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Chapter 7 MCQs in Hindi; राज्य से साम्राज्य
1. मौर्य वंश की स्थापना किसने की थी?
Answer: A
मौर्य वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ईसा पूर्व में की थी। उन्होंने नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद को पराजित कर भारत के प्रथम विशाल साम्राज्य की नींव रखी। चन्द्रगुप्त मौर्य को भारतीय इतिहास का पहला महान सम्राट माना जाता है जिसने उत्तर भारत के बड़े भाग को एक राजनीतिक सत्ता के अधीन संगठित किया।
चन्द्रगुप्त मौर्य की सफलता में चाणक्य अथवा कौटिल्य का महत्वपूर्ण योगदान था। चाणक्य तक्षशिला के विद्वान शिक्षक थे और उन्होंने राजनीति, प्रशासन तथा कूटनीति के सिद्धांतों का वर्णन ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रंथ में किया। अर्थशास्त्र प्राचीन भारत के प्रशासन, कर व्यवस्था, जासूसी व्यवस्था और शासन प्रणाली की महत्वपूर्ण जानकारी देता है।
चन्द्रगुप्त मौर्य ने बाद में यूनानी शासक सेल्युकस निकेटर को भी पराजित किया। यूनानी राजदूत मेगास्थनीज इसी काल में भारत आया था, जिसने ‘इंडिका’ नामक पुस्तक लिखी। मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी, जो वर्तमान पटना के निकट स्थित थी।
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2. मौर्य वंश की स्थापना करने में किस बुद्धिमान व्यक्ति ने चन्द्रगुप्त मौर्य की सहायता की थी?
Answer: B
चन्द्रगुप्त मौर्य को मौर्य साम्राज्य स्थापित करने में चाणक्य ने सहायता की थी। चाणक्य को कौटिल्य तथा विष्णुगुप्त नामों से भी जाना जाता है। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध विद्वान और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने नंद वंश के पतन तथा मौर्य साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चाणक्य ने शासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और प्रशासन से संबंधित विचारों को ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रंथ में संकलित किया। यह ग्रंथ प्राचीन भारत की राजनीतिक व्यवस्था को समझने का प्रमुख स्रोत माना जाता है। इसमें कर व्यवस्था, सेना, गुप्तचर तंत्र, दंड व्यवस्था तथा राजा के कर्तव्यों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
चन्द्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की जोड़ी भारतीय इतिहास में अत्यंत प्रसिद्ध है। चाणक्य की नीतियों के कारण ही मौर्य साम्राज्य एक शक्तिशाली और संगठित साम्राज्य बन सका। बाद में यही साम्राज्य सम्राट अशोक के समय अपने चरम पर पहुँचा।
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3. निम्नलिखित में से मौर्य वंश के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
I. मौर्य वंश की स्थापना लगभग 2300 वर्ष पहले चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी।
II. साम्राज्य में बहुत से नगर थे जिसमें उज्जैन उत्तर-पश्चिम और मध्य-एशिया के लिए आने-जाने का मार्ग था।
III. तक्षशिला उत्तरी भारत से दक्षिणी भारत जाने वाले रास्ते में पड़ता था।
IV. इस वंश को स्थापना करने में कौटिल्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य की सहायता की थी।
कूट :-
Answer: A
कथन I सही है क्योंकि मौर्य वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने लगभग 2300 वर्ष पहले की थी। उन्होंने नंद वंश को समाप्त कर भारत में एक विशाल केंद्रीकृत साम्राज्य स्थापित किया।
कथन II गलत है क्योंकि उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया जाने वाला प्रमुख मार्ग तक्षशिला से होकर गुजरता था, न कि उज्जैन से। तक्षशिला प्राचीन भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक और शैक्षणिक केंद्र था।
कथन III भी गलत है क्योंकि उत्तरी भारत से दक्षिण भारत जाने वाले मार्ग पर उज्जैन स्थित था। उज्जैन व्यापार और आवागमन का प्रमुख केंद्र था तथा मौर्य काल में इसका विशेष महत्व था।
कथन IV सही है क्योंकि कौटिल्य अथवा चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य को साम्राज्य स्थापना में सहायता प्रदान की थी। कौटिल्य के राजनीतिक ज्ञान और रणनीति ने मौर्य साम्राज्य को मजबूत आधार दिया।
मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी। इस साम्राज्य के प्रमुख नगरों में तक्षशिला, उज्जैन और सुवर्णगिरि शामिल थे। मौर्य प्रशासन अत्यंत संगठित था तथा साम्राज्य में सड़क, व्यापार और कर व्यवस्था का अच्छा विकास हुआ था।
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4. जब एक ही परिवार के कई सदस्य एक के बाद एक राजा बनते हैं तो उन्हें ________ कहा जाता है?
Answer: C
जब किसी एक ही परिवार के सदस्य पीढ़ी दर पीढ़ी शासन करते हैं, तो उस शासक परिवार को ‘वंश’ कहा जाता है। भारतीय इतिहास में अनेक प्रसिद्ध वंश हुए हैं जैसे मौर्य वंश, गुप्त वंश, कुषाण वंश आदि।
मौर्य वंश में चन्द्रगुप्त मौर्य के बाद उनके पुत्र बिन्दुसार और फिर बिन्दुसार के पुत्र अशोक शासक बने। इस प्रकार लगातार एक ही परिवार के लोगों के शासन करने के कारण इसे मौर्य वंश कहा गया।
प्राचीन भारतीय इतिहास में वंश पर आधारित शासन व्यवस्था बहुत सामान्य थी। कई परीक्षाओं में मौर्य वंश, गुप्त वंश और मुगल वंश के संस्थापक तथा प्रमुख शासकों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
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5. निम्नलिखित में से कौन सा जानवर हमारे राष्ट्रीय प्रतीक में दिखाया गया है?
Answer: D
भारत के राष्ट्रीय प्रतीक में शेर दर्शाया गया है। यह राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के सिंह शीर्ष पर आधारित है, जिसे सम्राट अशोक ने बनवाया था। इसमें चार शेर पीठ से पीठ मिलाकर खड़े दिखाए गए हैं, जिनमें से सामने से केवल तीन दिखाई देते हैं।
अशोक स्तंभ मौर्यकालीन कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसके नीचे धर्मचक्र बना हुआ है, जिसे आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में भी स्थान दिया गया। राष्ट्रीय प्रतीक के आधार भाग में घोड़ा, बैल तथा धर्मचक्र अंकित हैं।
सारनाथ वही स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश दिया था। इसलिए यह स्थान बौद्ध धर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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6. राज्य साम्राज्य से कैसे भिन्न है?
Answer: D
साम्राज्य सामान्य राज्यों की तुलना में अधिक विशाल क्षेत्र में फैले होते थे। बड़े भूभाग पर शासन करने के कारण उन्हें मजबूत प्रशासन, विशाल सेना तथा अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती थी। इसी कारण विकल्प A सही है।
इतने बड़े क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बड़ी सेनाओं की जरूरत पड़ती थी। मौर्य साम्राज्य की सेना प्राचीन भारत की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक मानी जाती है। यूनानी लेखक मेगास्थनीज ने भी मौर्य सेना का उल्लेख किया है। इसलिए विकल्प B भी सही है।
साम्राज्य के संचालन के लिए अनेक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी, जो कर वसूलने, कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रशासनिक कार्यों को संचालित करते थे। मौर्य प्रशासन अत्यंत संगठित था और विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग अधिकारी नियुक्त किए जाते थे। इसलिए विकल्प C भी सही है।
इसी कारण उपर्युक्त सभी कथन सही हैं और सही उत्तर विकल्प D है।
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7. निम्नलिखित में से मौर्य प्रशासन के संदर्भ में कौन सा कथन सत्य है?
I. मौर्य साम्राज्य बहुत ही बड़ा था, इसलिए अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग ढंग से शासन किया जाता था।
II. पाटलिपुत्र और उसके आस-पास के इलाकों पर सीधा नियंत्रण अधिकारियों का होता था।
III. साम्राज्य के भीतर छोटे-छोटे प्रांत थे जिस पर तक्षशिला और उज्जैन जैसी प्रांतीय राजधानियों से नियंत्रण होता था।
IV. खनिज संपदा वाले क्षेत्र जहाँ सोने और कीमती पत्थर के लिए प्रसिद्ध थे वहाँ से कर नजराने के रूप में वसूला जाता था।
कूट :-
Answer: C
कथन I सही है क्योंकि मौर्य साम्राज्य अत्यंत विशाल था। इतने बड़े साम्राज्य पर एक ही प्रकार से शासन करना संभव नहीं था, इसलिए विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाएँ अपनाई जाती थीं। सम्राट अशोक के समय मौर्य साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के विशाल भूभाग तक फैला हुआ था।
कथन II गलत है क्योंकि पाटलिपुत्र और उसके आसपास के क्षेत्रों पर सीधे सम्राट का नियंत्रण होता था। राजा अपने अधिकारियों के माध्यम से किसानों, व्यापारियों, शिल्पकारों तथा पशुपालकों से कर वसूल करवाता था। पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी और प्रशासनिक केंद्र था।
कथन III सही है। मौर्य साम्राज्य को कई प्रांतों में बाँटा गया था। तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि और तोसली जैसी प्रांतीय राजधानियों से प्रशासन संचालित किया जाता था। तक्षशिला उत्तर-पश्चिम क्षेत्र का प्रमुख केंद्र था जबकि उज्जैन उत्तर भारत और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण व्यापारिक नगर था। कई बार राजकुमारों को इन प्रांतों का राज्यपाल बनाकर भेजा जाता था।
कथन IV भी सही है। मौर्य शासक उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते थे जहाँ से मूल्यवान संसाधन प्राप्त होते थे। अर्थशास्त्र में उल्लेख मिलता है कि उत्तर-पश्चिम क्षेत्र ऊनी वस्त्रों के लिए तथा दक्षिण भारत सोने और कीमती पत्थरों के लिए प्रसिद्ध था। इन क्षेत्रों से कर, भेंट और नजराना वसूला जाता था। साम्राज्य की आय का मुख्य स्रोत कृषि कर था, लेकिन व्यापार, वन उत्पाद और खनिजों से भी राजस्व प्राप्त होता था।
मौर्य प्रशासन में सड़कों, नदियों और व्यापारिक मार्गों पर विशेष नियंत्रण रखा जाता था ताकि कर संग्रह और आवागमन सुचारु रूप से चलता रहे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र और मेगास्थनीज की ‘इंडिका’ से मौर्य प्रशासन की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है।
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8. जहाँ कर नियमित ढंग से इकट्ठा किये जाते थे वहीं _________ अनियमित ढंग से वसूला जाता है।
Answer: C
नियमित रूप से वसूले जाने वाले कर राज्य की आय का स्थायी स्रोत होते थे, जबकि ‘नजराना’ अनियमित रूप से वसूला जाता था। नजराना सामान्यतः उपहार, भेंट या सम्मान स्वरूप दिया जाता था। इसे प्रायः स्थानीय शासकों, व्यापारियों अथवा प्रभावशाली लोगों द्वारा स्वेच्छा से राजा को दिया जाता था।
मौर्यकाल में राज्य की आय का मुख्य स्रोत कृषि कर था। इसके अतिरिक्त व्यापार, वन उत्पाद, खनिज संपदा तथा शिल्प कार्यों से भी कर प्राप्त होता था। अर्थशास्त्र में विभिन्न प्रकार के करों और राजस्व संग्रह का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
‘नजराना’ शब्द का प्रयोग बाद के मध्यकालीन इतिहास में भी मिलता है, जहाँ अधीनस्थ शासक अपने उच्च शासक को भेंट स्वरूप धन या मूल्यवान वस्तुएँ प्रदान करते थे।
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9. चन्द्रगुप्त के दरबार में पश्चिम-एशिया के यूनानी राजा सेल्युकस निकेटर का राजदूत कौन था?
Answer: A
मेगास्थनीज यूनानी शासक सेल्युकस निकेटर का राजदूत था, जिसे चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा गया था। वह कई वर्षों तक पाटलिपुत्र में रहा और उसने मौर्य प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था तथा भारतीय जीवन का विस्तृत वर्णन किया।
मेगास्थनीज ने ‘इंडिका’ नामक पुस्तक लिखी, जो मौर्यकालीन भारत के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती है। इस पुस्तक से तत्कालीन नगर व्यवस्था, सेना, प्रशासन, कृषि तथा सामाजिक जीवन की जानकारी प्राप्त होती है।
सेल्युकस निकेटर सिकन्दर के सेनापतियों में से एक था। सिकन्दर की मृत्यु के बाद उसने पश्चिम एशिया के बड़े भाग पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। बाद में चन्द्रगुप्त मौर्य और सेल्युकस के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें सेल्युकस पराजित हुआ। इसके बाद दोनों के बीच संधि हुई और राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
पाटलिपुत्र उस समय मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी और इसे प्राचीन भारत के सबसे बड़े नगरों में गिना जाता था।
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10. निम्नलिखित में से प्रथम शासक कौन थे जिसने अभिलेखों के माध्यम से जनता द्वारा अपने संदेशों को पहुँचाने की कोशिश की?
Answer: B
सम्राट अशोक भारतीय इतिहास के प्रथम ऐसे शासक थे जिन्होंने अभिलेखों के माध्यम से जनता तक अपने संदेश पहुँचाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने आदेशों और विचारों को पत्थरों तथा स्तंभों पर खुदवाया, जिन्हें आज अशोक के शिलालेख और स्तंभलेख कहा जाता है।
अशोक के अभिलेख भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में पाए गए हैं। अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं, जबकि उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के कुछ अभिलेख खरोष्ठी लिपि में भी मिले हैं।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया और ‘धम्म’ के प्रचार पर विशेष बल दिया। उनके अभिलेखों में अहिंसा, धार्मिक सहिष्णुता, प्रजा कल्याण, पशुओं के प्रति दया तथा नैतिक जीवन पर जोर दिया गया है।
अशोक के प्रमुख शिलालेखों में गिरनार, धौली, शाहबाजगढ़ी, मानसेहरा और जौगढ़ के अभिलेख महत्वपूर्ण हैं। सारनाथ, लौरिया नंदनगढ़ तथा प्रयाग के स्तंभलेख भी अत्यंत प्रसिद्ध हैं। अशोक को ‘देवानांप्रिय’ तथा ‘प्रियदर्शी’ उपाधियों से भी जाना जाता था।
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11. अशोक का अधिकांश शिलालेख किस भाषा में थे?
Answer: B
सम्राट अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा में लिखे गए थे। इन अभिलेखों में मुख्य रूप से ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया था। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ अभिलेख खरोष्ठी लिपि में भी प्राप्त हुए हैं।
अशोक ने अपने संदेशों को सामान्य जनता तक पहुँचाने के लिए सरल भाषा का उपयोग किया, ताकि लोग आसानी से उन्हें समझ सकें। उनके अभिलेखों में धम्म, अहिंसा, प्रजा कल्याण, धार्मिक सहिष्णुता तथा नैतिक जीवन का उपदेश दिया गया है।
अशोक के शिलालेख भारत, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कई क्षेत्रों में प्राप्त हुए हैं। शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में मिलते हैं, जबकि अधिकांश अन्य अभिलेख ब्राह्मी लिपि में हैं।
ब्राह्मी लिपि को पढ़ने का श्रेय जेम्स प्रिंसेप को दिया जाता है, जिन्होंने 1837 ई. में इसे पढ़ने में सफलता प्राप्त की।
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12. निम्न में से तटवर्ती उड़ीसा का पुराना नाम ________ था?
Answer: A
प्राचीन काल में तटवर्ती उड़ीसा को ‘कलिंग’ कहा जाता था। कलिंग एक शक्तिशाली और समृद्ध राज्य था, जो समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। इसकी भौगोलिक स्थिति बंगाल की खाड़ी के तट पर होने के कारण व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
सम्राट अशोक ने कलिंग को जीतने के लिए एक भीषण युद्ध लड़ा, जिसे कलिंग युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध में भारी जनहानि हुई। अशोक के अभिलेखों के अनुसार लगभग डेढ़ लाख लोग बंदी बनाए गए तथा एक लाख से अधिक लोग मारे गए। युद्ध की विनाशलीला देखकर अशोक को गहरा पश्चाताप हुआ और बाद में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया।
कलिंग युद्ध भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है, क्योंकि इसके बाद अशोक ने युद्ध और हिंसा की नीति छोड़कर ‘धम्म’ के प्रचार पर बल दिया।
वर्तमान ओडिशा का धौली क्षेत्र अशोक के शिलालेखों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ प्राप्त शिलालेख कलिंग युद्ध के बाद अशोक के विचारों और परिवर्तन को दर्शाते हैं।
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13. अशोक ने राजा बनने के कितने साल बाद कलिंग पर आक्रमण किये?
Answer: C
सम्राट अशोक ने राजा बनने के आठ वर्ष बाद कलिंग पर आक्रमण किया था। इस घटना का उल्लेख अशोक के तेरहवें शिलालेख में मिलता है।
कलिंग युद्ध मौर्य साम्राज्य के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। युद्ध अत्यंत विनाशकारी सिद्ध हुआ। अशोक के अनुसार लगभग 1,50,000 लोग बंदी बनाए गए, 1,00,000 से अधिक लोग मारे गए तथा अनेक लोग घायल हुए।
इस भीषण रक्तपात को देखकर अशोक अत्यंत दुखी हो गए। इसके बाद उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर बौद्ध धर्म और ‘धम्म’ की नीति को अपनाया। उन्होंने प्रजा के नैतिक उत्थान, अहिंसा तथा धार्मिक सहिष्णुता पर विशेष बल दिया।
अशोक के शासनकाल में सड़कों, वृक्षारोपण, कुओं, धर्मशालाओं तथा पशु-चिकित्सालयों का निर्माण भी कराया गया। उनके शासन को भारतीय इतिहास में कल्याणकारी शासन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
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14. किस युद्ध को जीतने के बाद अशोक का मन दुःख से भर गया?
Answer: B
कलिंग युद्ध को जीतने के बाद सम्राट अशोक का मन गहरे दुःख और पश्चाताप से भर गया। युद्ध में भारी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई तथा हजारों लोग बंदी बनाए गए। अशोक ने स्वयं अपने अभिलेखों में इस विनाश का वर्णन किया है।
अशोक ने लिखा कि जब किसी स्वतंत्र राज्य को जीता जाता है, तब लाखों लोग प्रभावित होते हैं। लोग अपने परिवार, मित्रों और संबंधियों से बिछड़ जाते हैं। इस पीड़ा ने अशोक के मन को बदल दिया और उन्होंने भविष्य में युद्ध न करने का संकल्प लिया।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया और ‘धम्म’ के प्रचार में लग गए। उन्होंने अहिंसा, दया, करुणा तथा धार्मिक सहिष्णुता को शासन की नीति बनाया।
अशोक ने अपने संदेशों को फैलाने के लिए शिलालेखों और स्तंभलेखों का उपयोग किया। सारनाथ का सिंह स्तंभ, जिसे भारत का राष्ट्रीय प्रतीक माना जाता है, अशोक द्वारा ही स्थापित कराया गया था। अशोक चक्र, जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज के मध्य में बना है, भी अशोककालीन धम्मचक्र से लिया गया है।
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15. निम्नलिखित में से अशोक के धम्म के सन्दर्भ में कौन सा कथन गलत है?
I. अशोक के धम्म में किसी देवता की पूजा और कर्मकांड की आवश्यकता नहीं थी।
II. समाज के अंदर कई समस्याएँ थीं। इन समस्याओं के निदान के लिए उन्होंने धम्म-महामात्त नाम के अधिकारियों की नियुक्ति की, जो जगह-जगह घूमकर धम्म की शिक्षा दें।
III. बलपूर्वक के माध्यम से लोगों को दिल जीतना धम्म से ज्यादा अच्छा है।
IV. अशोक ने धम्म के विचारों को प्रसारित करने के लिए सीरिया, मिस्र, ग्रीस में दूत भेजे।
कूट:-
Answer: B
अशोक के धम्म का मुख्य उद्देश्य नैतिक जीवन, अहिंसा, सहिष्णुता और प्रजा कल्याण को बढ़ावा देना था। उनके धम्म में किसी विशेष देवता की पूजा या जटिल कर्मकांडों पर बल नहीं दिया गया था। वे मानते थे कि लोगों को अच्छे आचरण, दया, करुणा और सत्य का पालन करना चाहिए।
अशोक ने अपने विशाल साम्राज्य में विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए ‘धम्म-महामात्त’ नामक अधिकारियों की नियुक्ति की थी। ये अधिकारी जनता के बीच जाकर धम्म का प्रचार करते थे तथा लोगों की समस्याओं को समझते थे।
कथन III गलत है, क्योंकि अशोक बलपूर्वक विजय के पक्ष में नहीं थे। कलिंग युद्ध के बाद उन्होंने ‘धम्म विजय’ को सबसे श्रेष्ठ माना। उनका विश्वास था कि प्रेम, नैतिकता और सद्व्यवहार से लोगों का दिल जीता जा सकता है।
अशोक ने अपने धम्म के प्रचार के लिए श्रीलंका, सीरिया, मिस्र और यूनानी क्षेत्रों तक दूत भेजे। उनके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को भी बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु श्रीलंका भेजा गया था।
अशोक के अभिलेखों में धार्मिक सहिष्णुता पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने सभी संप्रदायों के प्रति सम्मान रखने की शिक्षा दी।
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16. निम्न में से कौन से मौर्यकालीन स्तम्भ जिसे राष्ट्रपति भवन में रखा गया है?
Answer: A
राष्ट्रपति भवन में रखा गया मौर्यकालीन स्तंभ बिहार के रामपुरवा से प्राप्त हुआ था। यह अशोककालीन स्तंभ का एक महत्वपूर्ण भाग है और मौर्यकालीन कला एवं मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
मौर्यकालीन स्तंभ प्रायः चिकने एवं चमकदार बलुआ पत्थर से बनाए जाते थे। इन स्तंभों पर अत्यंत उत्कृष्ट पॉलिश की जाती थी, जिसे ‘मौर्य पॉलिश’ कहा जाता है। यह कला उस समय की उच्च शिल्पकला को दर्शाती है।
अशोक ने अपने संदेशों को जनता तक पहुँचाने के लिए अनेक स्तंभों और शिलालेखों का निर्माण करवाया। इन स्तंभों पर धम्म, नैतिकता, अहिंसा और प्रजा कल्याण से संबंधित संदेश अंकित किए गए थे।
सारनाथ का सिंह स्तंभ अशोककालीन स्तंभों में सबसे प्रसिद्ध है, जिसे भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बनाया गया है। इसी स्तंभ के नीचे बना अशोक चक्र भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में भी स्थान प्राप्त करता है।
मौर्यकालीन स्तंभों की विशेषता उनकी एकाश्म संरचना है, अर्थात् इन्हें एक ही पत्थर से तराशकर बनाया जाता था।
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17. मौर्य साम्राज्य का पतन कितने वर्ष पहले हुआ था?
Answer: B
लगभग 2200 वर्ष पहले मौर्य साम्राज्य का पतन हुआ था। अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य धीरे-धीरे कमजोर होने लगा और अंततः इसका विघटन हो गया।
मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास का पहला विशाल साम्राज्य माना जाता है। इसकी स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ईसा पूर्व में की थी। चन्द्रगुप्त के बाद बिन्दुसार तथा फिर अशोक शासक बने।
अशोक के समय मौर्य साम्राज्य अपने चरम पर था। यह अफगानिस्तान से लेकर बंगाल तथा हिमालय से लेकर दक्षिण भारत के बड़े भाग तक फैला हुआ था। इतने विशाल साम्राज्य को नियंत्रित करने के लिए प्रांतों, अधिकारियों और सेना की व्यवस्था की गई थी।
मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में अनेक छोटे-छोटे राज्यों का उदय हुआ। उत्तर-पश्चिम भारत में हिन्द-यवन शासकों का प्रभाव बढ़ा। बाद के काल में शुंग, कण्व और सातवाहन जैसे राजवंशों का उदय हुआ।
मौर्य प्रशासन, कर व्यवस्था, जासूसी तंत्र तथा सड़क निर्माण की जानकारी मुख्य रूप से कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ और मेगस्थनीज की पुस्तक ‘इंडिका’ से प्राप्त होती है।
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18. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
I. मौर्य वंश के पतन के बाद पश्चिमोत्तर में तथा उत्तर-भारत में 100 वर्षों तक हिन्द-यूनानी राजाओं का शासन रहा।
II. दक्षिण भारत में, 2200 से 1800 साल पूर्व के बीच चोलों, चेरों तथा पाण्ड्यों ने शासन किया।
कूट:-
Answer: C
मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत के विभिन्न भागों में अनेक नए राजवंशों का उदय हुआ। उत्तर-पश्चिम भारत तथा उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में हिन्द-यूनानी शासकों का प्रभाव स्थापित हुआ। ये शासक मूल रूप से यूनानी थे, जो सिकन्दर के आक्रमण के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में आए। लगभग एक शताब्दी तक इनका प्रभाव बना रहा।
हिन्द-यूनानी शासकों में मेनांडर (मिलिंद) सबसे प्रसिद्ध था। बौद्ध ग्रंथ ‘मिलिंदपन्हो’ में मेनांडर और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच हुए संवाद का वर्णन मिलता है। हिन्द-यूनानी शासकों ने भारतीय संस्कृति, कला और सिक्का व्यवस्था पर प्रभाव डाला।
दक्षिण भारत में लगभग 2200 से 1800 वर्ष पूर्व चोल, चेर और पाण्ड्य राजवंश शक्तिशाली राज्यों के रूप में स्थापित थे। इनका उल्लेख संगम साहित्य में मिलता है। ये राज्य समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे और रोम सहित पश्चिमी देशों के साथ व्यापार करते थे।
चोल राज्य कावेरी नदी घाटी क्षेत्र में, चेर राज्य केरल क्षेत्र में तथा पाण्ड्य राज्य तमिल क्षेत्र में स्थित था। पाण्ड्यों की राजधानी मदुरै मानी जाती है, जबकि प्रारंभिक चोलों की राजधानी उरैयूर थी।
लगभग 1500 वर्ष पूर्व दक्षिण भारत में पल्लव और चालुक्य शक्तियों का उदय हुआ। पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम तथा चालुक्यों की राजधानी बादामी थी।
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19. दक्षिण भारत में 2200 से 1800 साल पूर्व तक किस वंश का शासक रहा?
Answer: D
दक्षिण India में लगभग 2200 से 1800 वर्ष पूर्व चोल, चेर तथा पाण्ड्य तीनों प्रमुख राजवंशों का शासन था। ये राज्य दक्षिण भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण थे।
चोल राज्य कावेरी नदी के मैदानों में फैला हुआ था। यह क्षेत्र कृषि और व्यापार दोनों के लिए प्रसिद्ध था। चोल शासकों ने समुद्री व्यापार को बढ़ावा दिया और दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपने व्यापारिक संबंध स्थापित किए।
चेर राज्य वर्तमान केरल क्षेत्र में स्थित था। यह राज्य काली मिर्च, इलायची तथा अन्य मसालों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। अरब और रोमन व्यापारी यहाँ व्यापार करने आते थे।
पाण्ड्य राज्य तमिल क्षेत्र में स्थित था और इसकी राजधानी मदुरै थी। मदुरै संगम साहित्य और तमिल संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता था। पाण्ड्य शासक मोती व्यापार के लिए भी प्रसिद्ध थे।
इन तीनों राजवंशों का उल्लेख संगम साहित्य में विस्तार से मिलता है। संगम साहित्य प्रारंभिक तमिल साहित्य का महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे दक्षिण भारत के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन की जानकारी प्राप्त होती है।
रोमन स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों से प्राप्त हुई हैं, जो उस समय के अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों का प्रमाण हैं।
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20. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. मौर्य साम्राज्य की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी।
II. चाणक्य के विचार ‘अर्थशास्त्र’ नामक पुस्तक में मिलते हैं।
III. अशोक मौर्य वंश के संस्थापक थे।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
Answer: A
मौर्य साम्राज्य प्राचीन भारत के सबसे विशाल और शक्तिशाली साम्राज्यों में से एक था। इसकी स्थापना लगभग 2300 वर्ष पहले चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी। चन्द्रगुप्त मौर्य ने अनेक छोटे राज्यों को जीतकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।
कथन I सही है क्योंकि अध्याय में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अशोक जिस साम्राज्य पर शासन करते थे उसकी स्थापना उनके दादा चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी। मौर्य वंश में चन्द्रगुप्त, बिन्दुसार और अशोक प्रमुख शासक थे।
कथन II भी सही है क्योंकि चन्द्रगुप्त मौर्य की सहायता चाणक्य या कौटिल्य नामक विद्वान ने की थी। उनके कई विचार ‘अर्थशास्त्र’ नामक पुस्तक में मिलते हैं। अर्थशास्त्र राज्य प्रशासन, राजनीति, कर व्यवस्था, सेना और शासन प्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
कथन III गलत है क्योंकि अशोक मौर्य वंश के संस्थापक नहीं थे। वे चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र तथा बिन्दुसार के पुत्र थे। अशोक बाद में मौर्य साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध शासक बने। विशेष रूप से कलिंग युद्ध के बाद उनके जीवन और नीतियों में बड़ा परिवर्तन आया।
मौर्य साम्राज्य का प्रशासन अत्यंत संगठित था। साम्राज्य में तक्षशिला, उज्जैन और पाटलिपुत्र जैसे महत्वपूर्ण नगर थे। साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किसान, व्यापारी, शिल्पकार और पशुपालक रहते थे। मौर्य शासकों ने कर व्यवस्था, प्रशासनिक अधिकारियों और विशाल सेना के माध्यम से साम्राज्य को मजबूत बनाया।
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21. निम्नलिखित का सुमेल कीजिए :
सूची-I सूची-II
1. तक्षशिला a. दक्षिण भारत जाने का मार्ग
2. उज्जैन b. उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया का मार्ग
3. पाटलिपुत्र c. मौर्य साम्राज्य की राजधानी
4. अर्थशास्त्र d. चाणक्य के विचार
कूट :
Answer: A
मौर्य साम्राज्य के प्रमुख नगर प्रशासन, व्यापार और आवागमन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थे। पाटलिपुत्र इसकी राजधानी थी, जबकि तक्षशिला और उज्जैन व्यापारिक तथा सामरिक दृष्टि से प्रमुख केंद्र थे।
1. तक्षशिला — उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया का मार्ग
तक्षशिला उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया जाने का प्रमुख मार्ग था। यह व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र था। यहाँ व्यापारी, अधिकारी और शिल्पकार रहते थे।
2. उज्जैन — दक्षिण भारत जाने का मार्ग
उज्जैन उत्तर भारत से दक्षिण भारत जाने वाले मार्ग पर स्थित था। इसलिए यह व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगर था। विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारी यहाँ से होकर गुजरते थे।
3. पाटलिपुत्र — मौर्य साम्राज्य की राजधानी
पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी। यह एक विशाल और सुंदर नगर था, जिसके चारों ओर विशाल प्राचीर, अनेक द्वार और बुर्ज बने थे। यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने भी पाटलिपुत्र की भव्यता का वर्णन किया है।
4. अर्थशास्त्र — चाणक्य के विचार
चाणक्य या कौटिल्य के विचार अर्थशास्त्र नामक ग्रंथ में मिलते हैं। इसमें शासन व्यवस्था, प्रशासन, सेना, कर संग्रह और राज्य संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है।
मौर्य साम्राज्य के ये नगर केवल प्रशासनिक केंद्र ही नहीं थे, बल्कि व्यापार, संस्कृति और संचार के प्रमुख केंद्र भी थे। इन्हीं नगरों और मार्गों के कारण मौर्य साम्राज्य इतना विशाल और संगठित बन सका।
22. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. अशोक मौर्य वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे।
II. अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए थे।
III. अशोक ने अपने संदेश केवल राजमहलों में लिखवाए थे।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
Answer: B
अशोक प्राचीन भारत के महानतम शासकों में गिने जाते हैं। वे मौर्य वंश के सबसे प्रसिद्ध सम्राट थे। उन्होंने शासन व्यवस्था, प्रशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। विशेष रूप से कलिंग युद्ध के बाद उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया और उन्होंने हिंसा छोड़कर ‘धम्म’ के प्रचार पर बल दिया।
कथन I सही है क्योंकि अध्याय में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अशोक मौर्य वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। वे पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने अभिलेखों के माध्यम से जनता तक अपना संदेश पहुँचाने का प्रयास किया।
कथन II भी सही है। अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा में तथा ब्राह्मी लिपि में लिखे गए थे। ब्राह्मी लिपि प्राचीन भारत की महत्वपूर्ण लिपियों में से एक थी और आधुनिक भारतीय भाषाओं की कई लिपियाँ इसी से विकसित हुईं। अशोक ने अपने विचारों और आदेशों को लोगों तक पहुँचाने के लिए इसी लिपि का प्रयोग कराया।
कथन III गलत है क्योंकि अशोक ने अपने संदेश केवल राजमहलों में नहीं लिखवाए थे। उन्होंने अपने आदेश और धम्म से संबंधित संदेश चट्टानों, शिलाओं तथा विशाल स्तंभों पर खुदवाए थे ताकि अधिक से अधिक लोग उन्हें पढ़ सकें या सुन सकें। जिन लोगों को पढ़ना नहीं आता था, उनके लिए अधिकारियों को ये संदेश पढ़कर सुनाने का निर्देश दिया गया था।
अशोक ने धम्म के प्रचार के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने सड़कों का निर्माण करवाया, कुएँ खुदवाए, विश्राम गृह बनवाए तथा मनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सा की व्यवस्था कराई। उन्होंने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजकर भी धम्म का प्रचार कराया। इससे स्पष्ट होता है कि अशोक केवल विजेता राजा ही नहीं बल्कि जनकल्याणकारी शासक भी थे।
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23. निम्नलिखित का सुमेल कीजिए :
सूची-I सूची-II
1. कलिंग a. अशोक का पुत्र
2. महेंद्र b. तटीय उड़ीसा का प्राचीन नाम
3. संघमित्रा c. अशोक की पुत्री
4. धम्म-महामात्त d. धम्म का प्रचार करने वाले अधिकारी
कूट :
Answer: A
मौर्य काल में अशोक ने प्रशासन और धर्म प्रचार के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटना कलिंग युद्ध मानी जाती है। कलिंग तटीय उड़ीसा का प्राचीन नाम था। अशोक ने इसे जीतने के लिए युद्ध किया, लेकिन युद्ध में हुए भारी रक्तपात और विनाश को देखकर वे अत्यंत दुखी हो गए। इसी घटना के बाद उन्होंने युद्ध की नीति छोड़कर धम्म के प्रचार का मार्ग अपनाया।
1. कलिंग — तटीय उड़ीसा का प्राचीन नाम
कलिंग वर्तमान उड़ीसा के तटीय क्षेत्र का प्राचीन नाम था। यह एक स्वतंत्र और शक्तिशाली राज्य था। अशोक ने इसे जीतने के लिए युद्ध किया था।
2. महेंद्र — अशोक का पुत्र
अशोक ने धम्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेंद्र को श्रीलंका भेजा। वहाँ उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. संघमित्रा — अशोक की पुत्री
संघमित्रा अशोक की पुत्री थीं। उन्हें भी श्रीलंका भेजा गया था ताकि वहाँ धम्म और बौद्ध विचारों का प्रचार किया जा सके।
4. धम्म-महामात्त — धम्म का प्रचार करने वाले अधिकारी
अशोक ने धम्म के प्रचार के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी जिन्हें धम्म-महामात्त कहा जाता था। ये अधिकारी विभिन्न स्थानों पर जाकर लोगों को नैतिकता, दया, सहिष्णुता और सदाचार की शिक्षा देते थे।
अशोक का धम्म किसी विशेष धर्म तक सीमित नहीं था। इसमें सभी धर्मों का सम्मान, दासों और नौकरों के साथ अच्छा व्यवहार, जीवों पर दया तथा आपसी सद्भाव पर जोर दिया गया था। उनके विचार आज भी मानवता और शांति के संदेश के रूप में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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24. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘अशोक के धम्म’ के संदर्भ में सही है?
Answer: C
अशोक का धम्म प्राचीन भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने महसूस किया कि हिंसा और युद्ध से केवल दुख और विनाश फैलता है। इसलिए उन्होंने लोगों को नैतिक जीवन जीने और शांति बनाए रखने का संदेश दिया। उनका धम्म किसी एक धर्म विशेष तक सीमित नहीं था, बल्कि यह नैतिकता और मानवता पर आधारित था।
विकल्प A गलत है क्योंकि अशोक के धम्म में किसी विशेष देवता की पूजा या धार्मिक कर्मकांड की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने लोगों को नैतिक व्यवहार, दया और सदाचार अपनाने की शिक्षा दी।
विकल्प B भी गलत है क्योंकि अशोक पशु बलि और हिंसा के विरोधी थे। उन्होंने सभी जीवों के प्रति दया रखने पर जोर दिया।
विकल्प C सही है क्योंकि अशोक ने अपने अभिलेखों में सभी धर्मों के सम्मान, दासों और नौकरों के साथ अच्छे व्यवहार, बड़ों के आदर तथा सभी प्राणियों के प्रति करुणा रखने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी दूसरे धर्म की निंदा नहीं करनी चाहिए।
विकल्प D गलत है क्योंकि अशोक का संदेश केवल राजपरिवार तक सीमित नहीं था। उन्होंने अपने संदेशों को पत्थरों और स्तंभों पर खुदवाकर आम जनता तक पहुँचाया। अधिकारियों को आदेश था कि वे इन संदेशों को उन लोगों को भी सुनाएँ जो पढ़ नहीं सकते थे।
अशोक के धम्म का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, सहिष्णुता और नैतिकता स्थापित करना था। उन्होंने मानव और पशु दोनों के लिए चिकित्सा की व्यवस्था कराई, सड़कों का निर्माण करवाया और विश्राम गृह बनवाए। इस प्रकार अशोक का धम्म जनकल्याण और नैतिक मूल्यों पर आधारित था।
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25. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. मेगस्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था।
II. पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी।
III. मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को एक छोटा नगर बताया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
Answer: A
मेगस्थनीज एक यूनानी राजदूत था जिसे पश्चिम एशिया के यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर ने चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। उसने भारत की प्रशासनिक व्यवस्था, समाज, राजधानी और राजदरबार का विस्तृत वर्णन किया। उसके विवरण से मौर्य साम्राज्य की भव्यता और शक्ति का पता चलता है।
कथन I सही है क्योंकि मेगस्थनीज वास्तव में सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था। वह चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहा और उसने अपने अनुभवों को विस्तार से लिखा।
कथन II भी सही है। पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी। यह आधुनिक पटना के पास स्थित था और उस समय भारत के सबसे बड़े तथा महत्वपूर्ण नगरों में गिना जाता था।
कथन III गलत है क्योंकि मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को छोटा नगर नहीं बल्कि विशाल और सुंदर नगर बताया था। उसके अनुसार नगर के चारों ओर विशाल प्राचीर थी जिसमें 570 बुर्ज और 64 द्वार थे। यहाँ दो और तीन मंजिल वाले घर बने थे तथा राजा का महल लकड़ी और पत्थर की नक्काशी से सजाया गया था।
मेगस्थनीज ने मौर्य सम्राट की सुरक्षा व्यवस्था का भी उल्लेख किया है। उसने लिखा कि राजा के भोजन को खाने से पहले विशेष सेवक उसका स्वाद चखते थे ताकि किसी प्रकार के विष या षड्यंत्र से बचा जा सके। राजा के चारों ओर सशस्त्र अंगरक्षक रहते थे और वह लगातार अपनी सुरक्षा को लेकर सावधान रहता था।
मेगस्थनीज के विवरण इतिहासकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं क्योंकि इनके माध्यम से मौर्यकालीन प्रशासन, राजधानी, समाज और राजदरबार की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है।