NCERT 6th History MCQ Our Pasts – I Chapter 4 (For All Competitive Exams)

Chapter 4 MCQs in Hindi; क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

1. वेद कितने प्रकार के होते हैं?

A. दो
B. तीन
C. चार
D. पाँच

Answer: C

वेद प्राचीन भारतीय सभ्यता और वैदिक संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ माने जाते हैं। ‘वेद’ शब्द संस्कृत की ‘विद्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है — ज्ञान। वेदों को मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन साहित्यिक स्रोतों में गिना जाता है। वैदिक साहित्य मुख्यतः चार भागों में विभाजित है — ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।

ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद माना जाता है और इसमें विभिन्न देवताओं की स्तुतियों के रूप में सूक्त संकलित हैं। सामवेद मुख्यतः संगीत और गायन से संबंधित है तथा इसमें ऋग्वेद के मंत्रों को गेय रूप में प्रस्तुत किया गया है। यजुर्वेद में यज्ञों और धार्मिक अनुष्ठानों की विधियाँ दी गई हैं। अथर्ववेद में जादू-टोना, चिकित्सा, लोकविश्वास तथा दैनिक जीवन से जुड़े मंत्रों का उल्लेख मिलता है।

वैदिक काल में इन वेदों को मौखिक रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी याद कराया जाता था। बाद में इन्हें लिखित रूप दिया गया। वेद भारतीय संस्कृति, दर्शन, धर्म और सामाजिक व्यवस्था के अध्ययन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

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2. निम्नलिखित में से वेदों के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

I. वेदों में सबसे पुराना वेद ‘ऋग्वेद’ है।

II. ऋग्वेद में एक हजार से ज्यादा प्रार्थनाएँ हैं।

III. ऋग्वेद की रचना लगभग 3500 साल पहले हुई।

IV. ऋग्वेद की लिपि ब्राह्मी लिखी गई थी।

कूट:-

A. I और II
B. II, III और IV
C. I और IV
D. I, II और III

Answer: D

वैदिक साहित्य भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है। इनमें ऋग्वेद को सबसे प्राचीन वेद माना जाता है। यह वेद विभिन्न देवताओं की स्तुतियों और प्रार्थनाओं का संग्रह है। इसलिए कथन I सही है।

ऋग्वेद में एक हजार से अधिक सूक्त या प्रार्थनाएँ हैं, जिन्हें ऋषियों द्वारा रचा गया था। इन सूक्तों में अग्नि, इन्द्र, सोम आदि देवताओं की स्तुति की गई है। इसलिए कथन II भी सही है।

इतिहासकारों के अनुसार ऋग्वेद की रचना लगभग 3500 वर्ष पूर्व हुई थी। यह वैदिक काल के प्रारंभिक चरण का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए कथन III भी सही है।

कथन IV गलत है क्योंकि प्रारंभिक वैदिक साहित्य मौखिक परंपरा में सुरक्षित रखा गया था। ऋग्वेद को ब्राह्मी लिपि में प्रारंभ में नहीं लिखा गया था। वैदिक मंत्रों को गुरु-शिष्य परंपरा द्वारा स्मरण कराया जाता था।

ऋग्वेद की भाषा वैदिक संस्कृत थी, जो बाद की संस्कृत से कुछ भिन्न थी। वैदिक काल में लिखित परंपरा की तुलना में मौखिक परंपरा अधिक महत्वपूर्ण थी।

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3. संस्कृत किस भाषा-परिवार की भाषा मानी जाती है?

A. द्रविड़
B. भारत-यूरोपीय
C. ऑस्ट्रो-एशियाटिक
D. इनमें से कोई नहीं

Answer: B

संस्कृत भाषा भारतीय सभ्यता और संस्कृति की सबसे प्राचीन एवं महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है। भाषावैज्ञानिकों के अनुसार संस्कृत भारत-यूरोपीय (Indo-European) भाषा-परिवार का हिस्सा है। यह भाषा-परिवार विश्व के सबसे बड़े भाषा-परिवारों में से एक माना जाता है, जिसकी भाषाएँ एशिया और यूरोप के अनेक देशों में बोली जाती हैं।

भारत की कई भाषाएँ जैसे हिंदी, असमिया, गुजराती, कश्मीरी और सिंधी इसी भाषा-परिवार से संबंधित हैं। इसके अतिरिक्त अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी, जर्मन, यूनानी, इतालवी और स्पेनिश जैसी यूरोपीय भाषाएँ भी इसी परिवार का हिस्सा हैं। इन भाषाओं में अनेक शब्दों और ध्वनियों में समानता पाई जाती है। उदाहरण के लिए संस्कृत का ‘मातृ’, हिंदी का ‘माँ’ और अंग्रेज़ी का ‘मदर’ शब्द एक समान मूल को दर्शाते हैं।

संस्कृत का महत्व केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय धार्मिक, दार्शनिक और साहित्यिक परंपरा का प्रमुख आधार भी है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और अनेक पुराण संस्कृत में रचित हैं। वैदिक संस्कृत और शास्त्रीय संस्कृत भारतीय इतिहास के अध्ययन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

विकल्प A गलत है क्योंकि द्रविड़ भाषा-परिवार में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी भाषाएँ आती हैं। विकल्प C भी गलत है क्योंकि ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार में संथाली और मुंडारी जैसी भाषाएँ शामिल हैं।

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4. तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम किस भाषा-परिवार की भाषाएँ हैं?

A. द्रविड़
B. प्राकृत
C. भारतीय-यूरोपीय
D. ऑस्ट्रो-एशियाटिक

Answer: A

भारत भाषाई विविधता वाला देश है, जहाँ अनेक भाषा-परिवारों की भाषाएँ बोली जाती हैं। तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम दक्षिण भारत की प्रमुख भाषाएँ हैं और ये सभी द्रविड़ भाषा-परिवार से संबंधित हैं। द्रविड़ भाषा-परिवार भारत के सबसे प्राचीन भाषा-परिवारों में से एक माना जाता है।

तमिल भाषा विशेष रूप से अत्यंत प्राचीन मानी जाती है और इसका साहित्यिक इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। तेलुगु को “इटैलियन ऑफ द ईस्ट” भी कहा जाता है क्योंकि इसकी ध्वनियाँ मधुर मानी जाती हैं। कन्नड़ और मलयालम भी समृद्ध साहित्य और सांस्कृतिक परंपरा वाली भाषाएँ हैं।

द्रविड़ भाषा-परिवार की भाषाएँ मुख्यतः दक्षिण भारत में बोली जाती हैं, जबकि उत्तर भारत की अधिकांश भाषाएँ भारत-यूरोपीय भाषा-परिवार से संबंधित हैं।

विकल्प B गलत है क्योंकि प्राकृत प्राचीन भारत की लोकभाषाओं का समूह था, न कि इन भाषाओं का परिवार। विकल्प C गलत है क्योंकि भारतीय-यूरोपीय परिवार में हिंदी, संस्कृत, अंग्रेज़ी आदि भाषाएँ आती हैं। विकल्प D भी गलत है क्योंकि ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार में संथाली और मुंडारी जैसी भाषाएँ शामिल हैं।

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5. झारखंड और मध्य भारत के क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाएँ किस भाषा-परिवार से जुड़ी हुई हैं?

A. द्रविड़
B. प्राकृत
C. भारतीय-यूरोपीय
D. ऑस्ट्रो-एशियाटिक

Answer: D

भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग भाषा-परिवारों की भाषाएँ बोली जाती हैं। झारखंड और मध्य भारत के कई हिस्सों में बोली जाने वाली भाषाएँ ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा-परिवार से संबंधित मानी जाती हैं। यह भाषा-परिवार भारत की प्राचीन भाषाई परंपराओं में से एक है।

इस परिवार की भाषाओं में संथाली, मुंडारी, हो और खड़िया जैसी भाषाएँ प्रमुख हैं। ये भाषाएँ मुख्यतः आदिवासी समुदायों द्वारा बोली जाती हैं। इन भाषाओं की अपनी विशिष्ट ध्वनियाँ, शब्दावली और सांस्कृतिक परंपराएँ हैं, जो इन्हें अन्य भाषा-परिवारों से अलग बनाती हैं।

ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा-परिवार केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी भाषाएँ बोली जाती हैं। भारत में यह भाषा-परिवार विशेष रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में प्रभावी है।

विकल्प A गलत है क्योंकि द्रविड़ भाषाएँ मुख्यतः दक्षिण भारत में बोली जाती हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि प्राकृत कोई आधुनिक भाषा-परिवार नहीं है। विकल्प C भी गलत है क्योंकि भारतीय-यूरोपीय परिवार में हिंदी, संस्कृत और अन्य उत्तर भारतीय भाषाएँ शामिल हैं।

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6. निम्नलिखित कथनों पर विचार करे:-

I. ऋग्वेद का उच्चारण किया जाता था और श्रवण किया जाता था न की पढ़ा जाता था।

II. ऋग्वेद में विश्वामित्र नामक ऋषि और देवियों के रूप में पूजित दो नदिया गंगा और सिन्धु के बीच संवाद का ही अंश है।

इनमे से कौन सा कथन सही है

A. केवल I
B. केवल II
C. I और II दोनों
D. इनमें से कोई नहीं

Answer: A

ऋग्वेद प्राचीन भारत का सबसे पुराना वेद माना जाता है और वैदिक साहित्य का महत्वपूर्ण स्रोत है। प्रारंभिक समय में वेदों को लिखित रूप में सुरक्षित नहीं किया गया था। उस समय ज्ञान को मौखिक परंपरा के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाया जाता था। आचार्य वेदों का उच्चारण करते थे और विद्यार्थी उन्हें सुनकर याद करते थे। इसलिए ऋग्वेद का उच्चारण और श्रवण किया जाता था, पढ़ा नहीं जाता था। कई सदियों बाद वेदों को पहली बार लिखित रूप में सुरक्षित किया गया।

दूसरा कथन गलत है क्योंकि ऋग्वेद में विश्वामित्र ऋषि और देवी के रूप में पूजित दो नदियों — व्यास और सतलुज — के बीच संवाद का उल्लेख मिलता है, न कि गंगा और सिन्धु के बीच। ऋग्वेद के कुछ सूक्त संवाद शैली में रचे गए हैं, जिनमें प्राकृतिक शक्तियों को देवी-देवताओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे यह पता चलता है कि वैदिक काल के लोग प्रकृति की शक्तियों का सम्मान और पूजा करते थे।

ऋग्वेद वैदिक समाज के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसमें अग्नि, इंद्र, सोम और नदियों जैसे प्राकृतिक तत्वों की स्तुति की गई है। मौखिक परंपरा के कारण वेदों के सही उच्चारण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था और इसके लिए विशेष अभ्यास कराया जाता था।

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7. ऋग्वेद में किस ऋषि के सतलुज और व्यास नदियों के साथ बातचीत का वर्णन है?

A. विश्वामित्र
B. सोम
C. द्रोणाचार्य
D. अर्जुन

Answer: A

ऋग्वेद में अनेक सूक्त संवाद शैली में लिखे गए हैं। इनमें देवताओं, ऋषियों और प्रकृति के विभिन्न तत्वों के बीच संवाद का वर्णन मिलता है। एक प्रसिद्ध सूक्त में विश्वामित्र नामक ऋषि और देवी के रूप में पूजित दो नदियों — व्यास और सतलुज — के बीच संवाद का वर्णन है।

इस संवाद से यह स्पष्ट होता है कि वैदिक काल के लोग नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं मानते थे, बल्कि उन्हें देवी के रूप में सम्मान देते थे। नदियाँ उस समय कृषि, पेयजल, पशुपालन और यात्रा का मुख्य आधार थीं। इसलिए उनका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक था।

विश्वामित्र वैदिक काल के प्रमुख ऋषियों में से एक थे। ऋग्वेद के कई सूक्तों की रचना उनसे संबंधित मानी जाती है। उनके और नदियों के बीच संवाद वैदिक साहित्य की काव्यात्मक शैली तथा प्रकृति-पूजा की परंपरा को दर्शाता है।

विकल्प B गलत है क्योंकि सोम एक देवता तथा विशेष पेय से संबंधित शब्द है। विकल्प C और D महाभारत काल के पात्र हैं और उनका इस वैदिक प्रसंग से कोई संबंध नहीं है।

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8. ऋग्वेद में किन दो नदियों को देवी के रूप प्रस्तुत किया गया है?

A. गंगा-यमुना
B. गंगा-सिन्धु
C. सतलुज-सरस्वती
D. सतलुज-व्यास

Answer: D

ऋग्वेद में प्रकृति के विभिन्न तत्वों को देवताओं और देवियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वैदिक समाज का जीवन प्रकृति पर आधारित था, इसलिए नदियों, अग्नि, वायु और सूर्य को विशेष महत्व दिया जाता था।

ऋग्वेद के एक सूक्त में सतलुज और व्यास नदियों को देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन नदियों और विश्वामित्र ऋषि के बीच संवाद का उल्लेख मिलता है। यह संवाद उस समय की धार्मिक मान्यताओं और प्रकृति के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाता है।

नदियाँ वैदिक समाज के जीवन का आधार थीं। इनके किनारे लोग बसते थे, खेती करते थे और पशुपालन करते थे। इसी कारण उन्हें पवित्र माना गया और देवी के रूप में सम्मान दिया गया।

गंगा और यमुना का महत्व बाद के काल में अधिक बढ़ा, लेकिन ऋग्वेद के इस विशेष प्रसंग में सतलुज और व्यास नदियों का उल्लेख मिलता है। वैदिक साहित्य के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि उस समय के लोग प्रकृति और पर्यावरण के साथ गहरा संबंध रखते थे।

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9. ऋग्वेद की कागज पर छपाई करने का कार्य कब पूरा किया गया?

A. 100 साल पहले
B. 150 साल पहले
C. 200 साल पहले
D. 400 साल पहले

Answer: B

ऋग्वेद प्राचीन भारत का सबसे महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथ माना जाता है। प्रारंभिक काल में इसे लिखित रूप में नहीं बल्कि मौखिक परंपरा के माध्यम से सुरक्षित रखा गया था। गुरु अपने शिष्यों को वेदों का उच्चारण करवाते थे और विद्यार्थी उन्हें सुनकर कंठस्थ करते थे। कई सदियों तक यही परंपरा चलती रही।

बाद में ऋग्वेद की पांडुलिपियाँ तैयार की गईं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण पांडुलिपि कश्मीर में प्राप्त हुई थी, जो भूर्ज वृक्ष की छाल पर लिखी गई थी। लगभग 150 वर्ष पहले इसी पांडुलिपि का उपयोग ऋग्वेद को पहली बार छापने के लिए किया गया। इस पांडुलिपि के आधार पर ऋग्वेद का अंग्रेज़ी अनुवाद भी तैयार किया गया। वर्तमान समय में यह पांडुलिपि पुणे, महाराष्ट्र के एक पुस्तकालय में सुरक्षित रखी गई है।

यह तथ्य इस बात को दर्शाता है कि भारत में प्राचीन ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए मौखिक और लिखित दोनों परंपराओं का उपयोग किया गया। ऋग्वेद केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि वैदिक समाज, संस्कृति, भाषा और जीवन-शैली को समझने का भी महत्वपूर्ण स्रोत है।

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10. निम्नलिखित में से सही कथन का चयन करे:-

I. ऋग्वेद में मवेशियों, बच्चों और घोड़ो की प्राप्ति के लिए अनेक प्रार्थनाएँ है।

II. मवेशियों को प्राप्त करने के लिए लड़ाइयाँ की जाती थी और लड़ाइयाँ वैसे जमीनों के लिए की जाती थी जो उपजाऊ हो तथा जहाँ अच्छे चारागाह हो।

III. अधिकांश युद्धों में पुरुष और स्त्रियाँ दोनों भाग लेती थी और उनकी स्थायी सेना भी थी।

कूट:-

A. I और II
B. II और III
C. तीनो
D. इनमें से कोई नहीं

Answer: A

ऋग्वेद से वैदिक काल के सामाजिक और आर्थिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। उस समय मवेशियों का विशेष महत्व था और उन्हें संपत्ति का प्रमुख स्रोत माना जाता था। ऋग्वेद में मवेशियों, बच्चों विशेषकर पुत्रों, तथा घोड़ों की प्राप्ति के लिए अनेक प्रार्थनाओं का उल्लेख मिलता है। घोड़े युद्ध और रथ चलाने के लिए उपयोग किए जाते थे, इसलिए उनका महत्व बहुत अधिक था।

वैदिक समाज में उपजाऊ भूमि और अच्छे चारागाहों के लिए संघर्ष भी होते थे। मवेशियों को प्राप्त करने और चरागाहों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए विभिन्न समूहों के बीच लड़ाइयाँ होती थीं। ऐसी भूमि जहाँ फसलें अच्छी उग सकें और पशुओं के लिए पर्याप्त घास उपलब्ध हो, अत्यंत मूल्यवान मानी जाती थी। कुछ युद्ध पानी के स्रोतों और लोगों को बंदी बनाने के लिए भी किए जाते थे।

तीसरा कथन गलत है क्योंकि अधिकांश युद्धों में मुख्य रूप से पुरुष भाग लेते थे। उस समय कोई स्थायी सेना नहीं होती थी। लोग आवश्यकता पड़ने पर समूह बनाकर युद्ध करते थे। समाज के लोग आपस में सभा करते थे और युद्ध तथा शांति के विषय में विचार-विमर्श करते थे। वे अपने सरदार का चुनाव उसकी बहादुरी और युद्ध-कौशल के आधार पर करते थे।

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11. ऋग्वेद में किन दो समूहों का वर्गीकरण काम के आधार पर किया गया है?

A. किसान और पशुपालक
B. ब्राह्मण और क्षत्रिय
C. वैश्य और शूद्र
D. राजा और पुरोहित

Answer: D

ऋग्वेद से यह जानकारी मिलती है कि वैदिक समाज में कुछ समूहों का वर्गीकरण उनके कार्यों के आधार पर किया गया था। इनमें प्रमुख रूप से दो समूह महत्वपूर्ण थे — पुरोहित और राजा।

पुरोहित धार्मिक कार्यों और यज्ञ-अनुष्ठानों का संचालन करते थे। उन्हें कभी-कभी ब्राह्मण भी कहा जाता था। वे मंत्रों का ज्ञान रखते थे और धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखने का कार्य करते थे। समाज में उनका विशेष सम्मान था क्योंकि धार्मिक कार्यों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था।

दूसरा प्रमुख समूह राजा का था। राजा का मुख्य कार्य लोगों की सुरक्षा करना, युद्ध का नेतृत्व करना और समाज में व्यवस्था बनाए रखना था। वैदिक समाज में राजा को शक्तिशाली और बहादुर होना आवश्यक माना जाता था। लोग अपने सरदार या राजा का चयन उसके युद्ध-कौशल और नेतृत्व क्षमता के आधार पर करते थे।

यह वर्गीकरण बाद के वर्ण-व्यवस्था से अलग था। उस समय समाज पूरी तरह कठोर वर्ण व्यवस्था में विभाजित नहीं हुआ था। कार्य और जिम्मेदारियों के आधार पर लोगों की भूमिका निर्धारित होती थी।

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12. ऋग्वेदिक काल में घोड़ो को किस काम लाया जाता है?

A. घुड़सवारी के लिए
B. लड़ाई रथ को खींचने के लिए
C. चौगान खेलने के लिए
D. इनमें से सभी

Answer: B

ऋग्वेदिक काल में घोड़ों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था। घोड़े शक्ति, गति और युद्ध-कौशल के प्रतीक माने जाते थे। उस समय रथ युद्ध का प्रमुख साधन था और इन रथों को खींचने के लिए घोड़ों का उपयोग किया जाता था। इसलिए वैदिक समाज में अच्छे घोड़ों को बहुत मूल्यवान माना जाता था।

ऋग्वेद में घोड़ों की प्राप्ति के लिए अनेक प्रार्थनाओं का उल्लेख मिलता है। युद्धों में रथों की गति और शक्ति विजय प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। घोड़ों के कारण योद्धा तेजी से युद्धक्षेत्र में आ-जा सकते थे और दुश्मनों पर प्रभावी आक्रमण कर सकते थे।

घोड़ों का उपयोग केवल परिवहन के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक और सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के लिए भी किया जाता था। जिन समूहों के पास अधिक घोड़े और रथ होते थे, उन्हें अधिक शक्तिशाली माना जाता था।

विकल्प A और C गलत हैं क्योंकि ऋग्वेदिक काल में घोड़ों का मुख्य उपयोग युद्ध रथ खींचने में होता था। चौगान जैसे खेल बाद के काल से संबंधित हैं।

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13. ऋग्वैदिक काल में जनता या पूरे समुदाय के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता था?

A. विश
B. जन
C. दस्यु
D. A और B

Answer: D

ऋग्वैदिक काल में समाज और समुदाय को व्यक्त करने के लिए कई शब्दों का प्रयोग किया जाता था। इनमें “जन” और “विश” दो महत्वपूर्ण शब्द थे। “जन” शब्द का उपयोग पूरे समुदाय या लोगों के समूह के लिए किया जाता था। यह शब्द आज भी हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त होता है।

दूसरा महत्वपूर्ण शब्द “विश” था, जिससे आगे चलकर “वैश्य” शब्द विकसित हुआ। ऋग्वेद में “पुरु-जन”, “भारत-जन” और “यदु-जन” जैसे उल्लेख मिलते हैं, जो विभिन्न समुदायों और समूहों को दर्शाते हैं। इसी प्रकार “विश” शब्द भी लोगों के समूह या समुदाय के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।

ऋग्वैदिक समाज मुख्यतः जनजातीय आधार पर संगठित था। लोग छोटे-छोटे समूहों में रहते थे और उनके अपने सरदार होते थे। समुदाय के लोग आपस में मिलकर युद्ध, पशुपालन, कृषि और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते थे। समाज में एकता बनाए रखने के लिए सामूहिक जीवन का विशेष महत्व था।

विकल्प C गलत है क्योंकि “दस्यु” शब्द का प्रयोग उन लोगों के लिए किया जाता था जिन्हें आर्य लोग अपना विरोधी मानते थे। ये लोग वैदिक यज्ञ नहीं करते थे और संभवतः भिन्न भाषाएँ बोलते थे।

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14. निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?

I. ऋग्वेद में जिन लोगों ने प्रार्थनाओं की रचना की उन्हें आर्य कहते है।

II. ऋग्वेद में पूरे समुदाय के लिए विश और जन का प्रयोग किया जाता है।

III. ऋग्वैदिक काल में राजा की मृत्यु के बाद उसका बेटा अपने आप शासक बन जाता था।

IV. दस्यु वे लोग थे जो यज्ञ नहीं करते थे और आर्य लोग अपने विरोधियों को दस्यु कहा करते थे।

कूट:-

A. I और II
B. II और III
C. केवल III
D. I, II और IV

Answer: C

ऋग्वेद से वैदिक समाज, राजनीति और सामाजिक संबंधों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। जिन लोगों ने ऋग्वेद की प्रार्थनाओं और सूक्तों की रचना की थी, वे स्वयं को कभी-कभी “आर्य” कहते थे। वे अपने विरोधियों को “दास” या “दस्यु” कहते थे। दस्यु वे लोग माने जाते थे जो वैदिक यज्ञ नहीं करते थे और संभवतः अलग भाषाएँ बोलते थे।

ऋग्वेद में “जन” और “विश” शब्दों का उपयोग पूरे समुदाय या लोगों के समूह के लिए किया गया है। ये शब्द उस समय के सामाजिक संगठन को समझने में महत्वपूर्ण हैं। विभिन्न समुदायों को “भारत-जन”, “पुरु-जन” आदि नामों से भी जाना जाता था।

तीसरा कथन असत्य है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में राजसत्ता पूरी तरह वंशानुगत नहीं थी। राजा का चयन केवल जन्म के आधार पर नहीं होता था। समाज के लोग बहादुर और कुशल व्यक्ति को अपना सरदार या राजा चुनते थे। इसलिए यह कहना गलत है कि राजा की मृत्यु के बाद उसका पुत्र स्वतः शासक बन जाता था।

ऋग्वैदिक समाज में सभा और समिति जैसी संस्थाओं का भी महत्व था, जहाँ लोग महत्वपूर्ण निर्णयों पर विचार-विमर्श करते थे। इससे पता चलता है कि उस समय शासन व्यवस्था पूरी तरह निरंकुश नहीं थी।

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15. ऋग्वेद में प्रार्थनाओं की रचना करने वाले को क्या कहा जाता था?

A. पुरोहित
B. आर्य
C. ऋषि
D. उपरोक्त सभी

Answer: B

ऋग्वेद विश्व के प्राचीनतम ग्रंथों में से एक है, जिसमें अनेक सूक्त और प्रार्थनाएँ संकलित हैं। इन प्रार्थनाओं की रचना करने वाले लोग स्वयं को कभी-कभी “आर्य” कहते थे। “आर्य” शब्द का उपयोग उस समुदाय के लिए किया जाता था जो वैदिक परंपराओं का पालन करता था।

ऋग्वेद में आर्यों ने अग्नि, इंद्र और सोम जैसे देवताओं की स्तुति में अनेक सूक्तों की रचना की। ये लोग यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे। वे अपने विरोधियों को “दास” या “दस्यु” कहते थे। दस्यु वे लोग थे जो वैदिक यज्ञ नहीं करते थे और संभवतः भिन्न भाषाएँ बोलते थे।

हालाँकि ऋषियों और पुरोहितों की भी वैदिक समाज में महत्वपूर्ण भूमिका थी, लेकिन दिए गए संदर्भ में प्रार्थनाओं की रचना करने वाले लोगों के लिए “आर्य” शब्द का प्रयोग किया गया है। वैदिक समाज में मौखिक परंपरा अत्यंत विकसित थी और इन प्रार्थनाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्मरण कर सुरक्षित रखा गया।

ऋग्वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं था, बल्कि इससे उस समय के समाज, युद्ध, पशुपालन, कृषि और राजनीतिक जीवन की भी जानकारी प्राप्त होती है।

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16. महापाषाण बनाने की प्रथा कब शुरू हुई थी?

A. 3000 साल पहले
B. 3500 साल पहले
C. 4000 साल पहले
D. 1500 साल पहले

Answer: A

भारतीय इतिहास में महापाषाण संस्कृति एक महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है। “महापाषाण” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — “मह” अर्थात बड़ा और “पाषाण” अर्थात पत्थर। इस संस्कृति में बड़े-बड़े पत्थरों का उपयोग कब्रों और स्मारकों के निर्माण के लिए किया जाता था।

महापाषाण बनाने की प्रथा लगभग 3000 साल पहले शुरू हुई थी। ये बड़े पत्थर मृत व्यक्तियों को दफनाने के स्थानों पर लगाए जाते थे। इससे यह पता चलता है कि उस समय लोग मृत्यु के बाद के जीवन में भी विश्वास करते थे और मृतकों की स्मृति को सुरक्षित रखने का प्रयास करते थे।

यह प्रथा मुख्य रूप से दक्कन, दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व भारत और कश्मीर क्षेत्रों में प्रचलित थी। पुरातत्त्वविदों को इन स्थलों से लोहे के औजार, मिट्टी के बर्तन, आभूषण और अन्य वस्तुएँ मिली हैं। इन वस्तुओं को मृतकों के साथ दफनाया जाता था, जिससे यह संकेत मिलता है कि लोग मानते थे कि मृत्यु के बाद भी इन वस्तुओं की आवश्यकता पड़ सकती है।

महापाषाण संस्कृति से उस समय की सामाजिक और तकनीकी प्रगति का भी पता चलता है। बड़े पत्थरों को काटना, लाना और व्यवस्थित करना आसान कार्य नहीं था। इससे स्पष्ट होता है कि समाज में श्रम-संगठन और तकनीकी ज्ञान का विकास हो चुका था।

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17. निम्न में से कौन से कथन सही है?

I. महापाषाण में गोलाकार सजाए हुए पत्थर मिले हुए है और कई बार अकेला खड़ा हुआ पत्थर मिलता है जो जमीन के नीचे कब्रों को दर्शाते है।

II. महापाषाण पत्थर दफ़न करने की जगह पर लोगों द्वारा बड़े करीने से लगाए जाते थे।

III. मृतकों को खास किस्म के धातुओं के बर्तनों के साथ दफनाया जाता था।

कूट:-

A. केवल I
B. I और II
C. इनमें से सभी
D. इनमें से कोई नहीं

Answer: B

महापाषाण संस्कृति भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें बड़े-बड़े पत्थरों का उपयोग दफ़न स्थलों को चिह्नित करने के लिए किया जाता था। “महापाषाण” शब्द का अर्थ ही है — बड़े पत्थर। पुरातत्त्वविदों को ऐसे कई स्थानों पर गोलाकार ढंग से सजाए गए पत्थर मिले हैं। कई बार एक बड़ा पत्थर अकेले खड़ा हुआ भी मिलता है, जो जमीन के नीचे स्थित कब्रों की ओर संकेत करता है। इसलिए कथन I सही है।

कथन II भी सही है क्योंकि महापाषाण पत्थरों को दफ़न स्थलों पर बहुत व्यवस्थित ढंग से लगाया जाता था। इनका उद्देश्य केवल शवों को दफनाना नहीं था, बल्कि मृतकों की स्मृति को सुरक्षित रखना भी था। कई स्थानों पर पत्थरों को घेरे के रूप में लगाया गया था, जिससे कब्रों की पहचान आसानी से की जा सके।

कथन III गलत है क्योंकि मृतकों को सामान्यतः विशेष प्रकार के मिट्टी के बर्तनों के साथ दफनाया जाता था, जिन्हें काला-लाल मृद्भांड (Black and Red Ware) कहा जाता है। इनके साथ लोहे के औजार, हथियार, आभूषण और अन्य वस्तुएँ भी रखी जाती थीं। प्रश्न में “धातुओं के बर्तनों” का उल्लेख किया गया है, जो सही नहीं है।

महापाषाण स्थलों से प्राप्त वस्तुएँ यह दर्शाती हैं कि उस समय समाज में धार्मिक विश्वास, मृतकों के प्रति सम्मान और सामाजिक परंपराएँ विकसित हो चुकी थीं। इन स्थलों से इतिहासकारों को उस समय के जीवन, तकनीक और सामाजिक संरचना की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

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18. निम्नलिखित में से सामाजिक असमानताओं के संदर्भ में सही कथन को चुने:-

I. महापाषाण में एक व्यक्ति के कब्र में 33 सोने के मनके और शंख पाए गये तथा दूसरे कब्र में मिट्टी की बर्तन ही पाए गये है।

II. एक ही परिवार के लोगों को एक ही स्थान पर अलग-अलग दफनाया जाता था। बाद में मरने वाले लोगों को पोर्ट-होल के रास्ते कब्रों में लाकर दफनाया जाता था।

कूट:-

A. केवल I
B. केवल II
C. I और II दोनों
D. इनमें से कोई नहीं

Answer: C

महापाषाण संस्कृति से प्राप्त पुरातात्त्विक साक्ष्य उस समय के समाज में सामाजिक असमानताओं के अस्तित्व को स्पष्ट करते हैं। कुछ कब्रों में अत्यधिक मूल्यवान वस्तुएँ मिली हैं, जबकि अन्य कब्रों में केवल साधारण वस्तुएँ प्राप्त हुई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि समाज में सभी लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति समान नहीं थी।

ब्राह्मगिरी जैसे महापाषाण स्थलों पर एक कब्र से 33 सोने के मनके और शंख प्राप्त हुए हैं, जबकि अन्य कब्रों में केवल मिट्टी के बर्तन मिले हैं। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि कुछ लोग अधिक सम्पन्न और प्रभावशाली थे, जबकि कुछ सामान्य जीवन जीते थे। इसलिए कथन I सही है।

कभी-कभी महापाषाण कब्रों में एक से अधिक कंकाल पाए गए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः एक ही परिवार के लोगों को एक ही स्थान पर अलग-अलग समय में दफनाया जाता था। बाद में मृत होने वाले लोगों को “पोर्ट-होल” नामक विशेष छिद्र के माध्यम से कब्रों में रखा जाता था। इसलिए कथन II भी सही है।

महापाषाण कब्रों के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि उस समय लोग मृतकों की स्मृति को बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास करते थे। कब्रों के ऊपर बड़े पत्थर लगाए जाते थे ताकि उनकी पहचान बनी रहे। साथ ही मृतकों के साथ दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, हथियार और आभूषण रखने की परंपरा भी प्रचलित थी।

इन साक्ष्यों से इतिहासकारों को उस समय की सामाजिक संरचना, आर्थिक भिन्नताओं और धार्मिक मान्यताओं को समझने में सहायता मिलती है।

(CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-39)

19. निम्नलिखित में से ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद कौन-सा है?

A. सामवेद
B. यजुर्वेद
C. ऋग्वेद
D. अथर्ववेद

Answer: C

भारतीय इतिहास और वैदिक साहित्य में वेदों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों को भारतीय सभ्यता का सबसे प्राचीन साहित्य माना जाता है। कुल चार वेद हैं— ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद। इनमें ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसकी रचना लगभग 3500 वर्ष पहले हुई थी। ऋग्वेद में एक हजार से अधिक सूक्त संकलित हैं, जिनमें विभिन्न देवी-देवताओं की स्तुति की गई है।

ऋग्वेद के सूक्त मुख्यतः प्राकृतिक शक्तियों से संबंधित हैं। इसमें अग्नि, इंद्र, सोम, वायु और वरुण जैसे देवताओं की प्रशंसा की गई है। उस समय के लोग प्रकृति को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे और वर्षा, अग्नि तथा सूर्य जैसी शक्तियों को देवता के रूप में पूजते थे। ऋग्वेद से हमें उस काल के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक जीवन की जानकारी मिलती है।

सामवेद मुख्यतः गायन से संबंधित है, जबकि यजुर्वेद में यज्ञों और अनुष्ठानों की विधियाँ दी गई हैं। अथर्ववेद में दैनिक जीवन, औषधियों तथा जादू-टोने से संबंधित मंत्र मिलते हैं। लेकिन इन सभी में सबसे पहले रचित ग्रंथ ऋग्वेद ही था।

यह प्रश्न वैदिक साहित्य के क्रम और उसके ऐतिहासिक महत्व को समझने पर आधारित है। इसलिए सही उत्तर विकल्प C अर्थात् ऋग्वेद है।

CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-33

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20. ऋग्वेद में “सूक्त” शब्द का क्या अर्थ है?

A. युद्ध
B. अच्छी तरह से बोला गया
C. पूजा स्थल
D. अनुष्ठान

Answer: B

ऋग्वेद में जो प्रार्थनाएँ और स्तुतियाँ संकलित हैं, उन्हें “सूक्त” कहा जाता है। “सूक्त” शब्द का अर्थ है — “अच्छी तरह से बोला गया”। यह शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जहाँ “सु” का अर्थ अच्छा और “उक्त” का अर्थ कहा गया होता है। इस प्रकार सूक्त का अर्थ हुआ — अच्छी तरह से कही गई वाणी या प्रार्थना।

ऋग्वेद में एक हजार से अधिक सूक्त हैं। इन सूक्तों की रचना ऋषियों द्वारा की गई थी। वे विभिन्न देवी-देवताओं की स्तुति करते थे और उनसे वर्षा, पशुधन, संतान, युद्ध में विजय तथा समृद्धि की कामना करते थे। सूक्तों का उच्चारण विशेष विधि से किया जाता था। उस समय इन्हें लिखा नहीं जाता था, बल्कि गुरु अपने शिष्यों को इन्हें सुनाकर याद करवाते थे। इसलिए वैदिक परंपरा को श्रुति परंपरा भी कहा जाता है।

सूक्त केवल धार्मिक प्रार्थनाएँ ही नहीं थे, बल्कि वे उस समय के समाज और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनके माध्यम से हमें वैदिक लोगों के जीवन, उनके विश्वास, प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण तथा सामाजिक व्यवस्था की जानकारी मिलती है।

विकल्प A, C और D गलत हैं क्योंकि सूक्त का संबंध युद्ध, पूजा स्थल या अनुष्ठान से नहीं, बल्कि वैदिक प्रार्थनाओं से है। इसलिए सही उत्तर विकल्प B है।

CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-33

21. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ऋग्वैदिक समाज के संदर्भ में सही है?

I. ऋग्वैदिक लोग पशुपालन को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे।

II. गायों को संपत्ति का प्रमुख स्रोत माना जाता था।

III. लोग स्थायी नगरों में विशाल पत्थर के महलों में रहते थे।

कूट:-

A. केवल I
B. I और II
C. II और III
D. I, II और III

Answer: B

ऋग्वैदिक समाज मुख्यतः ग्रामीण और पशुपालक समाज था। उस समय लोगों के जीवन में पशुओं का विशेष महत्व था। विशेष रूप से गायों को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता था। किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा का आकलन उसके पास मौजूद पशुओं की संख्या से किया जाता था। यही कारण है कि ऋग्वेद में बार-बार गायों, घोड़ों और अन्य पशुओं की प्राप्ति के लिए प्रार्थनाओं का उल्लेख मिलता है।

ऋग्वैदिक लोग कृषि भी करते थे, लेकिन पशुपालन उनकी अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार था। गायों से दूध, घी और अन्य उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त होती थीं। युद्धों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भी पशुधन प्राप्त करना होता था। इसी कारण “गविष्टि” शब्द का प्रयोग युद्ध के अर्थ में भी किया गया है।

कथन III असत्य है क्योंकि ऋग्वैदिक समाज नगरीय सभ्यता नहीं था। उस समय हड़प्पा सभ्यता जैसे विकसित नगर समाप्त हो चुके थे और लोग छोटे-छोटे गाँवों तथा जनसमूहों में रहते थे। विशाल पत्थर के महलों और विकसित नगरों का उल्लेख ऋग्वेद में नहीं मिलता। लोग सामान्य घरों और अस्थायी बस्तियों में रहते थे।

इस प्रकार कथन I और II सही हैं, जबकि कथन III गलत है। इसलिए सही उत्तर विकल्प B है।

CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-36

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22. निम्नलिखित का सही मिलान कीजिए:

List-I List-II

a. ऋग्वेद 1. लगभग 3000 वर्ष पहले

b. महापाषाण 2. श्रुति परंपरा

c. दस्यु 3. बड़े पत्थरों से चिह्नित कब्र

d. जन 4. पूरा समुदाय

कूट:-

A. a-2, b-3, c-1, d-4
B. a-2, b-3, c-4, d-1
C. a-3, b-1, c-2, d-4
D. a-4, b-2, c-1, d-3

Answer: A

ऋग्वैदिक और महापाषाण काल से संबंधित शब्द भारतीय इतिहास की प्रारंभिक सभ्यताओं और समाजों को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। “ऋग्वेद” प्राचीन भारत का सबसे पुराना वेद माना जाता है। इसका ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से दिया जाता था। गुरु अपने शिष्यों को मंत्र सुनाकर याद करवाते थे। इसी कारण इसे “श्रुति परंपरा” से जोड़ा जाता है। इसलिए a-2 सही है।

“महापाषाण” शब्द का अर्थ है बड़े पत्थर। प्राचीन काल में मृतकों को दफनाने वाले स्थानों को बड़े-बड़े पत्थरों से चिह्नित किया जाता था। ये पत्थर कब्रों की पहचान और स्मृति बनाए रखने के लिए लगाए जाते थे। इसलिए b-3 सही मिलान है।

“दस्यु” शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में उन लोगों के लिए किया गया है जिन्हें आर्यों का विरोधी माना जाता था। कई बार ये शब्द शत्रुओं या विरोधी समूहों के लिए प्रयुक्त हुआ है। प्रश्न में इसे लगभग 3000 वर्ष पहले की परंपराओं से जोड़ा गया है, इसलिए c-1 उपयुक्त है।

“जन” शब्द का उपयोग पूरे समुदाय या लोगों के समूह के लिए किया जाता था। ऋग्वैदिक समाज में जन एक महत्वपूर्ण सामाजिक इकाई थी। इसलिए d-4 सही है।

इस प्रकार सही मिलान a-2, b-3, c-1, d-4 है, इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।

CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-33 TO 39

23. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन महापाषाण संस्कृति के संदर्भ में असत्य है?

I. महापाषाण कब्रों को बड़े-बड़े पत्थरों से चिह्नित किया जाता था।

II. मृतकों के साथ उपयोग की वस्तुएँ भी दफनाई जाती थीं।

III. महापाषाण संस्कृति केवल उत्तर भारत तक सीमित थी।

IV. कब्रों में लोहे के औजार और हथियार भी पाए गए हैं।

कूट:-

A. केवल III
B. I और II
C. II और IV
D. I, III और IV

Answer: A

महापाषाण संस्कृति भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा थी, जिसका संबंध विशेष प्रकार की दफनाने की प्रथा से था। “महापाषाण” शब्द का अर्थ है — बड़े पत्थर। इन कब्रों को पहचानने और स्मृति बनाए रखने के लिए बड़े-बड़े पत्थर लगाए जाते थे। कई बार पुरातत्वविदों को गोलाकार ढंग से सजाए गए पत्थर मिले हैं, जबकि कई स्थानों पर अकेले खड़े विशाल पत्थर पाए गए हैं। इसलिए कथन I सही है।

महापाषाण कब्रों से प्राप्त वस्तुएँ यह स्पष्ट करती हैं कि मृतकों के साथ उनकी उपयोग की चीजें भी दफनाई जाती थीं। कब्रों में मिट्टी के बर्तन, लोहे के हथियार, औजार, घोड़ों के अवशेष, पत्थर और सोने के आभूषण भी पाए गए हैं। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि लोग मृत्यु के बाद के जीवन में विश्वास करते थे अथवा मृत व्यक्ति की सामाजिक स्थिति को दर्शाना चाहते थे। इसलिए कथन II और IV भी सही हैं।

कथन III असत्य है क्योंकि महापाषाण संस्कृति केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं थी। इसके प्रमाण दक्कन, दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व भारत और कश्मीर जैसे क्षेत्रों में भी मिले हैं। विशेष रूप से दक्षिण भारत में महापाषाण संस्कृति के अनेक महत्वपूर्ण स्थल खोजे गए हैं। इससे पता चलता है कि यह संस्कृति व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में फैली हुई थी।

इस प्रकार केवल कथन III गलत है, इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।

CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-37 & 38

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24. निम्नलिखित घटनाओं को कालानुक्रम में व्यवस्थित कीजिए:

1. ऋग्वेद की रचना

2. महापाषाण परंपरा की शुरुआत

3. ऋग्वेद का पहली बार लेखन

4. ऋग्वेद का पहली बार मुद्रण

कूट:-

A. 1 → 2 → 3 → 4
B. 2 → 1 → 3 → 4
C. 1 → 3 → 2 → 4
D. 2 → 3 → 1 → 4

Answer: A

प्राचीन भारतीय इतिहास की प्रमुख घटनाओं को समझने के लिए उनके कालक्रम को जानना अत्यंत आवश्यक है। सबसे पहले ऋग्वेद की रचना हुई थी। ऋग्वेद को भारत का सबसे प्राचीन वेद माना जाता है और इसकी रचना लगभग 3500 वर्ष पहले हुई थी। प्रारंभ में इसे लिखित रूप में नहीं रखा गया था, बल्कि गुरु अपने शिष्यों को सुनाकर याद करवाते थे। इस मौखिक परंपरा को “श्रुति परंपरा” कहा जाता है। इसलिए कालक्रम में ऋग्वेद की रचना सबसे पहले आती है।

इसके बाद लगभग 3000 वर्ष पहले महापाषाण परंपरा का विकास हुआ। इस काल में मृतकों को दफनाने के स्थानों को बड़े पत्थरों से चिह्नित किया जाने लगा। महापाषाण संस्कृति के प्रमाण दक्कन, दक्षिण भारत, कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत में प्राप्त हुए हैं। कब्रों से प्राप्त वस्तुएँ उस समय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की जानकारी देती हैं। इसलिए महापाषाण परंपरा ऋग्वेद की रचना के बाद आती है।

कई सदियों तक ऋग्वेद केवल मौखिक रूप में सुरक्षित रहा। बाद में इसे पहली बार लिखा गया। यह लेखन भोज वृक्ष की छाल पर प्राप्त पांडुलिपियों में सुरक्षित मिला। इसके बहुत बाद लगभग 150 वर्ष पहले ऋग्वेद का पहली बार मुद्रण किया गया। मुद्रण के माध्यम से यह व्यापक रूप से लोगों तक पहुँचा और उसका अध्ययन सरल हुआ।

इस प्रकार सही कालक्रम 1 → 2 → 3 → 4 है। इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।

CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-35 TO 38

25. निम्नलिखित का सही मिलान कीजिए:

List-I List-II

a. ऋग्वेद 1. बड़े पत्थरों से चिह्नित कब्र

b. महापाषाण 2. सबसे प्राचीन वेद

c. सूक्त 3. अच्छी तरह से बोला गया

d. श्रुति 4. सुनकर याद करने की परंपरा

कूट:-

A. a-2, b-1, c-3, d-4
B. a-1, b-2, c-4, d-3
C. a-2, b-3, c-1, d-4
D. a-4, b-1, c-2, d-3

Answer: A

प्राचीन भारतीय इतिहास और वैदिक संस्कृति को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण शब्दों और अवधारणाओं का ज्ञान आवश्यक है। “ऋग्वेद” भारत का सबसे प्राचीन वेद माना जाता है। इसकी रचना लगभग 3500 वर्ष पहले हुई थी और इसमें विभिन्न देवी-देवताओं की स्तुति में रचे गए सूक्त संकलित हैं। इसलिए ऋग्वेद का सही मिलान “सबसे प्राचीन वेद” से होगा, अर्थात a-2 सही है।

“महापाषाण” शब्द का अर्थ है — बड़े पत्थर। महापाषाण संस्कृति में मृतकों को दफनाने वाले स्थानों को बड़े-बड़े पत्थरों से चिह्नित किया जाता था। ये पत्थर कब्रों की पहचान और स्मृति बनाए रखने के लिए लगाए जाते थे। इसलिए b-1 सही मिलान है।

“सूक्त” शब्द ऋग्वेद की प्रार्थनाओं के लिए प्रयुक्त होता है। इसका अर्थ है — “अच्छी तरह से बोला गया”। ये सूक्त ऋषियों द्वारा रचे गए थे और इन्हें विशेष ढंग से उच्चारित किया जाता था। इसलिए c-3 सही है।

“श्रुति” का अर्थ है — सुनना। वैदिक काल में ज्ञान को लिखित रूप में सुरक्षित नहीं रखा जाता था, बल्कि गुरु अपने शिष्यों को सुनाकर मंत्र याद करवाते थे। इस मौखिक परंपरा को “श्रुति परंपरा” कहा जाता है। इसलिए d-4 सही है।

इस प्रकार सभी सही मिलान a-2, b-1, c-3, d-4 हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।

CLASS-6 CHAPTER-4 PAGE NO.-33 TO 38

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