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Chapter 5 MCQs in Hindi; राजा, राज्य और एक प्राचीन गणराज्य
1. आज से लगभग 3000 वर्ष पहले कुछ लोग राजा के रूप में कैसे प्रतिष्ठित हुए?
Answer: B
आज के समय में शासकों का चुनाव मतदान के माध्यम से किया जाता है, लेकिन प्राचीन काल में शासन व्यवस्था भिन्न थी। लगभग 3000 वर्ष पहले कुछ लोग बड़े-बड़े यज्ञों का आयोजन करके स्वयं को शक्तिशाली और प्रतिष्ठित शासक के रूप में स्थापित करते थे। ऐसे यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं थे, बल्कि राजनीतिक शक्ति और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदर्शित करने का माध्यम भी थे।
अश्वमेध यज्ञ इस प्रकार का सबसे प्रसिद्ध यज्ञ माना जाता था। इसमें एक घोड़े को स्वतंत्र रूप से विभिन्न क्षेत्रों में घूमने के लिए छोड़ दिया जाता था। यदि कोई अन्य राजा उस घोड़े को रोकता था, तो युद्ध होता था। यदि घोड़े को बिना रोके जाने दिया जाता, तो इसका अर्थ यह माना जाता था कि अश्वमेध करने वाला राजा अधिक शक्तिशाली है।
इन यज्ञों का आयोजन विशेष पुरोहितों द्वारा किया जाता था और इनमें अन्य राजाओं तथा गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता था। यज्ञ के दौरान उपहार, दान और भव्य आयोजन होते थे, जिससे राजा की प्रतिष्ठा और बढ़ती थी।
विकल्प A गलत है क्योंकि उस समय आधुनिक चुनाव प्रणाली नहीं थी। विकल्प C आंशिक रूप से बाद के काल में सही हो सकता है, लेकिन दिए गए संदर्भ में राजा बनने का प्रमुख माध्यम यज्ञ था। विकल्प D भी गलत है।
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2. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?
I. अश्वमेध यज्ञ में एक घोड़े को स्वतंत्र छोड़ दिया जाता था और यदि किसी दूसरे राजा ने उसे रोका तो युद्ध होता था।
II. अश्वमेध यज्ञ करने वाला राजा अत्यंत शक्तिशाली माना जाता था तथा यज्ञ में आमंत्रित राजा उसके लिए उपहार लाते थे।
कूट:-
Answer: D
अश्वमेध यज्ञ प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण राजसूचक यज्ञ था, जिसका उद्देश्य राजा की शक्ति और प्रभुत्व को प्रदर्शित करना था। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने का माध्यम भी था।
कथन I सही है क्योंकि अश्वमेध यज्ञ में एक विशेष घोड़े को स्वतंत्र रूप से विभिन्न राज्यों में घूमने के लिए छोड़ दिया जाता था। घोड़े के साथ राजा के सैनिक भी चलते थे। यदि कोई अन्य राजा उस घोड़े को रोक देता था, तो इसे चुनौती माना जाता था और युद्ध होता था। यदि घोड़े को बिना रोके आगे बढ़ने दिया जाता, तो इसका अर्थ यह माना जाता था कि अश्वमेध करने वाला राजा अधिक शक्तिशाली है।
कथन II भी सही है। अश्वमेध यज्ञ संपन्न कराने वाला राजा अत्यंत शक्तिशाली माना जाता था। यज्ञ में अनेक राजाओं, पुरोहितों और अतिथियों को आमंत्रित किया जाता था। आमंत्रित राजा उपहार और भेंट लेकर आते थे, जिससे यज्ञ करने वाले शासक की प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि होती थी।
यह यज्ञ विशेष पुरोहितों द्वारा वैदिक विधि से संपन्न कराया जाता था। इससे धार्मिक और राजनीतिक दोनों प्रकार की वैधता प्राप्त होती थी।
चूँकि दोनों कथन सही हैं, इसलिए कोई भी कथन असत्य नहीं है। अतः सही उत्तर “इनमें से कोई नहीं” है।
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3. युद्ध क्षेत्र में राजा का प्रमुख सहचर कौन होता था?
Answer: A
प्राचीन वैदिक काल में राजा का स्थान समाज और राज्य व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। युद्ध के समय राजा केवल सेनाओं का नेतृत्व ही नहीं करता था, बल्कि स्वयं भी युद्ध क्षेत्र में उपस्थित रहता था। ऐसे समय में उसका सबसे महत्वपूर्ण सहचर “सारथि” होता था।
सारथि का कार्य केवल रथ चलाना नहीं था, बल्कि युद्ध के दौरान राजा की सहायता करना भी था। वह युद्धभूमि की परिस्थितियों को समझते हुए रथ को उचित दिशा में ले जाता था तथा राजा की सुरक्षा का भी ध्यान रखता था। वैदिक और उत्तरवैदिक साहित्य में रथ और सारथि का विशेष महत्व बताया गया है।
यज्ञों और राजकीय समारोहों में भी राजा का विशेष स्थान होता था। उसे राजसिंहासन या बाघ की खाल से बने विशेष आसन पर बैठाया जाता था। युद्ध में राजा की प्रतिष्ठा और विजय को बढ़ाने में सारथि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती थी।
विकल्प B सेनापति सेना का प्रमुख होता था, लेकिन वह राजा का व्यक्तिगत सहचर नहीं माना जाता था। विकल्प C मंत्री प्रशासनिक सलाह देता था तथा विकल्प D अमात्य राजकीय अधिकारी होता था। इसलिए युद्ध क्षेत्र में राजा का मुख्य सहचर सारथि ही था।
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4. निम्नलिखित में से सही कथन का चयन कीजिए:-
I. यज्ञ के अवसर पर राजा का सारथि राजा की विजयों तथा अन्य गुणों का गान करता था।
II. वैश्य और शूद्र जिन्हें पुरोहित शूद्र मानते थे, उन्हें भी अनुष्ठानों में शामिल किया जाता था।
कूट:-
Answer: A
वैदिक काल में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं थे, बल्कि वे राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा के भी महत्वपूर्ण माध्यम थे। इन यज्ञों में राजा का स्थान सर्वोच्च माना जाता था और उसके वैभव तथा शक्ति का प्रदर्शन किया जाता था।
कथन I सही है क्योंकि यज्ञ के अवसर पर राजा का सारथि उसकी विजयों, वीरता और अन्य गुणों का वर्णन करता था। यह कार्य राजा की प्रतिष्ठा बढ़ाने और उपस्थित लोगों के सामने उसकी शक्ति प्रदर्शित करने के लिए किया जाता था। सारथि केवल युद्ध में ही नहीं बल्कि राजकीय आयोजनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
कथन II असत्य है। वैदिक समाज में सामाजिक विभाजन स्पष्ट होने लगा था। पुरोहितों द्वारा वैश्य और विशेष रूप से शूद्रों को कई धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल नहीं किया जाता था। समाज में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जैसे वर्गों का विभाजन दिखाई देता है तथा धार्मिक अधिकार मुख्यतः ऊँचे वर्गों तक सीमित थे।
यज्ञों में राजा, पुरोहित और आमंत्रित शासकों की प्रमुख भूमिका होती थी। राजा के परिवार के सदस्य भी कुछ छोटे अनुष्ठानों में भाग लेते थे। सामान्य लोग उपहार लाते थे, लेकिन सभी को धार्मिक क्रियाओं में समान भागीदारी नहीं दी जाती थी।
इस प्रकार केवल पहला कथन सही है।
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5. निम्नलिखित का सही मिलान कीजिए:-
List-I List-II
a. ब्राह्मण 1. युद्ध करना
b. क्षत्रिय 2. खेती करना
c. वैश्य 3. यज्ञ करना
d. शूद्र 4. तीनों वर्गों की सेवा करना
कूट:-
Answer: C
उत्तरवैदिक काल में समाज को मुख्यतः चार वर्णों में विभाजित किया गया था—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। प्रत्येक वर्ण के लिए अलग-अलग कार्य निर्धारित किए गए थे और समाज की व्यवस्था इन्हीं भूमिकाओं पर आधारित थी।
ब्राह्मणों का मुख्य कार्य वेदों का अध्ययन-अध्यापन तथा यज्ञ कराना था। वे धार्मिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ माने जाते थे और समाज में उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त था। इसलिए ब्राह्मण का सही मिलान “यज्ञ करना” से होगा।
क्षत्रियों का कार्य युद्ध करना और लोगों की रक्षा करना था। राजा तथा योद्धा इसी वर्ग से संबंधित होते थे। इसलिए क्षत्रिय का सही मिलान “युद्ध करना” से होगा।
वैश्य समाज के आर्थिक कार्यों से जुड़े थे। उनका मुख्य कार्य खेती, पशुपालन और व्यापार करना था। इसलिए वैश्य का सही मिलान “खेती करना” से होगा।
शूद्रों का कार्य अन्य तीनों वर्णों की सेवा करना माना जाता था। उन्हें समाज में निम्न स्थान दिया गया था और धार्मिक अधिकार सीमित थे। इसलिए शूद्र का सही मिलान “तीनों वर्गों की सेवा करना” से होगा।
अतः सही मिलान a-3, b-1, c-2, d-4 है।
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6. निम्नलिखित में से ‘जनपद’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
Answer: A
प्राचीन भारत में “जन” शब्द का प्रयोग लोगों या समुदाय के लिए किया जाता था। जब कोई जन या समुदाय किसी निश्चित क्षेत्र में स्थायी रूप से बसने लगा, तो उस क्षेत्र को “जनपद” कहा जाने लगा। इसलिए जनपद का शाब्दिक अर्थ “जन के बसने की जगह” होता है।
प्रारंभिक वैदिक काल में लोग मुख्यतः घुमंतू जीवन जीते थे, लेकिन धीरे-धीरे कृषि के विकास तथा स्थायी बस्तियों के निर्माण के साथ जनपदों का उदय हुआ। इन जनपदों में कृषि, व्यापार और सामाजिक संगठन का विकास हुआ।
बाद में कई जनपद शक्तिशाली होकर महाजनपद बने। मगध, कोशल, वत्स और अवंती जैसे महाजनपद प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र थे। इन राज्यों में राजाओं की शक्ति बढ़ी और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक संगठित हुई।
महायज्ञ करने वाले राजा अब केवल किसी जन के नेता नहीं रहे, बल्कि पूरे जनपद के शासक माने जाने लगे। इससे राज्य व्यवस्था और राजनीतिक नियंत्रण मजबूत हुआ।
विकल्प B, C और D जनपद के वास्तविक अर्थ को व्यक्त नहीं करते। इसलिए सही उत्तर “जन के बसने की जगह” है।
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7. निम्न में से जनपदों के संदर्भ में गलत कथन का चयन कीजिए:-
I. लोग झोपड़ियों में रहते थे तथा मवेशियों और अन्य जानवरों को भी पालते थे।
II. लोग चावल, गेहूँ, धान, जौ, दालें, गन्ना, तिल तथा सरसों जैसी फसलें उगाते थे।
III. लोग मिट्टी के बर्तन बनाते थे जिनमें कुछ धूसर और कुछ काले रंग के होते थे।
कूट:-
Answer: C
पुरातत्वविदों द्वारा जनपदों से संबंधित कई बस्तियों की खुदाई की गई है। दिल्ली का पुराना किला, मेरठ के पास हस्तिनापुर तथा एटा के निकट अतरंजीखेड़ा जैसे स्थल इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन स्थलों से प्राप्त साक्ष्यों से पता चलता है कि लोग झोपड़ियों में रहते थे तथा मवेशियों और अन्य जानवरों का पालन करते थे। इसलिए कथन I सही है।
इन क्षेत्रों में कृषि का भी पर्याप्त विकास हो चुका था। लोग चावल, गेहूँ, धान, जौ, दालें, गन्ना, तिल और सरसों जैसी अनेक फसलें उगाते थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि जनपदों की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और पशुपालन पर आधारित थी। अतः कथन II भी सही है।
कथन III गलत है क्योंकि जनपदों में मिलने वाले विशेष प्रकार के मिट्टी के बर्तनों को “चित्रित धूसर पात्र” कहा गया है। ये बर्तन धूसर रंग के होते थे जिन पर काले रंग से चित्रकारी की जाती थी। प्रश्न में कुछ बर्तनों को काले रंग का बताया गया है, जबकि वास्तव में वे धूसर पात्र थे जिन पर काले रंग की आकृतियाँ बनाई जाती थीं।
इस प्रकार केवल तीसरा कथन गलत है।
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8. महाजनपदों का उदय लगभग कब हुआ था?
Answer: A
प्राचीन भारत में प्रारंभिक जनपद समय के साथ अधिक शक्तिशाली और संगठित होते गए। लगभग 2500 वर्ष पहले कुछ महत्वपूर्ण जनपद विकसित होकर “महाजनपद” कहलाने लगे। ये बड़े और शक्तिशाली राज्य थे जिनका राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य महत्व अधिक था।
महाजनपदों की अपनी-अपनी राजधानियाँ होती थीं। अनेक राजधानियों को सुरक्षित रखने के लिए उनके चारों ओर लकड़ी, ईंट या पत्थर की ऊँची दीवारें बनाई जाती थीं। इससे यह पता चलता है कि उस समय राज्यों के बीच संघर्ष और युद्ध सामान्य बात थी तथा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता था।
महाजनपदों के उदय के पीछे कृषि, लोहे के औजारों के उपयोग तथा व्यापार के विस्तार का महत्वपूर्ण योगदान था। लोहे के हलों से कठोर भूमि को आसानी से जोता जाने लगा, जिससे उत्पादन बढ़ा और बड़े राज्यों को संसाधन प्राप्त हुए।
मगध, कोशल, वत्स और अवंती जैसे महाजनपद उस समय के प्रमुख राजनीतिक केंद्र थे। बाद में मगध सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा।
इस प्रकार महाजनपदों का उदय लगभग 2500 वर्ष पहले हुआ था।
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9. महाजनपदों के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
I. इस काल में लकड़ी के हल की जगह लोहे के हल बनने लगे, जिससे कठोर भूमि को भी आसानी से जोता जाने लगा।
II. महाजनपदों के राजा समय-समय पर मिलने वाले उपहारों पर निर्भर न रहकर नियमित रूप से कर वसूलने लगे।
कूट:-
Answer: C
महाजनपद काल में कृषि, प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। इस समय कृषि क्षेत्र में लोहे के औजारों का प्रयोग तेजी से बढ़ा। लकड़ी के हलों के स्थान पर लोहे के फाल वाले हल बनने लगे, जिनसे कठोर भूमि को भी आसानी से जोता जा सकता था। इससे खेती का विस्तार हुआ और कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई। इसलिए कथन I सही है।
इसी काल में शासन व्यवस्था भी अधिक संगठित होने लगी। महाजनपदों के राजाओं को विशाल किलों, सेनाओं और प्रशासनिक कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती थी। पहले राजा लोगों द्वारा दिए गए उपहारों पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब वे नियमित रूप से कर वसूलने लगे। इससे राज्य की आर्थिक व्यवस्था अधिक मजबूत हुई। अतः कथन II भी सही है।
इस युग में कृषि तकनीकों में भी सुधार हुआ। धान के पौधों का रोपण शुरू किया गया, जिससे पहले की तुलना में अधिक उत्पादन होने लगा। इससे राज्यों की आय और जनसंख्या दोनों में वृद्धि हुई।
इस प्रकार दोनों कथन सही हैं।
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10. निम्नलिखित में से ‘मगध महाजनपद’ के शक्तिशाली जनपद होने का कारण क्या था?
I. मगध से गंगा और सोन जैसी नदियाँ बहती थीं, जो यातायात, जल-वितरण तथा भूमि को उपजाऊ बनाने में महत्वपूर्ण थीं।
II. मगध के शक्तिशाली शासक बिम्बिसार और अजातशत्रु ने अन्य जनपदों को जीतकर अपने राज्य का विस्तार किया।
III. मगध की आधुनिक राजधानी राजगृह को बनाया गया था।
कूट:-
Answer: A
महाजनपद काल में मगध सबसे शक्तिशाली राज्यों में से एक बनकर उभरा। इसके शक्तिशाली बनने के पीछे कई भौगोलिक और राजनीतिक कारण थे। गंगा और सोन जैसी महत्वपूर्ण नदियाँ मगध क्षेत्र से होकर बहती थीं। ये नदियाँ यातायात, सिंचाई तथा कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी थीं। इनके कारण भूमि उपजाऊ बनी रहती थी और व्यापार का भी विकास हुआ। इसलिए कथन I सही है।
मगध के शक्तिशाली शासकों बिम्बिसार और अजातशत्रु ने अन्य जनपदों को पराजित कर अपने राज्य का विस्तार किया। उन्होंने सैन्य शक्ति और कूटनीति दोनों का उपयोग किया। बाद में महापद्म नंद ने भी मगध साम्राज्य को और अधिक विस्तृत बनाया। अतः कथन II भी सही है।
कथन III गलत है क्योंकि राजगृह मगध की प्राचीन राजधानी थी, आधुनिक राजधानी नहीं। बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया गया, जो वर्तमान पटना है। इसलिए तीसरा कथन सही नहीं माना जाएगा।
इस प्रकार केवल कथन I और II सही हैं।
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11. अजातशत्रु किस महाजनपद का शक्तिशाली शासक था?
Answer: C
अजातशत्रु प्राचीन भारत के शक्तिशाली शासकों में से एक था और वह मगध महाजनपद का राजा था। वह बिम्बिसार का पुत्र था तथा उसने मगध राज्य की शक्ति और क्षेत्रफल दोनों का विस्तार किया। महाजनपद काल में मगध का राजनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा था और अजातशत्रु ने इसे और मजबूत बनाया।
अजातशत्रु ने अपने राज्य की सीमाओं को बढ़ाने के लिए अनेक युद्ध लड़े। उसने वज्जि संघ सहित कई राज्यों के विरुद्ध अभियान चलाए। उसके समय में मगध की सैन्य शक्ति काफी विकसित हो गई थी। युद्ध में नए हथियारों और रणनीतियों का भी प्रयोग किया गया।
मगध की भौगोलिक स्थिति भी उसके विकास में सहायक थी। उपजाऊ भूमि, लोहे की उपलब्धता तथा नदियों के कारण यह क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध था। अजातशत्रु ने इन संसाधनों का उपयोग राज्य को शक्तिशाली बनाने में किया।
महाजनपद काल में बिम्बिसार, अजातशत्रु और बाद में महापद्म नंद जैसे शासकों ने मगध को उत्तर भारत की सबसे प्रभावशाली शक्ति बना दिया।
इस प्रकार अजातशत्रु मगध का शक्तिशाली शासक था।
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12. सिकंदर किस देश/क्षेत्र का शासक था?
Answer: A
सिकंदर प्राचीन काल का प्रसिद्ध विजेता था, जो मेसिडोनिया का शासक था। लगभग 2300 वर्ष पहले उसने विश्व-विजय का अभियान शुरू किया। वह अत्यंत महत्वाकांक्षी शासक था और अपने साम्राज्य का विस्तार एशिया तथा अन्य क्षेत्रों तक करना चाहता था।
सिकंदर ने मिस्र, फारस तथा पश्चिमी एशिया के अनेक क्षेत्रों को जीत लिया। इसके बाद वह भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ा और व्यास नदी तक पहुँच गया। उसका उद्देश्य आगे बढ़कर मगध तक पहुँचना था, लेकिन उसके सैनिक लंबे युद्धों से थक चुके थे और भारतीय राज्यों की विशाल सेना से भयभीत भी थे।
भारतीय शासकों के पास बड़ी संख्या में पैदल सैनिक, रथ और हाथी थे। विशेष रूप से युद्ध में हाथियों का प्रयोग यूनानी सैनिकों के लिए नया और चुनौतीपूर्ण अनुभव था। इसी कारण सिकंदर की सेना ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया।
सिकंदर का अभियान भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके बाद भारत और यूनानी संसार के बीच संपर्क बढ़ा।
इस प्रकार सिकंदर मेसिडोनिया का शासक था।
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13. सिकंदर ने भारत पर लगभग कब आक्रमण किया था?
Answer: B
सिकंदर का भारत पर आक्रमण प्राचीन भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। लगभग 2300 वर्ष पहले मेसिडोनिया का शासक सिकंदर विश्व-विजय के उद्देश्य से भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुँचा। उसने पहले फारस, मिस्र और पश्चिमी एशिया के अनेक क्षेत्रों को जीत लिया था।
भारत में प्रवेश करने के बाद सिकंदर व्यास नदी तक पहुँचा। वह आगे बढ़कर मगध साम्राज्य पर आक्रमण करना चाहता था, लेकिन उसकी सेना ने आगे जाने से मना कर दिया। सैनिक लगातार युद्धों से थक चुके थे और उन्हें भारतीय राज्यों की विशाल सैन्य शक्ति का भय था।
उस समय भारतीय शासकों के पास बड़ी सेनाएँ थीं जिनमें पैदल सैनिक, घुड़सवार, रथ और हाथी शामिल थे। विशेष रूप से युद्ध हाथियों का प्रयोग यूनानी सैनिकों के लिए कठिन चुनौती था। परिणामस्वरूप सिकंदर को वापस लौटना पड़ा।
यद्यपि सिकंदर भारत में स्थायी शासन स्थापित नहीं कर सका, फिर भी उसके आक्रमण का ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि इससे भारत और यूनानी सभ्यता के बीच राजनीतिक तथा सांस्कृतिक संपर्क बढ़े।
इस प्रकार सिकंदर ने लगभग 2300 वर्ष पहले भारत पर आक्रमण किया था।
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14. सिकंदर मिस्र और पश्चिमी एशिया के राज्यों को जीतते हुए भारतीय उपमहाद्वीप में किस नदी के किनारे तक पहुँचा था?
Answer: C
मेसिडोनिया का शासक सिकंदर लगभग 2300 वर्ष पहले विश्व-विजय के उद्देश्य से भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुँचा था। उसने पहले मिस्र, फारस तथा पश्चिमी एशिया के अनेक क्षेत्रों को जीत लिया और फिर उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ा। भारतीय उपमहाद्वीप में उसकी सेना व्यास नदी तक पहुँची थी। इसलिए सही उत्तर व्यास नदी है।
इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर 326 ईसा पूर्व में भारत पहुँचा था। उसने झेलम नदी के तट पर राजा पोरस से युद्ध किया था, जिसे हाइडेस्पीज़ का युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध में पोरस की वीरता से प्रभावित होकर सिकंदर ने उसका राज्य वापस लौटा दिया।
व्यास नदी तक पहुँचने के बाद सिकंदर आगे मगध की ओर बढ़ना चाहता था, लेकिन उसके सैनिकों ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया। वे भारतीय राज्यों की विशाल सेना, विशेषकर हाथियों की शक्ति से भयभीत थे। भारतीय सेनाओं में पैदल सैनिकों, रथों तथा युद्ध हाथियों का व्यापक उपयोग होता था।
ध्यान देने योग्य है कि पोरस का संबंध झेलम नदी से है, जबकि सिकंदर की सेना व्यास नदी से आगे नहीं बढ़ सकी। इस प्रकार प्रश्न में व्यास और झेलम के बीच भ्रम उत्पन्न किया जाता है, इसलिए दोनों नदियों का अंतर याद रखना महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार सिकंदर भारतीय उपमहाद्वीप में व्यास नदी तक पहुँचा था।
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15. वज्जि संघ की राजधानी कहाँ थी?
Answer: B
वज्जि संघ प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण गणराज्य था जिसकी राजधानी वैशाली थी। वैशाली वर्तमान बिहार राज्य में स्थित है और प्राचीन भारत के प्रमुख राजनीतिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों में गिनी जाती थी।
वज्जि संघ की शासन व्यवस्था राजतंत्र से भिन्न थी। यहाँ शासन किसी एक राजा के हाथ में न होकर अनेक गणों या प्रमुखों द्वारा संचालित किया जाता था। विभिन्न विषयों पर सभाओं में चर्चा और वाद-विवाद के बाद निर्णय लिए जाते थे। यही कारण है कि वज्जि संघ को प्राचीन भारत की गणतांत्रिक व्यवस्थाओं का प्रमुख उदाहरण माना जाता है।
वैशाली का संबंध बौद्ध तथा जैन धर्म दोनों से महत्वपूर्ण रूप से जुड़ा हुआ है। भगवान महावीर का जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ था। बौद्ध साहित्य में भी वैशाली का कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है।
प्रश्नों में पाटलिपुत्र और वैशाली के बीच भ्रम बनाया जाता है। पाटलिपुत्र मगध की राजधानी थी, जबकि वैशाली वज्जि संघ की राजधानी थी। इसी प्रकार चंपा अंग महाजनपद से संबंधित था।
इस प्रकार वज्जि संघ की राजधानी वैशाली थी।
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16. वज्जि संघ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
I. इसकी राजधानी वैशाली थी।
II. वज्जि संघ में गणतांत्रिक शासन व्यवस्था थी।
III. इस संघ की सभाओं में स्त्रियाँ, दास तथा कम्मकार भी भाग लेते थे।
IV. वज्जि संघ का वर्णन दीघ निकाय में मिलता है।
कूट:-
Answer: C
वज्जि संघ प्राचीन भारत के प्रमुख गणराज्यों में से एक था। इसकी राजधानी वैशाली थी, इसलिए कथन I सही है। वैशाली वर्तमान बिहार में स्थित था और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था।
वज्जि संघ की शासन व्यवस्था गणतांत्रिक थी। यहाँ अनेक शासक मिलकर शासन चलाते थे तथा महत्वपूर्ण निर्णय सभाओं में लिए जाते थे। इस कारण कथन II भी सही है। यह व्यवस्था उस समय के राजतंत्रों से भिन्न थी, जहाँ संपूर्ण सत्ता एक ही राजा के हाथ में होती थी।
कथन III गलत है क्योंकि वज्जि संघ की सभाओं में स्त्रियाँ, दास तथा कम्मकार भाग नहीं लेते थे। सभाओं में मुख्यतः गणों या शासक वर्ग के सदस्य ही शामिल होते थे।
कथन IV सही है क्योंकि वज्जि संघ का वर्णन “दीघ निकाय” में मिलता है। दीघ निकाय बौद्ध साहित्य का महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसमें उस समय की राजनीतिक व्यवस्थाओं और समाज का उल्लेख मिलता है।
वज्जि संघ, मल्ल तथा शाक्य जैसे गणराज्य अक्सर परीक्षाओं में एक साथ पूछे जाते हैं। वहीं मगध, कोशल और अवंती राजतंत्रीय महाजनपद थे।
इस प्रकार I, II और IV सही कथन हैं।
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17. अजातशत्रु ने वज्जि संघ पर आक्रमण करने से पहले किस मंत्री को बुद्ध के पास सलाह लेने के लिए भेजा था?
Answer: B
मगध के शक्तिशाली शासक अजातशत्रु वज्जि संघ पर आक्रमण करना चाहते थे। वज्जि संघ उस समय एक संगठित और शक्तिशाली गणराज्य था। युद्ध प्रारंभ करने से पहले अजातशत्रु ने अपने मंत्री वस्सकार को बुद्ध के पास सलाह लेने के लिए भेजा। इसलिए सही उत्तर वस्सकार है।
बुद्ध ने वस्सकार से पूछा कि क्या वज्जि संघ की सभाएँ नियमित रूप से आयोजित होती हैं तथा क्या उनमें सभी सदस्य उपस्थित रहते हैं। बुद्ध का संकेत यह था कि जब तक वज्जि संघ संगठित और अनुशासित रहेगा, तब तक उसे पराजित करना कठिन होगा।
यह घटना प्राचीन भारत की सभा-व्यवस्था और गणराज्य परंपरा को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि राजनीतिक मामलों में बुद्ध जैसे धर्मगुरुओं की राय को भी महत्व दिया जाता था।
अजातशत्रु हर्यक वंश का प्रमुख शासक था। उसने मगध साम्राज्य का विस्तार किया तथा वज्जि संघ सहित कई राज्यों को चुनौती दी। प्रश्नों में अक्सर बिम्बिसार, अजातशत्रु और महापद्मनंद को एक साथ पूछा जाता है, इसलिए इनके वंश और योगदान को अलग-अलग याद रखना महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार अजातशत्रु ने अपने मंत्री वस्सकार को बुद्ध के पास भेजा था।
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18. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. आर्यभट्ट ने ‘आर्यभटीयम’ नामक पुस्तक की रचना संस्कृत भाषा में की थी।
II. आर्यभट्ट ने यह बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
III. आर्यभट्ट के अनुसार सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Answer: B
प्राचीन भारत में गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में आर्यभट्ट का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। वे गुप्तकाल के महान वैज्ञानिक एवं गणितज्ञ थे। उन्होंने संस्कृत भाषा में ‘आर्यभटीयम’ नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की। इस पुस्तक में गणित, ज्यामिति, बीजगणित तथा खगोल विज्ञान से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांतों का वर्णन मिलता है। इसलिए कथन I सही है।
आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथ में यह स्पष्ट किया कि दिन और रात होने का कारण पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना है। उस समय सामान्य धारणा यह थी कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, किंतु आर्यभट्ट ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए बताया कि पृथ्वी की गति के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य उदय और अस्त हो रहा है। इसलिए कथन II भी सही है।
कथन III गलत है, क्योंकि आर्यभट्ट ने यह नहीं कहा था कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। उन्होंने पृथ्वी की घूर्णन गति का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जो उस समय के लिए अत्यंत उन्नत वैज्ञानिक विचार था।
आर्यभट्ट की खोजों ने भारतीय विज्ञान को नई दिशा प्रदान की। उनके विचारों का प्रभाव बाद के अनेक गणितज्ञों और खगोलशास्त्रियों पर पड़ा। आज भी उन्हें भारत के महानतम वैज्ञानिकों में गिना जाता है।
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19. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए :
सूची-I सूची-II
1. शिल्पदिकारम a. सत्तनार
2. मणिमेखलई b. कालिदास
3. मेघदूत c. इलांगो
4. आर्यभटीयम d. आर्यभट्ट
कूट :
Answer: A
प्राचीन भारत का साहित्य अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण रहा है। विभिन्न भाषाओं में रचित ग्रंथ उस समय के समाज, संस्कृति, धर्म और विज्ञान की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं। इस प्रश्न में प्रमुख साहित्यिक कृतियों और उनके रचनाकारों का मिलान पूछा गया है।
शिल्पदिकारम एक प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य है, जिसकी रचना इलांगो नामक कवि ने की थी। इसमें कोवलन और कन्नगी की कथा का वर्णन मिलता है। यह तमिल साहित्य की अत्यंत महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है। इसलिए 1-c सही है।
मणिमेखलई एक अन्य प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य है, जिसे सत्तनार ने लिखा था। इसमें कोवलन और माधवी की पुत्री मणिमेखलई की कहानी दी गई है। इसलिए 2-a सही है।
मेघदूत संस्कृत साहित्य की प्रसिद्ध काव्य रचना है, जिसके लेखक महान कवि कालिदास थे। यह काव्य अपनी भावनात्मक शैली और प्रकृति वर्णन के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए 3-b सही है।
आर्यभटीयम महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट द्वारा रचित पुस्तक है। इसमें गणित और खगोल विज्ञान के अनेक सिद्धांत दिए गए हैं। इसलिए 4-d सही है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर सही कूट 1-c, 2-a, 3-b, 4-d बनता है।
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20. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अजंता की गुफाओं के संदर्भ में असत्य है?
Answer: D
अजंता की गुफाएँ भारत की प्राचीन कला और स्थापत्य का अद्भुत उदाहरण हैं। ये गुफाएँ महाराष्ट्र में स्थित हैं और पहाड़ों को काटकर बनाई गई थीं। इनका निर्माण कई सदियों के दौरान हुआ और ये मुख्यतः बौद्ध धर्म से संबंधित थीं।
अजंता की अधिकांश गुफाएँ बौद्ध भिक्षुओं के रहने और धार्मिक कार्यों के लिए बनाई गई थीं। इन्हें विहार कहा जाता था। कुछ गुफाओं में प्रार्थना सभागार भी थे, जिन्हें चैत्य कहा जाता है। इसलिए विकल्प A सही है।
गुफाओं के भीतर प्राकृतिक प्रकाश बहुत कम पहुँचता था। इसी कारण कलाकारों को चित्र बनाने के लिए मशालों और दीपकों की रोशनी का सहारा लेना पड़ता था। इसलिए विकल्प B भी सही है।
अजंता के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता उनके चमकदार रंग हैं। लगभग 1500 वर्ष पुराने होने के बावजूद इन चित्रों की चमक बनी हुई है। इन रंगों को पौधों तथा खनिज पदार्थों से तैयार किया गया था। इसलिए विकल्प C भी सही है।
विकल्प D गलत है क्योंकि अजंता की गुफाएँ मुगल काल में नहीं बनी थीं। इनका निर्माण प्राचीन काल में, मुख्यतः बौद्ध धर्म के उत्कर्ष के समय किया गया था। ये गुफाएँ भारतीय प्राचीन कला, चित्रकला और स्थापत्य की महान धरोहर मानी जाती हैं।
21. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. महाभारत कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध की कहानी है।
II. इस युद्ध का उद्देश्य हस्तिनापुर की गद्दी प्राप्त करना था।
III. रामायण की रचना इलांगो ने की थी।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Answer: B
प्राचीन भारतीय साहित्य में महाभारत और रामायण का विशेष महत्व है। ये दोनों संस्कृत महाकाव्य भारतीय संस्कृति, धर्म, राजनीति और समाज के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।
महाभारत का संबंध कौरवों और पांडवों के बीच हुए महान युद्ध से है। यह युद्ध कुरु वंश के उत्तराधिकार को लेकर हुआ था। पांडव और कौरव दोनों ही हस्तिनापुर के राजसिंहासन पर अधिकार चाहते थे। इस कारण दोनों पक्षों के बीच संघर्ष बढ़ता गया और अंततः कुरुक्षेत्र का महायुद्ध हुआ। इसलिए कथन I और II सही हैं।
कथन III गलत है क्योंकि रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी, जबकि इलांगो तमिल महाकाव्य ‘शिल्पदिकारम’ के रचनाकार थे। रामायण में भगवान राम के जीवन, वनवास, सीता हरण और रावण वध का वर्णन मिलता है।
महाभारत में केवल युद्ध का वर्णन ही नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, नैतिकता, धर्म और कर्तव्य से जुड़े अनेक विचार भी दिए गए हैं। इसी महाकाव्य का एक महत्वपूर्ण भाग भगवद्गीता है, जिसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कर्म और धर्म का उपदेश दिया।
रामायण और महाभारत दोनों ही भारतीय सभ्यता के आधारभूत ग्रंथ माने जाते हैं और इनका प्रभाव भारतीय संस्कृति पर आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
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22. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए :
सूची-I सूची-II
1. आर्यभटीयम a. कालिदास
2. मेघदूत b. आर्यभट्ट
3. चरकसंहिता c. चरक
4. रामायण d. वाल्मीकि
कूट :
Answer: A
प्राचीन भारत में साहित्य, विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में अनेक महान विद्वानों ने महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। ये ग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं।
आर्यभटीयम की रचना महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने की थी। इस ग्रंथ में उन्होंने पृथ्वी की गति, ग्रहों की स्थिति तथा गणितीय सिद्धांतों का वर्णन किया। इसलिए 1-b सही है।
मेघदूत संस्कृत साहित्य का प्रसिद्ध काव्य है, जिसके रचनाकार कालिदास थे। यह काव्य अपनी काव्य शैली और प्रकृति वर्णन के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए 2-a सही है।
चरकसंहिता आयुर्वेद और चिकित्सा विज्ञान की महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसकी रचना चरक ने की थी। इसमें रोगों, औषधियों और उपचार पद्धतियों का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसलिए 3-c सही है।
रामायण भारतीय संस्कृति का महान महाकाव्य है, जिसकी रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। इसमें भगवान राम के जीवन और आदर्शों का वर्णन मिलता है। इसलिए 4-d सही है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर सही कूट 1-b, 2-a, 3-c, 4-d बनता है।
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23. निम्नलिखित में से ‘मणिमेखलई’ के संदर्भ में सही कथन का चयन कीजिए :
Answer: C
‘मणिमेखलई’ प्राचीन तमिल साहित्य का प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसकी रचना लगभग 1400 वर्ष पहले सत्तनार नामक कवि ने की थी। यह तमिल भाषा में रचित एक महत्वपूर्ण कृति है और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परंपरा को समझने में सहायता करती है।
इस महाकाव्य की कथा कोवलन और माधवी की पुत्री मणिमेखलई के जीवन पर आधारित है। कोवलन वही व्यापारी था जिसकी कहानी ‘शिल्पदिकारम’ नामक महाकाव्य में मिलती है। शिल्पदिकारम में कोवलन, उसकी पत्नी कन्नगी और नर्तकी माधवी का वर्णन मिलता है। ‘मणिमेखलई’ उसी कथा को आगे बढ़ाती है और उनकी पुत्री के जीवन को केंद्र में रखती है। इसलिए विकल्प C सही है।
विकल्प A गलत है क्योंकि यह संस्कृत नहीं बल्कि तमिल भाषा का महाकाव्य है। विकल्प B भी गलत है क्योंकि इसकी रचना कालिदास ने नहीं बल्कि सत्तनार ने की थी। विकल्प D भी गलत है क्योंकि इसका महाभारत से कोई संबंध नहीं है।
मणिमेखलई केवल साहित्यिक रचना ही नहीं है, बल्कि यह उस समय के समाज, धर्म, व्यापार और सांस्कृतिक जीवन की जानकारी भी देती है। यह दक्षिण भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है।
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24. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘एकाश्म मंदिरों’ के संदर्भ में सही है?
Answer: C
भारतीय स्थापत्य कला में एकाश्म मंदिरों का विशेष स्थान है। ‘एकाश्म’ शब्द का अर्थ होता है — एक ही पत्थर या चट्टान से निर्मित। ऐसे मंदिरों का निर्माण एक विशाल चट्टान या पहाड़ी को काटकर और तराशकर किया जाता था। इसलिए विकल्प C सही है।
इन मंदिरों को बनाने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन होती थी। सामान्य इमारतों की तरह इन्हें नीचे से ऊपर की ओर नहीं बनाया जाता था। पत्थर काटने वाले पहले पहाड़ी के ऊपरी भाग को तराशना शुरू करते थे और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते थे। इस कार्य में अत्यधिक सावधानी और योजना की आवश्यकता होती थी, क्योंकि एक छोटी गलती भी पूरी संरचना को नुकसान पहुँचा सकती थी।
विकल्प A गलत है क्योंकि ईंटों से बनी इमारतों में ईंटों की परतों को जोड़कर निर्माण किया जाता था, जबकि एकाश्म मंदिर पूरी तरह एक ही चट्टान को काटकर बनाए जाते थे। विकल्प B भी गलत है क्योंकि ये मंदिर लकड़ी या मिट्टी से नहीं बने होते थे। विकल्प D गलत है क्योंकि एकाश्म मंदिरों का निर्माण प्राचीन भारत में ही प्रारंभ हो चुका था।
एलोरा और महाबलीपुरम के मंदिर एकाश्म स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं। ये मंदिर भारतीय शिल्पकारों की अद्भुत कला, धैर्य और तकनीकी दक्षता को दर्शाते हैं।
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25. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. अजंता की गुफाओं के चित्रों के रंग पौधों और खनिजों से बनाए गए थे।
II. इन चित्रों को बनाने वाले सभी कलाकारों के नाम ज्ञात हैं।
III. गुफाओं के अंदर अंधेरा होने के कारण चित्र मशालों की रोशनी में बनाए गए थे।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Answer: B
अजंता की गुफाएँ भारतीय चित्रकला और स्थापत्य कला की महान धरोहर मानी जाती हैं। ये गुफाएँ महाराष्ट्र में स्थित हैं और मुख्यतः बौद्ध धर्म से संबंधित हैं। इन गुफाओं की दीवारों पर बनाए गए चित्र विश्व प्रसिद्ध हैं।
अजंता के चित्रों में उपयोग किए गए रंग प्राकृतिक स्रोतों से बनाए जाते थे। कलाकार पौधों और विभिन्न खनिज पदार्थों से रंग तैयार करते थे। यही कारण है कि लगभग 1500 वर्ष बाद भी इन चित्रों के रंग चमकदार दिखाई देते हैं। इसलिए कथन I सही है।
गुफाओं के भीतर प्राकृतिक प्रकाश बहुत कम पहुँचता था। इस कारण कलाकारों को चित्र बनाने के लिए मशालों और दीपकों की रोशनी का सहारा लेना पड़ता था। इसलिए कथन III भी सही है।
कथन II गलत है क्योंकि इन महान चित्रों को बनाने वाले अधिकांश कलाकारों के नाम ज्ञात नहीं हैं। इतिहास में उनके नाम सुरक्षित नहीं रह सके, लेकिन उनकी कला आज भी उनकी प्रतिभा का परिचय देती है।
अजंता की गुफाएँ केवल धार्मिक केंद्र नहीं थीं, बल्कि कला और शिक्षा के भी महत्वपूर्ण केंद्र थीं। इन चित्रों में बुद्ध के जीवन, जातक कथाओं और उस समय के समाज का सुंदर चित्रण मिलता है। भारतीय कला के इतिहास में अजंता की गुफाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।