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Chapter 10 MCQs in Hindi; इमारतें, चित्र तथा किताबें
1. स्तूप का शाब्दिक अर्थ ______ होता है?
Answer: B
प्राचीन भारत में स्तूप महत्वपूर्ण धार्मिक स्मारक माने जाते थे। स्तूप का शाब्दिक अर्थ “टीला” होता है। ये सामान्यतः मिट्टी, ईंट या पत्थरों से बने गोलाकार या अर्धगोलाकार ढाँचे होते थे।
स्तूप विभिन्न आकारों के बनाए जाते थे। कुछ स्तूप छोटे होते थे, जबकि कुछ बहुत बड़े और विशाल होते थे। इनके आकार गोल, लंबे या ऊँचे भी हो सकते थे, लेकिन अधिकांश स्तूपों में एक समानता होती थी कि उनके भीतर किसी महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के अवशेष या उनसे संबंधित वस्तुएँ रखी जाती थीं।
बौद्ध धर्म में स्तूपों का विशेष महत्व था। बुद्ध तथा अन्य महत्वपूर्ण भिक्षुओं की स्मृति में स्तूपों का निर्माण कराया जाता था। समय के साथ ये पूजा और तीर्थस्थल के रूप में भी प्रसिद्ध हो गए।
हमारे प्राचीन शिल्पकारों की कुशलता का सुंदर उदाहरण इन स्तूपों में देखने को मिलता है।
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2. निम्नलिखित में से असत्य कथन का चयन करें :-
I. महरौली में कुतुबमीनार के परिसर में खड़ा यह लौह स्तंभ भारतीय शिल्पकारों की कुशलता का एक अद्भुत उदाहरण है।
II. इसका निर्माण लगभग 1500 साल पहले हुआ है।
III. इसकी ऊँचाई 7.2 मीटर और वजन 3 टन से भी ज्यादा है।
IV. इसमें ‘चन्द्र’ नाम के एक शासक का जिक्र है जो संभवतः मौर्य वंश से थे।
Answer: C
महरौली (दिल्ली) में कुतुबमीनार के परिसर में स्थित लौह स्तंभ भारतीय शिल्पकारों की अद्भुत तकनीकी कुशलता का उदाहरण माना जाता है। इसलिए कथन I सही है।
इस लौह स्तंभ का निर्माण लगभग 1500 वर्ष पहले हुआ था। इसके निर्माण संबंधी जानकारी हमें इस पर खुदे अभिलेखों से प्राप्त होती है। इसलिए कथन II भी सही है।
इस स्तंभ की ऊँचाई लगभग 7.2 मीटर है तथा इसका वजन 3 टन से भी अधिक बताया जाता है। इतने लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने के बाद भी इसमें जंग न लगना भारतीय धातुकर्म की महान उपलब्धि मानी जाती है। इसलिए कथन III भी सही है।
स्तंभ के अभिलेख में “चन्द्र” नामक एक शासक का उल्लेख मिलता है, जिन्हें इतिहासकार सामान्यतः गुप्त वंश का शासक मानते हैं, न कि मौर्य वंश का। इसलिए कथन IV गलत है।
अतः असत्य कथन केवल IV है।
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3. महरौली का लौह स्तंभ किस शहर में स्थित है?
Answer: A
महरौली का प्रसिद्ध लौह स्तंभ दिल्ली में स्थित है। यह कुतुबमीनार परिसर के भीतर खड़ा है और भारतीय शिल्पकारों की कुशलता का एक अद्भुत उदाहरण माना जाता है।
यह लौह स्तंभ लगभग 1500 वर्ष पुराना है। इसकी ऊँचाई लगभग 7.2 मीटर तथा वजन 3 टन से भी अधिक है। इतने लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने के बावजूद इसमें जंग नहीं लगा, जो प्राचीन भारतीय धातुकर्म की उन्नत तकनीक को दर्शाता है।
इस स्तंभ पर एक अभिलेख खुदा हुआ है, जिसमें “चन्द्र” नाम के एक शासक का उल्लेख मिलता है। इतिहासकार सामान्यतः इसे गुप्त वंश से जोड़ते हैं।
महरौली का लौह स्तंभ आज भी भारत की प्राचीन वैज्ञानिक और शिल्पकला संबंधी उपलब्धियों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
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4. निम्नलिखित में से स्तूप के बारे में कौन सा कथन सत्य है?
I. स्तूप अलग-अलग आकार के होते थे – कभी गोल या लम्बे तो कभी बड़े या कभी छोटे।
II. सभी स्तूपों में एक छोटा सा डिब्बा रखा होता था। इन डिब्बों में बुद्ध या उनके अनुयायियों के शरीर के अवशेष या उनके द्वारा उपयोग किये गये कीमती पत्थर या सिक्के रखे होते थे।
III. स्तूप के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए बना वृत्ताकार पथ को वेदिका कहा जाता है।
IV. इस रास्ते को रेलिंग से घेर दिया जाता था जिसे वेदिका कहा जाता था।
Answer: A
प्राचीन भारत में स्तूप बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण धार्मिक स्मारक थे। इनका निर्माण बुद्ध तथा उनके प्रमुख अनुयायियों की स्मृति में कराया जाता था। स्तूपों की संरचना और बनावट में कई विशेषताएँ होती थीं, जिनके आधार पर इन कथनों का मूल्यांकन किया जा सकता है।
कथन I सही है क्योंकि स्तूप एक जैसे नहीं होते थे। कुछ स्तूप गोलाकार होते थे, कुछ लंबे, कुछ छोटे तथा कुछ बहुत विशाल आकार के बनाए जाते थे। अलग-अलग क्षेत्रों और समय के अनुसार इनके आकार और संरचना में भिन्नता देखने को मिलती थी।
कथन II भी सही है। अधिकांश स्तूपों के भीतर एक छोटा-सा डिब्बा या पात्र रखा जाता था। इनमें बुद्ध या उनके अनुयायियों के शरीर के अवशेष जैसे दाँत, हड्डियाँ या राख रखी जाती थीं। कई बार इनमें उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुएँ, कीमती पत्थर अथवा सिक्के भी रखे जाते थे। यही कारण था कि स्तूपों को अत्यंत पवित्र माना जाता था।
कथन III गलत है क्योंकि स्तूप के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए बनाए गए वृत्ताकार मार्ग को “प्रदक्षिणा पथ” कहा जाता था, न कि वेदिका। श्रद्धालु इसी मार्ग पर घूमकर स्तूप की परिक्रमा करते थे।
कथन IV भी गलत है। प्रदक्षिणा पथ के चारों ओर जो रेलिंग बनाई जाती थी, उसे “वेदिका” कहा जाता था। अर्थात वेदिका रेलिंग थी, रास्ता नहीं। इन रेलिंगों में प्रवेशद्वार भी बने होते थे और इन्हें सुंदर कलाकृतियों से सजाया जाता था।
इस प्रकार केवल कथन I और II सत्य हैं।
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5. स्तूप के चारों ओर परिक्रमा के लिए बने वृत्ताकार पथ को ______ कहा जाता है?
Answer: B
प्राचीन भारतीय स्तूपों की संरचना में परिक्रमा के लिए विशेष मार्ग बनाए जाते थे। श्रद्धालु स्तूप के चारों ओर घूमकर पूजा और श्रद्धा व्यक्त करते थे। इस उद्देश्य से बनाए गए वृत्ताकार मार्ग को “प्रदक्षिणा पथ” कहा जाता था।
यह मार्ग स्तूप के चारों ओर बना होता था ताकि लोग व्यवस्थित रूप से उसकी परिक्रमा कर सकें। बौद्ध धर्म में परिक्रमा को श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जाता था।
प्रदक्षिणा पथ के चारों ओर रेलिंग बनाई जाती थी, जिसे “वेदिका” कहा जाता था। इन वेदिकाओं में प्रवेशद्वार भी बने होते थे। कई स्थानों पर इन रेलिंगों और तोरणों को सुंदर मूर्तियों तथा कलाकृतियों से सजाया जाता था।
“गर्भगृह” शब्द मुख्यतः मंदिरों के उस भाग के लिए प्रयुक्त होता है जहाँ देवता की मूर्ति स्थापित रहती है, जबकि “तोरण” सजावटी प्रवेशद्वार को कहा जाता है।
अतः स्तूप के चारों ओर परिक्रमा के लिए बने वृत्ताकार पथ को “प्रदक्षिणा पथ” कहा जाता है।
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6. मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जहाँ मुख्य देवता की छवि रखी गई थी, ________ के रूप में जाना जाता है।
Answer: C
प्राचीन भारत में इस काल के दौरान अनेक आरंभिक हिन्दू मंदिरों का निर्माण किया गया। इन मंदिरों में विष्णु, शिव तथा दुर्गा जैसे देवी-देवताओं की पूजा की जाती थी। मंदिरों की संरचना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बनाई जाती थी और उसका सबसे महत्वपूर्ण भाग “गर्भगृह” कहलाता था।
गर्भगृह मंदिर का वह पवित्र स्थान होता था जहाँ मुख्य देवी या देवता की मूर्ति स्थापित की जाती थी। यह मंदिर का केंद्रीय भाग माना जाता था। इसी स्थान पर पुरोहित धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते थे तथा भक्त दर्शन और पूजा करने के लिए आते थे।
गर्भगृह सामान्यतः छोटा और शांत स्थान होता था, जिससे वहाँ की पवित्रता बनी रहे। कई मंदिरों में गर्भगृह के ऊपर ऊँचा शिखर भी बनाया जाता था, जो दूर से दिखाई देता था।
अन्य विकल्पों में —
• “वेदिका” रेलिंग या घेरे को कहा जाता था।
• “प्रदक्षिणा पथ” वह मार्ग था जहाँ भक्त परिक्रमा करते थे।
• “तोरण” सजावटी प्रवेशद्वार को कहा जाता था।
इस प्रकार मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण भाग “गर्भगृह” कहलाता था।
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7. एक सभागार जहाँ लोग इकट्ठा होते थे।
Answer: B
प्राचीन भारतीय मंदिरों की वास्तुकला में विभिन्न भागों का विशेष महत्व होता था। मंदिरों में गर्भगृह के अतिरिक्त एक बड़ा सभास्थल भी बनाया जाता था, जहाँ लोग एकत्रित होते थे। इस स्थान को “मंडप” कहा जाता था।
मंडप एक प्रकार का सभागार होता था। यहाँ भक्तजन बैठते, धार्मिक चर्चाएँ होतीं और पूजा से संबंधित गतिविधियाँ संपन्न की जाती थीं। मंदिरों में आने वाले लोग इसी स्थान पर इकट्ठा होकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते थे।
मंदिरों के ऊपर काफी ऊँचाई तक निर्माण किया जाता था, जिसे “शिखर” कहा जाता था। शिखर का निर्माण अत्यंत कठिन कार्य माना जाता था और इसके लिए विशेष योजना बनानी पड़ती थी।
“गर्भगृह” वह स्थान था जहाँ मुख्य देवता की प्रतिमा स्थापित होती थी, जबकि “तोरण” सजावटी प्रवेशद्वार को कहा जाता था।
इस प्रकार वह सभागार जहाँ लोग इकट्ठा होते थे, “मंडप” कहलाता था।
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8. निम्न में से ‘एकाश्म (Monolith)’ से संदर्भित कौन सा कथन गलत है?
Answer: B
“एकाश्म” या Monolith उन मंदिरों और संरचनाओं को कहा जाता है जिन्हें एक ही विशाल चट्टान या पहाड़ को तराशकर बनाया जाता था। यह प्राचीन भारतीय शिल्पकला की अत्यंत अद्भुत तकनीक मानी जाती है।
एकाश्म मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इन्हें अलग-अलग पत्थरों को जोड़कर नहीं बनाया जाता था, बल्कि एक विशाल चट्टान को काटकर पूरा मंदिर तैयार किया जाता था। इसलिए कथन A सही है।
ये मंदिर ईंटों से बने मंदिरों से पूरी तरह भिन्न होते थे। ईंटों के मंदिरों में नीचे से ऊपर की ओर ईंटों की परतें जोड़कर निर्माण किया जाता था, जबकि चट्टानों को काटकर बनाए जाने वाले मंदिरों में पत्थर काटने वाले ऊपर से नीचे की ओर कार्य करते थे। इसलिए कथन C और D सही हैं।
कथन B में ईंटों की इमारतों के निर्माण की सामान्य प्रक्रिया बताई गई है, जो “एकाश्म” मंदिरों की विशेषता नहीं है। इसलिए यह कथन गलत माना गया है।
ऐसे मंदिरों के निर्माण में शिल्पकारों को अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ती थी क्योंकि एक छोटी गलती भी पूरे मंदिर की संरचना को खराब कर सकती थी।
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9. अजन्ता के चित्र कितने वर्ष पुराने हैं?
Answer: A
अजंता भारत की प्रसिद्ध प्राचीन गुफाओं में से एक है। ये गुफाएँ पहाड़ों को काटकर बनाई गई थीं और इनमें से अधिकांश बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए बनाए गए विहार थे। इन गुफाओं की विशेषता इनके सुंदर चित्र हैं, जो भारतीय कला के उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।
पाठ में बताया गया है कि इन चित्रों के रंग लगभग 1500 वर्ष बाद भी चमकदार बने हुए हैं। यह उस समय के कलाकारों की अद्भुत कला-कौशल और रंग बनाने की उन्नत तकनीक को दर्शाता है। इन चित्रों के रंग पौधों और खनिजों से तैयार किए गए थे।
गुफाओं के अंदर पर्याप्त प्रकाश नहीं पहुँचता था, इसलिए कलाकारों ने मशालों की रोशनी में चित्र बनाए। इतने लंबे समय के बाद भी इन चित्रों का सुरक्षित रहना भारतीय कला इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस प्रकार स्पष्ट है कि अजंता के चित्र लगभग 1500 वर्ष पुराने हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।
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10. अजन्ता की गुफाओं के संदर्भ में गलत कथन को चुनें?
Answer: D
अजंता की गुफाएँ प्राचीन भारत की कला, स्थापत्य और बौद्ध संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र थीं। यहाँ सैकड़ों वर्षों में अनेक गुफाएँ बनाई गईं। इन गुफाओं में से अधिकांश बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाए गए विहार थे। इसलिए कथन A सही है।
गुफाओं के भीतर अंधेरा रहने के कारण कलाकारों ने मशालों की रोशनी में चित्र बनाए। यह तथ्य पाठ में स्पष्ट रूप से दिया गया है। इसलिए कथन B भी सही है।
अजंता के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके रंग लगभग 1500 वर्षों बाद भी चमकदार बने हुए हैं। ये रंग प्राकृतिक पदार्थों जैसे पौधों और खनिजों से बनाए गए थे। इसलिए कथन C भी सही है।
पाठ में यह बताया गया है कि इन महान चित्रों को बनाने वाले कलाकारों के बारे में कोई निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। वे कलाकार “अज्ञात” बताए गए हैं। कहीं भी यह नहीं लिखा है कि वे मौर्य वंश से संबंधित थे। इसलिए कथन D गलत है।
अतः सही उत्तर विकल्प D है।
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11. तमिल महाकाव्य ‘शिल्पदिकारम’ किसकी रचना है?
Answer: C
“शिल्पदिकारम” प्राचीन तमिल साहित्य का एक प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसकी रचना लगभग 1800 वर्ष पहले इलांगो नामक कवि ने की थी। यह दक्षिण भारत के सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
इस महाकाव्य में “कोवलन्” नामक एक व्यापारी की कहानी का वर्णन मिलता है। इस कथा के माध्यम से उस समय के समाज, व्यापार, लोगों के जीवन और संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
“शिल्पदिकारम” तमिल भाषा की महान कृतियों में गिना जाता है और यह संगमकालीन साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अन्य विकल्पों पर ध्यान दें—
• कालिदास संस्कृत साहित्य के महान कवि एवं नाटककार थे।
• दुष्यंत एक पात्र का नाम है, लेखक नहीं।
• हर्षवर्धन एक प्रसिद्ध शासक थे, जिन्होंने साहित्य को संरक्षण दिया था।
इस प्रकार “शिल्पदिकारम” के रचनाकार इलांगो थे। इसलिए सही उत्तर विकल्प C है।
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12. निम्न में तमिल महाकाव्य ‘शिल्पदिकारम’ में किसकी कहानी है?
Answer: D
“शिल्पदिकारम” प्राचीन तमिल साहित्य का एक प्रसिद्ध महाकाव्य है, जिसकी रचना लगभग 1800 वर्ष पहले कवि इलांगो ने की थी। यह महाकाव्य दक्षिण भारत के समाज, संस्कृति और जीवन शैली का महत्वपूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है।
इस महाकाव्य की मुख्य कहानी कोवलन् और उसकी पत्नी कन्नगी के जीवन पर आधारित है। कोवलन् पुहार नामक नगर में रहने वाला एक व्यापारी था। उसने अपनी पत्नी कन्नगी की उपेक्षा करके माधवी नामक नर्तकी से प्रेम करना शुरू कर दिया। बाद में वह और कन्नगी पुहार छोड़कर मदुरै चले गए।
मदुरै में एक दरबारी जौहरी ने कोवलन् पर चोरी का झूठा आरोप लगा दिया। पांड्य राजा ने बिना पूरी जाँच किए कोवलन् को मृत्युदंड दे दिया। जब कन्नगी को इस अन्याय का पता चला तो वह दुःख और क्रोध से भर उठी। उसने अपने पति की निर्दोषता सिद्ध की और क्रोधित होकर मदुरै नगर के विनाश का कारण बनी।
इस प्रकार “शिल्पदिकारम” में मुख्य रूप से कोवलन् और कन्नगी दोनों की कहानी का वर्णन मिलता है। इसलिए सही उत्तर विकल्प D (A और B) है।
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13. तमिल महाकाव्य ‘मनिमेखालाई’ किसकी रचना है?
Answer: A
“मनिमेखालाई” प्राचीन तमिल साहित्य का एक महत्वपूर्ण महाकाव्य है। इसकी रचना लगभग 1400 वर्ष पहले सत्तनार नामक कवि द्वारा की गई थी। यह तमिल साहित्य की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक मानी जाती है।
यह महाकाव्य समाज, धर्म और नैतिक जीवन से जुड़ी अनेक बातों को प्रस्तुत करता है। “मनिमेखालाई” को “शिल्पदिकारम” से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि इसकी कथा उसी कहानी से आगे बढ़ती है।
अन्य विकल्पों में—
• दुष्यंत एक पात्र का नाम है।
• इलांगो “शिल्पदिकारम” के रचनाकार थे।
• कालिदास संस्कृत साहित्य के महान कवि थे।
इस प्रकार “मनिमेखालाई” के रचनाकार सत्तनार थे। इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।
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14. निम्न में से ‘मणिमेखालाई’ में किसकी कहानी मिलती है?
Answer: C
“मणिमेखालाई” तमिल साहित्य का प्रसिद्ध महाकाव्य है, जिसकी रचना सत्तनार ने की थी। यह महाकाव्य “शिल्पदिकारम” की कथा से जुड़ा हुआ माना जाता है।
पाठ में बताया गया है कि “मणिमेखालाई” में कोवलन् तथा माधवी की बेटी की कहानी का वर्णन मिलता है। इस बेटी का नाम “मणिमेखालाई” था, और उसी के नाम पर इस महाकाव्य का नाम रखा गया।
यह कथा धार्मिक और नैतिक मूल्यों को भी प्रस्तुत करती है। इसमें उस समय के समाज और लोगों के जीवन के बारे में जानकारी मिलती है।
क्योंकि प्रश्न विशेष रूप से पूछता है कि “मणिमेखालाई” में किसकी कहानी मिलती है, इसलिए सही उत्तर माधवी की बेटी है। अतः सही विकल्प C है।
CLASS-6 CHAPTER-10 PAGE NO.-102
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15. संस्कृत महाकाव्य का नाम बताइए।
Answer: D
प्राचीन भारतीय साहित्य में संस्कृत भाषा के दो महान महाकाव्य — महाभारत और रामायण — अत्यंत प्रसिद्ध हैं। ये दोनों ग्रंथ भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं।
महाभारत कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध की कहानी है। इस युद्ध का मुख्य उद्देश्य हस्तिनापुर की गद्दी प्राप्त करना था। इसमें राजनीति, धर्म, नीति और समाज से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं।
रामायण भगवान राम के जीवन, उनके आदर्श चरित्र, वनवास, सीता हरण और रावण वध की कथा का वर्णन करती है। यह भारतीय समाज में आदर्श जीवन और कर्तव्य पालन का संदेश देती है।
हालाँकि मेघदूत भी संस्कृत साहित्य की प्रसिद्ध रचना है, लेकिन वह महाकाव्य नहीं बल्कि कालिदास द्वारा रचित एक काव्य है।
इस प्रकार संस्कृत के प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत और रामायण हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प D (A और B) है।
CLASS-6 CHAPTER-10 PAGE NO.-103
16. महाकाव्य, पुराण और महाभारत को किसने संकलित किया था?
Answer: A
प्राचीन भारतीय परंपरा के अनुसार महाभारत और पुराणों का संकलन महर्षि व्यास द्वारा किया गया था। व्यास भारतीय साहित्य और धार्मिक परंपरा के अत्यंत महत्वपूर्ण ऋषि माने जाते हैं।
महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य माना जाता है। इसमें कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध का वर्णन है। इस युद्ध का मुख्य उद्देश्य हस्तिनापुर की गद्दी प्राप्त करना था। महाभारत केवल युद्ध कथा ही नहीं, बल्कि राजनीति, धर्म, समाज, नैतिकता और जीवन मूल्यों से जुड़ी अनेक शिक्षाएँ भी प्रदान करता है।
महाभारत में “भगवद्गीता” भी शामिल है, जिसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कर्म, धर्म और जीवन के बारे में उपदेश दिए हैं। भगवद्गीता हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में गिनी जाती है।
पुराणों में देवी-देवताओं, राजाओं, ऋषियों तथा प्राचीन घटनाओं का वर्णन मिलता है। ये ग्रंथ धार्मिक कथाओं और परंपराओं को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम थे।
अन्य विकल्पों में उग्रश्रवा और लोमऋषि कथावाचक परंपरा से जुड़े नाम हैं, लेकिन महाभारत और पुराणों का संकलन व्यास द्वारा किया गया माना जाता है।
इस प्रकार सही उत्तर विकल्प A (व्यास) है।
CLASS-6 CHAPTER-10 PAGE NO.-103
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17. ‘आर्यभटीयम’ नामक पुस्तक की रचना किसने की?
Answer: B
“आर्यभटीयम” नामक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट ने की थी। वे प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं।
आर्यभट ने संस्कृत भाषा में “आर्यभटीयम” की रचना की। इस पुस्तक में उन्होंने गणित और खगोल विज्ञान से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत किए।
आर्यभट ने बताया कि दिन और रात पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण होते हैं। उस समय अधिकांश लोग मानते थे कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, लेकिन आर्यभट ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
उन्होंने ग्रहों की गति, ग्रहण तथा गणितीय गणनाओं के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उनकी गणना पद्धति अत्यंत उन्नत मानी जाती है।
इसी काल में वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे अन्य महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री भी हुए, जिन्होंने विज्ञान और गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस प्रकार “आर्यभटीयम” के रचनाकार आर्यभट थे। इसलिए सही उत्तर विकल्प B है।
CLASS-6 CHAPTER-10 PAGE NO.-105
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18. निम्नलिखित को सुमेलित करें :-
सूची-I सूची-II
1. मेघदूत a. इलांगो
2. चरकसंहिता b. सत्तनार
3. शिल्पदिकारम c. कालिदास
4. मणिमेखलई d. चरक
कूट :-
Answer: B
सूची-I सही सुमेलित कारण
1. मेघदूत c. कालिदास “मेघदूत” संस्कृत भाषा का प्रसिद्ध काव्य है, जिसकी रचना कालिदास ने की थी।
2. चरकसंहिता d. चरक “चरकसंहिता” आयुर्वेद और औषधिशास्त्र की प्रसिद्ध पुस्तक है, जिसे चरक ने लिखा।
3. शिल्पदिकारम a. इलांगो “शिल्पदिकारम” तमिल महाकाव्य है, जिसकी रचना इलांगो ने की थी।
4. मणिमेखलई b. सत्तनार “मणिमेखलई” तमिल महाकाव्य सत्तनार द्वारा रचित है।
“मेघदूत” कालिदास की अत्यंत प्रसिद्ध काव्य रचना है। इसमें एक यक्ष द्वारा बादल के माध्यम से अपनी पत्नी को संदेश भेजने की कल्पना की गई है। यह संस्कृत साहित्य की श्रेष्ठ रचनाओं में गिनी जाती है।
“चरकसंहिता” आयुर्वेद की महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसमें रोगों, औषधियों तथा उपचार पद्धतियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। चरक प्राचीन भारत के महान वैद्य माने जाते हैं।
“शिल्पदिकारम” लगभग 1800 वर्ष पहले इलांगो द्वारा रचित प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य है। इसमें कोवलन् और कन्नगी की कहानी का वर्णन मिलता है।
“मणिमेखलई” लगभग 1400 वर्ष पहले सत्तनार द्वारा लिखी गई थी। इसमें कोवलन् तथा माधवी की बेटी की कहानी का वर्णन मिलता है।
इस प्रकार सही सुमेलित क्रम 1-c, 2-d, 3-a, 4-b है। इसलिए सही उत्तर विकल्प B है।
CLASS-6 CHAPTER-10 PAGE NO.-102 & 105
19. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. अजंता की अधिकांश गुफाएँ बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाए गए विहार थे।
II. अजंता की गुफाओं के चित्र मशालों की रोशनी में बनाए गए थे।
III. अजंता के चित्रों के रंग पौधों तथा खनिजों से बनाए गए थे।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
Answer: D
अजंता की गुफाएँ भारतीय चित्रकला और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण मानी जाती हैं। ये गुफाएँ महाराष्ट्र में स्थित हैं और प्राचीन भारत की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं को दर्शाती हैं। इन गुफाओं का निर्माण कई सदियों के दौरान पहाड़ों को काटकर किया गया था। NCERT में उल्लेख है कि इनमें से अधिकांश गुफाएँ बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाए गए विहार थे।
कथन I सही है क्योंकि अजंता की गुफाओं का उपयोग मुख्यतः बौद्ध भिक्षुओं के निवास और ध्यान के लिए किया जाता था। इन गुफाओं में भिक्षु रहते थे तथा धार्मिक गतिविधियाँ संचालित होती थीं। कुछ गुफाओं को अत्यंत सुंदर चित्रों से सजाया गया था, जो बौद्ध धर्म से संबंधित कथाओं और जीवन मूल्यों को दर्शाते हैं।
कथन II भी सही है। गुफाओं के भीतर प्राकृतिक प्रकाश बहुत कम पहुँचता था, इसलिए अधिकांश चित्र मशालों की रोशनी में बनाए गए थे। यह तथ्य उस समय के कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा और धैर्य को दर्शाता है। सीमित प्रकाश में इतनी सूक्ष्म और सुंदर चित्रकारी करना अत्यंत कठिन कार्य रहा होगा।
कथन III भी सही है क्योंकि अजंता के चित्रों में प्रयुक्त रंग प्राकृतिक स्रोतों से बनाए गए थे। NCERT के अनुसार ये रंग पौधों तथा खनिजों से तैयार किए गए थे। यही कारण है कि लगभग 1500 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन चित्रों की चमक और सुंदरता बनी हुई है।
अजंता की चित्रकला भारतीय कला के स्वर्णिम अध्याय का प्रतिनिधित्व करती है। इन चित्रों मंस धार्मिक कथाएँ, राजदरबार, पशु-पक्षी, प्रकृति तथा मानव जीवन के विभिन्न दृश्य अत्यंत जीवंत रूप में दर्शाए गए हैं। इन महान चित्रों को बनाने वाले कलाकारों के नाम आज ज्ञात नहीं हैं, फिर भी उनकी कला आज भी विश्वभर के लोगों को आकर्षित करती है।
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20. निम्नलिखित का सुमेल कीजिए :
सूची-I सूची-II
1. गर्भगृह a. लोगों के इकट्ठा होने का स्थान
2. मंडप b. स्तूप के चारों ओर बना वृत्ताकार मार्ग
3. प्रदक्षिणा पथ c. मुख्य देवता की मूर्ति रखने का स्थान
4. शिखर d. गर्भगृह के ऊपर बना ऊँचा भाग
कूट :
Answer: A
प्राचीन भारतीय मंदिर स्थापत्य कला अत्यंत विकसित और वैज्ञानिक थी। मंदिरों के विभिन्न भागों का अपना विशेष धार्मिक और स्थापत्य महत्व होता था। NCERT में मंदिरों तथा स्तूपों की संरचना का विस्तृत वर्णन दिया गया है।
1. गर्भगृह — मुख्य देवता की मूर्ति रखने का स्थान
गर्भगृह मंदिर का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण भाग माना जाता था। इसी स्थान पर मुख्य देवी या देवता की मूर्ति स्थापित की जाती थी। पुरोहित यहीं धार्मिक अनुष्ठान करते थे तथा भक्त पूजा-अर्चना करते थे। गर्भगृह को अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता था।
2. मंडप — लोगों के इकट्ठा होने का स्थान
मंडप मंदिर का सभागार होता था जहाँ लोग एकत्र होते थे। धार्मिक सभाएँ, पूजा तथा अन्य अनुष्ठान यहीं आयोजित किए जाते थे। मंदिरों में मंडप सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होता था।
3. प्रदक्षिणा पथ — स्तूप के चारों ओर बना वृत्ताकार मार्ग
स्तूपों के चारों ओर भक्तों के घूमकर पूजा करने के लिए एक गोलाकार मार्ग बनाया जाता था जिसे प्रदक्षिणा पथ कहा जाता था। भक्त श्रद्धा के साथ स्तूप की परिक्रमा करते थे। यह बौद्ध धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण भाग था।
4. शिखर — गर्भगृह के ऊपर बना ऊँचा भाग
मंदिरों में गर्भगृह के ऊपर ऊँचाई तक निर्मित भाग को शिखर कहा जाता था। शिखर मंदिर की पहचान और पवित्रता का प्रतीक माना जाता था। इसका निर्माण अत्यंत सावधानी और योजना से किया जाता था।
इन सभी स्थापत्य तत्वों से स्पष्ट होता है कि प्राचीन भारतीय शिल्पकार वास्तुकला और इंजीनियरिंग कला में अत्यंत दक्ष थे। मंदिर केवल पूजा स्थल ही नहीं बल्कि कला, संस्कृति और सामाजिक जीवन के भी केंद्र थे।
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21. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘सिलप्पदिकारम’ के संदर्भ में सही है?
Answer: B
‘सिलप्पदिकारम’ प्राचीन तमिल साहित्य का एक प्रसिद्ध महाकाव्य है। यह दक्षिण भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। NCERT के अनुसार इसकी रचना लगभग 1800 वर्ष पहले इलांगो नामक कवि ने की थी।
इस महाकाव्य की मुख्य कहानी कोवलन और उसकी पत्नी कन्नगी के जीवन से जुड़ी हुई है। कोवलन पुहार नामक नगर में रहने वाला एक व्यापारी था। वह अपनी पत्नी कन्नगी की उपेक्षा करके माधवी नामक नर्तकी से प्रेम करने लगा। बाद में परिस्थितियों के कारण वह और कन्नगी मदुरै चले गए। वहाँ पांड्य राजा के दरबारी जौहरी ने कोवलन पर चोरी का झूठा आरोप लगा दिया। बिना उचित जाँच के राजा ने कोवलन को मृत्युदंड दे दिया।
जब कन्नगी को इस अन्याय का पता चला तो वह अत्यंत दुख और क्रोध से भर गई। उसने राजा और राज्य की अन्यायपूर्ण व्यवस्था का विरोध किया। कथा के अनुसार उसके शाप के कारण मदुरै नगर का विनाश हो गया। यह प्रसंग तत्कालीन समाज में न्याय, स्त्री की स्थिति और राजसत्ता की भूमिका को दर्शाता है।
विकल्प A गलत है क्योंकि सिलप्पदिकारम की रचना कालिदास ने नहीं बल्कि इलांगो ने तमिल भाषा में की थी। विकल्प C गलत है क्योंकि यह रामायण का भाग नहीं है, बल्कि स्वतंत्र तमिल महाकाव्य है। विकल्प D भी गलत है क्योंकि इसका संबंध केवल बौद्ध धर्म से नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन से है।
सिलप्पदिकारम केवल प्रेम और दुख की कहानी नहीं है, बल्कि यह तत्कालीन दक्षिण भारतीय समाज, व्यापार, स्त्री सम्मान तथा न्याय व्यवस्था की भी महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करता है।
22. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. महाभारत कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध की कहानी है।
II. इस युद्ध का उद्देश्य हस्तिनापुर की गद्दी प्राप्त करना था।
III. महाभारत का संकलन ऋषि व्यास द्वारा किया गया माना जाता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
Answer: D
महाभारत भारतीय संस्कृति और साहित्य का सबसे विशाल तथा प्रसिद्ध संस्कृत महाकाव्य माना जाता है। यह केवल एक युद्ध कथा नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय समाज, राजनीति, धर्म, नीति तथा मानव जीवन के आदर्शों का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। NCERT के अनुसार महाभारत कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध की कहानी है।
कथन I सही है क्योंकि महाभारत का मुख्य विषय कौरवों और पांडवों के बीच संघर्ष है। दोनों ही कुरुवंश के सदस्य थे और हस्तिनापुर के सिंहासन पर अधिकार चाहते थे। यह संघर्ष आगे चलकर कुरुक्षेत्र के महान युद्ध में परिवर्तित हुआ।
कथन II भी सही है। NCERT में स्पष्ट उल्लेख है कि इस युद्ध का उद्देश्य पुरुवंश की राजधानी हस्तिनापुर की गद्दी प्राप्त करना था। हस्तिनापुर उस समय राजनीतिक शक्ति का केंद्र था, इसलिए उस पर अधिकार प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था।
कथन III भी सही है क्योंकि माना जाता है कि महाभारत और पुराणों का संकलन ऋषि व्यास ने किया था। महाभारत में भगवद्गीता भी सम्मिलित है, जो भारतीय दर्शन और धर्म का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म, धर्म और जीवन के आदर्शों का उपदेश दिया।
महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं है बल्कि यह नैतिकता, कर्तव्य, धर्म और सत्ता संघर्ष की भी गहन व्याख्या प्रस्तुत करता है। इसमें उस समय के सामाजिक संबंध, पारिवारिक संघर्ष, राजनीतिक व्यवस्था और धार्मिक विचारों का विस्तृत चित्रण मिलता है। यही कारण है कि महाभारत भारतीय सभ्यता का अमूल्य ग्रंथ माना जाता है।
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23. निम्नलिखित का सुमेल कीजिए :
सूची-I सूची-II
1. आर्यभट्ट a. चरकसंहिता
2. चरक b. शल्य चिकित्सा
3. सुश्रुत c. आर्यभट्टीयम
4. कालिदास d. मेघदूत
कूट :
Answer: A
प्राचीन भारत विज्ञान, चिकित्सा, गणित तथा साहित्य के क्षेत्र में अत्यंत उन्नत था। इस काल में अनेक विद्वानों ने महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की, जिनका प्रभाव आज भी दिखाई देता है। NCERT में आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत तथा कालिदास जैसे महान विद्वानों का उल्लेख मिलता है।
1. आर्यभट्ट — आर्यभट्टीयम
आर्यभट्ट प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री थे। उन्होंने ‘आर्यभट्टीयम’ नामक पुस्तक लिखी। इसमें उन्होंने पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने, दिन-रात होने तथा ग्रहण से संबंधित वैज्ञानिक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने वृत्त की परिधि मापने की विधि भी बताई।
2. चरक — चरकसंहिता
चरक आयुर्वेद के प्रसिद्ध चिकित्सक थे। उनकी रचना ‘चरकसंहिता’ आयुर्वेद और औषधिशास्त्र की अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक मानी जाती है। इसमें रोगों, औषधियों तथा उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई है।
3. सुश्रुत — शल्य चिकित्सा
सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है। उनकी पुस्तक ‘सुश्रुतसंहिता’ में शल्य चिकित्सा की विभिन्न विधियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें शरीर रचना और शल्य उपकरणों की जानकारी भी दी गई है।
4. कालिदास — मेघदूत
कालिदास संस्कृत साहित्य के महान कवि और नाटककार थे। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘मेघदूत’ प्रकृति और प्रेम का सुंदर वर्णन प्रस्तुत करती है। इसमें बादल को संदेशवाहक के रूप में चित्रित किया गया है।
इन सभी विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। गणित, विज्ञान, चिकित्सा और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान ने भारत को विश्व में विशेष पहचान दिलाई।
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24. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. आर्यभट्ट ने ‘आर्यभट्टीयम’ नामक पुस्तक लिखी।
II. उन्होंने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
III. आर्यभट्ट ने ग्रहण के संबंध में वैज्ञानिक तर्क प्रस्तुत किया।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
Answer: D
आर्यभट्ट प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उनका योगदान भारतीय विज्ञान के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। NCERT के अनुसार उन्होंने संस्कृत में ‘आर्यभट्टीयम’ नामक पुस्तक लिखी थी।
कथन I सही है क्योंकि ‘आर्यभट्टीयम’ आर्यभट्ट की प्रसिद्ध पुस्तक है। इस ग्रंथ में गणित, खगोल विज्ञान और ज्यामिति से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए गए हैं।
कथन II भी सही है। आर्यभट्ट ने यह विचार प्रस्तुत किया कि दिन और रात पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण होते हैं। उस समय सामान्य धारणा यह थी कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, लेकिन आर्यभट्ट ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पृथ्वी की गति को समझाया। यह उस काल के लिए अत्यंत क्रांतिकारी विचार था।
कथन III भी सही है क्योंकि आर्यभट्ट ने ग्रहण के विषय में वैज्ञानिक तर्क प्रस्तुत किया। उन्होंने ग्रहण को किसी दैवी घटना के बजाय खगोलीय प्रक्रिया के रूप में समझाने का प्रयास किया। इससे स्पष्ट होता है कि प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक तार्किक और वैज्ञानिक सोच रखते थे।
आर्यभट्ट ने वृत्त की परिधि मापने की विधि भी बताई, जो आधुनिक गणना के काफी निकट थी। उनके कार्यों ने बाद के वैज्ञानिकों और गणितज्ञों को भी प्रभावित किया। भारत में शून्य तथा दशमलव पद्धति के विकास में भी भारतीय गणितज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आर्यभट्ट का योगदान यह सिद्ध करता है कि प्राचीन भारत विज्ञान और गणित के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल था।
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25. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन पुराणों के संदर्भ में सही है?
Answer: C
पुराण प्राचीन भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक साहित्य का महत्वपूर्ण भाग हैं। ‘पुराण’ शब्द का अर्थ ‘प्राचीन’ होता है। इन ग्रंथों में धार्मिक कथाएँ, देवी-देवताओं की महिमा, सृष्टि की उत्पत्ति तथा राजाओं से संबंधित विवरण दिए गए हैं। NCERT के अनुसार पुराणों में विष्णु, शिव, दुर्गा या पार्वती जैसे देवी-देवताओं से जुड़ी कथाएँ मिलती हैं।
विकल्प A गलत है क्योंकि पुराण केवल युद्ध कथाओं का संग्रह नहीं हैं। इनमें धार्मिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक विषयों का भी वर्णन मिलता है।
विकल्प B भी गलत है क्योंकि पुराणों में केवल राजाओं की वंशावली नहीं बल्कि सृष्टि की रचना, देवी-देवताओं की पूजा पद्धति और अनेक धार्मिक कथाएँ भी सम्मिलित हैं।
विकल्प C सही है। NCERT में उल्लेख है कि पुराणों में देवी-देवताओं से संबंधित कथाएँ, संसार की सृष्टि और राजाओं के बारे में जानकारी दी गई है। ये ग्रंथ सामान्य लोगों को धर्म और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम थे।
विकल्प D गलत है क्योंकि पुराण हिंदू धर्म से संबंधित ग्रंथ हैं, न कि बौद्ध धर्म से। इन्हें सरल संस्कृत भाषा में लिखा गया था ताकि सामान्य लोग भी इन्हें सुन और समझ सकें। मंदिरों में पुरोहित इनका पाठ करते थे और लोग इन्हें सुनने आते थे।
पुराण भारतीय समाज में धार्मिक शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं को फैलाने का प्रमुख माध्यम थे। इन ग्रंथों ने भारतीय संस्कृति और धार्मिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया।