुआ। संथाल जनजाति ने महाजनों, जमींदारों और अंग्रेज अधिकारियों के शोषण के विरुद्ध विद्रोह किया। इसके प्रमुख नेता सिदो, कान्हू, चाँद और भैरव थे।
दक्कन दंगा आयोग (Deccan Riots Commission) — 1875
महाराष्ट्र के दक्कन क्षेत्र में किसानों ने साहूकारों और ऋण व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह किया। इस घटना की जाँच के लिए ब्रिटिश सरकार ने दक्कन दंगा आयोग की स्थापना की। बाद में किसानों की स्थिति सुधारने हेतु दक्कन कृषक राहत अधिनियम, 1879 पारित किया गया।
इस प्रकार सही कालानुक्रमिक क्रम होगा—
I → IV → III → II
अर्थात सही विकल्प D है।
72. भारत में ब्रिटिश अधिकारियों की भूमिका के संदर्भ में, नीचे दिए गए कूटों का प्रयोग करके स्तंभ-II को स्तंभ-I से सुमेलित कीजिए।
स्तंभ-I स्तंभ-II
a. लॉर्ड कार्नवालिस 1. पर्यवेक्षक
b. ऑगस्टस क्लीवलैंड 2. अर्थशास्त्री
c. फ्रांसिस बुकानन 3. बंगाल के गवर्नर जनरल
d. डेविड रिकाडो 4. शांति नीति
Answer: C
लॉर्ड कार्नवालिस (Lord Cornwallis) भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान महत्वपूर्ण प्रशासक थे। वे 1786 से 1793 तक बंगाल के गवर्नर जनरल रहे। उन्होंने प्रशासनिक, न्यायिक तथा राजस्व सुधार लागू किए। उनके द्वारा लागू स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement), 1793 भारतीय कृषि व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था। इसलिए—
a → 3
ऑगस्टस क्लीवलैंड (Augustus Cleveland) ब्रिटिश अधिकारी थे जिन्होंने आदिवासी क्षेत्रों, विशेषकर राजमहल पहाड़ियों में “शांति नीति” (Policy of Pacification) अपनाई। उनका उद्देश्य पहाड़िया जनजातियों को नियंत्रित कर ब्रिटिश प्रशासन के अधीन लाना था। इसलिए—
b → 4
फ्रांसिस बुकानन (Francis Buchanan) एक चिकित्सक, सर्वेक्षक और पर्यवेक्षक थे। उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया और कृषि, समाज, व्यापार तथा जनजीवन से संबंधित विस्तृत विवरण तैयार किए। उनके वृत्तांत आधुनिक भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। इसलिए—
c → 1
डेविड रिकाडो (David Ricardo) प्रसिद्ध ब्रिटिश अर्थशास्त्री थे। उन्होंने अर्थशास्त्र में तुलनात्मक लाभ का सिद्धांत (Theory of Comparative Advantage) तथा किराया सिद्धांत (Rent Theory) दिया। उनकी पुस्तक “Principles of Political Economy and Taxation” (1817) अत्यंत प्रसिद्ध है। इसलिए—
d → 2
इस प्रकार सही मिलान होगा—
a → 3
b → 4
c → 1
d → 2
73. निम्नलिखित का मिलान कीजिए और सही विकल्प चुनिए :
सूची-I (हड़प्पा स्थल) सूची-II (प्रसिद्ध)
1. लोथल a. सीप की वस्तुएँ बनाने के विशिष्ट केंद्र
2. कालीबंगा b. कार्नीलियन के निकट स्रोत
3. धोलावीरा c. जोते हुए खेत के साक्ष्य मिले
4. नागेश्वर d. जलाशय मिले
Answer: A
सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) विश्व की प्राचीन नगरीय सभ्यताओं में से एक थी। इसका विस्तार वर्तमान पाकिस्तान, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा तथा पंजाब तक फैला हुआ था। यह सभ्यता अपने विकसित नगर नियोजन, जल निकासी व्यवस्था, व्यापारिक गतिविधियों तथा हस्तशिल्प उद्योग के लिए प्रसिद्ध थी।
दिए गए हड़प्पा स्थलों की विशेषताओं का सही मिलान इस प्रकार है—
• लोथल (Lothal) — यह स्थल वर्तमान गुजरात में स्थित है और हड़प्पा सभ्यता का महत्वपूर्ण बंदरगाह नगर माना जाता है। यहाँ से गोदी (Dockyard) के साक्ष्य मिले हैं, जो समुद्री व्यापार की उन्नति को दर्शाते हैं। लोथल विशेष रूप से कार्नीलियन (Carnelian) पत्थर के मनकों के निर्माण और व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। कार्नीलियन लाल रंग का अर्ध-मूल्यवान पत्थर होता था, जिससे आभूषण बनाए जाते थे।
अतः — 1 → b
• कालीबंगा (Kalibangan) — यह स्थल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है। यहाँ से कृषि के महत्वपूर्ण प्रमाण प्राप्त हुए हैं। पुरातत्वविदों को यहाँ जोते हुए खेत (Ploughed Field) के साक्ष्य मिले, जो विश्व के सबसे प्राचीन कृषि साक्ष्यों में गिने जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि हड़प्पावासी उन्नत कृषि तकनीकों से परिचित थे।
अतः — 2 → c
• धोलावीरा (Dholavira) — यह स्थल गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित है। यह हड़प्पा सभ्यता का अत्यंत विकसित नगर था। यहाँ से विशाल जलाशयों (Reservoirs), बाँधों और जल संचयन प्रणाली के प्रमाण मिले हैं। धोलावीरा की जल प्रबंधन प्रणाली उस समय की वैज्ञानिक एवं तकनीकी उन्नति को दर्शाती है।
अतः — 3 → d
• नागेश्वर (Nageshwar) — यह स्थल गुजरात में स्थित है और विशेष रूप से सीप (Shell) से वस्तुएँ बनाने के उद्योग के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ से शंख उद्योग तथा सीप से बने आभूषणों के प्रमाण मिले हैं।
अतः — 4 → a
इस प्रकार सही मिलान होगा—
• 1-b
• 2-c
• 3-d
• 4-a
हड़प्पा सभ्यता के अन्य महत्वपूर्ण स्थल—
• मोहनजोदड़ो — महान स्नानागार के लिए प्रसिद्ध
• हड़प्पा — अन्नागार के लिए प्रसिद्ध
• राखीगढ़ी — भारत का सबसे बड़ा हड़प्पाई स्थल
• चन्हूदड़ो — मनका निर्माण केंद्र
आदि हैं।
74. निम्नलिखित विकल्पों में से ‘चिश्ती सिलसिला’ का सही कालानुक्रमिक क्रम ज्ञात कीजिए :
I. शेख निजामुद्दीन औलिया
II. शेख फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर
III. शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली
IV. शेख मुईनुद्दीन सिज्जी
Answer: D
सूफी आंदोलन मध्यकालीन भारत का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक आंदोलन था, जिसने प्रेम, मानवता, सहिष्णुता और ईश्वर भक्ति पर बल दिया। सूफी संतों ने समाज में भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा दिया। भारत में सूफी परंपरा के अनेक सिलसिले विकसित हुए, जिनमें चिश्ती सिलसिला सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली माना जाता है।
चिश्ती सिलसिले का सही कालानुक्रमिक क्रम इस प्रकार है—
• शेख मुईनुद्दीन चिश्ती (Muinuddin Chishti) — भारत में चिश्ती सिलसिले के संस्थापक माने जाते हैं। वे 12वीं शताब्दी में भारत आए और अजमेर को अपना केंद्र बनाया। उन्हें “गरीब नवाज़” कहा जाता है क्योंकि वे गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी दरगाह अजमेर शरीफ भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।
अतः — IV सबसे पहले आए।
• शेख फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर (Baba Farid) — वे पंजाब क्षेत्र के महान सूफी संत थे। उनकी शिक्षाओं में प्रेम, सादगी और मानव सेवा पर बल दिया गया। उनकी वाणी का कुछ भाग गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित है, जिससे उनके प्रभाव का पता चलता है।
अतः — II इसके बाद आते हैं।
• शेख निजामुद्दीन औलिया — वे दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध सूफी संतों में थे। उन्होंने सत्ता और राजनीति से दूरी बनाए रखी तथा मानव प्रेम और सेवा को महत्व दिया। उनके प्रमुख शिष्य अमीर खुसरो थे, जिन्होंने संगीत और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अतः — I इसके बाद आते हैं।
• शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली — वे निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्य और उत्तराधिकारी थे। उन्हें “चिराग-ए-दिल्ली” कहा जाता था। उन्होंने दिल्ली में चिश्ती परंपरा को आगे बढ़ाया।
अतः — III सबसे बाद में आते हैं।
इस प्रकार सही क्रम होगा—
• IV → II → I → III
75. वर्ष 2024 में संपादकीय लेखन के लिए पुलित्जर पुरस्कार किसे मिला?
Answer: B
वर्ष 2024 में Editorial Writing (संपादकीय लेखन) श्रेणी में प्रतिष्ठित Pulitzer Prize से डेविड ई. हॉफमैन (David E. Hoffman) को सम्मानित किया गया। वे प्रसिद्ध अमेरिकी समाचार पत्र The Washington Post से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं।
उन्हें यह पुरस्कार डिजिटल युग में सत्तावादी (Authoritarian) सरकारों द्वारा असहमति को दबाने के लिए उपयोग की जाने वाली नई तकनीकों, निगरानी प्रणालियों तथा दमनकारी रणनीतियों पर आधारित गहन शोधपूर्ण संपादकीय श्रृंखला के लिए प्रदान किया गया।
Pulitzer Prize की स्थापना अमेरिकी पत्रकार और प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर (Joseph Pulitzer) की स्मृति में की गई थी। पहला पुलित्जर पुरस्कार वर्ष 1917 में प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार पत्रकारिता, साहित्य, संगीत, नाटक तथा संपादकीय लेखन सहित कई श्रेणियों में दिया जाता है।
वर्ष 2024 के पुलित्जर पुरस्कारों में—
• The New York Times को गाजा युद्ध की कवरेज के लिए अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग पुरस्कार मिला।
• Reuters को ब्रेकिंग न्यूज़ फोटोग्राफी के लिए सम्मानित किया गया।
• Justin Chang को आलोचना (Criticism) श्रेणी में पुरस्कार प्राप्त हुआ।
अन्य विकल्पों के बारे में—
• कैथलीन किंग्सबरी को वर्ष 2015 में The Boston Globe के लिए संपादकीय लेखन का पुलित्जर पुरस्कार मिला था।
• निकोल हाना जोन्स को वर्ष 2020 में The New York Times Magazine के प्रसिद्ध “1619 Project” के लिए Commentary श्रेणी में पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
• ब्रेट स्टीफेंस को वर्ष 2013 में The Wall Street Journal के लिए Commentary श्रेणी में पुलित्जर पुरस्कार मिला था।
पुलित्जर पुरस्कार को पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग “ऑस्कर पुरस्कार” के समान प्रतिष्ठा प्राप्त है।
76. “हैरी पॉटर” श्रृंखला के लेखक कौन हैं?
Answer: C
विश्व प्रसिद्ध “Harry Potter” श्रृंखला की लेखिका जे.के. राउलिंग (J.K. Rowling) हैं। यह श्रृंखला आधुनिक काल की सबसे लोकप्रिय फैंटेसी साहित्यिक कृतियों में से एक मानी जाती है।
इस श्रृंखला की पहली पुस्तक “Harry Potter and the Philosopher’s Stone” वर्ष 1997 में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद कुल सात उपन्यास प्रकाशित हुए, जिनमें जादुई विद्यालय Hogwarts School of Witchcraft and Wizardry तथा हैरी पॉटर के साहसिक जीवन का वर्णन है।
हैरी पॉटर श्रृंखला के प्रमुख पात्र—
• हैरी पॉटर
• हर्माइनी ग्रेंजर
• रॉन वीज़ली
• लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट
• एल्बस डंबलडोर
हैं।
यह श्रृंखला विश्व की अनेक भाषाओं में अनूदित की गई है और इस पर आधारित फिल्में भी अत्यंत लोकप्रिय हुईं।
अन्य विकल्पों में—
• जे.आर.आर. टोल्किन — “The Lord of the Rings” और “The Hobbit” के लेखक हैं।
• सी.एस. लुईस — “The Chronicles of Narnia” के लेखक हैं।
• रोआल्ड डाहल — “Charlie and the Chocolate Factory” जैसी बाल साहित्य कृतियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
जे.के. राउलिंग की हैरी पॉटर श्रृंखला ने बाल एवं किशोर साहित्य को वैश्विक स्तर पर नई लोकप्रियता प्रदान की।
77. यूएनएससी (UNSC) का पूर्ण रूप है :
Answer: A
UNSC का पूर्ण रूप United Nations Security Council है, जिसे हिंदी में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कहा जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क (अमेरिका) में स्थित है।
सुरक्षा परिषद का मुख्य कार्य—
• अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना
• युद्ध और संघर्षों को रोकना
• शांति सेना भेजना
• प्रतिबंध (Sanctions) लगाना
• नए सदस्य देशों की अनुशंसा करना
आदि है।
UNSC में कुल 15 सदस्य होते हैं—
• 5 स्थायी सदस्य (Permanent Members)
• 10 अस्थायी सदस्य (Non-Permanent Members)
स्थायी सदस्य—
• अमेरिका
• रूस
• चीन
• ब्रिटेन
• फ्रांस
हैं। इन देशों को Veto Power (निषेधाधिकार) प्राप्त है।
भारत कई बार UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है और लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के अन्य प्रमुख अंग—
• महासभा (General Assembly)
• आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC)
• अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ)
• सचिवालय (Secretariat)
आदि हैं।
78. आईएफसी-आईओआर (IFC-IOR) का मतलब :
Answer: A
IFC-IOR का पूर्ण रूप Information Fusion Centre – Indian Ocean Region है। यह भारत द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण समुद्री सुरक्षा केंद्र है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में समुद्री गतिविधियों की निगरानी, सूचना साझाकरण तथा सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
इस केंद्र की स्थापना वर्ष 2018 में भारतीय नौसेना द्वारा गुरुग्राम (हरियाणा) में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में—
• समुद्री डकैती (Piracy)
• तस्करी
• आतंकवादी गतिविधियाँ
• अवैध मछली पकड़ना
• संदिग्ध समुद्री गतिविधियाँ
पर निगरानी रखना है।
भारत की समुद्री सुरक्षा नीति में IFC-IOR का विशेष महत्व है क्योंकि हिंद महासागर विश्व व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। विश्व के बड़े हिस्से का तेल और व्यापारिक सामान इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।
IFC-IOR विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ समुद्री सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है। इससे समुद्री क्षेत्र में सहयोग और सुरक्षा बढ़ती है।
भारत की समुद्री सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख पहलें—
• SAGAR (Security and Growth for All in the Region)
• इंडो-पैसिफिक नीति
• मालाबार नौसैनिक अभ्यास
आदि हैं।
79. यदि α का अर्थ ‘से बड़ा’, ß का अर्थ ‘बराबर’, θ का अर्थ ‘से कम नहीं’, γ का अर्थ ‘से छोटा’, δ का अर्थ ‘बराबर नहीं’ तथा η का अर्थ ‘से बड़ा नहीं’ है, तब चार विकल्पों में से दिए गये कथन के लिए सही विकल्प चुनो : C α 2d तथा 2d θ s
Answer: B
प्रश्न में विभिन्न प्रतीकों के विशेष अर्थ दिए गए हैं। पहले इन प्रतीकों को सामान्य गणितीय चिन्हों में बदलते हैं—
• α = से बड़ा ( > )
• ß = बराबर ( = )
• θ = से कम नहीं ( ≥ )
• γ = से छोटा ( < )
• δ = बराबर नहीं ( ≠ )
• η = से बड़ा नहीं ( ≤ )
अब दिए गए कथनों को समझते हैं—
C α 2d
अर्थात—
C > 2d
दूसरा कथन—
2d θ s
अर्थात—
2d ≥ s
इसका अर्थ है कि 2d, s के बराबर या उससे बड़ा है।
अब दोनों संबंधों को मिलाएँ—
• C > 2d
• 2d ≥ s
जब C, 2d से बड़ा है और 2d, s के बराबर या उससे बड़ा है, तब निश्चित रूप से C, s से बड़ा होगा।
अर्थात—
C > s
अब दिए गए प्रतीकों के अनुसार—
“से बड़ा” = α
इसलिए—
C α s
सही विकल्प होगा।
80. एक निश्चित कूट भाषा में ‘MIKE’ को ‘2%#$’ लिखा जाता है और ‘KOAL’ को ‘#@75’ लिखा जाता है, तो उसी कूट में ‘AIM’ कैसे लिखा जाता है ?
Answer: A
दिया गया है—
MIKE → 2%#$
इससे प्राप्त होता है—
• M = 2
• I = %
• K = #
• E = $
अब दूसरा शब्द—
KOAL → #@75
इससे—
• K = #
• O = @
• A = 7
• L = 5
अब “AIM” को कोड में बदलते हैं—
• A = 7
• I = %
• M = 2
अतः—
AIM → 7%2
81. यदि किसी सांकेतिक भाषा में ‘TEACHER’ को ‘KAELRAS’ लिखा जाता है, तो उसी भाषा में ‘CHEATER’ को कैसे लिखा जायेगा ?
Answer: D
दिए गए शब्द—
TEACHER → KAELRAS
अब प्रत्येक अक्षर का कोड देखें—
• T → K
• E → A
• A → E
• C → L
• H → R
• E → A
• R → S
अब इसी पैटर्न को “CHEATER” पर लागू करें—
• C → L
• H → R
• E → A
• A → E
• T → K
• E → A
• R → S
CHEATER → LRAEKAS
82. यदि ‘DIAMOND’ को संकेत में ‘VQYMKLV’ लिखा जाता है, तो ‘FEMALE’ को कैसे सांकेतिक किया जा सकता है ?
Answer: A
यह प्रश्न अंग्रेजी वर्णमाला के विपरीत अक्षर (Opposite Letter Pattern) पर आधारित है।
अंग्रेजी वर्णमाला में किसी अक्षर का विपरीत अक्षर वह होता है जिसके स्थान क्रमांक का योग 27 होता है।
जैसे—
• A ↔ Z
• B ↔ Y
• C ↔ X
• D ↔ W
आदि।
अब दिए गए शब्द “DIAMOND” को देखें—
मूल अक्षर विपरीत अक्षर कोड
D W V
I R Q
A Z Y
M N M
O L K
N M L
D W V
यहाँ प्रत्येक अक्षर के विपरीत अक्षर में से 1 घटाकर कोड बनाया गया है।
अब “FEMALE” पर यही नियम लागू करें—
मूल अक्षर विपरीत अक्षर कोड
F U T
E V U
M N M
A Z Y
L O N
E V U
अतः कोड होगा—
TUMYNU
इसलिए सही उत्तर A है।
83. उत्तर आकृतियों में से उस आकृति को चुनिए जो श्रृंखला जारी रखने के लिए प्रश्न आकृति की अनुक्रमण करेगी।
Answer: B
इस प्रश्न में तीर (Arrow) की स्थिति को घड़ी की विपरीत दिशा (Anti-clockwise direction) में देखा जा सकता है। यदि हम आयत के चारों कोनों और भुजाओं के मध्य बिंदुओं को क्रमशः 1 से 8 तक मान लें, तो—
• पहली आकृति में तीर स्थिति 1 पर है।
• दूसरी आकृति में तीर स्थिति 3 पर पहुँचता है।
• तीसरी आकृति में तीर स्थिति 4 पर है।
• चौथी आकृति में तीर स्थिति 6 पर पहुँचता है।
अर्थात तीर लगातार Anti-clockwise दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसलिए अगली आकृति में तीर स्थिति 7 पर होना चाहिए।
दिए गए विकल्पों में केवल विकल्प A में तीर स्थिति 7 पर दिखाई देता है।
84. उस आकृति को चुनो जो इस श्रृंखला को उचित रूप से पूर्ण करती है।
Answer: A
इस प्रश्न में मुख्य पैटर्न ‘+’ चिन्ह की स्थिति पर आधारित है। यदि हम वर्ग की भुजाओं और कोनों को क्रमशः 1 से 8 तक संख्या दें और ‘+’ चिन्ह की गति को देखें, तो यह Anti-clockwise दिशा में आगे बढ़ रहा है।
स्थिति क्रम इस प्रकार है—
• पहली आकृति में ‘+’ चिन्ह स्थिति 1 पर है।
• दूसरी आकृति में यह स्थिति 3 पर पहुँचता है।
• तीसरी आकृति में स्थिति 4 पर है।
• चौथी आकृति में स्थिति 6 पर पहुँच जाता है।
अर्थात अगली आकृति में ‘+’ चिन्ह स्थिति 7 पर होना चाहिए, जो ऊपरी भुजा के मध्य भाग में स्थित होगा।
85. यहाँ दो कथन दिये गये हैं, जिन्हें क्रमशः अभिकथन (A) और कारण (R) के रूप में चिह्नित किया गया है। नीचे दिये गये कोड के अनुसार अपना उत्तर चुनें।
अभिकथन (A): घरेलू विद्युत परिपथों में उपकरणों को श्रेणीक्रम में जोड़ने के बजाय समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है।
कारण (R): समानांतर संयोजन यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक उपकरण को मुख्य आपूर्ति के समान वोल्टेज प्राप्त हो और प्रत्येक उपकरण स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।
Answer: A
घरेलू विद्युत परिपथों में विद्युत उपकरणों को सामान्यतः समानांतर संयोजन (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है। इसलिए अभिकथन (A) पूर्णतः सत्य है।
समानांतर संयोजन में प्रत्येक उपकरण सीधे मुख्य विद्युत स्रोत से जुड़ा होता है। इस कारण प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर (Voltage) प्राप्त होता है। भारत में घरेलू विद्युत आपूर्ति सामान्यतः 220 V की होती है, इसलिए पंखा, बल्ब, फ्रिज, टीवी, कूलर तथा अन्य उपकरणों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समान वोल्टेज प्राप्त होता है।
समानांतर संयोजन के प्रमुख लाभ—
• प्रत्येक उपकरण स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।
• किसी एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरण कार्य करते रहते हैं।
• प्रत्येक उपकरण को अलग-अलग स्विच द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
• सभी उपकरणों को समान वोल्टेज प्राप्त होता है।
यदि घरेलू परिपथों में उपकरणों को श्रेणीक्रम (Series Connection) में जोड़ा जाए, तो कई समस्याएँ उत्पन्न होंगी—
• सभी उपकरणों में समान धारा प्रवाहित होगी, जबकि प्रत्येक उपकरण की आवश्यकता अलग होती है।
• वोल्टेज विभाजित हो जाएगा।
• यदि एक उपकरण खराब हो जाए, तो पूरा परिपथ टूट जाएगा और सभी उपकरण बंद हो जाएंगे।
विद्युत विज्ञान में समानांतर संयोजन का सिद्धांत ओम के नियम (Ohm’s Law) तथा विद्युत धारा और विभवांतर के सिद्धांतों पर आधारित है। घरेलू वायरिंग प्रणाली इसी कारण समानांतर संयोजन पर आधारित होती है।
इस प्रकार कारण (R) सत्य है और वही अभिकथन (A) की सही व्याख्या भी करता है।
86. पौधे का प्रकाश की ओर झुकने का सही स्पष्टीकरण कौन-सा है ?
I. प्रकाश के संपर्क में आने वाले क्षेत्र में ऑक्सिन का उत्पादन।
II. छायादार क्षेत्र में ऑक्सिन का उत्पादन।
III. छायादार क्षेत्र में कोशिकाओं से ऑक्सिन का प्रसार उन कोशिकाओं के विभाजन का कारण बनता है।
IV. छायादार क्षेत्र में कोशिकाओं में ऑक्सिन का प्रसार उन कोशिकाओं को लंबा करता है।
Answer: C
पौधों का प्रकाश की ओर झुकना प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहलाता है। यह पौधों की एक महत्वपूर्ण जैविक प्रतिक्रिया है, जिसमें पौधा प्रकाश स्रोत की दिशा में वृद्धि करता है। इस प्रक्रिया में मुख्य भूमिका ऑक्सिन (Auxin) नामक पादप हार्मोन निभाता है।
ऑक्सिन का निर्माण पौधे के शीर्ष भाग (Shoot Apex) में होता है। जब पौधे पर एक दिशा से प्रकाश पड़ता है, तब ऑक्सिन प्रकाश वाले भाग से हटकर छायादार भाग में अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाता है। इसलिए कथन II सही है।
छायादार भाग में ऑक्सिन की अधिक मात्रा कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने (Cell Elongation) का कार्य करती है, न कि कोशिका विभाजन का। परिणामस्वरूप छायादार भाग की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं और पौधा प्रकाश की दिशा में मुड़ जाता है। इसलिए कथन IV सही है जबकि कथन III गलत है।
कथन I भी गलत है क्योंकि ऑक्सिन का अधिक संचय प्रकाश वाले भाग में नहीं, बल्कि छायादार भाग में होता है।
ऑक्सिन पौधों का एक महत्वपूर्ण वृद्धि हार्मोन है, जो—
• कोशिका लंबाई वृद्धि (Cell Elongation)
• जड़ों एवं तनों की वृद्धि
• प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)
• गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism)
जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
पौधों में अन्य प्रमुख हार्मोन—
• जिबरेलिन (Gibberellin) — तने की वृद्धि
• साइटोकाइनिन (Cytokinin) — कोशिका विभाजन
• एब्सिसिक अम्ल (ABA) — वृद्धि अवरोधक
• एथिलीन (Ethylene) — फल पकना
आदि हैं।
87. यहाँ दो कथन दिये गये हैं, जिन्हें क्रमशः अभिकथन (A) और कारण (R) के रूप में चिह्नित किया गया है। नीचे दिये गये कोड के अनुसार अपना उत्तर चुनें।
अभिकथन (A): द्विपद नामकरण पद्धति हमारे चारों ओर उपस्थित जीवों की अतिविविधता को एक समान तरीके से पहचानने के लिये बनायी गयी है।
कारण (R): द्विपद नाम दो शब्दों से बना होता है — वंशीय नाम तथा जातीय नाम।
Answer: A
जीव-जगत में लाखों प्रकार के जीव पाए जाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों और भाषाओं में एक ही जीव के अलग-अलग स्थानीय नाम होने के कारण वैज्ञानिक अध्ययन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए द्विपद नामकरण पद्धति (Binomial Nomenclature) विकसित की गई। इसलिए अभिकथन (A) सत्य है।
इस पद्धति का विकास प्रसिद्ध वैज्ञानिक कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus) ने किया था, जिन्हें आधुनिक वर्गीकरण विज्ञान (Taxonomy) का जनक कहा जाता है। द्विपद नामकरण के अंतर्गत प्रत्येक जीव को दो शब्दों वाला एक वैज्ञानिक नाम दिया जाता है—
• पहला शब्द — वंश (Genus) का नाम
• दूसरा शब्द — जाति (Species) का नाम
इसलिए कारण (R) भी सत्य है।
द्विपद नामकरण के कुछ महत्वपूर्ण नियम—
• वैज्ञानिक नाम सामान्यतः लैटिन भाषा में लिखे जाते हैं।
• वंश (Genus) का पहला अक्षर बड़ा लिखा जाता है।
• जाति (Species) का पहला अक्षर छोटा लिखा जाता है।
• मुद्रित रूप में नाम तिरछे अक्षरों (Italic) में लिखे जाते हैं।
उदाहरण—
• मनुष्य — Homo sapiens
• आम — Mangifera indica
• शेर — Panthera leo
द्विपद नामकरण से—
• विश्वभर में जीवों की पहचान एक समान तरीके से होती है।
• वैज्ञानिक संचार में सरलता आती है।
• जीवों के वर्गीकरण और अध्ययन में सुविधा होती है।
88. निम्नलिखित में से कौन-से राइबोसोम के कार्य हैं?
I. प्रोटीन संश्लेषण
II. एन्जाइम का निर्माण
III. वसा (लिपिड्स) का निर्माण
IV. स्टार्च का निर्माण
Answer: D
राइबोसोम (Ribosome) कोशिका के अत्यंत महत्वपूर्ण कोशिकांग (Cell Organelles) हैं, जो मुख्यतः प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis) का कार्य करते हैं। इन्हें कोशिका की “प्रोटीन फैक्ट्री” भी कहा जाता है। राइबोसोम सभी प्रकार की जीवित कोशिकाओं — प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक — में पाए जाते हैं।
राइबोसोम पर ही अमीनो अम्ल (Amino Acids) जुड़कर प्रोटीन का निर्माण करते हैं। कोशिका में बनने वाले अधिकांश एन्जाइम (Enzymes) प्रोटीन प्रकृति के होते हैं। इसलिए एन्जाइमों का निर्माण भी अप्रत्यक्ष रूप से राइबोसोम द्वारा ही होता है। इस कारण कथन (I) और (II) सही हैं।
वसा अथवा लिपिड्स (Lipids) का निर्माण मुख्यतः स्मूथ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Smooth Endoplasmic Reticulum – SER) में होता है। इसलिए कथन (III) गलत है।
स्टार्च का निर्माण पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान होता है। यह कार्य मुख्यतः क्लोरोप्लास्ट जैसे प्लास्टिड्स में सम्पन्न होता है। इसलिए कथन (IV) भी गलत है।
राइबोसोम की महत्वपूर्ण विशेषताएँ—
• राइबोसोम झिल्ली रहित कोशिकांग होते हैं।
• इनकी खोज जॉर्ज पलाडे (George Palade) ने की थी, इसलिए इन्हें कभी-कभी “Palade Particles” भी कहा जाता है।
• ये कोशिका द्रव्य में स्वतंत्र रूप से या रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (RER) से जुड़े पाए जाते हैं।
• प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में 70S तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं में 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।
• माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट में भी अपने स्वतंत्र राइबोसोम पाए जाते हैं।
89. पौधों में, प्रतान किस उद्दीपन के लिए संवेदनशील होते हैं?
Answer: C
पौधों में प्रतान (Tendrils) पतली, धागेनुमा तथा कुंडलित संरचनाएँ होती हैं, जो पौधों को सहारा पकड़ने और ऊपर चढ़ने में सहायता करती हैं। ये मुख्यतः बेल वाले पौधों जैसे—
• मटर
• अंगूर
• लौकी
• कद्दू
• खीरा
आदि में पाए जाते हैं।
प्रतान स्पर्श उद्दीपन (Touch Stimulus) के प्रति संवेदनशील होते हैं। जब प्रतान किसी सहारे के संपर्क में आते हैं, तो वे उस वस्तु के चारों ओर लिपटने लगते हैं। पौधों की इस प्रतिक्रिया को स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) कहा जाता है। इसलिए सही उत्तर स्पर्श उद्दीपन है।
स्पर्शानुवर्तन में पौधे का कोई भाग स्पर्श के कारण किसी विशेष दिशा में वृद्धि करता है। प्रतान का सहारे के चारों ओर लिपटना पौधे को अधिक ऊँचाई तक पहुँचने और सूर्य के प्रकाश को प्राप्त करने में मदद करता है।
यह प्रक्रिया पौधों में उपस्थित वृद्धि हार्मोन ऑक्सिन (Auxin) से प्रभावित होती है। जब प्रतान किसी वस्तु को छूते हैं, तो ऑक्सिन का असमान वितरण होता है, जिसके कारण एक ओर की कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं और प्रतान मुड़कर सहारे को पकड़ लेते हैं।
पौधों में प्रमुख अनुवर्तन (Tropisms)—
• प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) — प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया
• गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) — गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया
• जलानुवर्तन (Hydrotropism) — जल के प्रति प्रतिक्रिया
• रसायनानुवर्तन (Chemotropism) — रासायनिक पदार्थों के प्रति प्रतिक्रिया
• स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) — स्पर्श के प्रति प्रतिक्रिया
पौधों की ये अनुक्रियाएँ उन्हें वातावरण के अनुसार अनुकूलन करने तथा वृद्धि एवं विकास में सहायता प्रदान करती हैं।
90. प्रतीक ने एक वस्तु ₹ 8,400 में खरीदी और उसे ₹ 6,384 में बेच दिया। उसे होने वाले नुकसान का प्रतिशत है –
Answer: A
दिया गया है—
• क्रय मूल्य (CP) = ₹8400
• विक्रय मूल्य (SP) = ₹6384
चूँकि विक्रय मूल्य, क्रय मूल्य से कम है, इसलिए यहाँ हानि (Loss) होगी।
हानि = क्रय मूल्य − विक्रय मूल्य
= 8400 − 6384
= ₹2016
अब,
हानि प्रतिशत = (हानि / क्रय मूल्य) × 100
= (2016 / 8400) × 100
= 24%
91. 12 cm ऊँचाई तथा 13 cm तिर्यक ऊँचाई का एक शंकु, इसकी त्रिज्या के समान त्रिज्या वाले एक अर्धगोले पर अध्यारोपित है। इस ठोस का आयतन cm³ में है –
Answer: B
दिया गया है—
• शंकु की ऊँचाई (h) = 12 cm
• शंकु की तिर्यक ऊँचाई (l) = 13 cm
शंकु की त्रिज्या ज्ञात करने के लिए—
l² = r² + h²
13² = r² + 12²
169 = r² + 144
r² = 25
r = 5 cm
अर्थात शंकु तथा अर्धगोले दोनों की त्रिज्या 5 cm है।
अब,
शंकु का आयतन
= (1/3)πr²h
= (1/3)π × 5² × 12
= (1/3)π × 25 × 12
= 100π cm³
अर्धगोले का आयतन
= (2/3)πr³
= (2/3)π × 5³
= (2/3)π × 125
= 250π/3 cm³
अब कुल आयतन—
= 100π + 250π/3
= (300π + 250π)/3
= 550π/3 cm³
92. स्तंभ-। में दिए गए शब्दों का स्तंभ ।। में दिए गए अर्थों से सही मिलान करें और सही उत्तर के रूप में उपयुक्त कूट चुनें।
स्तंभ-I स्तंभ-II
a. विश्वास निर्माण उपाय i. कुछ प्रकार के हथियारों का त्याग
b. शस्त्र नियंत्रण ii. नियमित आधार पर राष्ट्रों के बीच रक्षा मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की एक प्रक्रिया
c. गठबंधन सैन्य हमला iii. राष्ट्रों का एक गठबंधन जिसका उद्देश्य प्रतिरोध या बचाव करना है
d. निरस्त्रीकरण iv. हथियारों के अधिग्रहण या विकास को नियंत्रित करता है
Answer: A
• a. विश्वास निर्माण उपाय (Confidence Building Measures) → ii. नियमित आधार पर राष्ट्रों के बीच रक्षा मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की एक प्रक्रिया :
इसके अंतर्गत दो या दो से अधिक देश सैन्य टकराव को रोकने के लिए एक-दूसरे के साथ अपनी सैन्य योजनाओं, बलों की स्थिति और सूचनाओं को साझा करते हैं ताकि कोई गलतफहमी या अचानक युद्ध की स्थिति उत्पन्न न हो।
• b. शस्त्र नियंत्रण (Arms Control) → iv. हथियारों के अधिग्रहण या विकास को नियंत्रित करता है :
शस्त्र नियंत्रण के तहत देश कुछ विशेष प्रकार के हथियारों के निर्माण, परीक्षण और उपयोग पर आपसी सहमति से नियम एवं सीमाएँ निर्धारित करते हैं। एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि (ABM Treaty) इसका उदाहरण है।
• c. गठबंधन (Alliance/Coalition) → iii. राष्ट्रों का एक गठबंधन जिसका उद्देश्य प्रतिरोध या बचाव करना है :
यह सामूहिक सुरक्षा के लिए बनाया गया देशों का संगठन होता है, जो बाहरी खतरों या सैन्य हमलों का मिलकर सामना करता है। नाटो (NATO) इसका प्रमुख उदाहरण है।
• d. निरस्त्रीकरण (Disarmament) → i. कुछ प्रकार के हथियारों का त्याग :
निरस्त्रीकरण का अर्थ मानवता के लिए खतरनाक हथियारों को समाप्त करना या उनका त्याग करना है। जैविक हथियार निषेध संधि तथा रासायनिक हथियार निषेध संधि इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
93. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन बहुसंख्यकवाद और सत्ता की साझेदारी के बीच सटीक रूप से अंतर करता है?
Answer: A
• बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) ऐसी राजनीतिक व्यवस्था या विचारधारा है जिसमें बहुसंख्यक समुदाय अपनी संख्या के आधार पर शासन और नीतियों पर प्रभुत्व स्थापित करता है। इसमें कई बार अल्पसंख्यकों के हितों की उपेक्षा होने की संभावना रहती है। श्रीलंका में सिंहली बहुसंख्यकवाद इसका प्रमुख उदाहरण माना जाता है, जहाँ तमिल समुदाय के साथ असमानता की स्थिति उत्पन्न हुई थी।
• सत्ता की साझेदारी (Power Sharing) लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसमें विभिन्न सामाजिक, भाषाई, धार्मिक एवं क्षेत्रीय समूहों के बीच सत्ता का बंटवारा किया जाता है ताकि सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसका उद्देश्य सामाजिक संघर्षों को कम करना और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना होता है।
• सत्ता की साझेदारी कई रूपों में दिखाई देती है—
• सरकार के विभिन्न अंगों के बीच शक्ति विभाजन
• केंद्र और राज्य के बीच संघीय व्यवस्था
• विभिन्न सामाजिक समूहों की राजनीतिक भागीदारी
• राजनीतिक दलों एवं दबाव समूहों के बीच संतुलन
• बेल्जियम को सत्ता की साझेदारी का सफल उदाहरण माना जाता है, जहाँ डच और फ्रेंच भाषी समुदायों के बीच संवैधानिक शक्ति संतुलन स्थापित किया गया।
94. सरकार गठन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
कथन I : स्वतंत्र उम्मीदवारों द्वारा सरकार बनाना संभव है।
कथन II : सरकार गठन केवल राजनीतिक दलों के लिए आरक्षित है।
कथन III : सरकार गठन केवल निर्वाचित राजनीतिक दलों तक ही सीमित है।
कथन IV : सरकार केवल निर्वाचित और बहुमत प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा ही बनाई जा सकती है।
Answer: D
भारत में संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था लागू है, जहाँ सरकार गठन का आधार विधानमंडल में बहुमत होता है। लोकसभा या विधानसभा में जिस राजनीतिक दल या गठबंधन को बहुमत प्राप्त होता है, वही सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत करता है।
• कथन I गलत है क्योंकि केवल स्वतंत्र उम्मीदवार सामान्यतः सरकार नहीं बनाते। वे सरकार को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन सरकार गठन के लिए संगठित बहुमत आवश्यक होता है।
• कथन II गलत है क्योंकि संविधान में सरकार गठन को केवल राजनीतिक दलों तक “आरक्षित” नहीं कहा गया है। यद्यपि व्यवहारिक रूप से सरकार राजनीतिक दलों या गठबंधनों द्वारा ही बनाई जाती है।
• कथन III आंशिक रूप से सही प्रतीत होता है, लेकिन यह अधूरा है क्योंकि केवल निर्वाचित होना पर्याप्त नहीं है, बहुमत भी आवश्यक है।
• कथन IV सही है क्योंकि संसदीय प्रणाली में सरकार वही राजनीतिक दल या गठबंधन बनाता है जिसे सदन में बहुमत प्राप्त हो। भारत में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की नियुक्ति भी इसी सिद्धांत पर आधारित होती है।
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 75 केंद्र में मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व को लोकसभा के प्रति निर्धारित करता है, जबकि राज्यों में यही व्यवस्था अनुच्छेद 164 के अंतर्गत विधान सभा के प्रति लागू होती है। यही कारण है कि सरकार गठन के लिए सदन का विश्वास और बहुमत अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
95. नीचे दो कथन दिए हैं, जिन्हें अभिकथन (A) और कारण (R) के रूप में चिह्नित किया गया है। कथनों को पढ़ें और सही विकल्प चुनें।
अभिकथन (A): सत्ता की साझेदारी समाज में संघर्ष को रोकने में मदद कर सकती है।
कारण (R): सत्ता की साझेदारी यह सुनिश्चित करती है कि विभिन्न सामाजिक समूहों को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाए, हाशिए पर होने को कम किया जाए और समावेशिता को बढ़ावा दिया जाए।
Answer: C
• अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि सत्ता की साझेदारी (Power Sharing) विभिन्न सामाजिक, भाषाई, धार्मिक और क्षेत्रीय समूहों को शासन में भागीदारी का अवसर देती है। इससे असंतोष और संघर्ष की संभावना कम होती है तथा राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है।
• कारण (R) भी सत्य है क्योंकि सत्ता की साझेदारी में निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी प्रमुख समूहों को शामिल किया जाता है। इससे किसी एक समुदाय का प्रभुत्व कम होता है और अल्पसंख्यक समूहों को भी प्रतिनिधित्व मिलता है। यही समावेशिता सामाजिक संघर्ष को कम करने में सहायता करती है।
• कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है क्योंकि सामाजिक समूहों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व ही संघर्ष रोकने का मुख्य आधार है।
बेल्जियम सत्ता की साझेदारी का प्रमुख उदाहरण माना जाता है, जहाँ डच और फ्रेंच भाषी समुदायों के बीच संवैधानिक शक्ति संतुलन स्थापित कर सामाजिक संघर्ष को कम किया गया। वहीं श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद की नीति के कारण सिंहली और तमिल समुदायों के बीच लंबे समय तक संघर्ष की स्थिति बनी रही।
96. निम्नलिखित को सही क्रम में व्यवस्थित करें। भूतापीय ऊर्जा उत्पन्न करने का क्रम निम्नलिखित हैः
(i) यह इतना गर्म होता है कि जब पृथ्वी की सतह पर ऊपर उठता है, तो यह भाप में बदल जाता है।
(ii) ऐसे क्षेत्रों में (जहाँ भूतापीय प्रवणता अधिक होती है) भूजल चट्टानों से ऊष्मा अवशोषित कर लेता है और गर्म हो जाता है।
(iii) इस भाप का उपयोग टर्बाइन चलाने और बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
(iv) भूतापीय ऊर्जा इसलिए मौजूद है क्योंकि पृथ्वी गहराई बढ़ने के साथ उत्तरोत्तर गर्म होती जाती है।
Answer: A
• (iv) प्राथमिक कारण :
सबसे पहले भूतापीय ऊर्जा का मूल कारण स्थापित होता है। पृथ्वी के भीतर गहराई बढ़ने के साथ तापमान लगातार बढ़ता जाता है, जिसे भूतापीय प्रवणता (Geothermal Gradient) कहा जाता है। इसी कारण पृथ्वी के अंदर अत्यधिक ऊष्मा मौजूद रहती है।
• (ii) भूजल का गर्म होना :
जिन क्षेत्रों में भूतापीय प्रवणता अधिक होती है, वहाँ भूमिगत जल गर्म चट्टानों के संपर्क में आकर ऊष्मा अवशोषित कर लेता है और अत्यधिक गर्म हो जाता है।
• (i) भाप में परिवर्तन :
जब यह अत्यधिक गर्म जल पृथ्वी की सतह की ओर ऊपर उठता है, तो दबाव कम होने के कारण यह भाप में बदल जाता है।
• (iii) विद्युत उत्पादन :
अंत में इस भाप का उपयोग टर्बाइन चलाने के लिए किया जाता है। टर्बाइन जनरेटर से जुड़े होते हैं, जिनकी सहायता से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
भूतापीय ऊर्जा को नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है क्योंकि इससे प्रदूषण कम होता है और यह लंबे समय तक उपलब्ध रहने वाली ऊर्जा है।
भारत में पुगा घाटी (लद्दाख), मणिकरण (हिमाचल प्रदेश) तथा तत्तापानी (छत्तीसगढ़) भूतापीय ऊर्जा के प्रमुख संभावित क्षेत्र हैं।
97. महेश ने अपने दोस्त को कपास उगाने के लिए उपयुक्त मिट्टी के प्रकार के बारे में संकेत दिए। महेश द्वारा दिए गए निम्नलिखित संकेतों में से कौन-सा मिट्टी के आदर्श प्रकार की पहचान करने में सबसे उपयोगी होगा ?
संकेतः
i. यह नमी धारण करने की अपनी क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
ii. यह जलयोजन के बाद पीली हो जाती है।
iii. यह कंकुर और भांगर की गांठों से भरपूर है।
iv. यह अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी है।
Answer: A
कपास (Cotton) की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी काली मिट्टी (Black Soil / Regur Soil) मानी जाती है। इस मिट्टी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी अत्यधिक नमी धारण करने की क्षमता (Moisture Retention Capacity) है। इसलिए संकेत i कपास के लिए आदर्श मिट्टी की पहचान करने में सबसे अधिक उपयोगी है।
काली मिट्टी का निर्माण मुख्यतः बेसाल्ट चट्टानों के अपक्षय से हुआ है। यह मिट्टी विशेष रूप से दक्कन ट्रैप क्षेत्र में पाई जाती है। इसमें चूना, मैग्नीशियम, लोहा और पोटाश प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।
यह मिट्टी वर्षा के बाद लंबे समय तक नमी बनाए रखती है, जिससे कपास की फसल को निरंतर जल उपलब्ध होता रहता है। सूखने पर इसमें चौड़ी दरारें पड़ती हैं, जिससे मिट्टी में वायु संचार बेहतर होता है। इसी कारण इसे “स्वयं जुताई वाली मिट्टी” (Self-Ploughing Soil) भी कहा जाता है।
• संकेत ii पीली मिट्टी की विशेषता से संबंधित है, जो जलयोजन के कारण पीली दिखाई देती है।
• संकेत iii में वर्णित कंकुर और भांगर जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) से संबंधित शब्द हैं। भांगर पुरानी जलोढ़ मिट्टी को कहा जाता है जिसमें कैल्शियम युक्त कंकरीले पदार्थ पाए जाते हैं।
• संकेत iv में दी गई दोमट मिट्टी सामान्य कृषि के लिए उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन कपास की विशेष पहचान काली मिट्टी और उसकी नमी धारण क्षमता है।
भारत में काली मिट्टी मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में पाई जाती है।
98. कॉलम । को कॉलम II से मिलाएँ :
कॉलम-I (बादलों के प्रकार) कॉलम-II (विशेषताएँ)
a. सिरस (Ci), सिरो क्यूम्यूलस (Cc), सिरो स्ट्रेटस (Cs) I. परतदार या फूले हुए, लिक्विड पानी से बने
b. ऑल्टो क्यूम्यूलस (Ac), ऑल्टो स्ट्रेटस (As) II. उदास आसमान, हल्की बारिश, आम तौर पर बादल छाए रहते हैं
c. स्ट्रेटस (St), स्ट्रेटा क्यूम्यूलस (Sc), निम्बो स्ट्रेटस (Ns) III. पतले, सफेद और बर्फीले, कोई वर्षा नहीं
d. क्यूम्यूलस (Cu), क्यूम्युलोनिम्बस IV. लंबे, संकरे, फूले हुए
Answer: C
• a. सिरस (Ci), सिरो क्यूम्यूलस (Cc), सिरो स्ट्रेटस (Cs) → III. पतले, सफेद और बर्फीले, कोई वर्षा नहीं :
ये उच्च स्तर (High Clouds) के बादल होते हैं जो बहुत अधिक ऊँचाई पर बनते हैं। इनमें मुख्यतः बर्फ के क्रिस्टल पाए जाते हैं। ये पतले, सफेद और रेशेदार दिखाई देते हैं तथा सामान्यतः वर्षा नहीं करते।
• b. ऑल्टो क्यूम्यूलस (Ac), ऑल्टो स्ट्रेटस (As) → I. परतदार या फूले हुए, लिक्विड पानी से बने :
ये मध्य स्तर (Middle Clouds) के बादल होते हैं। इनमें जल की बूंदें पाई जाती हैं और ये परतदार या गुच्छेदार रूप में दिखाई देते हैं।
• c. स्ट्रेटस (St), स्ट्रेटा क्यूम्यूलस (Sc), निम्बो स्ट्रेटस (Ns) → II. उदास आसमान, हल्की बारिश, आम तौर पर बादल छाए रहते हैं :
ये निम्न स्तर (Low Clouds) के बादल होते हैं जो आकाश को ढक लेते हैं और हल्की वर्षा या फुहार लाते हैं। विशेष रूप से निम्बोस्ट्रेटस लगातार वर्षा कराने वाले बादल माने जाते हैं।
• d. क्यूम्यूलस (Cu), क्यूम्युलोनिम्बस → IV. लंबे, संकरे, फूले हुए :
ये ऊर्ध्वाधर विकास वाले बादल (Clouds with Vertical Development) हैं। क्यूम्युलोनिम्बस बादल गर्जन, बिजली और तीव्र वर्षा से संबंधित होते हैं। इन्हें “Thunder Clouds” भी कहा जाता है।
बादलों का वर्गीकरण मुख्यतः उनकी ऊँचाई, आकार तथा संरचना के आधार पर किया जाता है। ल्यूक हॉवर्ड (Luke Howard) को आधुनिक बादल वर्गीकरण प्रणाली का जनक माना जाता है।
99. रेडियल ड्रेनेज पैटर्न के बारे में इनमें से कौन से कथन सही हैं ?
a. एक चोटी से निकलने वाली सहायक नदियाँ ढलान का पालन करते हुए नीचे की ओर बहती हैं और सभी दिशाओं में पानी बहाती हैं।
b. रेडियल ड्रेनेज पैटर्न का एक अच्छा उदाहरण अमरकंटक पठार से निकलने वाली नदियाँ देती है।
c. रेडियल ड्रेनेज पैटर्न नीलगिरि पहाड़ियों में भी पाए जाते हैं।
Answer: D
• a. एक चोटी से निकलने वाली सहायक नदियाँ ढलान का पालन करते हुए नीचे की ओर बहती हैं और सभी दिशाओं में पानी बहाती हैं। (सही)
रेडियल (अरीय) अपवाह प्रतिरूप (Radial Drainage Pattern) तब बनता है जब नदियाँ किसी केंद्रीय ऊँचे स्थान, जैसे गुंबद, ज्वालामुखी शंकु या पठार की चोटी से निकलकर ढलान का अनुसरण करते हुए सभी दिशाओं में बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं। यह प्रतिरूप पहिए की तिल्लियों (Spokes) जैसा दिखाई देता है।
• b. रेडियल ड्रेनेज पैटर्न का एक अच्छा उदाहरण अमरकंटक पठार से निकलने वाली नदियाँ देती है। (सही)
अमरकंटक पठार भारत में रेडियल अपवाह प्रतिरूप का प्रमुख उदाहरण है। यहाँ से विभिन्न दिशाओं में नदियाँ निकलती हैं—
• नर्मदा नदी पश्चिम की ओर
• सोन नदी उत्तर की ओर
• महानदी तंत्र की सहायक नदियाँ पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर
• c. रेडियल ड्रेनेज पैटर्न नीलगिरि पहाड़ियों में भी पाए जाते हैं। (सही)
दक्षिण भारत की नीलगिरि पहाड़ियाँ भी एक केंद्रीय ऊँचा क्षेत्र बनाती हैं। यहाँ से भवानी, मोयार तथा काबिनी जैसी नदियाँ विभिन्न दिशाओं में बहती हैं, जिससे रेडियल ड्रेनेज पैटर्न विकसित होता है।
100. आर्द्रभूमि क्षेत्र को उनके क्षेत्रफल (लगभग) वर्ग किमी में अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
a. वेम्बनाड आर्द्रभूमि
b. चिलिका झील
c. अष्टमुडी आर्द्रभूमि
d. सांभर झील
e. सुंदरवन
Answer: D
अवरोही क्रम (Descending Order) का अर्थ है सबसे बड़े क्षेत्रफल से सबसे छोटे क्षेत्रफल की ओर व्यवस्थित करना। दिए गए आर्द्रभूमि क्षेत्रों का वास्तविक क्षेत्रफल लगभग निम्न प्रकार है—
• सुंदरवन (Sundarban Wetland) — लगभग 4230 वर्ग किमी
यह पश्चिम बंगाल के गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र में स्थित है। यह विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र है तथा UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर पाए जाते हैं।
• वेम्बनाड आर्द्रभूमि (Vembanad Wetland System) — लगभग 2033 वर्ग किमी
यह केरल में स्थित भारत की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि प्रणाली है। यह बैकवाटर पर्यटन, मत्स्य पालन तथा कुमारकोम पक्षी विहार के लिए प्रसिद्ध है। इसे रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है।
• चिलिका झील (Chilika Lake) — लगभग 1165 वर्ग किमी
यह ओडिशा में स्थित एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है। यह प्रवासी पक्षियों तथा इरावदी डॉल्फिन के लिए प्रसिद्ध है। यह भारत की प्रारंभिक रामसर साइट्स में शामिल है।
• सांभर झील (Sambhar Lake) — लगभग 230 वर्ग किमी
यह राजस्थान में स्थित भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील है। यहाँ बड़े पैमाने पर नमक उत्पादन किया जाता है तथा यह फ्लेमिंगो पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास क्षेत्र है।
• अष्टमुडी आर्द्रभूमि (Ashtamudi Wetland) — लगभग 61 वर्ग किमी
यह केरल के कोल्लम जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण बैकवाटर एस्ट्युरी है। “अष्टमुडी” का अर्थ आठ शाखाओं वाली झील है। यह मत्स्य पालन, नारियल आधारित उद्योग तथा अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार सही अवरोही क्रम होगा—
सुंदरवन > वेम्बनाड > चिलिका > सांभर > अष्टमुडी
अर्थात् —
e > a > b > d > c
नोट :
वास्तविक क्षेत्रफल के आधार पर सही क्रम e → a → b → d → c बनता है, लेकिन यह संयोजन मूल प्रश्न के विकल्पों में उपलब्ध नहीं था। यह नया विकल्प Examdhara द्वारा जोड़ा गया है।
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